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मोदी राज में चारधाम से अयोध्या तक धार्मिक पर्यटन बन रहा इकोनॉमी की नई ताकत, सरयू के घाटों पर फिर दीपों का रिकॉर्ड

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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से दर्शन-पूजन के लिए यहां आने वाले भक्तों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हो रही है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद केवल दो माह में ही 1 करोड़ 12 लाख श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए हैं। रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले सालों की अपेक्षा तेजी से बढ़ी है। प्रतिदिन मंदिर में औसतन एक से सवा लाख रामभक्त दर्शन करने पहुंच रहे हैं। वहीं अयोध्या में आयोजित होने वाले पर्वों और मंगलवार को यह संख्या और बढ़ जाती है। डबल इंजन सरकार का टारगेट अयोध्या को दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन हब बनाने का है। इसी को ध्यान में रखते हुए अयोध्या में 32 हजार करोड़ से ज्यादा के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चल रहे हैं। यह इसी से समझा जा सकता है कि सीएम योगी के साथ ही खुद पीएम नरेंद्र मोदी भी अयोध्या के विकास कार्यों पर नजर रखे हुए हैं।

धार्मिक पर्यटन के चलते तेजी से बदल रही स्थानीय अर्थव्यवस्था
पीएम मोदी की दूरदर्शी विजन के चलते भारत में धार्मिक पर्यटन अब केवल तीर्थ और आस्था की यात्रा भर नहीं रह गया है। यह देश में रोजगार, होटल-पर्यटन, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार को गति देने वाला एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र बनता जा रहा है। उत्तराखंड के चारधाम से लेकर अयोध्या तक श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इसका स्पष्ट संकेत है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था के साथ ही देश की इकोनॉमी को भी रफ्तार मिल रही है। पीएम मोदी सनातन संस्कृति को संरक्षित करते हुए निरंतर प्राचीन मंदिरों को जीर्णोद्धार कर रहे हैं। देशभर में धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालु-भक्तों का न सिर्फ सफर सुगम और सुरक्षित हो रहा है, बल्कि उन्हें तमाम सुविधाएं भी मिल रही हैं। इससे देशभर में धार्मिक पर्यटन के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। देशभर के धार्मिक स्थलों पर रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।चार धामों में 48 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके
इस साल उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में एक बार फिर पिछले वर्ष की तुलना में अधिक धार्मिक पर्यटक और श्रद्धालु आए हैं। अगस्त तक यात्रा के 125 दिनों में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में 48 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। 2025 में इसी अवधि में यह संख्या 42,82,263 थी। यानी एक वर्ष में समान अवधि के दौरान 5,22,634 अतिरिक्त श्रद्धालु, लगभग 12.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। यह वृद्धि केवल संख्याभर नहीं है। हर अतिरिक्त तीर्थयात्री भगवान के साथ-साथ स्थानीय अर्थ-तंत्र से भी जुड़ता है। यात्रा मार्ग पर परिवहन की मांग, होटल और धर्मशालाओं में कमरे, स्थानीय भोजनालयों में कारोबार, प्रसाद और पूजा सामग्री की बिक्री, घोड़ा-खच्चर और पालकी सेवाओं की मांग तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर मिलते हैं। इसलिए चारधाम की बढ़ती भीड़ को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के विस्तार का संकेत भी है।

 

बद्रीनाथ: यहां पर अगस्त तक 16,78,008 श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर चुके थे। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार समान अवधि में पिछले साल की तुलना में यहां करीब 3.62 लाख अधिक श्रद्धालु पहुंचे। बद्रीनाथ की बढ़ती लोकप्रियता यह बताती है कि बेहतर सड़क संपर्क, यात्रा सुविधाओं और धार्मिक पर्यटन के विस्तार ने हिमालयी तीर्थ को देश के बड़े आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में और मजबूत किया है।

केदारनाथ: बाबा केदार के धाम में 31 अगस्त तक 14,73,325 श्रद्धालु पहुंच चुके थे। 2025 में पूरे यात्रा सत्र में केदारनाथ लगभग 17.6–17.7 लाख यात्रियों के साथ चारों धामों में सबसे अधिक फुटफॉल वाला धाम रहा था। इस वर्ष भी केदारनाथ श्रद्धालुओं की पसंद में सबसे आगे बने रहने के संकेत दे रहा है।

गंगोत्री: मां गंगा के उद्गम क्षेत्र से जुड़े गंगोत्री धाम में इस वर्ष अगस्त तक 7,47,671 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। यह आंकड़ा बताता है कि धार्मिक पर्यटन अब केवल प्रसिद्ध बड़े मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालु हिमालय के अपेक्षाकृत कठिन और दूरस्थ तीर्थों तक भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

यमुनोत्री: इस बार 31 अगस्त तक सबसे अहम उपलब्धि यमुनोत्री के नाम रही। यहां 6,68,163 श्रद्धालु पहुंचे और पहली बार यह संख्या 6.68 लाख के पार गई। 2025 में इसी अवधि तक यमुनोत्री में 6,44,637 श्रद्धालु पहुंचे थे। यानी यहां भी नया रिकॉर्ड बना है। चारधाम की यह कहानी एक बड़े बदलाव की ओर संकेत करती है। पहले धार्मिक पर्यटन को मुख्यतः आध्यात्मिक गतिविधि के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब इसके आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर, हॉस्पिटैलिटी, मोबिलिटी और स्थानीय उद्यमिता का पूरा इकोसिस्टम विकसित हो रहा है।1. बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी से पहुंच आसान
मोदी सरकार के प्रयासों से चारधाम यात्रा में सबसे बड़ा बदलाव कनेक्टिविटी में आया है। ऑल-वेदर रोड परियोजनाओं से कई संवेदनशील मार्गों पर आवागमन की क्षमता और पहुंच बेहतर हुई है। पीएम मोदी ने स्वयं कहा है कि ऑल-वेदर रोड से चारधाम यात्रा की पहुंच आसान हुई है। साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर काम चल रहा है और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और चारधाम मार्ग की पहुंच और आसान हुई है।2. केदारनाथ का पुनर्निर्माण और नई सुविधाएं
2013 की त्रासदी के बाद केदारनाथ का पुनर्निर्माण केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने पुनर्निर्माण की लगातार समीक्षा की और तीर्थ क्षेत्र में सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया। पुनर्निर्माण के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। अब सोनप्रयाग-केदारनाथ 12.9 किमी रोपवे को 4,081 करोड़ रुपए की लागत से विकसित करने की मंजूरी दी गई है। इससे न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि प्रतिदिन यात्रियों की क्षमता में भी और वृद्धि होगी।3. हेलीकॉप्टर कनेक्टिविटी और ऑल वेदर रोड
चारधाम यात्रा अब केवल पारंपरिक सड़क और पैदल यात्रा तक सीमित नहीं रही। 2026 के पहले चरण में ही हेलीकॉप्टर सेवाओं के जरिए 67,064 श्रद्धालुओं ने शटल उड़ानों और अन्य 11,715 श्रद्धालुओं ने चार्टर सेवाओं का उपयोग किया। लगभग 400 हेलीकॉप्टर मूवमेंट प्रतिदिन हुए। इसका विशेष लाभ बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और उन दिव्यांग श्रद्धालुओं को भीलमिलता है जो कठिन पर्वतीय यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं।4. धार्मिक पर्यटन को मिली राष्ट्रीय प्राथमिकता
मोदी सरकार के दौर में धार्मिक पर्यटन को केवल आस्था नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्रोत के रूप में भी देखा गया है। उत्तराखंड में पर्यटन बढ़ने से होटल, ढाबे, टैक्सी, होमस्टे और पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिल रहा है। यह दृष्टिकोण चारधाम के आसपास पर्यटन ढांचे के विस्तार में भी दिखाई देता है।5. पीएम मोदी का चार धाम पर विशेष फोकस
चारधाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ आस्था की लहर और बेहतर होती पहुंच के मिलन का परिणाम है। मोदी सरकार ने स्वयं उत्तराखंड में 2 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के चलने की बात कही है। इससे शीतकालीन धार्मिक पर्यटन भी तेजी आई है। शीतकालीन चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या 2024 के करीब 80 हजार से बढ़कर 2025 में 1.5 लाख से अधिक हो गई। आदि कैलाश और ओम पर्वत जाने वाले श्रद्धालु भी कुछ सौ से बढ़कर 2025 में 36 हजार से अधिक हुए। 2026 में मानसून और भूस्खलन जैसी चुनौतियों के बावजूद यात्रा की रफ्तार बनी रहना बताता है कि चारधाम अब भारत के सबसे बड़े धार्मिक-पर्यटन सर्किटों में और अधिक मजबूत होकर उभर रहा है।अयोध्या: धार्मिक पर्यटन का नया हब बन रही राम नगरी
चारधाम की तरह अयोध्या भी धार्मिक पर्यटन की नई तस्वीर लिख रही है। राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं का प्रवाह लगातार ऊंचा बना हुआ है। जुलाई 2026 में 21 जून से 3 जुलाई के बीच केवल रामलला के दर्शन के लिए 11.54 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। कई दिनों में दैनिक संख्या एक लाख के करीब या उससे ऊपर रही और 28 जून को 1,02,672 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। सावन 2026 में भी अयोध्या में 35 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई। इससे स्पष्ट है कि अयोध्या का धार्मिक पर्यटन अब केवल दीपावली या रामनवमी जैसे विशेष अवसरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे वर्ष चलने वाली आर्थिक गतिविधि का रूप ले चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023 में अयोध्या में लगभग 5.75 करोड़ पर्यटक आए थे, जो 2024 में बढ़कर 16 करोड़ से अधिक हो गए और 2025 के पहले छह महीनों में ही 23 करोड़ से अधिक आगमन दर्ज किया गया। केंद्र सरकार ने अयोध्या के पर्यटन से 2028 तक सालाना लगभग 18,000 करोड़ रुपये का राजस्व सृजित होने का अनुमान भी जताया है।दीपावली पर रामनगरी: दीपों से बड़ा होगा पर्यटन का उत्सव
अब निगाहें 2026 के दसवें दीपोत्सव पर हैं। अयोध्या में इस वर्ष दीपोत्सव 5 से 8 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। दसवें संस्करण को विशेष बनाने के लिए प्रशासन तैयारियों में जुटा है। पिछले वर्ष सरयू के घाटों पर 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया था और 2026 का आयोजन उस भव्यता को और आगे ले जाने की तैयारी के साथ हो रहा है। योगी सरकार में दीपोत्सव केवल दीप जलाने का कार्यक्रम नहीं रह गया है। राम की पैड़ी और सरयू के घाटों की सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम, रामायण आधारित प्रस्तुतियां, लेजर शो, ड्रोन शो और बड़े पैमाने पर पर्यटकों के स्वागत की व्यवस्थाएं इसे धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन के मेगा इवेंट में बदल रही हैं। इस वर्ष दीपोत्सव से पहले दशरथ पथ पर हर 500 मीटर पर 30 सांस्कृतिक प्रतीक-स्तंभ लगाने की योजना भी सामने आई है, जबकि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए फ्लोटिंग रेस्टोरेंट को भी दीपोत्सव से पहले शुरू करने की तैयारी है।

आइए, अब जानते हैं उन धार्मिक स्थलों के बारे में जिनका पीएम मोदी की प्रेरणा और प्रयास से जीर्णोद्धार किया गया है। आज ये अपने नए भव्य और दिव्य स्वरूप में बेहतर सुविधाओं से युक्त हैं…1. काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 दिसंबर, 2021 को 500 साधु संतों और मंत्रोच्चार के साथ काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही काशी को उसके स्तर के मुताबिक बुनियादी ढांचा देने का ऐलान कर दिया। 8 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार का काम शुरु कर दिया और चार साल के रिकॉर्ड समय में यह कॉरिडोर बनकर तैयार हो गया। वाराणसी से लोकसभा सांसद प्रधानमंत्री मोदी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिसके निर्माण में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस भव्य कॉरिडोर में छोटी-बड़ी 23 इमारतें और 27 मंदिर हैं। अब काशी विश्वनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को गलियों और तंग संकरे रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा। गंगा घाट से सीधे कॉ‍रिडोर के रास्‍ते बाबा विश्‍वनाथ के दर्शन किए जा सकते हैं।2. महाकाल लोक कॉरिडोर धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देगी

पीएम मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के नवविस्तारित क्षेत्र ‘श्री महाकाल लोक’ का लोकार्पण किया। महाकाल मंदिर के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान का उद्देश्य महाकाल मंदिर को पुरानी पहचान वापस दिलाना है। महाकाल लोक कॉरिडोर काफी भव्य है और अब ये मंदिर के क्षेत्र को 10 गुना तक बढ़ा देगा। कॉरिडोर में भगवान शिव से जुड़ी कई मूर्तियां लगाई गई हैं, जो अलग अलग कहानी बताती है और भक्तों को भगवान शिव से जोड़ती हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर 300 मीटर में बना है, जबकि इसकी लंबाई 900 मीटर है। इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से भव्य माना जा रहा है। इस पर 856 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जितना भव्य यह कॉरिडोर बना है उससे पता चलता है कि आने वाले दिनों में यह धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देगी। इसमें त्रिशूल के डिजाइन के 108 स्तंभ हैं। साथ ही शिव पुराण की कहानियों को दर्शाने वाले 50 भित्ति चित्र बनाए गए हैं। उज्जैन में बना कॉरिडोर काशी विश्वनाथ मंदिर से आकार में करीब 4 गुना बड़ा है। अभी महाकाल कॉरिडोर के पहले फेज का उद्घाटन किया गया है, जिसकी लागत 350 करोड़ रुपये है। दूसरे फेज की लागत 450 करोड़ रुपये होगी। 3. सोमनाथ मंदिर परिसर का विकास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 अगस्त 2021 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर के पुननिर्माण के लिए विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में सोमनाथ समुद्र दर्शन पथ, सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र और पुराने (जूना) सोमनाथ का पुनर्निर्मित मंदिर परिसर शामिल हैं। इससे यहां का पर्यटन बढ़ा है और लोगों में समृद्धि आई है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्वती मंदिर की आधारशिला भी रखी। इसका निर्माण कुल 30 करोड़ रुपये के परिव्यय से किया जाना प्रस्तावित है। इसमें सोमपुरा सलात शैली में मंदिर निर्माण, गर्भ गृह और नृत्य मंडप का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत मंदिर के पीछे समुद्र तट पर 49 करोड़ रुपये की लागत से बना एक किलोमीटर लम्‍बा समुद्र दर्शन मार्ग, पुरानी कलाकृतियों से युक्‍त नवनिर्मित सभागार और मुख्‍य मंदिर के सामने बने नवीनीकृत अहिल्‍याबाई होल्‍कर मंदिर यानी पुराना सोमनाथ मंदिर को भी शामिल किया गया है।

4. अयोध्या में राम मंदिर में अगले साल प्राण-प्रतिष्ठा करेंगे पीएम मोदी 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को विधि-विधान के साथ अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की नींव रखी थी। अब अगले साल 22 जनवरी को मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेंगे।  पीएम मोदी के विजन से आज राम मंदिर के रूप में भारत के गौरव का प्रतिबिंब खड़ा हुआ है। यह केवल भौगोलिक एवं वैचारिक निर्माण नहीं है। यह हमारे अतीत से जोड़ने का प्रकल्प है। हमने अतीत के खंडहरों पर आधुनिक गौरव का निर्माण किया है।अयोध्या में भव्य राम मंदिर के साथ विकास की योजनाएं परवान चढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अंतरराष्ट्रीय स्तर का बस स्टॉप, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, राम की पैड़ी, भजन संध्या स्थल जैसी विकास की योजनाएं लगातार चल रही है। अयोध्या में चौमुखी विकास की गंगा बह रही है। जिसको लेकर आम जनमानस उत्साहित है। धर्म नगरी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी कई विशेष सौगात है जैसे कि चौड़े मार्ग यात्री सुविधा युक्त यात्रियों की मूलभूत सुविधाएं, राम नगरी की अपनी अमिट पहचान इन सब को विकसित और सुरक्षित करने का कार्य सरकार कर रही है।5. पावागढ़ के कालिका मंदिर में 500 साल बाद शिखर पर फहराया ध्वज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिन्दू स्वाभिमान के प्रतीक है। उनका शासनकाल हिन्दू धर्म के पुनर्जागरण का काल है। 18 जून, 2022 को हर हिन्दू गर्वान्वित महसूस किया, जब 500 साल बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के पावागढ़ पहाड़ी पर स्थित महाकाली मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उसके शिखर पर पताका फहराया। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से ही 11वीं सदी में बने इस मंदिर का पुनर्विकास योजना के तहत कायाकल्प किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाकाली मंदिर के ऊपर पांच सदियों तक, यहां तक कि आजादी के 75 वर्षों के दौरान भी पताका नहीं फहराई गई थी। लाखों भक्तों का सपना आज उस समय पूरा हो गया जब मंदिर प्राचीन काल की तरह अपने पूरे वैभव के साथ खड़ा है। करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से महाकाली मंदिर का पुनर्विकास किया गया है, जिसमें पहाड़ी पर स्थित मंदिर की सीढ़ियों का चौड़ीकरण और आसपास के इलाके का सौंदर्यीकरण शामिल है। नया मंदिर परिसर तीन स्तरों में बना है और 30,000 वर्ग फुट दायरे में फैला है। 6. मोदी सरकार ने कश्मीर में किया मंदिरों का पुनरोद्दार

कश्मीर में 05 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद मोदी सरकार ने श्रीनगर में कई पुराने मंदिरों का पुनर्निर्माण शुरु किया। मंदिरविहीन हो चुकी घाटी में गुलमर्ग का शिव मंदिर ऐसा पहला मंदिर है, जिसे 1 जून, 2021 को जीर्णोद्धार के बाद जनता के लिए खोल दिया गया। इस दौरान सेना की गुलमर्ग बटालियन द्वारा एक भव्य उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया था। भारतीय सेना ने स्थानीय लोगों की मदद से गुलमर्ग के इस शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य किया है। सेना के जवानों ने मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों को भी नया रूप दिया है। शिव मंदिर को व्यापक जीर्णोद्धार की आवश्यकता थी, क्योंकि लंबे समय से इस मंदिर में कोई जीर्णोद्धार कार्य नहीं हुआ था। गुलमर्ग में आने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों की एक बड़ी संख्या ने मंदिर को उसकी मूल स्थिति में देखने की इच्छा व्यक्त की थी।

7. पीएम मोदी की पहल से चार धाम परियोजना का विकास

मोदी सरकार ने देवभूमि उत्तराखंड के लिए चार धाम परियोजना शुरू की है। केदारनाथ बद्रीनाथ की यमुनोत्री और गंगोत्री के चारधाम परियोजना- रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाली 900 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के चारों धामों के लिए हर मौसम में सुलभ और सुविधाजनक रास्ता देना है। चारधाम परियोजना एक तरह से ऑल वेदर रोड परियोजना है, जो उत्तराखंड में केवल चार धामों को जोड़ने की परियोजना भर नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। इसके जरिए उत्तराखंड के गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा तो मिलेगा ही, साथ ही पड़ोसी चालबाज देश चीन को चुनौती देने के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है। इसके अलावा ऋषिकेश को रेल मार्ग से कर्णप्रयाग से जोड़ने का काम चल रहा है। ये रेलवे लाइन 2025 से शुरू हो जाएगी।केदारनाथ और बद्रीनाथ को दिव्य-भव्य बनाने के लिए 3400 करोड़ दिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2022 को केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की और विकास कार्यों का जायजा लिया। केदारनाथ में पीएम मोदी ने आदिगुरु शंकराचार्य समाधि स्थल के दर्शन किए। उन्होंने केदारनाथ, बद्रीनाथ व माणा में 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास किया। इनमें केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे और चीन सीमा से लगे माणा क्षेत्र में दो राजमार्गों से संबंधित योजनाएं शामिल हैं। बाबा केदार के भक्त प्रधानमंत्री ने सबसे पहले केदारनाथ पहुंचकर लगभग 946 करोड़ की लागत से बनने वाले अपने ड्रीम प्रोजेक्ट 13 किमी लंबे सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे का शिलान्यास किया। साथ ही पुनर्निर्माण के तहत हो रहे कार्यों का जायजा लिया।7. हिंदू संत रामानुजाचार्य के सम्मान में स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2022 को हैदराबाद में 11वीं सदी के हिंदू संत रामानुजाचार्य के सम्मान में बनी 216 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी का उद्घाटन किया था। इस प्रतिमा में 120 किलो सोने का इस्तेमाल किया गया है। जिसकी लागत करीब 400 करोड़ रूपए है। यह 45 एकड़ जमीन पर बना है। मंदिर परिसर में करीब 25 करोड़ की लागत से म्यूजिकल फाउंटेन का निर्माण कराया गया है।8. संत तुकाराम शिला मंदिर का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 जून 2022 को संत तुकाराम शिला मंदिर का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने विकास योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा, ‘संत ज्ञानेश्वर पालखी मार्ग का निर्माण 5 चरणों में होगा और संत तुकाराम पालखी मार्ग का निर्माण 3 चरणों में होगा। 350 किलोमीटर से ज्यादा बड़े हाइवे बनेंगे, इसमें 11000 करोड़ का खर्च होगा। संत तुकाराम एक वारकरी संत और कवि थे। उन्हें अभंग भक्ति कविता और कीर्तन के माध्यम से समुदाय-उन्मुख पूजा के लिए जाना जाता है। यह मंदिर 36 चोटियों के साथ पत्थर की चिनाई से बनाया गया है। इसमें संत तुकाराम की एक मूर्ति भी स्थापित की गई है।9. सरकार ने प्रसाद योजना का किया विस्तार, 12 और धार्मिक स्थल शामिल

सरकार ने धार्मिक स्थलों का विकास करने के शुरू की गई प्रसाद योजना का विस्तार किया है। फिलहाल इस योजना से 12 धार्मिक स्थलों को जोड़ा गया है। इनमें कामाख्या (असम), अमरावती (आंध्र प्रदेश), द्वारका (गुजरात), गया (बिहार), अमृतसर (पंजाब), अजमेर (राजस्थान), पुरी (ओडिशा), केदारनाथ (उत्तराखंड), कांचीपुरम (तमिलनाडु), वेलनकन्नी (तमिलनाडु), वाराणसी (उत्तर प्रदेश), मथुरा (उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। इन 12 स्थलों के अलावा प्रसाद योजना का दायरा और बढ़ा दिया गया है.योजना के तहत स्थलों की संख्या बढ़कर लगभग 41 हो गयी है। बौद्ध तीर्थ यात्रा के लिए कुशीनगर के अलावा झारखंड स्थित देवघर समेत कई तीर्थ स्थलों का प्रसाद योजना के तहत बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कराया जा रहा है। दूसरी तरफ रामायण सर्किट और बुद्ध सर्किट को भी जोड़ने का काम चल रहा है। देश में कोरोना की रफ्तार में कमी होने के बाद घरेलू पर्यटन में बढोतरी हुई है। पर्यटन मंत्रालय की माने तो दुर्गम इलाकों में कनेक्टिविटी में सुधार तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई विकास कार्य तेज कर दिया गया है, जिससे आने वाले यात्रियों को असुविधा न हो। बेहतर सुविधाएं मिलने से जहां पर्यटकों को सहुलियत होगी, वहीं रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे। स्थानीय सरकार को इससे कमाई भी बढ़ेगी।

10. गुरु पर्व पर पीएम मोदी का सिख समुदाय को तोहफा, करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोला

मोदी सरकार ने कोरोना महामारी के कारण मार्च 2020 से बंद करतारपुर साहिब कॉरिडोर को बुधवार (17 नवंबर, 2021) से फिर से खोलने की घोषणा की। यह फैसला श्री गुरु नानक देव जी और सिख समुदाय के प्रति मोदी सरकार की अपार श्रद्धा को दर्शाता है। इससे बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालुओं को फायदा होगा। इस फैसले से जहां सिख श्रद्धालु काफी खुश है, वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने मोदी सरकार के इस फैसले की सराहना और स्वागत किया।

 

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