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बड़ा खुलासा, राहुल गांधी के इशारे पर NSUI ने रची पथराव की साजिश, निशु आजाद ने की नौटंकी

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यूट्यूबर निशु आजाद और उसके पिता संजय आजाद को लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। एक बार फिर निशु आजाद का झूठ पकड़ा गया है। निशु आजाद ने सोशल मीडिया पर एक 30 सेकेंड का वीडियो जारी कर दवा किया था कि 5 सितंबर की रात कुछ लोगों ने उसके घर पर दो बार पथराव किया। पत्थर बालकनी और रसोई की खिड़की तक पहुंचे। रात में ही इसकी सूचना पुलिस को दी गई। लेकिन इस मामले में हैरान करने वाली सच्चाई सामने आ रही है। जहां मौके पर पड़े पत्थरों की जांच के बाद पुलिस ने मामले को फर्जी पाया, वहीं पड़ोसियों ने राहुल गांधी के इशारे पर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई द्वारा रची गई पथराव की साजिश का पर्दाफाश कर दिया है।

निशु आजाद का दावा- घर पर हुआ पथराव 
निशु आजाद ने शनिवार रात कुछ वीडियो पोस्ट करके अपनी सुरक्षा को खतरा बताया। निशु ने साहिबाबाद के शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र में स्थित अपने घर की बालकनी में फैले पत्थर दिखाते हुए कहा कि गैलरी और किचन में इन्हें फेंका गया है। निशु कहती है, ‘ऐसी आवाजें आ रही हैं, जैसे कोई चढ़ रहा हो। मैं बहुत डर गई हूं। मैं पहले इतना नहीं डरी थी। पता नहीं आगे क्या होगा। हमें कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा, हमें सिक्यॉरिटी दी जाएगी या फिर हमें मार दिया जाएगा। यदि हमें कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार स्वतंत्र और उसके साथी होंगे।’

बीजेपी और आरएसएस समर्थकों पर धमकी देने का आरोप
निशु आजाद ने एक और वीडियो में कहा, “अब तो हद ही हो गई है। मुझे धमकी देने के साथ-साथ मेरे घर के सामने खड़े होकर, चिल्ला-चिल्लाकर मुझे देखकर उकसाने की कोशिश कर रहे हैं और आपस में बात करते हुए एक-दूसरे से कह रहे हैं, चिल्लाकर की हां हम हैं बीजेपी सपोर्टर। कौन हमारा क्या कर लेगा। हां हम हैं आरएसएस वाले। कोई हमारा कुछ नहीं कर सकता। और ये बात उन्होंने तब कही जब उन्हें पता चला कि मैं यहां रहती हूं। उन्होंने जब विनोद झाकड़ भैया को जाते हुए देखा तब। और बोल रहे थे कि भाई तू किससे डर रहा है। मतलब अब मेरी फैमिली की सुरक्षा कौन करेगा। ये कल को घर में घुस जाएंगे और मम्मा-पापा के साथ कुछ हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।”

दोबारा कॉल की तो पुलिस पहुंची- निशु आजाद
निशु के पिता संजय आजाद ने बताया कि शनिवार रात को वह बाहर गए थे। बेटी निशु ने उन्हें फोन पर बताया कि रात करीब 11 बजे कुछ असामाजिक तत्वों ने घर में कुछ पत्थर फेंके, जो किचन की खिड़की में आकर लगे। कुछ समय बाद दोबारा पत्थर फेकें गए और वह बालकनी में आकर गिरे। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनके घर को निशाना बनाकर पथराव किया। वहीं, निशु आजाद का आरोप है कि घटना की सूचना पहली बार डायल-112 की तो पुलिस नहीं आई। इसके बाद दोबारा कॉल की तो पुलिस पहुंची। उनके परिवार ने रात 12 बजे थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

जांच के दौरान मामला फर्जी पाया गया- एसीपी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने बताया की जांच के दौरान मामला फर्जी पाया गया। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। दीवार, ग्रिल, शीशे पर पत्थर लगने के निशान नहीं मले हैं। पड़ोसियों ने भी पथराव की घटना से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से घटना की पुष्टि नहीं हुई है। गाजियाबाद सिटी/ट्रांस हिंडन के डीसीपी धवल जायसवाल के अनुसार, पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना की जानकारी मिली। सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस आसपास के सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और अन्य डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों को इकट्ठा कर रही है। पुलिस के मुताबिक, जांच में जो भी तथ्य और सबूत सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निशु के पड़ोसी ने खोल दी पथराव की पोल 
निशु आजाद के पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने पथराव के दावे पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि निशु का घर उनके फ्लैट से बिल्कुल सटा हुआ है। दोनों घरों के बीच की दूरी बेहद कम है। उन्होंने कहा, “निशु हमारे बिल्कुल बगल वाले मकान में रहती हैं। उनकी किचन की दीवार हमारे घर से लगी हुई है। अगर रात में वहां इतने पत्थर फेंके जाते तो आवाज हमारे घर में भी जरूर आती। इसलिए मुझे यह दावा सही नहीं लगता और यह पूरा मामला फर्जी खबर जैसा लग रहा है।” 

निशु को सोसायटी से बाहर निकाला जाए-सोसायटी के लोग
जिस सोसायटी में निशु आजाद और उसका परिवार रहता है, वहां के लोगों का कहना है, “हम चाहते हैं कि इसको जल्द से जल्द सोसायटी से बाहर निकाला जाए। सोसायटी के लोगों की मांग है कि उसको हटाया जाए। महिलाएं भी कह रही हैं कि यहां से वो चली जाए। जो भगवान को नहीं छोड़ सकता वो हममें से किसी को कैसे छोड़ सकता है। पूरी सोसियटी चाहती है कि वो जहां भी जाना चाहे जाए, लेकिन यहां पर नहीं रहे।” एक अन्य महिला ने कहा,” जो लोग मां सरस्वती और प्रधानमंत्री के बारे में गलत बोल सकता है, वो किसी के बारे में भी बोल सकता है। ऐसे लोग देश को खराब कर रहे हैं। ऐसे लोग ही नई पीढ़ी को खराब करते हैं। “

पत्थर फेंके गए तो शीशा तो टूटता- पड़ोसी महिला
पड़ोसी महिला ने कहा, “निशु ने जो पत्थर फेंकने वाली वीडियो डाली है,ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। हमें वीडियो से पता चला कि लड़की झूठ भी बोलती है। ये बहुत शांत एरिया है। एक दूसरी पड़ोसी महिला ने सवाल किया कि पत्थर फेंके गए तो शीशा तो टूटता। उसने जो वीडियो डाली है, उसमें सिर्फ बिखरे पत्थर दिखा रही है। हम भी अपनी बालकनी में पत्थर रखकर वीडियो बना दे और बोले कि हमें पत्थर मार रहे हैं। उनका ना शीशा टूटा, कहीं निशान भी नहीं लगा। मेरा घर उसके बराबर में हैं, लेकिन पत्थर गिरने की आवाज तक नहीं आई। तो आप ऐसे झूठे-झूठे आरोप व्यूज के लिए, पैसे के लिए बयान दे रहे हैं। कल से गाड़ियां आ रही हैं। राजस्थान से कुछ गाड़ियां आई थीं।”

पथराव से पहले रात में पहुंचे थे NSUI के लोग
शालीमार गार्डन में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया, “आज ही पता चला कि बाहर से 15 से 20 गाड़ियां आई थीं। उन सब गड़ियों पर राजस्थान के नंबर थे। यहां का एक भी नंबर नहीं था। वहीं लोग थे। उसके बाद सोशल मीडिया में डाला गया कि निशु के घर पर पत्थर फेंके गए। इस कॉलोनी में ऐसा कोई भी इंसान नहीं है, जो किसी पर पत्थर फेंके। ना पत्थर फेंका गया है, ना कुछ हुआ है। ये सब मनगढ़ंत है। अगर गाड़ियां बहर से नहीं आती तो पता ही नहीं चलता। पूरी कॉलोनी हाइजैक हो गई। न जाने कौन सी ऐसी बात हो गई, जो कॉलोनी में दिख रही है। जब सोसायटी में आए लोगों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हम निशु आजाद के समर्थन में आए हैं, राहुल गांधी ने भेजा है। हुआ क्या है, जो राहुल गांधी ने भेजा है?”

4 सितंबर को दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष का समर्थन
गैरतलब है कि 5 सितंबर को हुए पथराव से एक दिन पहले 4 सितंबर को दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने निशु आजाद को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के साथ-साथ हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ी है। लाकड़ा ने निशु आजाद और उनके पिता के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचकर भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान कांग्रेस के विधि विभाग के सदस्य ऋषभ रंजन भी मौजूद थे। दोनों ने थाने के थाना प्रभारी (एसएचओ) से मुलाकात कर मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की।

6 सितंबर को निशु के घर पहुंचे कांग्रेस के NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष
5 सितंबर की रात में पत्थर फेंके जाने की घटना हुई और उसके अगले दिन यानी 6 सितंबर को कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने निशु आजाद और उनके परिवार से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार से पूरे मामले की जानकारी ली और निशु के पिता के साथ कथित हमले से जुड़ी परिस्थितियों पर चर्चा की। जाखड़ ने परिवार को न्याय की लड़ाई में हरसंभव लोकतांत्रिक और कानूनी सहयोग देने का भरोसा दिलाया। इससे स्पष्ट है कि मामले को जातीय रंग देने, मुलाकात को चर्चा में लाने और दलित समुदाय को संदेश देने के लिए राहुल गांधी की लिखी स्क्रिप्ट पर ड्रामा किया गया।

BJP और RSS के खिलाफ राहुल गांधी की स्क्रिप्ट पढ़ रही है निशु
निशु आजाद ने जिस तरह से बीजेपी और आरएसएस को इस मामले में घसीटने की कोशिश की है, उससे पता चलता है कि वो राहुल गांधी की लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ रही है। 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी दलित वोट बैंक को साधने के लिए किसी भी हद तक नीचे गिर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, देश और देवी-देवताओं को गाली देने वाले लोग उनके सबसे प्रिय है। वो उन सभी लोगों को समर्थन देने के लिए तैयार है जो बीजेपी को हराने में उनकी मदद कर सकते हैं। राहुल गांधी ऐसे लोगों का वोट हासिल करने के लिए नियम-कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाने के लिए तैयार है, जैसे उन्होंने निशु आजाद और उसके परिवार को समर्थन देकर किया है। 

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