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PoK में बहता बेकसूरों का खून और ‘ग्लोबल लिबरल मीडिया’ का खौफनाक सन्नाटा!

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पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में इस वक्त बर्बरता और खूनी तांडव का वो भयावह दौर चल रहा है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। पाकिस्तानी सेना के जनरलों के इशारे पर बेकसूर कश्मीरियों की आवाज़ को गोलियों और संगीनों के दम पर दबाया जा रहा है। भारतीय कश्मीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे अभूतपूर्व विकास, शांति और समृद्धि को देखकर PoK के नागरिक भी अपने हक और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं। लेकिन शहबाज़ शरीफ सरकार और जनरल असीम मुनीर की ‘शैतानी सेना’ को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है, जिसके चलते PoK को एक खुले यातनागृह में बदल दिया गया है।

जून 2026 के पहले सप्ताह से लेकर 3 अगस्त 2026 तक के चंद हफ्तों के भीतर, मुनीर की सेना ने 76 बेगुनाह कश्मीरियों को सरेआम गोलियों से भून डाला है। इन बेकसूरों का एकमात्र ‘गुनाह’ सिर्फ इतना था कि वे भारत के जम्मू-कश्मीर जैसी सड़कें, अस्पताल, बिजली, रोजगार और शांति चाहते हैं। अपनी नाकामी और घिनौने चेहरों को छिपाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने पूरे PoK में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी हैं, मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिए हैं और अल-जज़ीरा समेत कई अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की एंट्री पर पूर्ण पाबंदी लगा दी है, ताकि वहां हो रहे नरसंहार का सच दुनिया के सामने न आ सके।

लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा शर्मनाक और चिंताजनक भूमिका पश्चिमी ‘लेफ्ट-लिबरल’ ग्लोबल मीडिया इकोसिस्टम की रही है। मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी का ढोल पीटते नहीं थकने वाले पश्चिमी मीडिया ने PoK में जारी इस कत्लेआाम पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। BBC, द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और द गार्डियन जैसे नामचीन मीडिया संस्थानों का यह खौफनाक सन्नाटा उनके तथाकथित निष्पक्षता के झूठे नकाब की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। भारत के खिलाफ छोटी-सी बात पर भी एजेंडा चलाने वाली यह इंटरनेशनल मीडिया लॉबी PoK में बहते मासूमों के खून पर पूरी तरह अंधी और बहरी बन चुकी है।

आंकड़ों का सच: ‘लेफ्ट-लिबरल’ मीडिया का खुला दोहरा मापदंड और दोगलापन
जब भारत में किसी फर्जी मुद्दे या ‘प्रायोजित आंदोलनों’ के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश होती है, तो यही पश्चिमी मीडिया दिन-रात एक कर देता है। लेकिन जब PoK में असली नरसंहार होता है, तो इनकी कलम सूख जाती है। हालिया कवरेज के आंकड़े इस ‘टूलकिट इकोसिस्टम’ और उनके एजेंडे को पूरी तरह बेनकाब करते हैं:

BBC का दोहरा रवैया: PoK में 76 लोगों की जघन्य हत्या और मीडिया पर पूर्ण पाबंदी जैसी गंभीर घटना पर BBC ने सिर्फ 4 रिपोर्ट्स छापने की औपचारिकता निभाई, जबकि नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए एक छोटे-से प्रदर्शन पर 36 सनसनीखेज रिपोर्ट्स छाप डालीं।

द न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की पक्षपातपूर्ण पत्रकारिता: PoK के खूनी तांडव पर NYT ने महज 2 रिपोर्ट्स दीं, लेकिन जंतर-मंतर के प्रदर्शन को हाइलाइट करने के लिए 16 रिपोर्ट्स प्रकाशित कर दीं।

वाशिंगटन पोस्ट/वाशिंगटन टाइम्स का एजेंडा: PoK के मानवाधिकार हनन पर कुल 6 रिपोर्ट्स छापी गईं, जबकि जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन पर 17 रिपोर्ट्स बनाकर भारत की छवि खराब करने की नाकाम कोशिश की गई।

द गार्डियन का शर्मनाक रिकॉर्ड: द गार्डियन ने PoK में कश्मीरी भाइयों पर हो रहे जुल्म पर केवल 1 रिपोर्ट देकर पल्ला झाड़ लिया, वहीं जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर 20 खबरें छापकर अपना भारत-विरोधी एजेंडा साफ कर दिया।

मानवाधिकारों का ‘सिलेक्टिव एजेंडा’: सीरिया और गाजा पर छाती पीटने वाले PoK पर खामोश क्यों?
पश्चिमी मीडिया की इस तथाकथित पत्रकारिता का सबसे घिनौना पहलू उनका ‘सिलेक्टिव एम्पेथी’ (चुनिंदा हमदर्दी) है। यूक्रेन से लेकर गाजा और सीरिया तक, दुनिया के किसी भी कोने में मानवाधिकारों की बात करने वाला ‘द गार्डियन’ और ‘BBC’ जैसे ही PoK का नाम आता है, घुटनों पर आ जाता है। पाकिस्तानी सेना की ‘मुनीर ब्रिगेड’ जब PoK के मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाती है, तब इन वैश्विक आउटलेट्स का ‘ह्यूमन राइट्स कार्ड’ अचानक गायब हो जाता है। यह सन्नाटा साबित करता है कि इनके लिए मानवाधिकार केवल एक राजनीतिक हथियार है, जिसका इस्तेमाल केवल भारत जैसी उभरती वैश्विक शक्तियों को घेरने और कमजोर करने के लिए किया जाता है।

भारत का ‘विकास’ और PoK का ‘यातनागृह’: मुनीर सेना की बौखलाहट की असली वजह
जब से केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को ध्वस्त किया है, तब से घाटी में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। आज श्रीनगर और अनंतनाग में एम्स, आईआईटी, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और रिकॉर्ड निवेश आ रहा है। भारत के कश्मीर में खिलखिलाती शांति को देखकर सीमा पार PoK के नागरिकों में भी भारत में शामिल होने और मोदी सरकार जैसा सुशासन पाने की तड़प जगी है। पाकिस्तान की कंगाल अर्थव्यवस्था और तानाशाही सेना के पास इस विकास का कोई जवाब नहीं है। इसी बौखलाहट में मुनीर सेना अपने ही नागरिकों को भून रही है और जब भारत की मजबूत सरकार इस अत्याचार का पर्दाफाश करती है, तो अंतरराष्ट्रीय लिबरल लॉबी पाकिस्तान के बचाव में उतर आती है।

क्या अंतरराष्ट्रीय मीडिया का यह सन्नाटा ‘टूलकिट लॉबी’ का हिस्सा है?
PoK के कत्लेआम पर पश्चिमी मीडिया की यह चुप्पी केवल एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि एक गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा नजर आती है। जो मीडिया संस्थान भारत में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को ‘मानवाधिकार हनन’ का नाम देकर दुनिया भर में हेडलाइन बनाते हैं, वही संस्थान जब पाकिस्तानी सेना द्वारा 76 नागरिकों की हत्या पर चुप रहते हैं, तो उनकी नीयत पर सवाल उठना लाजमी है। यह साफ दिखाता है कि ये मीडिया घराने पत्रकारिता नहीं, बल्कि भारत को नीचा दिखाने और उसके विकास की गति को रोकने के लिए ‘विदेशी एजेंडा’ चला रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय की दोटूक: अब झूठे नैरेटिव से तय नहीं होगी भारत की छवि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रुख बिल्कुल साफ और आक्रामक रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दुनिया के हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह स्पष्ट कर दिया है कि PoK भारत का अभिन्न अंग है और वहां के नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना का अत्याचार अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां एक ओर पश्चिमी मीडिया और विदेशी लॉबी भारत विरोधी दुष्प्रचार में लगी है, वहीं भारत अब रक्षात्मक (Defensive) होने के बजाय आक्रामक होकर इन अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव्स को ध्वस्त कर रहा है। आज का भारत इन बिके हुए मीडिया घरानों के ‘सर्टिफिकेट’ का मोहताज नहीं है; भारत का सच और PoK के बेकसूरों की चीख अब दुनिया के सामने पूरी तरह उजागर हो चुकी है।

‘न्यू इंडिया’ बेनकाब करेगा हर भारत-विरोधी नैरेटिव
आज का भारत बदल चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में भारत अब पश्चिमी मीडिया की ‘प्रमाणिकता’ या उनके दिए ‘सर्टिफिकेट’ का मोहताज नहीं है। PoK में बहते मासूमों के खून पर ग्लोबल लिबरल मीडिया की यह चुप्पी उनके अपने वजूद और साख पर एक ऐसा काला धब्बा है, जो कभी नहीं मिटेगा। भारत दुनिया के हर मंच पर पाकिस्तान की इस बर्बरता और पश्चिमी मीडिया के इस दोहरे चरित्र को बेनकाब करता रहेगा, क्योंकि राष्ट्रहित और सत्य की लड़ाई में भारत अब झुकने वाला नहीं है।

PoK में पाक से नाराजगी और भारत को समर्थन की ये 6 वजह
1. शोषण: पीओके से पैदा होने वाली 1,000 मेगावॉट बिजली का 80% पंजाब (पाकिस्तान) को दिया जाता है, जबकि पीओके को बिजली कटौती झेलनी पड़ती है। (स्रोतः पाकिस्तान वाटर एंड पावर डेवलपमेंट अथॉरिटी)
2. बेरोजगारी : 40 लाख आबादी वाले पीओके में बेरोजगारी 24%। (स्रोतः पाक लेबर फोर्स सर्वे, 2023)
3. अत्याचार: 2001 से अब तक 5,000 लोग सेना/ISI द्वारा गायब किए गए। (स्रोतः एमनेस्टी इंटरनेशनल)
4. चुनाव का दिखावा : 2023 के पीओके चुनाव में 70% सीटें पाक समर्थित पार्टियों को, स्थानीय दलों को धमकाया। (स्रोतः एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शंस)
5. शिक्षा-स्वास्थ्य :  बदहाल साक्षरता दर 58% है। प्रति 1 लाख पर 2 ही डॉक्टर।
6. भारत के साथ: 2022 के गोपनीय सर्वे में 62% पीओके निवासियों ने भारत से जुड़ने को बेहतर विकल्प माना। (स्रोतः जर्नल ऑफ साउथ एशियन स्टडीज) पाक ने 40 लाख की आबादी वाले पीओके की दुर्दशा कर रखी है। जबकि यहां नीलम वैली, अयून घाटी जैसे कई पर्यटन स्थल हैं। 2023 में 11 लाख पर्यटक आए। 

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