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सात साल में बदला जम्मू-कश्मीर: पहले पीढ़ी ने बंदूकों की आवाजें सुनी, अब युवा बुन रहे भविष्य के सपने

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भारत के इतिहास में 5 अगस्त 2019 एक निर्णायक तारीख के रूप में दर्ज है। जिसे आजादी के 70 साल तक असंभव माना जाता था, उसे पीएम मोदी की दूरदर्शिता और अदम्य साहस ने पूरा कर दिखाया। सात साल पहले आज ही के दिन दिन केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया और राज्य का पुनर्गठन किया। पीएम मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में दिए प्रसिद्ध नारे “एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” को साकार करके दिखा दिया। यह राष्ट्रीय एकीकरण और विकास की दिशा में बड़ा कदम साबित हुआ। सात वर्षों बाद आज जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, पर्यटन, सड़क और रेल संपर्क, निवेश, शिक्षा, खेल, महिलाओं के अधिकार और युवाओं की आकांक्षाओं जैसे अनेक क्षेत्रों में आमूलचूल परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। खासकर 2019 से पहले जो पीढ़ी बंदूक की आवाजें सुनकर और पत्थरबाजी देखकर जवां हुई, वो अब भविष्य से सुनहरे सपनों को साकार करने में जुटी है।पत्थरबाजी से पुस्तकालय तक: बदली युवाओं की प्राथमिकता
अनुच्छेद 370 के खात्मे से पहले कश्मीर घाटी की पहचान अक्सर पत्थरबाजी, बंद, इंटरनेट प्रतिबंध, हमले और अस्थिरता से जुड़ी सुर्खियों से बनती थी। खासकर युवाओं की ऐसे मामलों में संलिप्तता चिंतित करती थी। सात साल की अवधि में सबसे अधिक बदलाव भी युवाओं में ही देखने को मिल रहा है। आज बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं, स्टार्टअप, पर्यटन, आईटी, खेल और उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और करियर पहले की तुलना में अधिक प्रमुख हो गए है। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर की आज की पीढ़ी खुद को संघर्ष की बजाय अवसरों से जोड़कर देख रही है। आईआईटी, आईआईएम, एम्स, नए मेडिकल कॉलेज और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार से युवाओं को राज्य से बाहर जाने की मजबूरी कम हुई है। डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों का भी विस्तार हुआ है। फुटबॉल, क्रिकेट, स्कीइंग और विंटर स्पोर्ट्स में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है और नई प्रतिभाओं को अवसर मिल रहे हैं।घाटी आतंकवाद के खौफ से पर्यटकों की खुशियों तक
जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में आतंकवादी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। यहां जनजीवन पहले की तुलना में अधिक सामान्य हुआ है। एक समय श्रीनगर का लाल चौक बंद, प्रदर्शन और तनाव का प्रतीक माना जाता था। आज वही इलाका पर्यटकों, स्थानीय कारोबार और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। कैफे, पुस्तकालय, स्थानीय बाजार और शाम तक चहल-पहल इस बदलाव का प्रतीक माने जा रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद कोविड काल की चुनौती समाप्त होने पर पर्यटन ने तेजी से वापसी की। गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग, डल झील और श्रीनगर में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पर्यटन उद्योग से जुड़े होटल, टैक्सी, हाउसबोट, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को इसका सीधा लाभ मिला है।विकास की नई कहानी: बदलते जम्मू-कश्मीर की तस्वीर
जम्मू-कश्मीर में विकास की गति को नई दिशा देने के तेज प्रयास हो रहे हैं। वंदे भारत ट्रेन के संचालन ने आधुनिक रेल यात्रा का नया अध्याय जोड़ा है। दुनिया के सबसे ऊंचे रेल आर्च ब्रिज के शुरू होने से कश्मीर घाटी की देश के अन्य हिस्सों से रेल कनेक्टिविटी को ऐतिहासिक मजबूती मिली है। श्रीनगर को यूनेस्को ने वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी का दर्जा दिया, जिससे कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान मिली। सोनमर्ग सुरंग के चालू होने से वर्षभर आवागमन आसान हुआ और लंबे समय तक मौसम पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिला है। चिनैनी-नाशरी, जोजिला, जेड-मोड़ और अन्य सुरंग परियोजनाओं के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार जम्मू-कश्मीर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। खेलों के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर ने 2026 के खेलो इंडिया विंटर गेम्स की मेजबानी कर अपनी नई पहचान बनाई, वहीं स्थानीय कला और हस्तशिल्प को भी वैश्विक मंच पर सम्मान मिला। इतना ही नहीं प्रदेश के 18 पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है। जम्मू-कश्मीर आज पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जिसने राज्य की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है।

 

 

डिजिटल कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
एक समय ऐसा भी था जब जम्मू-कश्मीर बंद और नेट प्रतिबंध से जूझता रहता था। आज सात साल में यहां पर ब्रॉडबैंड, मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं का विस्तार होने से सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हुई हैं। युवाओं के लिए ऑनलाइन शिक्षा, ई-कॉमर्स और डिजिटल रोजगार के अवसर बढ़े हैं। नए मेडिकल कॉलेज, एम्स और स्वास्थ्य संस्थानों के विकास से चिकित्सा सुविधाओं में सुधार हुआ है। दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयास भी तेज हुए हैं। घाटी में माहौल अच्छा होने से अब व्यापारियों और किसानों को सेब, केसर, चेरी और अन्य बागवानी उत्पादों के विपणन, कोल्ड स्टोरेज और परिवहन सुविधाओं में सुधार से नए बाजार मिलने लगे हैं। विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद औद्योगिक नीति में बदलाव हुआ और निजी निवेशक आकर्षित हुए हैं। कभी बॉलीवुड की पसंदीदा लोकेशन रहा कश्मीर लंबे समय तक आतंकवाद के कारण फिल्म निर्माण से दूर रहा। अब फिर कई फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग घाटी में हो रही है, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़ा है।भारत के समावेशी विकास की यात्रा का मील का पत्थर
प्रधानमंत्री मोदी ने भी आज अनुच्छेद 370 और 35(ए) के ऐतिहासिक निरसन के सात साल पूरे होने पर 5 अगस्त, 2019 को भारत के समावेशी विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। पिछले सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव देखा है। इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता और खेल के क्षेत्र में नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं और हाशिए वाले समुदायों के सदस्य, अब भारत के संविधान के भरपूर कार्यान्वयन के माध्यम से सशक्त हुए हैं, जो दशकों से अनेक संवैधानिक अधिकारों से वंचित थे।

डॉ. मुखर्जी की प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस वर्ष की जयंती का विशेष महत्व है क्योंकि देश डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता के प्रति डॉ. मुखर्जी की आजीवन प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और उनके द्वारा प्रतिपादित दृष्टिकोण को 5 अगस्त, 2019 को ऐतिहासिक रूप से साकार होते देखा गया। सात साल पहले, इसी दिन, अनुच्छेद 370 और 35(ए) इतिहास बन गए, जिसने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख की यात्रा में एक निर्णायक नए अध्याय की शुरुआत की। दशकों पहले उन्होंने जो कल्पना की थी, वह अब ऐतिहासिक रूप से साकार हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख की प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक नागरिक को बड़े सपने देखने, उन्हें हासिल करने और एक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का अवसर मिलता रहे।

 

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