हाल के दिनों में झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले ने युवाओं और अभ्यर्थियों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। राज्य के शैक्षणिक माहौल में बनी इस अनिश्चितता ने लाखों होनहार अभ्यर्थियों की सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल देश के जाने-माने शिक्षकों, डिजिटल इंफ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज की चुप्पी को लेकर उठ रहा है। यही वो चेहरे हैं जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलनों और राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक बेबाक बयानबाजी करते नजर आते थे। उस वक्त हर मंच से लोकतंत्र, छात्रों के अधिकार और न्याय की बातें की जाती थीं, लेकिन आज जब झारखंड के युवा अपने हक की लड़ाई अकेले लड़ रहे हैं, तब ये तमाम नामचीन हस्तियां गायब हैं।
अब देश के आम अभ्यर्थियों और जनता के बीच यह सवाल गहराता जा रहा है कि आखिर सेलिब्रिटी और डिजिटल मंचों का यह दोहरा मापदंड क्यों? क्या छात्रों के अधिकारों और भविष्य की चिंता केवल तभी जागती है जब मुद्दा राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों या किसी विशेष राजनीतिक एजेंडे के अनुकूल हो? झारखंड के युवाओं का यह आंदोलन अब न सिर्फ परीक्षा प्रणाली की कमियों को उजागर कर रहा है, बल्कि तथाकथित ‘सामाजिक चिंतकों’ की चुनिंदा संवेदनशीलता की पोल भी खोल रहा है।
जंतर-मंतर पर वोकल, झारखंड पर मौन: ऑनलाइन गुरुओं की चुप्पी पर सवाल
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले देश के बड़े अध्यापकों और ऑनलाइन मेंटर्स ने राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों में हमेशा आगे बढ़कर हिस्सा लिया है। खान सर, विकास दिव्यकीर्ति, अलख पांडे (फिजिक्स वाला) और अवध ओझा जैसे लोकप्रिय शिक्षकों ने पहले राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं और नीतियों के विरोध में न केवल डिजिटल मंचों से आवाज उठाई, बल्कि अभ्यर्थियों के समर्थन में खुलकर बयान भी दिए। हालांकि, झारखंड में प्रतियोगी परीक्षा के पेपर लीक होने और उससे प्रभावित लाखों युवाओं के सड़कों पर उतरने के बावजूद इन शिक्षकों का मौन बना हुआ है। न तो उनके आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से कोई समर्थन जारी हुआ और न ही जमीनी आंदोलन को लेकर कोई प्रतिक्रिया आई। इस चुप्पी ने लोगों के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि क्या छात्रों के अधिकारों का समर्थन भी राज्यों की राजनीति और मीडिया कवरेज को देखकर तय होता है?
All nine of these teachers run coaching institutes, and all nine of them are frauds.
Several of them even went to Jantar Mantar during the CJP protest. Abhinay Maths went there four times.
Ashu Sir went there and gave a big lecture on education.
Will even one of these nine… pic.twitter.com/YJgzg2wG9k
— Amit Kumar Sindhi (@AMIT_GUJJU) August 3, 2026
मंचों पर हल्ला-बोल, ज़मीन पर सन्नाटा: बॉलीवुड और इंफ्लुएंसर्स का दोहरा रवैया
इसी तरह, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित विभिन्न अभियानों और राष्ट्रीय स्तर के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान फ़िल्मी सितारों और डिजिटल इंफ्लुएंसर्स की सक्रियता भी प्रमुखता से देखी गई थी। उस दौरान करीना कपूर, आलिया भट्ट, स्वरा भास्कर, सोनू सूद, फरहान अख्तर और ऋतिक रोशन जैसी हस्तियों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से जन-मुद्दों के पक्ष में खुलकर राय रखी थी। परंतु, झारखंड में अभ्यर्थियों के जारी व्यापक आंदोलन और अनिश्चित भविष्य के मुद्दे पर इनमें से अधिकांश सार्वजनिक चेहरों ने दूरी बना रखी है। सोशल मीडिया पर एक भी संदेश या बयान न आने से इस स्पष्ट विरोधाभास पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आम जनता और परीक्षार्थियों के बीच यह चर्चा गहरा रही है कि क्या सार्वजनिक हस्तियों का यह जन-सरोकार केवल चुनिंदा मुद्दों और राजनीतिक सहूलियत तक ही सीमित रहता है?
Students of Jharkhand are waiting for these celebs to speak in their support.
But they are silent because Jharkhand is not in their toolkit! pic.twitter.com/APmnaNCv1M
— Office Of Vijay Patel (@VijayGajeraO) August 3, 2026
झारखंड में डिजिटल एक्टिविज़्म नदारद
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले इन सेलिब्रिटी का रवैया देखकर अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या आज का ‘सोशल कॉज़’ केवल एल्गोरिदम और हैशटैग तक सीमित रह गया है? जब कोई मुद्दा राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में होता है या जिससे भारी व्यूज और टीआरपी मिलती है, तब तो हर डिजिटल मंच पर ‘जस्टिस’ के नारे लगाए जाते हैं। लेकिन जब झारखंड या किसी राज्य विशेष में प्रशासनिक विफलता के कारण लाखों युवाओं का करियर बर्बाद हो रहा होता है, तब यही डिजिटल एक्टिविज़्म नदारद दिखता है।
राजनीतिक स्वार्थ या छात्र हित? विपक्ष के दोहरे रवैये पर उठते सवाल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलनों के नाम पर मुखर रहने वाला विपक्ष और तथाकथित ‘थिंक टैंक’ आज झारखंड के वास्तविक छात्र संकट पर पूरी तरह खामोश नजर आ रहे हैं। जंतर-मंतर पर विभिन्न गुटों के उकसावे के बाद बने राजनीतिक माहौल के उलट, आज झारखंड की राजधानी रांची में हजारों वास्तविक परीक्षार्थी अपने भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं। यह विरोधाभास एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है कि जो विपक्षी नेता कल तक छात्रों के अधिकारों की आड़ में लगातार बयानबाजी कर रहे थे, वे आज झारखंड के युवाओं के समर्थन में एक शब्द भी बोलने से क्यों बच रहे हैं? जानकारों का मानना है कि इस चुनिंदा चुप्पी की सबसे बड़ी वजह झारखंड में कांग्रेस समर्थित हेमंत सोरेन सरकार का होना है, जिससे यह साफ होता है कि जंतर-मंतर का विरोध वास्तविक छात्र आंदोलन के बजाय राजनीतिक स्वार्थ साधने का जरिया मात्र था।
आइए अब देखते हैं विपक्षी दलों का दोहरा रवैया –
जंतर-मंतर के ‘छात्र हितैषियों’ का गायब होना और विपक्ष की नीयत पर सवाल
जब-जब गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे झारखंड में paper leak या भर्ती घोटाले होते हैं, तब-तब इस विपक्षी कुनबे और तथाकथित सीजेपी/वामपंथी एक्टिविस्टों का ‘छात्र प्रेम’ पूरी तरह गायब हो जाता है। जंतर-मंतर पर छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने वाले नेता आज सत्ता के मोह में पूरी तरह चुप हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्याय और संवेदनाएं भी अब सत्ता देखकर तय की जा रही हैं।
बीजेपी सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट, झारखंड को ठेंगा
जंतर-मंतर पर लंबे-चौड़े भाषण देने वाले और खुद को छात्र अधिकारों का मसीहा बताने वाले सीजेपी (CJP) और अभिजीत दीपके जैसे चेहरों का दोहरा चरित्र एक बार फिर बेनकाब हो गया है। झारखंड के छात्रों ने जब मदद की आस में सीजेपी से संपर्क किया और मैसेज भेजे, तो ज़मीन पर उतरकर समर्थन देने के बजाय दीपके ने केवल फोन पर ही “हमारा पूरा सपोर्ट है” कहकर पल्ला झाड़ लिया। अगर यह प्रदर्शन बीजेपी सरकार के खिलाफ होता तो कैमरे लेकर दौड़े चले आते, लेकिन झारखंड के आदिवासी और गरीब परीक्षार्थियों के संघर्ष को इन्होंने सिरे से ठेंगा दिखा दिया है।
BIG NEWS 🚨 Jharkhand JPSC protesters say they messaged CJP but received no response 😳
“We want Media to cover our protest” – They say pic.twitter.com/akkJ9cYO12
— News Algebra (@NewsAlgebraIND) August 2, 2026
आखिरकार, CJP के लोग और अभिजीत दिपके झारखंड के स्टूडेंट्स के प्रोटेस्ट को लेकर जाग गए हैं।
लेकिन उन्होंने झारखंड सरकार या CM के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने उनके इस्तीफे की मांग भी नहीं की।
जंतर-मंतर पर, वे हर दिन धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांग रहे थे। pic.twitter.com/gJKpVHlHap
— Panchjanya (@epanchjanya) August 2, 2026
झारखंड बनाम दिल्ली: विरोध का फर्क
झारखंड में परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे युवाओं और दिल्ली के आंदोलनों के चरित्र में जमीन-आसमान का अंतर साफ देखा जा सकता है। जहां एक तरफ दिल्ली में प्रायोजित आंदोलनों के दौरान उग्रता, तोड़फोड़ और गाड़ियों पर हमले जैसे विजुअल देखने को मिले, वहीं झारखंड में हजारों की संख्या में जुटे छात्र पूरी तरह अनुशासित होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। एक ओर अराजकता और हिंसा का रास्ता था, तो दूसरी ओर हाथों में मशाल लेकर अपने न्यायसंगत हक के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष। यह अंतर साफ बताता है कि कौन सा आंदोलन राजनीति से प्रेरित है और कौन सा असली छात्रों का आंदोलन है।
पालतू मीडिया साइलेंट 🤐
CJP साइलेंट 🤐
विपक्ष साइलेंट 🤐झारखंड के हजारों छात्र
JPSC-JSSC पेपर लीक और गड़बड़ियों के खिलाफ सड़कों पर हैं।कोई कवरेज नहीं, कोई शोर नहीं।
वजह – क्योंकि राज्य में INDI गठबंधन की सरकार है? pic.twitter.com/iBNmlBUO7d
— Shivam Dixit (@ShivamdixitInd) August 1, 2026
शाम 4 बजे राजीव चौक पर प्रदर्शन हिंसक हो गया! लगातार आंसू गैस के गोले के बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और पुलिस की गाड़ियों को तोड़ डाला। दिल्ली में फिर हिंसा भड़क गई! #Neet #protest #cjp pic.twitter.com/X7utLDsJ0k
— kishor Yadav (@kishor_2023) July 20, 2026
जंतर-मंतर पर वीआईपी मंच और गाड़ियों का लश्कर, झारखंड में जमीन पर छात्र
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में जिस तरह नेताओं और प्रायोजकों के लिए महंगे वीआईपी मंच, शानदार टेंट और लग्जरी गाड़ियों के इंतजाम देखे गए थे, उसने उस आंदोलन के ‘प्रायोजित’ होने के सबूत दिए थे। लेकिन इसके ठीक विपरीत झारखंड की राजधानी रांची की सड़कों पर असली परीक्षार्थी बिना किसी बड़े बजट या वीआईपी तामझाम के केवल न्याय की आस में सीधे जमीन पर बैठकर संघर्ष कर रहे हैं।
DAY 12 UPDATE
CHALO SANSAD
A peaceful march to the Indian Parliament.
Most countries in the democratic world are not only accessible but welcoming to general public. Most even have a protest place right in front, so there’s no reason this shouldn’t be possible in the capital of… pic.twitter.com/4u7YAd3O9z— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 10, 2026
मूसलाधार बारिश और खुले आसमान के नीचे डटे छात्र
रांची में हो रही तेज बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। जयपाल सिंह स्टेडियम और सड़कों पर हजारों छात्र प्लास्टिक की तिरपाल ओढ़कर और भीगते हुए भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। शासन-प्रशासन द्वारा टेंट हटाने और सहूलियतें छीनने के बावजूद छात्र अपनी लगन और निष्ठा के साथ इस कठिन परिस्थिति में भी डटकर मुकाबला कर रहे हैं।
रांची में लगातार बारिश हो रही है, लेकिन छात्र आंदोलन में डटे पड़े हैं।
हेमंत सोरेन सरकार छात्रों को टेंट भी नहीं लगाने दे रही है। सही मायने में यही तो लोकतंत्र है।
हेमंत सोरेन तुमको इस्तीफा देना पड़ेगा। pic.twitter.com/5WMc9rvLc1
— खुचरेंप (@khuchrep) August 3, 2026
दोहरे रवैये का पर्दाफाश: जंतर-मंतर के ‘नेता’ गायब, झारखंड का छात्र सड़कों पर
जंतर-मंतर पर हुए विरोध को खत्म हुए 10 दिन से अधिक का समय हो गया है। इन दिनों में वहां के स्वघोषित छात्र नेता इंटरव्यू देने और जश्न मनाने में व्यस्त हैं, जबकि झारखंड में पिछले एक हफ्ते से आदिवासी और स्थानीय छात्र रुखा-सूखा खाकर तंबुओं में रातें गुजार रहे हैं। जिन नेताओं ने झारखंड जाने के बड़े-बड़े दावे किए थे, उन्हें अपने ‘राजनैतिक आकाओं’ से हरी झंडी न मिलने के कारण अब तक वहां जाने की फुर्सत नहीं मिली है।
जंतर मंतर प्रोटेस्ट को खत्म हुए 10 दिन होने को आए। इन 10 दिनों में जंतर मंतर के नेता पार्टियां करने और जिन्हें” गोदी मेडी” कह कर पिटवा रहे थे, उन चैनलों में इंटरव्यू देने में व्यस्त हैं।
इधर पिछले एक हफ्ते से झारखंड के स्टूडेंट्स प्रदर्शन कर रहे हैं। तम्बुओं में बैठे हैं,रुखी… pic.twitter.com/73G3lt6rlh— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) August 2, 2026
जंतर मंतर के स्टूडेंट लीडर इंटरव्यू देने, पार्टी करने और अब अमित शाह का इंटरव्यू देने में व्यक्त हैं। उधर रांची में झारखंड के आदिवासी स्टूडेंट्स रुखा सूखा खाकर आज फिर रात भर धरने पर बैठेंगे।
छात्रों की हौसला अफजाई के लिए उन्हें पिज्जा बर्गर भेजने वाले कहां गए ? pic.twitter.com/HIchZnioMR— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) July 31, 2026
राष्ट्रभक्ति और आस्था के साथ ‘अनुशासित’ आंदोलन
रांची में छात्रों के मशाल जुलूस के दौरान भारतीय संस्कृति और वास्तविक छात्र शक्ति की झलक देखने को मिली। सावन के पवित्र महीने में जब जुलूस एक मंदिर के पास से गुजरा, तो हजारों छात्र रुककर भगवान शिव की आरती और भजनों में शामिल हो गए। इस दौरान पूरे परिसर में ‘वंदे मातरम’ के नारे गूंजते रहे। बिना किसी पत्थरबाजी, हिंसा, या अराजकता के यह आंदोलन साबित करता है कि देश का असली छात्र राष्ट्रहित और अपनी निष्ठा के साथ न्याय की मांग कर रहा है।
🚨 जानते हो CJP के फ्रॉड्स झारखंड विरोध में क्यों नहीं आ रहे?
यह वीडियो देखो 👇🏻
झारखंड में छात्रों के मशाल जुलूस के दौरान एक दिल छू लेने वाला पल देखने को मिला।
जब जुलूस मंदिर के पास से गुजरा तो भक्ति गीत गूंजने लगे। श्रावण का पवित्र महीना चल रहा है, हजारों छात्रों ने कुछ पल… pic.twitter.com/JKyXR42Bwu
— Manoj Singh (@PracticalSpy) August 3, 2026
अंधेरे और बारिश के बीच हेमंत सरकार की बर्बरता
रांची में देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बावजूद छात्र तिरपाल लेकर धरना स्थल पर डटे रहे। प्रशासन ने न केवल उनका टेंट हटवाया, बल्कि धरना स्थल की लाइटें भी काट दीं। रात के 1:00 बजे घुप्प अंधेरे के बीच छात्र मोबाइल की टॉर्च और चादर-तिरपाल के सहारे अपना हक मांगते दिखे। राहुल गांधी और हेमंत सोरेन की यह सरकार छात्रों की बुनियादी सहूलियतें छीनकर आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है।
झारखंड, रांची में स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट का यह वीडियो अभी रात 1.15 मिनट का है।
स्टूडेंट्स पहले टैंट के नीचे रातें गुजार रहे थे, पर झारखंड सरकार ने उनके तंबू भी उखड़वा दिए। बारिश में तिरपाल ओढ कर स्टूडेंट्स रात को भी धरने पर बैठे रहे। और अब स्थितियां की लाइटें भी काट दी गई हैं।… pic.twitter.com/IHuMxcOyv2— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) August 2, 2026
रांची में इस समय तेज बरसात हो रही है। पर बरसात के बावजूद जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स तिरपाल लेकर डटे हुए हैं। pic.twitter.com/zR52tIbg1Y
— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) August 2, 2026
धांधली और मेरिट लिस्ट में हेरफेर: आमरण अनशन पर GenZ छात्र
झारखंड में केवल paper leak ही नहीं, बल्कि पूरी मेरिट लिस्ट बदलने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। प्रशासनिक सेवाओं में हुई धांधली के खिलाफ छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने JPSC 14वीं PT परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। हजारों GenZ परीक्षार्थी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, लेकिन विपक्षी दलों के प्रमुख चेहरे इस भीषण अव्यवस्था पर पूरी तरह मौन साधे बैठे हैं।
झारखंड में पिछले 8 दिनों से 12000 छात्र एक स्टेडियम में बैठे हैं
झारखंड में तो पेपर लीक छोड़िए पैसे लेकर पुरी की पूरी मेरिट लिस्ट ही बदल दी गई
और खुद सरकार भी स्वीकार कर रही है कि हां झारखंड प्रशासनिक सेवा का मेरिट लिस्ट बदल दिया गया
लेकिन वहां ना मंत्री इस्तीफा दे रहा है… pic.twitter.com/4CrWdtPINM
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) August 2, 2026
🚨 प्रदर्शन से आमरण अनशन तक।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने JPSC 14वीं PT परीक्षा रद्द करने और अनियमितताओं की जाँच की माँग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है।
झारखंड के GenZ छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं।
राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव, डिंपल यादव, आप लोग… pic.twitter.com/hqULrsQwGl
— Manoj Singh (@PracticalSpy) August 3, 2026
25 हजार छात्रों का मशाल जुलूस और ‘चुनिंदा’ मीडिया-विपक्ष की चुप्पी
रांची की सड़कों पर 20 से 25 हजार से अधिक छात्रों ने विशाल मशाल जुलूस निकालकर सोरेन सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। इसके बावजूद, न तो वामपंथी ईकोसिस्टम इस पर बात कर रहा है और न ही राहुल गांधी या अरविंद केजरीवाल जैसे नेता अपनी जुबान खोल रहे हैं। क्या छात्रों के अधिकार और न्याय की परिभाषा केवल राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से तय होगी?
झारखंड में छात्र सड़कों पर हैं।
लेकिन न राष्ट्रीय मीडिया में वैसी चर्चा दिख रही है, न सोशल मीडिया पर वैसा शोर।
अभिजीत डिपके अमेरिका से भारत आकर विरोध कर सकता है।
राहुल गांधी भी पीएम आवास तक विरोध करने पहुंच सकते हैं।
लेकिन कोई भी झारखंड नहीं पहुँच सकता,क्या विरोध की आवाज़… pic.twitter.com/TmDcLa70ze
— ocean jain (@ocjain4) August 3, 2026
झारखंड की राजधानी रांची का यह वीडियो आज शाम का है।
20 से 25 हज़ार से अधिक छात्र सड़कों पर उतरकर झारखंड सरकार के खिलाफ़ मशाल जुलूस निकाल रहे हैं। यह आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में छात्रों के बढ़ते आक्रोश का प्रतीक है.
लेकिन जो लोग कल तक… pic.twitter.com/SkSCebAcTk
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 2, 2026
फ्लैशलाइट मार्च: युवाओं के भविष्य की बुलंद आवाज
JSSC और JPSC में हुए बड़े घोटालों के खिलाफ छात्रों ने हाथ में मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर शांतिपूर्ण और अनोखे अंदाज में ‘फ्लैशलाइट मार्च’ निकाला। यह अंधेरे सिस्टम के खिलाफ अपने उज्ज्वल भविष्य की लड़ाई लड़ रहे युवाओं का प्रतीक बन गया है।
“यह सिर्फ फ्लैश लाइट नहीं, झारखंड के युवाओं के भविष्य की रोशनी है।”
आज शाम राँची में JSSC–JPSC घोटाले और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों ने हजारों की संख्या में फ्लैश लाइट मार्च निकालकर अपने हक की बुलंद आवाज उठाई। pic.twitter.com/vv8DxVKs4M
— BJP JHARKHAND (@BJP4Jharkhand) August 1, 2026
JPSC-JSSC नौकरियों की खुली बिक्री और दागी अफसरों का संरक्षण
झारखंड में JPSC और JSSC के माध्यम से नौकरियों की सरेआम बोली लगाई गई है। अभ्यर्थियों को दूसरे राज्यों में ले जाकर प्रश्न पत्र रटवाए गए और परीक्षा केंद्रों पर इंटरनेट बंद कराकर सेटिंग की गई। जांच को प्रभावित करने के लिए निष्पक्ष अधिकारियों का तबादला कर दागी अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
इस विषय पर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार से स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- JPSC और JSSC के अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक और सचिव को तुरंत बर्खास्त किया जाए।
- दोषियों पर तत्काल FIR दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी हो।
- संपूर्ण परीक्षा घोटाले की निष्पक्ष CBI जांच कराई जाए।
झारखंड में JPSC और JSSC ने खुलेआम नौकरियां बेची हैं।
दलालों ने लड़कों को नेपाल, बिहार और बंगाल ले जाकर 135-150 प्रश्न रटवाए, जिनमें से 120 प्रश्न हूबहू परीक्षा में आए। सेंटर पर नेट बंद कराकर इस पूरी धांधली को अंजाम दिया गया।
पैसों की सेटिंग के कारण ही JSSC ने 26 हजार आचार्यों… pic.twitter.com/Ygk4AsKbXz
— Babulal Marandi (@yourBabulal) August 3, 2026
गैर-भाजपा शासित राज्यों में पेपर लीक पर चुप्पी बनाम भाजपा राज्यों में दुष्प्रचार
झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में जब-जब प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द होती हैं या पेपर लीक के मामले सामने आते हैं, तब विपक्ष का दोहरा रवैया साफ नजर आता है। राजस्थान की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान हुए ‘रीट’ (REET) पेपर लीक घोटाला हो या अब झारखंड का JPSC/JSSC घोटाला—विपक्ष हमेशा अपने शासित राज्यों में युवाओं के भविष्य पर पर्दा डालने का प्रयास करता है। वहीं, दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए सख्त ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (एंटी-चीटिंग) एक्ट’ जैसे ऐतिहासिक कदमों की सराहना करने के बजाय विपक्ष केवल राजनीति करने में मशगूल रहता है।










