जंतर-मंतर पर चले आंदोलन का चेहरा बने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके इस समय एक नए और गंभीर विवादों के घेरे में हैं। जो आंदोलन कल तक परीक्षा प्रणालियों में पारदर्शिता और सत्ता की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा था, आज उसकी सुई खुद आंदोलन के प्रणेता और उनके परिवार की वित्तीय पारदर्शिता पर टिक गई है। गुजरात के सूरत के रहने वाले एक आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार में दर्ज कराई एक शिकायत में कहा है कि अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की ‘आय से अधिक संपत्ति’ की जांच कराई जाए। उन्होंने जायज सवाल उठाया है कि एक मामूली सरकारी कर्मचारी अपने बच्चे को अमेरिका में महंगी पढ़ाई कैसे करवा सकता है? इसके साथ ही उन्होंने वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा CJP को दिए गए 1 करोड़ रुपये के लीगल फंड और इस संगठन के कानूनी वजूद पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
दीपके के पिता की ‘आय से अधिक संपत्ति’ पर सवाल
दरअसल, दीपके के पिता भगवानराव दीपके महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में एक जूनियर इंजीनियर (JE) के पद से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जिनका मासिक वेतन सेवाकाल के दौरान लगभग ₹60,000 से ₹65,000 के बीच था। आरटीआई कार्यकर्ता ने इसी बिंदु को आधार बनाकर ‘आय से अधिक संपत्ति'(Disproportionate Assets) की जांच की मांग की है। सवाल यह उठाया गया है कि एक मध्यमवर्गीय सरकारी कर्मचारी की इतनी सीमित आय में किसी बच्चे को अमेरिका के बोस्टन जैसे बेहद महंगे शहर में उच्च शिक्षा दिलाना कैसे संभव हुआ? यह सवाल केवल एक व्यक्ति की व्यक्तिगत संपत्ति का नहीं रह जाता, बल्कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में शुचिता और व्यवस्था सुधार का झंडा लेकर उतरता है, तो उसके खुद का चेहरा और पृष्ठभूमि भी बेदाग होना जनता के भरोसे के लिए अनिवार्य हो जाता है।
#WATCH | Surat, Gujarat: RTI activist Amit Tiwari says, “I have filed a complaint at three different locations. I have complained against CJP at ECI. Regarding the Rs 1 Crore fund by Kapil Sibal, I have complained to CBIC (Central Board of Indirect Taxes and Customs) that 18% GST… pic.twitter.com/TYDy9Iy6cN
— ANI (@ANI) August 2, 2026
अमेरिका में दीपके का प्रवास के खर्च की वास्तविकता
यदि अभिजीत के अमेरिकी प्रवास और वहां के वित्तीय समीकरणों पर बारीक शोध और उपलब्ध आंकड़ों को देखा जाए, तो वे लगभग डेढ़ वर्ष (सितंबर 2024 से जून 2026 की शुरुआत तक) अमेरिका में रहे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित बोस्टन यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने मास्टर ऑफ साइन्स इन पब्लिक रिलेशंस की डिग्री हासिल की। यह 48 क्रेडिट्स (12 कोर्सेज) का तीन सेमेस्टर का एक सघन पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम है, जिसमें पब्लिक इमेज मैनेजमेंट, डिजिटल मीडिया रणनीति और क्राइसिस कम्युनिकेशन जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। अमेरिका के इस महंगे पाठ्यक्रम और बोस्टन जैसे शहर में रहने का कुल खर्च बेहद भारी-भरकम है। आंकड़ों के मुताबिक, बोस्टन यूनिवर्सिटी में प्रति यूनिट फीस दो-तीन हजार डॉलर के करीब है। जिससे कुल ट्यूशन फीस ही लगभग 109,536 डॉलर के करीब बैठती है। इसमें यदि यूनिवर्सिटी फीस, 5,500 से 6,100 डॉलर का छात्र स्वास्थ्य बीमा, और लगभग 33,000 से 42,000 डॉलर का रहने-खाने, परिवहन व किताबों का खर्च जोड़ दिया जाए, तो डेढ़ साल के इस पूरे सफर का कुल वित्तीय बोझ करीब 160,000 तक पहुंच जाता है, जो भारतीय मुद्रा में 1.60 करोड़ से भी ज्यादा है।
सिब्बल की फंडिंग और लीगल डिफेंस फंड पर गहराता संशय
सार्वजनिक जीवन में जब ऐसे तीखे वित्तीय सवाल उठते हैं, तो उनका जवाब भी उसी तत्परता से आना जरूरी होता है। लेकिन इन पर की सीधा-सपाट जवाब आने के बीच ही एक दूसरा विवाद सीजेपी को लेकर उठा है। इस पूरे विवाद का दूसरा और अधिक जटिल पहलू कॉकरोच जनता पार्टी को मिलने वाली फंडिंग और उसके कानूनी दर्जे से जुड़ा है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुए छात्रों की कानूनी मदद के लिए राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा घोषित 1 करोड़ के लीगल डिफेंस फंड को लेकर भी केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) में शिकायत की गई है। सवाल यह उठाया गया है कि क्या इस तरह के फंड जुटाने की गतिविधि पर 18 प्रतिशत का वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होना चाहिए?
पारदर्शिता ही जन-आंदोलनों की असली संजीवनी
लोकतंत्र में असंतोष और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों के मौलिक अधिकार हैं। सीजेपी ने एक सोशल मीडिया मूवमेंट शुरू किया। सोशल एक्सेटिविस्ट सोनम वांगचुक का साथ मिला तो इस आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। लेकिन इतिहास गवाह है कि किसी भी जन-आंदोलन की दीर्घकालिक सफलता और उसकी नैतिक ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि वह वित्तीय मामलों में कितनी पारदर्शी है। जब आप व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करते हैं, तो आपकी अपनी साख भी कांच की तरह साफ होनी चाहिए। अभिजीत दीपके के पिता की संपत्ति की जांच और CJP के फंड्स को लेकर उठे ये सवाल भले ही उनके समर्थकों को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ लग सकते हैं, लेकिन देश की कानूनी और नियामक संस्थाओं के सामने दूध का दूध और पानी का पानी करना अब दीपके की भी जिम्मेदारी है। अन्यथा, वित्तीय विसंगतियों का दाग कॉकरोच जनता पार्टी के मंसूबों को धराशायी करके रख देगा।
IT’S A VICTORY OF DEMOCRACY
direct democracy… straight from the streets.
It’s a victory of peace, patience & persévérance.
Congratulations CJP, Gen Z of the nation and thank you all citizens for shedding fear and the fear of fear and rising up from every corner of the nation.… pic.twitter.com/rSLOfvba2R— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 25, 2026
RTI एक्टिविस्ट ने किन-किन एजेंसियों से की शिकायत?
सूरत के RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी का कहना है कि अगर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) राजनीतिक दल की तरह काम कर रही है और सार्वजनिक तौर पर आर्थिक सहयोग या डोनेशन स्वीकार कर रही है, तो उसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकरण कराना चाहिए। उनका दावा है कि बिना रजिस्ट्रेशन राजनीतिक गतिविधियों और फंड जुटाने की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। सीबीआईसी के साथ ही अमित तिवारी ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में भी एक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें यह जांच करने का आग्रह किया गया है कि CJP जैसी एक गैर-पंजीकृत संस्था आखिर किस कानूनी अधिकार के तहत राजनीतिक या जन-आंदोलनों के नाम पर देश-विदेश से क्राउडफंडिंग या वित्तीय सहायता जुटा रही है?
NEET आंदोलन से शुरू होकर पीएम को गाली देने तक
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि CJP का यह आंदोलन अब अपनी मूल दिशा से भटक चुका है। शुरुआत में यह आंदोलन युवाओं के हित के लिए था, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडे और निजी हमलों के लिए किया जाने लगा। अमित तिवारी ने कहा, “हम अपने बुजुर्गों का सम्मान करते हैं। जब तक आप CJP आंदोलन चला रहे थे और NEET मामले पर विरोध दर्ज करा रहे थे, तब तक सब ठीक था। लेकिन आंदोलन के बीच में आपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के लिए गंदी भाषा का इस्तेमाल शुरू कर दिया। उनके विदेशी नेताओं के साथ रिश्तों पर भी बेहद घटिया टिप्पणी की गई। हमने इन सभी बातों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, क्योंकि यह पूरी तरह गलत है।” अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग, CBIC और महाराष्ट्र सरकार इन शिकायतों पर क्या कदम उठाती हैं और क्या दिपके या CJP की ओर से सभी मामलों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आती है।
कॉकरोचों ने जीत के बाद सोनम को मच्छर की तरह मसला
इससे पहले धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 25 जुलाई को जीत का ऐलान किया। मंच पर मौजूद CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने खुद हीरो बनते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया, लेकिन उनके पूरे संबोधन में एक नाम नहीं आया, जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा ही। वह नाम है सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का। कॉकरोच पार्टी ने जीत के बाद किसी मच्छर की तरह सोनम को मसल दिया। दरअसल, सोनम वांगचुक ही वह शख्स थे, जिनकी 26 दिन की भूख हड़ताल ने शुरुआती धरने को राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन में बदल दिया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जीत के सबसे बड़े मौके पर उनका जिक्र क्यों नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि ऐसा लग रहा है कि सोनम वांगचुक को जीत के जश्न में सीजेपी भूल गई। जंतर-मंतर के मंच पर बोलते हुए अभिजीत दीपके ने लोगों से अपील की कि वे किसी एक इंसान को आंदोलन का चेहरा न बनाएं।
दीपके का सफेद झूठ- ‘मोदी-शाह मुझे बुला रहे हैं’
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनपर भाजपा में शामिल होने का दबाव बना रहे हैं। अब रिपोर्टर ने उनके बीजेपी में जाने की अटकलों पर सवाल किया तो अभिजीत ने सारी बातें बताईं। अभिजीत संगीन आरोप लगाते हुए कहा, “मुझे लगातार धमकी भरे कॉल और मैसेज आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि मैं जल्द से जल्द बीजेपी में शामिल हो जाऊं, वरना मेरे और मेरे परिवार के लिए ठीक नहीं होगा।” अभिजीत दीपके बीजेपी के हाईकमान पर निशाना साधते हुए आगे कहा, “मुझे तो लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे बड़े कद के नेता अपने से काफी छोटे, पोते की उम्र के लड़के को धमकियां दिलवा रहे हैं।” हालांकि अभिजीत दीपके ने साफ किया कि वो भाजपा में जाने वाले नहीं हैं। उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है और उन्हें इन धमकियों से कोई फर्क भी नहीं पड़ता है।
Now Abhijeet dipke claims that he received a threat from the BJP to join the BJP party.
Few words for him … pic.twitter.com/6KUklXsbDI
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) July 30, 2026









