देश में इलाज का सबसे बड़ा खर्च अक्सर दवाओं पर होता है। यही वजह है कि कई परिवार गंभीर बीमारी के दौरान आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) लगातार आम लोगों के लिए राहत का जरिया बनती जा रही है। इस योजना के तहत देशभर में हजारों जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं बाजार में मिलने वाली ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद केवल सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति तक समान और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी है। यही कारण है कि शहरों के साथ-साथ गांवों और दूरदराज के इलाकों में भी जन औषधि केंद्रों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
18 हजार से ज्यादा जन औषधि केंद्र
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत इस समय देशभर में 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र (JAK) संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर हर दिन करीब 10 से 12 लाख लोग सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं खरीदने पहुंच रहे हैं। योजना के तहत उपलब्ध उत्पादों का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल जन औषधि केंद्रों पर 2,110 प्रकार की दवाएं, 315 सर्जिकल आइटम, मेडिकल कंज्यूमेबल्स तथा 29 चिकित्सीय श्रेणियों से जुड़े उपकरण उपलब्ध हैं। इनमें संक्रमण, मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, पेट संबंधी बीमारियों समेत कई गंभीर रोगों के उपचार में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं।

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
जन औषधि योजना को लेकर अक्सर लोगों के मन में जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते हैं। सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाता। दवाओं की खरीद केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (WHO-GMP) का पालन करने वाले निर्माताओं से की जाती है। इसके बाद हर बैच की जांच एनएबीएल (NABL) मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराई जाती है। गुणवत्ता जांच में सफल होने के बाद ही दवाओं की आपूर्ति जन औषधि केंद्रों तक की जाती है।
ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमत
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत है। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध अधिकांश दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) बाजार में मिलने वाली समान ब्रांडेड दवाओं से 50 से 80 प्रतिशत तक कम है। इसका सीधा फायदा उन परिवारों को मिल रहा है जिन्हें लंबे समय तक दवाइयों का सेवन करना पड़ता है। मधुमेह, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, थायराइड या अन्य पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का मासिक चिकित्सा खर्च काफी हद तक कम हो रहा है।

मार्च 2027 तक 25 हजार केंद्र खोलने का लक्ष्य
सरकार ने योजना के विस्तार के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है। मार्च 2027 तक देशभर में 25 हजार जन औषधि केंद्र खोलने की तैयारी है। इसके लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया गया है। फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया (PMBI) व्यक्तिगत उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों, ट्रस्ट, सोसायटी, निजी संस्थानों और अन्य पात्र संगठनों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करता है। इसका उद्देश्य ब्लॉक, तहसील, छोटे कस्बों और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी सस्ती दवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
महिलाएं भी योजना के केंद्र में
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं है। महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 2019 में जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत महिलाओं को सिर्फ एक रुपये प्रति पैड की दर से सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल तकनीक पर आधारित है, जिससे पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचता है। इस पहल का असर तेजी से दिखाई दिया है। 31 जनवरी 2026 तक 100 करोड़ से अधिक सैनिटरी पैड बेचे जा चुके हैं। इनमें से केवल वित्त वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक 22.50 करोड़ से अधिक पैड की बिक्री हुई।

मोबाइल ऐप से घर बैठे मिलेगी जानकारी
लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने 2019 में ‘जन औषधि सुगम’ मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। इस ऐप के जरिए लोग अपने नजदीकी जन औषधि केंद्र का पता लगा सकते हैं। साथ ही किसी दवा की उपलब्धता, ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमत की तुलना तथा संभावित बचत की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। यह ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर मुफ्त उपलब्ध है और दवा खरीदने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी बना रहा है।
अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों तक पहुंची योजना
सरकार अब इस योजना को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से भी जोड़ रही है। राज्यों को सरकारी अस्पतालों में किराया मुक्त स्थान उपलब्ध कराकर जन औषधि केंद्र खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि मरीजों को अस्पताल परिसर में ही सस्ती दवाएं मिल सकें। इसके अलावा 31 जनवरी 2026 तक देशभर के रेलवे स्टेशनों पर 116 जन औषधि केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनका उद्देश्य यात्रियों, प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले लोगों को यात्रा के दौरान भी सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना है।

लगातार बढ़ रहा उत्पादों का दायरा
सरकार केवल दवाओं की संख्या ही नहीं बढ़ा रही बल्कि उत्पादों की विविधता भी लगातार बढ़ाई जा रही है। अब जन औषधि केंद्रों पर दवाओं के साथ प्रोटीन पाउडर, माल्ट आधारित पोषण उत्पाद, ग्लूकोमीटर जैसे न्यूट्रास्यूटिकल और स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे मरीजों को एक ही स्थान पर अधिक सुविधाएं मिल रही हैं और केंद्रों की आर्थिक व्यवहार्यता भी मजबूत हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका
सरकार ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को भी इस योजना से जोड़ने की पहल की है। देशभर में फैले इनके नेटवर्क का उपयोग करके दूरदराज के गांवों तक जन औषधि केंद्र पहुंचाने की तैयारी है। इससे उन इलाकों में भी सस्ती दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी जहां अब तक ऐसी सुविधा सीमित रही है।

कौन खोल सकता है जन औषधि केंद्र
जन औषधि केंद्र खोलने के लिए कुछ निर्धारित पात्रता शर्तें हैं। डी.फार्मा या बी.फार्मा योग्यता रखने वाले व्यक्ति या योग्य फार्मासिस्ट नियुक्त करने वाले संगठन इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। केंद्र के लिए कम से कम 120 वर्ग फुट का स्थान होना जरूरी है। संबंधित राज्य की फार्मेसी परिषद में फार्मासिस्ट का पंजीकरण अनिवार्य है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग श्रेणी के आवेदकों को आवश्यक प्रमाण पत्र भी देना होता है।
उद्यमियों को मिलते हैं आकर्षक प्रोत्साहन
योजना के तहत जन औषधि केंद्र संचालकों को दवाओं की एमआरपी पर 20 प्रतिशत का व्यापार मार्जिन मिलता है। इसके अलावा प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन भी दिया जाता है। मासिक खरीद के 20 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम 20 हजार रुपये प्रति माह तक प्रोत्साहन मिलता है, जो निर्धारित स्टॉक बनाए रखने की शर्तों के साथ दिया जाता है। महिला उद्यमियों, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों तथा आकांक्षी जिलों, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी और द्वीपीय क्षेत्रों में केंद्र खोलने वालों को 2 लाख रुपये का अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है। इसमें 1.50 लाख रुपये फर्नीचर और फिक्स्चर पर तथा 50 हजार रुपये कंप्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट और स्कैनर जैसी सुविधाओं पर प्रतिपूर्ति के रूप में उपलब्ध कराए जाते हैं।

दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सप्लाई सिस्टम
योजना की सफलता के पीछे मजबूत आपूर्ति व्यवस्था भी अहम भूमिका निभा रही है। पीएमबीआई ने देशभर में 5 केंद्रीय गोदाम और 41 वितरकों के जरिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सप्लाई चेन विकसित की है। सितंबर 2024 से जन औषधि केंद्रों में 200 अधिक मांग वाली दवाओं का न्यूनतम स्टॉक रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा लगभग 400 तेजी से बिकने वाले उत्पादों की लगातार निगरानी की जाती है ताकि किसी भी केंद्र पर आवश्यक दवाओं की कमी न हो। मांग का पूर्वानुमान लगाने और खरीद प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल तथा स्वचालित बनाया जा रहा है।
आम लोगों के लिए बड़ी राहत
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना आज देश में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल हो चुकी है। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता ने लाखों परिवारों का इलाज का खर्च कम किया है। महिलाओं के लिए कम कीमत पर सैनिटरी नैपकिन, मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल सुविधा, रेलवे स्टेशन और सरकारी अस्पतालों तक विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने जैसी पहलें इस योजना को और प्रभावी बना रही हैं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक 25 हजार जन औषधि केंद्र स्थापित कर देश के हर हिस्से में गुणवत्तापूर्ण और सस्ती जेनेरिक दवाएं पहुंचाना है। यदि यह लक्ष्य तय समय पर पूरा होता है तो स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में यह देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में से एक साबित हो सकती है।










