आजादी के बाद से आज तक कांग्रेस के खिलाफ जितनी आवाजें उठीं, उसे दबाने की कोशिश की गई, क्योंकि कांग्रेस के डीएनए में तानाशाही है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण जून 1975 का आपातकाल है। जब गांधी-नेहरू परिवार ने अपने खिलाफ उठी आवाज को दबाने के लिए लोकतंत्र की हत्या कर देश पर आपातकाल थोपा था। अखबारों पर सेंसरशिप लगा दी थी। कांग्रेस ने न सिर्फ विपक्षी दलों के नेताओं बल्कि सच के साथ खड़े पत्रकारों का भी दमन किया था। 50 साल बाद समय बदल गया, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों की आपातकालीन मानसिकता नहीं बदली। इस मानसिकता ने उन सभी लोगों को अपना शिकार बनाया है, जिन्होंने गांधी-नेहरू परिवार और उसके सहयोगी दलों के खिलाफ लिखने और बोलने का साहस किया है। 
आइए देखते हैं, हाथ में संविधान की लाल किताब लेकर घूमने वाले किस तरह लोकतंत्र की हत्या, संविधान, मौलिक अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करते हैं…
“इटली वाली एंटोनियो माइनो” कहने पर FIR, अर्नब की गिरफ्तारी की मांग
महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की निर्मम हत्या के बाद रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक और एंकर अर्नब गोस्वामी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने सोनिया गांधी को “इटली वाली एंटोनियो माइनो” कहा था, जिसके बाद देश भर में भारी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था और कई राज्यों में उनके खिलाफ पुलिस शिकायतें व FIR दर्ज की गईं थीं। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के कांग्रेस नेताओं ने अर्नब पर सोनिया गांधी के खिलाफ अपमानजनक, सांप्रदायिक और भड़काऊ भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की थी।
Arnab Goswami of Republic TV to be arrested immediately for abusing Smt Sonia Gandhi . This chennel should be banned . @INCIndia @PTI_News @ANI https://t.co/cUQ1JZjNV7
— Dr. Udit Raj (@Dr_Uditraj) April 22, 2020
अर्नब गोस्वामी को मिली सोनिया गांधी के खिलाफ बोलने की सजा
अप्रैल 2020 में सोनिया गांधी को “इटली वाली एंटोनियो माइनो” कहने की सजा अर्नब गोस्वामी को नवंबर 2020 में मिली, जब मुंबई पुलिस की ‘क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट’ (CIU) ने अर्नब गोस्वामी को 2018 के अन्वय नाइक आत्महत्या उकसाने के मामले में उनके घर से गिरफ्तार किया था। उस समय CIU का नेतृत्व सचिन वाजे कर रहे थे। इस कार्रवाई के तरीके को लेकर काफी राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप हुए थे। हैरानी की बात यह है कि सचिन वाजे 2004 में ख्वाजा यूनुस कस्टोडियल मौत मामले में निलंबित हुए थे और बाद में 2007 में इस्तीफा दे दिया था। जून 2020 में, महाराष्ट्र पुलिस ने कोविड-19 महामारी के कारण पुलिस बल में जवानों और अधिकारियों की कमी का हवाला देते हुए वाजे को सेवा में वापस बहाल किया। इसके बाद सचिन वाजे को अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार करने का स्पेशल टास्क दिया गया था। सचिन वाजे ने अपने आकाओं के निर्देश पर अर्नब गोस्वामी को घर से गिरफ्तार कर लिया था।
Screenshots of Republic TV channel showing Mumbai police entering Arnab Goswami’s residence and what appears to be a scuffle inside https://t.co/wUlFrNX108 pic.twitter.com/3kmnUy81BP
— ANI (@ANI) November 4, 2020
राहुल के खिलाफ बोलने पर अजीत भारती को गिरफ्तार करने पहुंची थी कर्नाटक पुलिस
पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने अपने सहयोगियों के साथ एक बैठक में राम मंदिर के फैसले को पलटने की बात कही थी। अजीत भारती ने अपने एक वीडियो में आचार्य प्रमोद कृष्णम के इसी बयान को कोट करते हुए टिप्पणी की थी। कर्नाटक कांग्रेस लीगल सेल की शिकायत पर बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में अजीत भारती के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ भड़काने और दुश्मनी फैलाने की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई। 20 जून 2024 को कर्नाटक पुलिस के अधिकारी (बिना यूनिफॉर्म में) अजीत भारती को धारा 41A का नोटिस देने उनके नोएडा (उत्तर प्रदेश) स्थित आवास पहुँचे। स्थानीय पुलिस को पूर्व सूचना न होने के कारण अजीत भारती ने नोएडा पुलिस को संपर्क किया। इसके बाद नोएडा पुलिस मौके पर पहुँची और प्रक्रियात्मक नियमों के तहत कर्नाटक पुलिस के अधिकारियों को अपने साथ स्थानीय थाने ले गई। कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद कर्नाटक पुलिस नोटिस देकर रवाना हुई।
Karnataka police reaches Ajit Bharti’s residence in Uttar Pradesh.#Congress leader @RahulGandhi talks of freedom of press, expression, democracy, constitution & what not! Asks everyone to not fear!
But his own #KarnatakaGovt resorts to intimidating journos? #RahulDarGaya pic.twitter.com/snUD8dsGUn
— Debashish Sarkar 🇮🇳 (@DebashishHiTs) June 20, 2024
राहुल के खिलाफ बोलने पर एंकर को गिरफ्तार करने पहुंची थी छत्तीसगढ़ पुलिस
जुलाई 2022 में Zee News पर प्रसारित एक शो में राहुल गांधी के उदयपुर कार्यालय पर दिए गए बयान को राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल हत्याकांड के संदर्भ में गलत तरीके से पेश किया गया था। छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर Zee News एंकर रोहित रंजन को गिरफ्तार करने के लिए गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) स्थित उनके आवास पर दबिश दी थी। लेकिन उससे पहली ही यूपी की नोएडा पुलिस ने रोहित को हिरासत में ले लिया। एंकर को हिरासत में लेने के लिए नोएडा और छत्तीसगढ़ पुलिस आपस में भिड़ गई जिससे मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। इस मामले में Zee News को माफी मांगनी पड़ी थी।
बिना लोकल पुलिस को जानकारी दिए छत्तीसगढ़ पुलिस मेरे घर के बाहर मुझे अरेस्ट करने के लिए खड़ी है,क्या ये क़ानूनन सही है @myogiadityanath @SspGhaziabad @adgzonelucknow
— Rohit R Ranjann (@irohitr) July 5, 2022
नेहरू-गांधी परिवार के खिलाफ बोलने पर अभिनेत्री पायल रोहतगी की गिरफ्तारी
दिसंबर 2019 में बॉलीवुड अभिनेत्री पायल रोहतगी को राजस्थान पुलिस की एक टीम ने गुजरात के अहमदाबाद स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया था। उन पर नेहरू-गांधी परिवार के बारे में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने का आरोप था। दरअसल, पायल ने स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष पंडित मोतीलाल नेहरू पर एक वीडियो बनाया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद राजस्थान के बूंदी जिले में कांग्रेस कार्यकर्ता ने अभिनेत्री के खिलाफ आईटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था।

रॉबर्ट वाड्रा और कार्ति चिदंबरम के खिलाफ लिखने पर उद्योगपति गिरफ्तार
पुडुचेरी के उद्योगपति रवि श्रीनिवासन ने अक्टूबर 2012 में एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था कि “खबरें हैं कि कार्ति चिदंबरम ने वाड्रा से भी ज्यादा जायदाद बना ली है”। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की शिकायत के बाद पुडुचेरी पुलिस (CB-CID) ने 30 अक्टूबर 2012 को तड़के रवि श्रीनिवासन को गिरफ्तार कर लिया था। जिसे उस समय भारत में सोशल मीडिया पोस्ट/ट्वीट के सिलसिले में पहली गिरफ्तारियों में से एक माना गया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

एक प्रचलित कहावत है, “खरबूजा खरबूजे को देख कर रंग बदलता है।” शायद इसका सीधा मतलब यह है कि एक को देखकर या उसके असर से दूसरा भी उसी की तरह बन जाता है। कांग्रेस के संपर्क में आने से उसके सहयोगी दलों के नेताओं की मानसिकता भी वैसी ही हो जाती है। इसका अनेकों प्रमाण देखा जा सकता है….
शरद पवार के खिलाफ लिखने पर मराठी अभिनेत्री केतकी की गिरफ्तारी
2022 में मराठी अभिनेत्री केतकी चिताले को एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इससे जुड़े एक अन्य मामले में दूसरी गिरफ्तारी नासिक से हुई थी। नासिक पुलिस ने फार्मेसी के छात्र 23 साल के निखिल भामरे को गिरफ्तार किया था। मराठी अभिनेत्री और फार्मेसी के छात्र, दोनों के ही खिलाफ शरद पवार को लेकर फेसबुक पर अपमानजनक पोस्ट करने का मामला दर्ज किया गया था। चिताले ने किसी और की लिखी पोस्ट शेयर की थी। इस पोस्ट में शरद पवार का पूरा नाम नहीं लिखा गया था, केवल सरनेम मेंशन था। इसके बावजूद दोनों को गिरफ्तार किया गया था। मराठी अभिनेत्री केतकी चितले लगभग 40 दिनों (लगभग एक महीने से अधिक समय) के बाद जेल से बाहर आई थीं।
शरद पवार की आलोचना में सोशल मीडिया पर एक कविता साझा करने की कीमत…
मराठी अभिनेत्री केतकी चिताले पर 22 FIR दर्ज हुईं उन्हें किसी बड़े अपराधी की तरह गिरफ्तार किया गया और 40 दिन से अधिक जेल में रहना पड़ा। अब वही लोग लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सबसे बड़े भाषण देते हैं और… pic.twitter.com/Qd67V9GSF7— Ravi Ranjan Singh 🇮🇳 (@RaviRanjanIn) August 1, 2026
आदित्य ठाकरे को “बेबी पेंग्विन” कहने पर समित ठक्कर गिरफ्तार
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (तत्कालीन ट्विटर) यूजर समित ठक्कर ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने एक ट्वीट में आदित्य ठाकरे के संदर्भ में “बेबी पेंग्विन” शब्द का इस्तेमाल किया था। शिवसेना नेताओं (युवा सेना और स्थानीय प्रतिनिधियों) की शिकायत पर नागपुर और मुंबई में समित ठक्कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। नागपुर पुलिस ने उन्हें 24 अक्टूबर 2020 को राजकोट (गुजरात) से गिरफ्तार किया था।

उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी, कंगना रनौत के बंगले पर बुलडोजर एक्शन
अभिनेत्री कंगना रनौत और तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी शिवसेना के नेताओं के बीच ज़बानी जंग के दौरान कंगना ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से की थी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी की थी। 9 सितंबर 2020 को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने बांद्रा स्थित कंगना रनौत के दफ्तर/बंगले के एक हिस्से में अवैध निर्माण का हवाला देते हुए तोड़फोड़ (Demolition) की कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने तोड़फोड़ पर रोक लगा दी थी। बाद में नवंबर 2020 में कोर्ट ने इस तोड़फोड़ को अवैध और दुर्भावनापूर्ण करार दिया था।
“Was reminded of 26/11 Mumbai terror attacks. Will never tolerate violence in Maharashtra.” said @OfficeofUT once upon a time
Flash forward to today:
– State enable Palghar sadhu lynching
– Kangana Ranaut’s office demolished
– Retd. Naval officer beaten up#UddhavResignNow pic.twitter.com/0t2zKcPvGE— Know The Nation (@knowthenation) September 12, 2020
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी एक-दूसरे के साथ ‘बिल्ली-चूहे का खेल’ खेलते हैं। लेकिन अपने विरोधियों की आवाज दबाने के लिए एक ही तरीका अपनाते हैं, क्योंकि कांग्रेस के संपर्क में आने से केजरीवाल पर भी आपातकालीन मानसिकता और तानाशाही हावी है। इसका असर पंजाब में स्पष्ट रूप में देखा सजा सकता है…
पंजाब में सरकार बनते ही तानाशाह बने केजरीवाल, नवीन कुमार जिंदल के घर पहुंची थी पंजाब पुलिस
मार्च 2022 में पंजाब में सरकार बनते ही अरविंद केजरीवाल की तानाशाही शुरू हो गई। केजरीवाल ने अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने के लिए पंजाब पुलिस का इस्तेमाल शुरू कर दिया। अप्रैल 2022 में पंजाब पुलिस की एक टीम दिल्ली स्थित तत्कालीन दिल्ली बीजेपी मीडिया सेल प्रमुख नवीन कुमार जिंदल के आवास पर पहुँची थी। पंजाब के मोहाली में नवीन जिंदल के खिलाफ मामला (FIR) दर्ज किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया (ट्विटर/X) हैंडल से दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक कथित रूप से ‘एडिटेड/डॉकटर्ड’ (संपादित) वीडियो शेयर किया था। पंजाब पुलिस के दिल्ली पहुँचने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे पंजाब पुलिस का दुरुपयोग बताया था।
महाठग @ArvindKejriwal को डर है कि कही जनता को उसका सच ना पता चल जाये।इसलिए मेरी आवाज को दबाने के लिए बार बार मेरे घर पंजाब पुलिस भेज रहा है
लेकिन मैं आज फिर बताना चाहता हूँ कि पुलिस का खौफ दिखाकर मेरी आवाज को नही दबा सकता।
मैं उसका काला सच दिल्ली की जनता को ऐसे ही बताता रहूँगा pic.twitter.com/j7GEGmzhpi— Naveen kr Jindal (@naveenjindalbjp) April 19, 2022
केजरीवाल के खिलाफ बोलने पर तेजिंदर सिंह बग्गा की हुई थी गिरफ्तारी
6 मई, 2022 को पंजाब पुलिस ने दिल्ली बीजेपी के नेता तेजिंदर सिंह बग्गा को गिरफ्तार कर लिया था। हैरानी की बात है कि दिल्ली के तत्कालीन सीएम केजरीवाल के खिलाफ मामले पर पंजाब के मोहाली साइबर थाने में केस दर्ज कराई गई थी। इधर तेजिंदर के पिता ने पंजाब पुलिस के खिलाफ दिल्ली के जनकपुरी थाने में किडनैपिंग का केस दर्ज कराया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस की सूचना पर पंजाब पुलिस की गाड़ी को हरियाणा पुलिस ने रोक लिया गया। दिल्ली बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा था कि बीजेपी के युवा नेता के घर पंजाब पुलिस के 50-60 जवान भेज कर उन्हें जबरन उठवाना और उनके बुजुर्ग पिताजी के साथ मारपीट करवाना अरविंद केजरीवाल की तानाशाही मानसिकता का प्रमाण है।
.@TajinderBagga के पिताजी के साथ पंजाब पुलिस द्वारा मारपीट करने के खिलाफ जनकपुरी थाने में FIR की।
भाजपा के युवा नेता के घर पंजाब पुलिस के 50-60 जवान भेज कर उन्हें जबरन उठवाना और उनके बुजुर्ग पिताजी के साथ मारपीट करवाना @ArvindKejriwal की तानाशाही मानसिकता का प्रमाण है। pic.twitter.com/a5vti5GBNa
— Adesh Gupta (@adeshguptabjp) May 6, 2022
केजरीवाल और AAP सरकार के खिलाफ बोलने पर कवि कुमार विश्वास के घर पहुंची पंजाब पुलिस
आजकल पंजाब के सुपर सीएम बने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बोलने वालों के घर पंजाब पुलिस पहुंच जा रही है। इसी क्रम में पंजाब पुलिस ने मशहूर कवि कुमार विश्वास के घर पहुंच गई। इसकी जानकारी देते हुए कुमार विश्वास ने ट्वीट किया, ‘सुबह-सुबह पंजाब पुलिस द्वार पर पधारी है। एक समय, मेरे द्वारा ही पार्टी में शामिल कराए गए भगवंत मान को आगाह कर रहा हूं कि तुम, दिल्ली में बैठे जिस आदमी को, पंजाब के लोगों की दी हुई ताकत से खेलने दे रहे हो, वो एक दिन तुम्हे व पंजाब को भी धोखा देगा। देश मेरी चेतावनी याद रखे।’ कभी केजरीवाल के साथ रहे कवि कुमार विश्वास ने चुनाव के दौरान उन पर और आप सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। ऐसे में कुमार विश्वास से नाराज केजरीवाल पंजाब पुलिस का सहारा लेकर उन्हें सबक सिखाना और मुंह बंद कराना चाहते थे।
सुबह-सुबह पंजाब पुलिस द्वार पर पधारी है।एक समय, मेरे द्वारा ही पार्टी में शामिल कराए गए @BhagwantMann को आगाह कर रहा हूँ कि तुम, दिल्ली में बैठे जिस आदमी को, पंजाब के लोगों की दी हुई ताक़त से खेलने दे रहे हो वो एक दिन तुम्हें व पंजाब को भी धोखा देगा।देश मेरी चेतावनी याद रखे🙏🇮🇳 pic.twitter.com/yDymGxL1gi
— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) April 20, 2022
केजरीवाल के ‘शीशमहल’ के बारे में लिखने पर रचित कौशिक की गिरफ्तारी
फरवरी 2024 में पंजाब पुलिस (लुधियाना) की टीम ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र (मुजफ्फरनगर/गाजियाबाद के पास से) से रचित कौशिक को गिरफ्तार किया था। परिजनों और सहयोगियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें सादे कपड़ों में आई पुलिस बिना किसी पूर्व सूचना या स्थानीय पुलिस को सूचना दिए ले गई थी। रचित कौशिक द्वारा दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और ‘शीशमहल’ (मुख्यमंत्री आवास के जीर्णोद्धार) पर बनाए गए वीडियो के कारण यह दंडात्मक कार्रवाई पंजाब पुलिस के जरिए कराई गई थी। पंजाब पुलिस के अनुसार, रचित कौशिक के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत लुधियाना में मामला (FIR) दर्ज किया गया था।
#केजरीवाल की पंजाब पुलिस ने कुमार विश्वास और तेजिंदर बग्गा को गिरफ़्तार करने की नाकाम कोशिश की।
शीशमहल की स्टोरी चलाने वाली महिला पत्रकार को SC/ST एक्ट में गिरफ़्तार कर रात भर थाने में टॉर्चर किया, कोर्ट ने पहली सुनवाई में केस ख़ारिज कर दिया।
और अब उत्तर प्रदेश पुलिस को सूचित… pic.twitter.com/TpZkRddU1A
— ANUPAM MISHRA (@scribe9104) February 7, 2024
‘ऑपरेशन शीशमहल’ की वजह से ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ की पत्रकार की गिरफ्तारी
मई 2023 में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ की पत्रकार भावना किशोर, कैमरा पर्सन मृत्युंजय कुमार और ड्राइवर परमिंदर सिंह लुधियाना में एक कार्यक्रम की कवरेज के लिए जा रहे थे। रास्ते में उनकी गाड़ी और एक ई-रिक्शा के बीच टक्कर/विवाद की बात सामने आई। पंजाब पुलिस ने उनके खिलाफ रैश ड्राइविंग और SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
‘टाइम्स नाउ नवभारत’ और विभिन्न पत्रकार संगठनों (जैसे एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया) ने इस कार्रवाई का विरोध किया था। चैनल का कहना था कि भावना गाड़ी चला नहीं रही थीं, बल्कि केवल उसमें बैठी थीं। चैनल ने आरोप लगाया था कि उनके द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन शीशमहल’ के प्रतिशोध में पंजाब पुलिस द्वारा यह अनुचित कार्रवाई की गई। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने घटना के तुरंत बाद भावना किशोर और उनकी टीम को अंतरिम जमानत दे दी थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द कर दिया था।
#SheeshMahalKaBadla: पंजाब में #AAP सरकार की बदले की कार्रवाई पर ‘नवभारत’ की एडिटर इन चीफ @navikakumar बोलीं- ‘हम थोड़े परेशान हो सकते हैं पर पराजित नहीं.. पूरा ‘नवभारत’ @BhawanaKishore के साथ खड़ा है’@SwetaSri27 #OperationSheeshMahal #SheeshMahalKhulGaya #ArvindKejriwal pic.twitter.com/ynXtFT971Y
— Times Now Navbharat (@TNNavbharat) May 6, 2023
अजीत अखबार के एडिटर बरजिंदर सिंह हमदर्द पर FIR
मई 2024 में जालंधर के वरिष्ठ पत्रकार औऱ अजीत अखबार के संपादक बरजिंदर सिंह हमदर्द के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। ये एफआईआर करतारपुर में स्थित जंग-ए-आजादी मेमोरियल स्मारक मामले को लेकर जालंधर विजिलेंस ब्यूरो ने दर्ज की गई थी। इस केस में जालंधर विजिलेंस ने SDO रैंक के दो धिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में भारी हंगामा हुआ था। कांग्रेस, बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने पंजाब सरकार की इस कार्रवाई को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई बताया था। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस मामले में डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।










