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Example No 9: पीएम मोदी ने माफ किया पर INDI गठबंधन के नेताओं ने बच्चों और युवतियों के खिलाफ कराई FIR

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जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर संबंधित बच्चों को क्षमा करने का संदेश दिया है। दूसरी ओर अभद्र टिप्पणी करने वाले जेन जी का समर्थन कर रहे इंडी गठबंधन के नेता अपना इतिहास भूल रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के चलते पिछले डेढ़ दशक का इतिहास बताता है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब एक्स) और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर लिखी गई टिप्पणियों के कारण अनेक बच्चों, युवतियों और लोगों को गिरफ्तारी, जेल, पुलिस पूछताछ और वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़े हैं। कुछ मामलों में आखिरकार अदालतों ने राहत दी या आरोप टिक नहीं पाए, लेकिन तब तक मानसिक, सामाजिक और आर्थिक क्षति इन लोगों को झेलनी पड़ी। धारा 66A के दौर में इसका इतना व्यापक दुरुपयोग देखने को मिला कि सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया। यह सही है कि कानून को हिंसा, घृणा, आतंकवाद, अश्लीलता और दुष्प्रचार फैलाने वालों के विरुद्ध कठोर होना चाहिए, लेकिन केवल आलोचना, व्यंग्य या असहमति को अपराध मान लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस से लेकर केजरीवाल और ममता से लेकर अखिलेश सरकार तक इसके कई उदाहरण हैं।आइए, ऐसे मामलों पर एक नजर डालते हैं, जिनमें बड़े-बड़े विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ टिप्पणी करने वालों को  किस कदर कानूनी धाराओं में उलझाकर परेशान किया…

उदाहरण नंबर 9
राहुल पर इंस्टाग्राम पोस्ट, तीन सोशल मीडिया यूजर्स पर कानूनी डंडा
कांग्रेस के नेता पीएम मोदी पर भद्दे कमेंट करने वालों का बेशर्मी से समर्थन कर रहे हैं, लेकिन केरल में पिछले माह में ऐसे ही एक मामले और एक्शन को लेकर उसकी बोलती बंद है। दरअसल, केरल में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कुछ इंस्टाग्राम पोस्ट क्या डल गईं, वहां की पुलिस तुरंत हरकत में आ गई और तीन सोशल मीडिया यूजर्स पर कानूनी डंडा चला दिया। बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस ने कथित तौर पर मानहानिकारक वीडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई टिप्पणियों के संबंध में तीन इंस्टाग्राम अकाउंट धारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लीगल सेल के एक सदस्य को 25 जुलाई को इंस्टाग्राम पर 30 सेकंड का यह वीडियो मिला और 27 जुलाई को एफआईआर दर्ज हो गई। ये वीडियो को 16 जुलाई को ground.reality_india नामक अकाउंट से अपलोड किया गया था। वीडियो को इस कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया था कि विपक्षी दल चुप क्यों हैं?”

उदाहरण नंबर 8
ममता को मीम पर मिर्ची लगी, लड़की को गिरफ्तार कर जेल भेजा
पश्चिम बंगाल की कहानी 2019 की है, लेकिन मंशा ऐसी ही बदले वाली है। भाजपा युवा मोर्चा की कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक मीम फेसबुक पर शेयर कर दिया। टीएमसी के नेताओं को मिर्ची लगी, शिकायत दर्ज हुई और लड़की को तत्काल गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। प्रियंका ने ममता बनर्जी के मीम को अपने फेसबुक एकाउंट में पोस्ट किया था, जिसमें ममता को प्रियंका के मेट गाला जैसे लुक में दिखाया गया है। यह सिंपल मीम था, जिसमें फिल्मी अदाकारा प्रियंका चोपड़ा के चेहरे की जगह ममता बनर्जी का चेहरा लगाया गया है। लेकिन टीएमसी नेता बिदक गए और तत्काल केस कर दिया। प्रियंका शर्मा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भी भेज दिया गया। ये कार्रवाई तृणमूल नेता बिश्वास चंद्र हाजरा की शिकायत पर की गई है। तब गिरफ्तारी पर बीजेपी ने सवाल उठाए और पूनम महाजन ने कहा था कि टीएमसी को मजाक को समझना चाहिए और प्रियंका को तुरंत रिहा करना चाहिए।उदाहरण नंबर 7
आजम खां पर फेसबुक पोस्ट का खामियाजा स्कूली बच्चे ने भुगता
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के राज में बरेली में 11वीं क्लास के एक छोटे से बच्चे ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर कर दी, जिसमें समादवादी नेता आजम खां का कोई बयान था। बस फिर क्या था! सपा नेता आजम खां के करीबी मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां ने रामपुर के गंज थाने में पर्चा दर्ज करवा दिया। यूपी पुलिस ने भी ऐसी मुस्तैदी दिखाई कि उस मासूम बच्चे को रातों-रात उसके घर से उठाकर सीधे जेल की सलाखों के पीछे ठूंस दिया। परिवार वाले गिड़गिड़ाते रहे कि बच्चे ने खुद कुछ नहीं लिखा, बस अनजाने में मोबाइल से शेयर हो गया था, लेकिन सपा नेताओं की अकड़ के आगे उस बच्चे और उसके परिवारजनों की एक न सुनी गई।

उदाहरण नंबर 6
शरद पवार के खिलाफ पोस्ट पर एक्ट्रेस केतकी को किया गिरफ्तार
मराठी एक्ट्रेस केतकी चितले ने एनसीपी सुप्रीम शरद पवार के खिलाफ फेसबुक पर एक कविता शेयर कर दी थी तो उन्हें सीधे सलाखों के पीछे डाल दिया गया। केतकी को एक महीने से ज्यादा जेल में गुजारना पड़ा, तब जाकर अदालत से जमानत मिली। मुंबई पुलिस ने केतकी चितले को एक स्थानीय कोर्ट में पेश किया। अदालत ने केतकी को तीन दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे जुड़े एक अन्य मामले में दूसरी गिरफ्तारी नासिक से हुई थी। नासिक पुलिस ने फार्मेसी के 23 साल के छात्र निखिल भामरे को गिरफ्तार किया था। केतकी और फार्मेसी के छात्र दोनों के ही खिलाफ शरद पवार को लेकर फेसबुक पोस्ट करने का मामला दर्ज किया गया था। इतना ही नहीं हिरासत में लेने के बाद एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने उन पर काली स्याही फेंकी थी। उनके खिलाफ 3 केस दर्ज हुए हैं। इनमें से एक केस ठाणे शहर के कलवा पुलिस स्टेशन में और दो पुणे और मुंबई में दर्ज हुए हैं। एक्ट्रेस के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 और 505 के तहत FIR दर्ज की गई थी।

उदाहरण नंबर 5
पंजाब पुलिस गैर-कानूनी ढंग से तजिंदर बग्गा को उठा ले गई
दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयानबाजी और सोशल मीडिया पर तीखे कमेंट्स किए थे, जो कि राजनीति में हर विपक्षी प्रवक्ता करता है। चूंकि दिल्ली पुलिस केजरीवाल के हाथ में नहीं थी, तो जैसे ही पंजाब में ‘आप’ की सरकार बनी। 6 मई 2022 को पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को उनके दिल्ली स्थित घर से गिरफ्तार किया था। पंजाब पुलिस की एक टीम रातों-रात दिल्ली आई और बग्गा को उनके घर से सुबह-सुबह गैर-कानूनी ढंग से उठा लिया। अब कॉकरोच जनता पार्टी और जेन जी का समर्थन कर रहे केजरीवाल ने तब दिल्ली पुलिस नहीं मिली तो जिस राज्य में सत्ता मिली, वहां की पुलिस का गुंडागर्दी के लिए इस्तेमाल किया था।

उदाहरण नंबर 4
कुमार विश्वास और अलका लांबा पर रोपड़ में केस, कोर्ट ने रोका
इसी तरह जब कवि कुमार विश्वास और कांग्रेस नेता अलका लांबा ने पंजाब चुनावों के दौरान केजरीवाल पर कड़े राजनीतिक आरोप लगाए, तो पंजाब के रोपड़ में उनके खिलाफ केस ठोक दिया गया। पंजाब पुलिस बग्गा की तरह कुमार विश्वास और अलका लांबा के घर भी नोटिस का पर्चा लेकर धमक गई। वो तो तब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस बदले की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगा दी। इस सिलसिले में पंजाब पुलिस की टीमें कुमार विश्वास और अलका लांबा के घर पहुंची थीं। डॉ. विश्वास गाजियाबाद में और लांबा दिल्ली में रहती हैं। दोनों ने ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी। इससे यह भी साबित हुआ कि आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल दिल्ली में बैठकर पंजाब में सरकार चला रहे हैं। भगवंत मान कठपुतली मुख्यमंत्री बनकर रह गए।

उदाहरण नंबर 3
शिवसेना फेसबुक पोस्ट से खफा, दो लड़कियों को आईटी एक्ट में दबोचा
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के निधन पर जब पूरा मुंबई बंद कर दिया गया, तो शाहीन ढाडा नाम की एक आम लड़की ने फेसबुक पर बस इतना सा सवाल पूछ लिया कि एक अंतिम संस्कार के लिए पूरे शहर को ठप्प क्यों होना चाहिए? उसकी सहेली रीनू श्रीनिवासन ने इस पोस्ट को सिर्फ ‘लाइक’ किया था। इसका नतीजा ये हुआ कि ठाकरे बंधुओं के इशारे पर पुलिस ने दोनों लड़कियों को आईटी एक्ट की धारा 66A के तहत धर दबोचा। सिर्फ एक पोस्ट ‘लाइक’ करने पर गिरफ्तारी हो गई। इस पोस्ट के कारण उनमें से एक लड़की के चाचा के क्लिनिक पर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। ठाणे में हुई इन गिरफ्तारियों से भारी आक्रोश फैल गया। तब प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रमुख मार्कंडेय काटजू ने इसमें शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की थी।

उदाहरण नंबर 2
अखिलेश सरकार ने फेसबुक टिप्पणी पर दलित लेखक को नहीं बख्शा
जंतर-मंतर पर अश्लील और भद्दी टिप्पणियां करने वाले जेन जी के खैरख्वाह बन रहे अखिलेश यादव को अपनी सरकार में फेसबुक की एक टिप्पणी भी गवारा नहीं हुई थी। अगस्त 2013 में फेसबुक पर यूपी सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में दलित चिंतक व लेखक कंवल भारती को गिरफ्तार कर लिया गया और मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। कंवल भारती ने अपने फेसबुक वाल इतना ही लिखा था कि  ‘आपको तो यह ही नहीं पता कि रामपुर में सालों पुराना मदरसा बुलडोजर चलवा कर गिरा दिया गया और संचालक को विरोध करने पर जेल भेज दिया गया जो अभी भी जेल में ही है। अखिलेश की सरकार ने रामपुर में तो किसी भी अधिकारी को सस्पेंड नहीं किया। वह इसलिए कि रामपुर में आजम खां का राज चलता है, अखिलेश का नहीं। इस तरह की टिप्पणियां करने पर कंवल भारती के खिलाफ 153 ए और 295ए में मुकदमा दर्ज किया गया। इन धाराओं में तीन-तीन साल की सजा का प्रावधान है।

उदाहरण नंबर 1
ममता के रेलमंत्री कार्टून से बिफरे, प्रोफेसर को11 साल बाद क्लीन चिट
पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी के केमिस्ट्री के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा का ‘कसूर’ सिर्फ इतना था कि उन्होंने ममता बनर्जी और तत्कालीन रेल मंत्री मुकुल रॉय का एक मासूम सा कार्टून ईमेल पर फॉरवर्ड कर दिया था। महापात्रा ने उस कार्टून को कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके में एक हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों के एक ईमेल ग्रुप को भेजा था। टीएमसी नेताओं को यह नागवार गुजरा और स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया! हालांकि मामला जब देश भर में उछला, तो कोर्ट ने बाद में उन्हें बाइज्जत बरी किया। कार्टून को सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड करने के आरोप में गिरफ्तार प्रोफेसर महापात्रा को 11 साल बाद राहत मिली। जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अंबिकेश के खिलाफ 2012 में केस दर्ज हुआ था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार कोलकाता की एक निचली अदालत से क्लीन चिट मिल गई।

 

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