कांग्रेस खुद को महिला अधिकार, समानता और सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी पैरोकार होने का झूठा दावा करती रहती है। राहुल गांधी का ‘Smash the Patriarchy’ नैरेटिव भी इसी को लेकर है। कांग्रेस कहती है कि महिलाओं को पितृसत्तात्मक सोच से मुक्त होकर अपनी पहचान बनानी चाहिए। लेकिन महिलाओं की स्वतंत्रता, बराबरी और नेतृत्व की बात करने वाली कांग्रेस का असली चरित्र बिल्कुल इसके उलट है। दरअसल अपनी ही कसौटी पर कांग्रेस पूरी तरह से फ्लॉप है।
क्या कांग्रेस पार्टी में महिलाओं को निर्णय लेने और सत्ता के शीर्ष स्तरों पर पर्याप्त जगह मिलती है? क्या टिकट वितरण में महिला नेताओं को बराबर अवसर मिलते हैं? क्या कांग्रेस शासित सरकारों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी उसके नारों से मेल खाती है? और जब पार्टी के अपने नेताओं पर महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बयान या व्यवहार के आरोप लगे, तब पार्टी के बड़े नेताओं ने चुप्पी क्यों साध ली?
कांग्रेस को लेकर ऐसे कई उदाहरण हैं। जो महिला सशक्तीकरण के उसके दावों पर सवाल उठाते हैं। कई मामले तो ऐसे हैं, जहां पार्टी के नेताओं ने कार्यकर्ताओं को अपमानित किया। वहीं कई महिला नेताओं ने खुद पार्टी के भीतर भेदभाव और Patriarchy के आरोप लगाए। सत्ता और कांग्रेस संगठन में महिलाओं की हिस्सेदारी पर भी सवाल उठते रहे हैं। महिला अधिकार से लेकर महिला नेतृत्व तक कांग्रेस का रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है। लेकिन नारों, दावा और हकीकत के बीच कांग्रेस के इस झूठे नैरेटिव की भी हवा निकल चुकी है।
कांग्रेस ने महिला मंत्री को कैबिनेट से बर्खास्त किया

तेलंगाना का कोंडा सुरेखा मामला कांग्रेस के झूठे ‘Smash the Patriarchy’ नैरेटिव पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। कांग्रेस ने महिला मंत्री को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया। सुरेखा को अपना पक्ष रखने तक का अवसर तक नहीं मिला। सुरेखा ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर ‘ब्लैकमेल की राजनीति’ का आरोप लगाया। सुरेखा का सवाल सीधा है, जब महिलाओं को अपनी बात रखने की आजादी का दावा किया जाता है, तो उन्हें अपनी बात रखने का अवसर क्यों नहीं मिला? उनका कहना है कि बेटी की स्वतंत्र राय के लिए मां को दंडित करना कैसे सही हो सकता है।
आज ‘Smash the Patriarchy’ नैरेटिव और तेलंगाना की राजनीतिक हकीकत आमने-सामने खड़ी है। एक तरफ महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी स्वतंत्र आवाज की बात हो रही है, तो दूसरी ओर महिला नेता को बाहर कर दिया है। कोंडा सुरेखा पिछड़े वर्ग से आती हैं और उन्हें अपमानित करके कांग्रेस ने अपनी औकात बता दी है।
कांग्रेस का नैरेटिव केवल भाषणों और सोशल मीडिया अभियानों तक सीमित है। अपनी पार्टी के भीतर महिलाओं की असहमति, स्वतंत्र राय और राजनीतिक अधिकारों के सम्मान की उसे कोई चिंता नहीं है। सुरेखा मामले में कांग्रेस की विचारधारा और उसके राजनीतिक व्यवहार के बीच अंतर साफ नजर आ रहा है।
कांग्रेस में ‘male chauvinistic mentality’ का शिकार बनीं राधिका खेड़ा
साधिका खेरा ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। रायपुर के राजीव भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय से राधिका का एक भावुक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वे अपने साथ हुए अनादर की बात करते हुए रोती हुई नजर आ रही थीं। उन्होंने साफ कहा था कि पार्टी के कुछ नेता Male Chauvinistic Mentality से पीड़ित हैं और महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं करते।
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष का उत्पीड़न: अंगकिता दत्ता पार्टी से निष्कासित

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में असम प्रदेश युवा कांग्रेस की अध्यक्ष अंगकिता दत्ता को छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई अंगकिता द्वारा भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी और सचिव प्रभारी वर्धन यादव पर उत्पीड़न एवं मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाने के बाद की गई।
प्रताड़ना और भेदभाव के गंभीर आरोप
अंगकिता दत्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीनिवास बीवी लंबे समय से उनके साथ लैंगिक आधार पर भेदभाव कर रहे थे और उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहे थे। पूर्व कांग्रेस मंत्री अंजन दत्ता की बेटी अंगकिता ने कहा कि उनका परिवार चार पीढ़ियों से पार्टी से जुड़ा रहा है। उन्होंने बूथ स्तर से लेकर आंतरिक चुनावों तक में सक्रिय भूमिका निभाई है, लेकिन इसके बावजूद संगठन के भीतर उनकी शिकायतों को अनदेखा किया गया।
शीर्ष नेतृत्व से सवाल और पुलिस शिकायत
अंगकिता का कहना था कि महीनों तक शिकायत करने के बावजूद श्रीनिवास बीवी के खिलाफ कोई जांच समिति गठित नहीं की गई। मामला तब और गंभीर हो गया जब अंगकिता ने गुवाहाटी के दिसपुर पुलिस स्टेशन में श्रीनिवास बीवी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की घटना को पार्टी अनुशासन का उल्लंघन मानते हुए कांग्रेस ने अंगकिता दत्ता को छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
‘Smash the Patriarchy’ और तारा यादव का उत्पीड़न

प्रियंका चतुर्वेदी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने की बदसलूकी

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी की तेजतर्रार और मुखर राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी को अपनी ही पार्टी के रवैये से गहरी चोट पहुंची। राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने वाली प्रियंका उत्तर प्रदेश के मथुरा के दौरे पर थीं, जहां वे राफेल डील के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने पहुंची थीं। हालांकि, किसी ने यह नहीं सोचा था कि अपनी ही पार्टी का बचाव करने निकलीं प्रवक्ता को वहां अपने ही कार्यकर्ताओं के हाथों अभद्रता और अमर्यादित व्यवहार का सामना करना पड़ेगा।
अपने साथ हुए इस अन्याय और पार्टी के दोहरे रवैये से आहत होकर प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर अपने मन का दर्द और निराशा साझा की। उन्होंने बेहद भावुक और कड़े शब्दों में लिखा कि यह अत्यंत दुखद है कि पार्टी में उन लोगों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है जो मारपीट और गुंडागर्दी करते हैं, जबकि जो कार्यकर्ता पार्टी के लिए अपना खून-पसीना बहाते हैं, उनकी अनदेखी कर दी जाती है।
केरल कांग्रेस में ‘कास्टिंग काउच’ का आरोप
केरल कांग्रेस की वरिष्ठ महिला नेता सिमी रोजबेल जॉन ने एक इंटरव्यू के दौरान पार्टी के भीतर महिलाओं के उत्पीड़न को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह फिल्म इंडस्ट्री में ‘कास्टिंग काउच’ की बातें सामने आती हैं, वैसी ही स्थिति केरल कांग्रेस के अंदर भी बनी हुई है। महिला कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने और पद पाने के लिए शोषणकारी समझौते करने पर मजबूर किया जाता है।
Patriarchy को चुनौती देने के लिए जरूरी है पीड़ित की बात सुनना और सुरक्षित माहौल तैयार करना। लेकिन इस मामले में, निष्पक्ष आंतरिक समिति का गठन कर आरोपों की जांच कराने के बजाय, सिमी रोजबेल जॉन को कुछ ही घंटों के भीतर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। जब अधिकार मांगने वाली महिला की आवाज़ को ही दबा दिया जाए, तो ‘Smash the Patriarchy’ का नारा केवल भाषणों तक सीमित रह जाता है।
कांग्रेस की महिला नेताओं की सरेआम बेइज्जती

कांग्रेस नेता की महिलाओं के प्रति घटिया सोच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। 5 अगस्त 2024 की रात का यह वीडियो राजस्थान विधानसभा के भीतर का है। इस वीडियो में दिख रहा है कि कुछ कांग्रेस विधायक बैठे हुए हैं और एक विधायक कह रहा है कि जिसको भी आगे बढ़ना है वो पैर दबाएगी। नारीशक्ति के प्रति कांग्रेस के नेताओं की यह सोच शर्मनाक और निंदनीय है। लगता है लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ नैतिक मूल्य भी कांग्रेसी विधायक भूल गए हैं।
महिला नेता को कहा- इसे जूते मारकर बाहर निकालो
भोपाल में महिला कांग्रेस कमेटी की एक बैठक की। बैठक में पार्टी नेता मधु शर्मा ने जब पूछा कि हमने पिछले 40 वर्षों से विभिन्न पदों पर काम किया है फिर महासचिवों की सूची से हमारा नाम गायब क्यों है? हम लोगों की नियुक्तियां फर्जी हैं क्या? इस पर भड़कते हुए अलका लांबा ने कहा कि इन्हें जूते मारकर बाहर निकालिए। इस पर मधु शर्मा ने कहा कि एक बाप की बेटी हैं तो जूता मारकर दिखाइए। तो अलका लांबा ने कहा कि निकालिए इन्हें बाहर। पार्टी से भी बाहर कीजिए ऐसे लोगों को।

अर्चना गौतम को धक्के मार कर कांग्रेस से निकाला
बिग बॉस फेम अर्चना गौतम को कांग्रेस ने धक्के मार कर पार्टी से निकाल गिया था। उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। इसके लिए अनुशासनहीनता और कार्यकर्ताओं की शिकायतों का बहाना बनाया गया।

अर्चना गौतम को 2022 के विधानसभा चुनाव में हस्तिनापुर से कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया था।

बिग बॉस की लोकप्रियता से राजनीति में आईं अर्चना गौतम से कांग्रेस ने बीच रास्ते में ही किनारा कर लिया।
महिला कार्यकर्ता का कांग्रेस नेता पर यौन उत्पीड़न का आरोप
छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक महिला कार्यकर्ता ने कांग्रेस नेता जयंत साहू पर बड़ा आरोप लगाया। महिला ने जयंत साहू पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। बेमेतरा इलाके की रहने वाली महिला कार्यकर्ता ने इसकी लिखित शिकायत रायपुर एसपी से की। कांग्रेस नेता जयंत साहू धरसींवा से कांग्रेस पार्टी से पूर्व जनपद सदस्य रह चुके हैं। धरसींवा में ही वह काफी सक्रिय है। जयंत साहू पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कथित रूप से महिला को उच्च पद पर पहुंचाने का लालच दिया। महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि जयंत मेरे साथ फिजिकल रिलेशन बनाना चाहता था। इतना ही नहीं महिला ने एसपी को शिकायत करते हुए यह भी कहा कि जयंत ने मुझसे ब्लैकमेल कर 5 लाख रुपए लिए हैं। फिलहाल मामला रायपुर पुलिस के पास है। पुलिस दोनों ही मामलों की जांच करने में जुट गई है।

केरल में कांग्रेस की महिला नेता का यौन शोषण

जुलाई 2022 में केरल के पलक्कड़ में यूथ कांग्रेस के तीन दिवसीय ‘युवा चिंतन शिविर’ के दौरान एक महिला युवा कांग्रेस नेता ने संगठन के एक कार्यकारी सदस्य पर दुर्व्यवहार और यौन शोषण की कोशिश का आरोप लगाया था। महिला नेता ने यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव को पत्र लिखकर कहा कि राज्य कार्यकारी सदस्य विवेक नायर ने कथित तौर पर शराब के नशे में उसके साथ यौन दुर्व्यवहार करने की कोशिश की। उस नेता को पार्टी से तो निकाल दिया गया। लेकिन कांग्रेस ने इस घटना से साफ इनकार कर दिया।
सवाल है कि क्या कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता बिना डर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है? क्या उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है? और क्या उन्हें कांग्रेस पार्टी में इंसाफ मिलता है ?
इमरती देवी अब जलेबी बन गई हैं- सज्जन सिंह वर्मा
इसके पहले मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी नेता सज्जन सिंह ने एक विवादित बयान दिया। सज्जन सिंह ने पूर्व मंत्री इमरती देवी पर निशाना साधते हुए कहा कि इमरती देवी अब ‘जलेबी’ बन गई हैं।

दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार (1998-2003) में कैबिनेट मंत्री रहे सज्जन सिंह के इस बयान से पार्टी की काफी फजीहत हुई।
कमलनाथ ने इमरती देवी को कहा आइटम
इसके पहले राहुल गांधी के करीबी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी की महिला नेता इमरती के लिए जिस तरह के शब्दों का प्रयोग किया है वह पार्टी की महिलाओं के प्रति सोच को उजागर करती है। मध्य प्रदेश के डबरा में कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राजे के लिए प्रचार करने पहुंचे कमलनाथ ने कहा, ‘सुरेश राजे जी हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे साधे हैं। यह उसके जैसे नहीं है, क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूं आप तो उसको मुझसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं, आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ‘यह क्या आइटम है’।
अजय सिंह ने पारुल साहू को कहा- टिकाऊ माल
मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस के बड़े नेता अजय सिंह ने अपनी पार्टी की उम्मीदवार पारुल साहु को टिकाऊ माल कहा।
कांग्रेस महिलाओं को काम करने नहीं दे रही है- खुशबू सुंदर

कांग्रेसी महिला कार्यकर्ताओं की सुरक्षा-सम्मान का सवाल

महिला कार्यकर्ताओं से सिर्फ पोस्टर-बैनर लगवाती है कांग्रेस
मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के दौरान भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित कई जिलों में कांग्रेस की स्थानीय महिला कार्यकर्ताओं ने पार्टी दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया था। महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं का आरोप था कि रैलियों में भीड़ जुटाने और पोस्टर लगाने का काम तो महिलाओं से कराया जाता है, लेकिन जब टिकट बांटने की बारी आती है, तो पुरुष नेता अपनी पत्नियों, बेटियों या बड़े नेताओं की महिला रिश्तेदारों को टिकट दे देते हैं। वर्षों से धरातल पर काम करने वाली समर्पित महिला कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है।
दिग्विजय सिंह ने अपनी महिला सांसद को कहा ‘100 टंच माल’

दिग्विजय सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मीनाक्षी नटराजन को लेकर ‘100 टंच माल’ जैसी टिप्पणी की थी। उस वक्त इस बयान पर जमकर विवाद हुआ था और दिग्विजय सिंह को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। बाद में उन्होंने सफाई देते हुए इसे नटराजन की राजनीतिक क्षमता की तारीफ बताया था। यह सिर्फ एक बयान भर नहीं था। यह कांग्रेस की राजनीति में महिलाओं के सम्मान, भाषा और नेतृत्व को लेकर उसके दावों पर भी सवाल खड़े करता है। खासकर तब, जब कांग्रेस लगातार महिला अधिकार और लैंगिक समानता की राजनीति का दावा करती है।
कर्नाटक में भी महिला मंत्री बनाने में फेल कांग्रेस

कर्नाटक में कांग्रेस की राजनीति की इस तस्वीर को देखिए। यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। जिस पार्टी की सरकार ‘गृह लक्ष्मी’ जैसी योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का दावा करती है, उसी कर्नाटक सरकार में महिला मंत्रियों की संख्या ‘Zero’ है।
यह कांग्रेस के ‘Smash the Patriarchy’ के नैरेटिव और उसकी करनी में अंतर ही तो है। साफ है कि जहां-जहां कांग्रेस की सरकरें हैं, वहां को महिलाओं को सिर्फ अपना वोटबैंक समझती है।
महिला सशक्तीकरण का मतलब उन्हें सत्ता, संगठन और नीति-निर्माण में प्रभावी भागीदार बनाना है, लेकिन कांग्रेस कहती कुछ और है , करती कुछ और है। साफ है कि ‘Smash the Patriarchy’ जैसे कांग्रेस के नैरेटिव केवल वोटबैंक की राजनीति के लिए हैं। कांग्रेस पार्टी को महिलाओं के मुद्दों से कुछ लेना देना नहीं है। सवाल है कि आखिर कांग्रेस पितृसत्ता को खत्म करने की शुरुआत अपनी पार्टी से क्यों करती है। क्योंकि अगर देश की माताओं-बहनों को सत्ता के शीर्ष निर्णयों में पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी तो ‘सशक्तीकरण’ का उसका दावा अधूरा ही रहेगा।कांग्रेस के सामने असली चुनौती यही है कि ‘Smash the Patriarchy’ पार्टी और जिन-जिन राज्यों में उसकी सरकारें हैं, वहां कब दिखाई देगा।
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की एक भी महिला मंंत्री नहीं

कांग्रेस ‘Smash the Patriarchy’ जैसे नैरेटिव से युवाओं को भरमाने की भरपूर कोशिश कर रही है। लेकिन उसका यह प्रयास खोखला है। महिला सशक्तिकरण पर भाषण खूब, लेकिन सत्ता में हिस्सेदारी शून्य! हिमाचल कांग्रेस कैबिनेट में 11 मंत्री, लेकिन एक भी महिला को जगह नहीं मिली। जो कांग्रेस महिलाओं को बराबरी और प्रतिनिधित्व का पाठ पढ़ाती है, उसके अपने सत्ता ढांचे में महिलाओं के लिए जगह कहां है? यही है कांग्रेस के ‘महिला सशक्तिकरण’ का असली सच! हिमाचल प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मंत्रिमंडल में कोई भी महिला शामिल नहीं है। यह कांग्रेस और राहुल गांधी के महिला विरोधी चेहरे को सामने लाने वाला है।
कांग्रेस वाले राज्यों में महिला मंत्रियों के शर्मनाक आंकड़े
क्या ‘Smash the Patriarchy’ सिर्फ कांग्रेस का राजनीतिक नारा है। क्योंकि इसे कुचलने वालों में कांग्रेस पार्टी ही सबसे आगे है। कांग्रेस पार्टी के शासन वाले राज्यों में महिला मंत्रियों की संख्या न के बराबर है। कांग्रेस की चार राज्यों में सरकार है। लेकिन सिर्फ 3 मंत्री पद पर महिलाएं हैं। हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में एक भी महिला मंत्री नहीं है। केरल में दो महिला मंत्री हैं, जबकि तेलंगाना में दो में से एक मंत्री को हटा दिया गया। इस तरह चार राज्यों में अब सिर्फ तीन महिला मंत्री रह गई हैं। यह महिलाओं के साथ कांग्रेस के सौतेले रवैये का प्रमाण है।
3 सीएम, 18 मंत्री और 8 राज्यपाल के साथ बीजेपी बहुत आगे
कांग्रेस के नारों को NDA के राजनीतिक रिकॉर्ड के आईने में देखा जाता है, तो बहस सिर्फ नारों की नहीं, बल्कि सत्ता में महिलाओं की वास्तविक हिस्सेदारी की बन जाती है।NDA के शासन वाले राज्यों में महिलाओं को मुख्यमंत्री, मंत्री और राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बड़ी संख्या में जिम्मेदारी मिली है।
महिलाओं को निर्णय लेने वाली कुर्सियों तक पहुंचाना बहुत अहम है। आंकड़ों में देखें तो 3 सीएम, 18 मंत्री और 8 राज्यपाल और महिलाओं के मामले में UPA से BJP बहुत आगे निकल चुकी है। कांग्रेस के लिए चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि ‘Smash the Patriarchy’ जैसे अभियान उसके राजनीतिक संदेश का हिस्सा हैं। ऐसे में उसके सामने अपने ही नारे को अपने संगठन और शासन के रिकॉर्ड से साबित करने की जिम्मेदारी भी आती है। कांग्रेस को बताना होगा कि पितृसत्ता तोड़ने का उसका नारा सत्ता के ढांचे में महिलाओं की हिस्सेदारी और पार्टी के भीतर सम्मान में कितना बदला है?












