विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill, 2026) को लोकसभा में 25 मार्च 2026 को पेश किया गया था। अब मानसून सत्र के दौरान इस पर आगे की विधायी कार्रवाई और चर्चा के लिए इसे संसद में प्रस्तुत किया जा रहा है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और एनजीओ (NGO) द्वारा मिलने वाले विदेशी पैसों के दुरुपयोग को रोकना है। सरकार के अनुसार, इन बदलावों से यह सुनिश्चित होगा कि विदेशी अंशदान का उपयोग केवल वैध उद्देश्यों के लिए हो, ताकि देश और आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो सके। इन उद्देश्यों की प्राप्ति कैसे होगी, इसका स्पष्ट और प्रभावी प्रावधान इस संशोधन विधेयक में किया गया है।

कैसे आएगी पारदर्शिता और जवाबदेही ?
- विदेशी फंड के स्रोत और उसके उपयोग की सही जानकारी सरकार को देना है।
- डिजिटल गतिविधियों और सोशल मीडिया खातों का खुलासा करना अनिवार्य है।
- धन के उपयोग का प्रोजेक्ट-वार और लोकेशन-वार हिसाब रखना और देना है।
- विदेशी फंड का उपयोग व्यक्तिगत लाभ, अनधिकृत गतिविधियों के लिए नहीं होगा।
- धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए प्राप्त विदेशी फंड का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए करना है।
- खर्च सीमा का पालन, अंतिम दानदाताओं, मध्यवर्ती संस्थाओं की जानकारी देना जरूरी है।
- हर वित्तीय लेनदेन, स्रोत और उपयोग का पूरा विवरण ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य है।
- विदेशी फंड से बनाई गई अचल संपत्तियों पर एक तय प्राधिकारी द्वारा कड़ी नजर रखी जाएगी।
- बिना अनुमति के अन्य गैर-एफसीआरए संगठनों को फंड ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं है।
- लाइसेंस समाप्ती पर संपत्ति नियंत्रण, नवीनीकरण के लिए न्यूनतम उपयोग सीमा तय किए गए हैंं।
कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता सुनिश्चित होगी ?
- देश की संप्रभुता और लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना है। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखनी है।
- यदि किसी संस्था का पंजीकरण रद्द या समाप्त होता है, तो विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों को एक तय कानूनी अधिकारी के अधीन सुरक्षित किया जाएगा, ताकि उनका दुरुपयोग देश विरोधी गतिविधियों में न हो सके।
- एनजीओ और अन्य संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों के विवरण और वित्तीय लेनदेन की सख्त निगरानी की जाती है, जिससे बाहरी ताकतों द्वारा गुप्त फंडिंग पर लगाम लगती है।
- वैध धार्मिक गतिविधियों को छूट है, लेकिन जबरन धर्मांतरण या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले कृत्यों के लिए विदेशी धन के इस्तेमाल पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है।

आइए जानते हैं कि आखिर FCRA कानून में संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी और किस तरह इस कानून का दुरुपयोग किया गया…
देश के सामने नई चुनौती, सोशल मीडिया एल्गोरिदम, विदेशी बॉट नेटवर्क्स और फंडिंग
आज के डिजिटल युग में लड़ाइयां सिर्फ देशों की सीमाओं पर नहीं लड़ी जाती हैं, बल्कि इसका दायरा वैश्विक हो गया है। आज की लड़ाई डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, एआई और डीपफेक, बॉट नेटवर्क और एल्गोरिदम कंट्रोल (सोशल मीडिया पर किसी खास ट्रेंड को जानबूझकर नंबर-1 पर लाना या विरोधी आवाजों को दबाना), खास प्रोजेक्ट्स के खिलाफ पीआईएल (जनहित याचिकाएं), बड़े-बड़े सर्वे, रिपोर्ट्स और इंडेक्स, बायकॉट और ‘वोक’ (Woke) कल्चर, यूनिवर्सिटी, थिंक टैंक, एनवायरनमेंट कैंपेन और सोशल मूवमेंट्स के जरिए लड़ी जाती है। इस खेल में बंदूक की गोली की जगह ‘विदेशी ग्रांट’ को हथियार बनाया जाता है, ताकि देश के अंदर ही अशांति फैलाई जा सके। ‘विदेशी ग्रांट’ का इस्तेमाल पर्यावरण के नाम पर प्रोटेस्ट करने, मीडिया नैरेटिव सेट करने, पॉलिसी रिसर्च और आंदोलनों का बखेड़ा खड़ा करने में भी किया जाता है। जब किसी देश में हजारों करोड़ रुपये का विदेशी पैसा आ रहा हो, तो कोई भी देश इसे बिना जांच-पड़ताल के नहीं छोड़ सकता।

सीजेपी प्रदर्शन : डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों को विदेशी फंडिंग का आरोप
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर जांच एजेंसियां विदेशी फंडिंग समेत कई बिंदुओं पर जांच कर रही हैं। एजेंसियां पता लगा रही हैं कि किन माध्यमों से फंड जुटाए गए। जांच एजेंसियों के रडार पर पांच से ज्यादा कंपनियां हैं। इनमें कुछ डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के लिए काम करने वाली कंपनियां भी हैं। इन पर आंदोलन के दौरान विदेशी फंडिंग से सोशल मीडिया एल्गोरिदम और विदेशी बॉट नेटवर्क्स के जरिए कंटेंट्स को नियंत्रित व प्रसारित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इन कंपनियों के मुंबई, बंगलूरू, गुरुग्राम व दिल्ली के कई ठिकानों पर छापे मारे गए। कंपनियों के वित्तीय लेन-देन, कैंपेन, इंफ्लूएंसर के बीच एग्रीमेंट समेत कई दस्तावेज खंगाले गए। कुछ डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं। विश्लेषकों और रिपोर्ट्स के अनुसार, सीजेपी आंदोलन से जुड़े रील्स और वीडियो को इस तरह से साझा किया गया कि एल्गोरिदम के माध्यम से यह कम समय में करोड़ों लोगों तक पहुंच गया। जांच में यह बात सामने आई है कि सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए हजारों की संख्या में विदेशी बॉट या फर्जी अकाउंट्स का इस्तेमाल करके संदेशों को कृत्रिम रूप से वायरल कराया गया। 
सरकारी नीतियों और विकास प्रोजेक्ट्स के खिलाफ विदेशी फंड का इस्तेमाल
भारत की ऊर्जा नीतियों को प्रभावित करने के लिए विदेशी फंड का दुरुपयोग
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 5 जनवरी 2026 को सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड (SSPL) के दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा में स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी ने कहा था कि यह कार्रवाई कंपनी को विदेशी NGO और इन्फ्लुएंस ग्रुप्स से प्राप्त फंडिंग की सही जांच के लिए की जा रही है। दरअसल, इस कंपनी पर कंसल्टेंसी शुल्कों की आड़ में विदेशी धन प्राप्त करने और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघनों का आरोप है। कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में कई प्रोजेक्ट्स में निवेश किया और विदेश से मिली कंसल्टेंसी फीस को अपने बिज़नेस खर्चों में दिखाया। यह कंपनी पर्यावरण कार्यकर्ता हरजीत सिंह और उनकी पत्नी ज्योति अवस्थी द्वारा संचालित की जाती है। इस कंपनी को वर्ष 2021 से 2025 के बीच 6 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी धनराशि प्राप्त होने का आरोप है। इस धन का उपयोग भारत सरकार की ऊर्जा नीतियों को प्रभावित करने और जीवाश्म ईंधन विरोधी एजेंडा (जैसे ‘Fossil Fuel Non-Proliferation Treaty’) को बढ़ावा देने के लिए नैरेटिव सेट करने में किया गया।

सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) का लाइसेंस रद्द, विदेशी फंड के दुरुपयोग का आरोप
केन्द्र सरकार ने प्रमुख थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) पर विदेशी चंदे का दुरुपयोग कर विकास और सरकारी परियोजनाओं के खिलाफ प्रदर्शनों तथा कानूनी लड़ाइयों को वित्तपोषित करने का आरोप लगाया। इन उल्लंघनों के आधार पर गृह मंत्रालय ने जनवरी 2024 में सीपीआर (CPR) का विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम यानी FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था। आरोप है कि संस्था ने अनुसंधान के बजाय विदेशी अनुदानों का इस्तेमाल कोयला खदानों और अन्य बड़े विकास प्रोजेक्ट्स के खिलाफ मुकदमेबाजी और एक्टिविज्म के लिए किया। सरकार ने अदालत और आधिकारिक बयानों में कहा कि सीपीआर की गतिविधियां देश के आर्थिक हितों और नीतियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रही थीं। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी अय्यर ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ (CPR) की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) थीं, जिन्होंने मार्च 2024 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

थूथुकुडी (स्टरलाइट) कॉपर प्रोजेक्ट को बंद कराने में फॉरेन-फंडेड NGO ‘द अदर मीडिया’ का हाथ
वर्ष 2018 में तमिलनाडु में वेदांता समूह के थूथुकुडी (स्टरलाइट) कॉपर प्रोजेक्ट को बंद कराने और माइनिंग इलाकों में लोगों को भड़काने के पीछे कुछ फॉरेन-फंडेड NGOs का हाथ पाया गया। मई 2018 में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस गोलीबारी में 13-14 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद तमिलनाडु सरकार ने संयंत्र को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया। सरकार और जांच एजेंसियों के अनुसार, स्थानीय पर्यावरण चिंताओं का इस्तेमाल कर भारत की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करने के लिए विदेशी धन का उपयोग किया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद में स्वीकार किया था कि नई दिल्ली स्थित ‘द अदर मीडिया’ (The Other Media) नामक एनजीओ की विदेशी चंदे (FCRA) नियमों के उल्लंघन और स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शनों को आयोजित करने में भूमिका की जांच की जा रही है।

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में विदेशी फंडिंग
तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से लेकर कई पावर प्रोजेक्ट्स के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में विदेशी फंडिंग के सबूत मिले। 2011-2012 के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों में विदेशी फंडिंग का गंभीर आरोप लगाया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्रालय ने दावा किया था कि अमेरिका और स्कैंडिनेवियाई देशों के विदेशी एनजीओ भारत के विकास में बाधा डालने के लिए स्थानीय आंदोलनों को वित्तीय सहायता दे रहे हैं। डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को कोर्ट-कचहरी और प्रोटेस्ट में फंसाने से भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ को हर साल 2 से 3 परसेंट का सीधा नुकसान हो रहा था।

विदेशों में भारत की इमेज बिगाड़ने के लिए विदेशी फंड का इस्तेमाल
असम के चाय उद्योग पर विदेशी धन से तैयार की गई थी Oxfam India की रिपोर्ट
Oxfam India पर FCRA का उल्लंघन करने, विदेशी नीतियों के उपकरण के रूप में काम करने, विदेशों में भारत की छवि बिगाड़ने और भारत के राष्ट्रीय आर्थिक हितों के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के कई गंभीर आरोप लगे हैं। इस संगठन पर विदेशी सरकारों व संस्थाओं के माध्यम से भारत सरकार पर एफसीआरए लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए दबाव बनाने की योजना बनाने का आरोप है। सरकार का पक्ष है कि यह एनजीओ सामाजिक कार्यक्रमों के बजाय देश के मुख्य उद्योगों (जैसे असम चाय उद्योग और कोयला क्षेत्र) के खिलाफ स्थानीय यूनियनों की मदद से नकारात्मक अभियान चलाने व समुदायों को भड़काने में लिप्त रहा है। दिसंबर 2021 में एफसीआरए पंजीकरण के नवीनीकरण का आवेदन अस्वीकार किए जाने के बाद इस संगठन का एफसीआरए पंजीकरण समाप्त हो गया। लाइसेंस निरस्त होने से पहले सीबीआई की जांच में पाया गया कि असम की चाय उद्योग पर विदेशी धन से तैयार की गई ऑक्सफैम की रिपोर्ट में मुख्य शोधकर्ता ने न तो कोई फील्ड रिसर्च किया और न ही तथ्यों का स्वतंत्र सत्यापन किया।

LIFE पर बुनियादी ढांचे, खनन और ऊर्जा परियोजनाओं में बाधा डालने का आरोप
एनजीओ लीगल इनिशिएटिव फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंट (LIFE) पर भारत विरोधी या विकास-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया जाता है, क्योंकि यह संस्था पर्यावरणीय कानूनों के उल्लंघन और जंगलों के क्षरण से जुड़े विकास प्रोजेक्ट्स के खिलाफ अदालतों में मुकदमे लड़ती है। इस तरह के कानूनी हस्तक्षेप और जनहित याचिकाएं बुनियादी ढांचे के विकास, खनन और ऊर्जा परियोजनाओं को समय पर पूरा होने से रोकती हैं, जिससे आर्थिक प्रगति प्रभावित होती है। संगठन ने कोरमराडा थर्मल पावर परियोजना, राजस्थान की कई तापीय ऊर्जा परियोजनाओं, छत्तीसगढ़ की 12 तापीय ऊर्जा परियोजनाओं तथा पीईकेबी (PEKB) कोयला ब्लॉक को कानूनी चुनौती दी। जांच के दौरान प्राप्त आंतरिक संचार से यह भी सामने आया कि LIFE Trust विदेशी संस्थाओं के साथ समन्वय कर परियोजनाओं को विलंबित या रोकने के उद्देश्य से कानूनी कार्यवाहियों को लक्षित कर रहा था। इस संगठन का एफसीआरए पंजीकरण मार्च 2023 में निलंबित कर दिया गया था और फरवरी 2024 में रद्द कर दिया गया।

माओवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी फंड का इस्तेमाल
ईसाई मिशनरी संगठन पर विदेश फंड देकर माओवाद को बढ़ावा देने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जून 2026 में बेंगलुरु में एक अमेरिका से संचालित ईसाई मिशनरी संगठन और सात लोगों के खिलाफ़ पुलिस केस दर्ज करवाया। संगठन पर आरोप है कि टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) ने अमेरिकी बैंक के डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करके भारत में 92.55 करोड़ रुपये से ज़्यादा का गैर-कानूनी विदेशी फंड भेजा। इस फंड को नवंबर 2025 और अप्रैल 2026 के बीच कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और असम के माओवाद प्रभावित इलाकों में ATM से कैश निकाला गया। पिछले कुछ सालों में पूरे भारत में 1,000 से ज़्यादा ऐसे विदेशी डेबिट कार्ड बांटे जाने का आरोप है। इसका मकसद माओवादी-प्रभावित इलाकों में गैर-कानूनी गतिविधियों का समर्थन करना था।

राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध गतिविधियों में विदेशी फंड का इस्तेमाल
सोशियो लीगल इंफॉर्मेशन सेंटर (SLIC) का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द
गृह मंत्रालय ने नवंबर 2022 में विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (FCRA) के नियमों के कथित उल्लंघन और फंड के उपयोग में अनियमितता के चलते गैर-सरकारी संगठन सोशियो लीगल इंफॉर्मेशन सेंटर (SLIC) का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। एसएलआईसी (SLIC) एक कानूनी सहायता और मानवाधिकार संगठन है, जिसके चेयरपर्सन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस दीपक वर्मा हैं। यह मानवाधिकार नेटवर्क (HRLN) की मूल संस्था भी है। रिपोर्टों के अनुसार, विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन का उपयोग तयशुदा सामाजिक-कानूनी दायरों के बाहर जाकर अन्य गतिविधियों में करने के आरोप लगाए गए। HRLN पर जॉर्ज सोरोस से जुड़े संगठनों द्वारा वित्तपोषण प्राप्त करने तथा सीएए (CAA), इस्कॉन की अक्षय पात्र (Akshaya Patra) योजना और रोहिंग्या शरणार्थियों को कानूनी सहायता से संबंधित अभियानों में शामिल होने के आरोप लगे हैं।

विदेशी फंड का व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग
‘एडवांटेज इंडिया’ पर फर्जी दावे और विदेशी फंड के दुरुपयोग का आरोप
दिल्ली के गैर-सरकारी संगठन ‘एडवांटेज इंडिया’ पर 2012 से 2016 के बीच सामाजिक व शैक्षणिक कार्यों के नाम पर लगभग 90.72 करोड़ रुपये के विदेशी फंड मिले। इस फंड में 72 करोड़ रुपये के फर्जी दावे करने और धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा। 2017 में सीबीआई ने एडवांटेज इंडिया के मालिक दीपक तलवार, जो एक प्रसिद्ध कॉर्पोरेट लॉबिस्ट हैं, और चार अन्य लोगों के खिलाफ विदेशी फंड के दुरुपयोग करने के आरोप में मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि आस्था फार्मा और हिंद फार्मा से 26.97 करोड़ रुपये की दवाएं खरीदने का दावा पूरी तरह झूठा था। इस एनजीओ को एयरबस एसएएस (Airbus SAS) और यूके की मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए इंटरनेशनल (MBDA International) से भारी मात्रा में विदेशी चंदा मिला था। गृह मंत्रालय के मिली रिपोर्ट में कहा गया कि एनजीओ कोई धर्मार्थ गतिविधि नहीं कर रहा है और उसने व्यक्तिगत लाभ या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए विदेशी फंड का दुरुपयोग किया। एनजीओ की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, पर्यावरण क्षरण, हाशिए पर रहने वाले समुदायों का जीवन सुधारने और लैंगिक असमानताओं जैसे क्षेत्रों में काम करने का दावा करता है।

OM India पर सुनामी राहत फंड के दुरुपयोग का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और तेलंगाना सीआईडी ने दिसंबर 2025 में गुड शेफर्ड स्कूल नेटवर्क चलाने वाले ऑपरेशन मोबिलाइजेशन (OM India) समूह पर विदेशी चंदे और धन के भारी दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया। जांच एजेंसियों के अनुसार, दलित और वंचित बच्चों की शिक्षा के नाम पर लगभग 296 करोड़ रुपये का विदेशी फंड जुटाया गया, जिसका अनधिकृत और संदेहास्पद कार्यों में डायवर्जन किया गया। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए ईडी ने ओएम इंडिया समूह की लगभग 15 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अटैच किया है। जांच एजेंसियों ने मुफ्त वितरण के लिए आने वाली बाइबिल को व्यावसायिक चैनलों के जरिए बेचने और सुनामी राहत फंड के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए हैं।

एनजीओ न्यू होप फाउंडेशन पर विदेशी फंड के दुरुपयोग का आरोप
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोप में तमिलनाडु स्थित ईसाई एनजीओ न्यू होप फाउंडेशन (New Hope Foundation) का विदेशी फंडिंग लाइसेंस यानी पंजीकरण रद्द कर दिया था।गृह मंत्रालय ने नियमों के उल्लंघन और तय मानकों के विरुद्ध विदेशी चंदा लेने के मामले में यह कड़ी कार्रवाई की। इस संगठन ने वर्ष 2017-18 से 2019-20 के दौरान विदेशी स्रोतों से 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त की थी। इस संस्था को मुख्य रूप से अमेरिका और फिनलैंड जैसे देशों के विभिन्न विदेशी संगठनों और डोनर्स से फंडिंग मिलती थी। इस संगठन ने विदेशी अंशदान का उपयोग घोषित उद्देश्यों से असंबंधित भूमि खरीदने में किया। इसके अलावा, बिहार में कोई संचालन न होने के बावजूद बोरवेल परियोजना पर धन खर्च किया।

फॉरेन फंडिंग से धर्मांतरण का खेल
IREF का FCRA लाइसेंस निलंबित, विदेशी फंडिंग्स से धर्मांतरण का आरोप
गृह मंत्रालय ने लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ‘इंडियन रूरल इवेंजेलिकल फेलोशिप’ (IREF) एनजीओ का एफसीआरए (FCRA) लाइसेंस निलंबित कर दिया। संस्था पर विदेशी फंड के दुरुपयोग, नाबालिगों के धर्मांतरण और विदेशी मिशनरियों द्वारा वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप है। संगठन पर विदेशों से मिलने वाले फंड का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब परिवारों के बीच धर्म परिवर्तन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करने का आरोप है। भारत में बिना अनुमति या पर्यटक वीजा पर आए विदेशी मिशनरियों द्वारा प्रचार और बपतिस्मा कराने संबंधी शिकायतें दर्ज की गईं। विदेशी दानदाताओं को आकर्षित करने के लिए स्थानीय बच्चों की तस्वीरों और भ्रामक जानकारियों के इस्तेमाल का भी दावा किया गया।

झारखंड में विदेशी फंड से धर्मांतरण में लिप्त 13 एनजीओ पर कार्रवाई
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2020 में 13 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की विदेशी फंडिंग के लाइसेंस निलंबित कर दिए। उन पर एफसीआरए-2010 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में धर्मांतरण की गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप था। गृह मंत्रालय को खुफिया रिपोर्ट मिली थी कि ये एनजीओ कुछ प्रदेशों और खासकर झारखंड के अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में स्थानीय लोगों का धर्मांतरण कराकर ईसाई बनाने के कार्य में संलिप्त थे। इसके बाद एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस को निलंबित करके इनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया। बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियों ने धर्मांतरण के काम में इन एनजीओ की तरफ से इस्तेमाल किए गए विदेशी फंड के पुराने रिकॉर्ड भी पेश किए थे। इन सभी एनजीओ को नोटिस जारी किए गए। इनमें से एक को छोड़कर बाकी किसी ने तय समय में जवाब नहीं दिया और जिसने जवाब दिया वह संतोषजनक नहीं पाया गया।

विदेशी फंड से धर्मांतरण के आरोप में चार ईसाई संगठनों का FCRA सस्पेंड
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2020 में चार ईसाई संगठनों के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया था। The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, जिन चार ईसाई समूहों का FCRA सस्पेंड किया गया था, उनमें झारखंड का Ecreosoculis North Western Gossner Evangelical, मणिपुर का Evangelical Churches Association (ECA), झारखंड का Northern Evangelical Lutheran Church और मुंबई स्थित New Life Fellowship Association (NLFA) शामिल था। इसके अलावा दो अमेरिकी दानदाता Seventh Day Adventist Church और Baptist Church भी मंत्रालय के शक के घेरे में थे। ये दोनों यूएस बेस्ड हैं।










