ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। इस घोषणापत्र का सर्वसम्मति से पारित होना पीएम मोदी का वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव और दृढ़ संकल्प की एक ऐतिहासिक मिसाल है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर मतभेदों, विशेषकर मध्य-पूर्व के तनाव और महाशक्तियों के टकराव के बीच, बिना किसी आपत्ति के 45 पन्नों के इस साझा दस्तावेज पर आम सहमति बनाना भारत की कुशल मध्यस्थता को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘भारत मंडपम’ से गूंजी यह सामूहिक आवाज न केवल आतंकवाद के सभी रूपों और सीमा पार टेरर-फंडिंग के खिलाफ एक कड़ा और एकजुट संकल्प व्यक्त करती है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे वैश्विक संस्थानों में समयबद्ध सुधारों की वकालत भी करती है। यह घोषणापत्र इस बात का भी जीवंत प्रमाण है कि भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ को मात्र एक मूकदर्शक से बदलकर वैश्विक नीतियों को नया आकार देने वाली एक सक्रिय, निर्णायक और अपरिहार्य शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है, जिसमें युद्ध के बजाय कूटनीति, संवाद और शांतिपूर्ण समाधान ही सर्वोपरि है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 में क्या है?
• ब्रिक्स के इस संयुक्त घोषणापत्र में संघर्ष को रोकने के प्रयासों, उनके मूल कारणों को जानने पर जोर दिया गया।
• इसमें बातचीत, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए ब्रिक्स देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया गया है।
• घोषणापत्र में एक ऐसे बहुपक्षीय दृष्टिकोण की वकालत की गई जो महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विभिन्न राष्ट्रीय दृष्टिकोणों और स्थितियों का सम्मान करता है
• संयुक्त बयान में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में वृद्धि के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की गई, जो व्यापार को बाधित करते हैं और WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
इन 10 प्वाइंट में समझिए नई दिल्ली घोषणापत्र की खास बातें
1. ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय फैसलों में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व में बेहतर भौगोलिक संतुलन और व्यापक प्रतिनिधित्व की भी बात कही गई।
2. ट्रंप टैरिफ पर चिंता, WTO और मुक्त व्यापार में सुधार हो
BRICS ने विश्व व्यापार संगठन के सुधार और उसके विवाद निपटान तंत्र को प्रभावी बनाने का समर्थन किया। एकतरफा टैरिफ, व्यापार प्रतिबंधों और संरक्षणवादी नीतियों पर चिंता जताई गई। एकतरफा टैरिफ में परोक्ष रूप से ट्रंप टैरिफ की ही आलोचना की गई है।
3. महिला महासचिव की जरूरत पर जोर
घोषणा में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है। BRICS ने वैश्विक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का समर्थन किया।
4. पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा
BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की। हमले में 26 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने का जिक्र किया गया।
5. आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
समूह ने आतंकवाद के सभी रूपों का विरोध किया और आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर कार्रवाई की मांग की। आतंकवाद को किसी धर्म या समुदाय से जोड़ने का भी विरोध किया गया।
6. पश्चिम एशिया में संवाद और कूटनीति पर जोर
BRICS ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। समूह ने कहा कि स्थायी शांति का रास्ता संवाद और कूटनीति से ही निकल सकता है।
7. गाजा और फिलिस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान
BRICS ने गाजा में संघर्षविराम, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और नागरिकों की सुरक्षा की मांग की। समूह ने 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य और पूर्वी येरुशलम को उसकी राजधानी बनाने का समर्थन किया।
8. शांति में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने की अपील
BRICS ने संघर्ष रोकने, शांति वार्ता, मध्यस्थता और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। समूह के मुताबिक इससे शांति और विकास के प्रयास मजबूत होंगे।
9. फेक न्यूज और दुष्प्रचार की निंदा
BRICS देशों ने नस्लवाद, नफरत फैलाने वाली भाषा, फेक न्यूज और दुष्प्रचार की निंदा की। समूह ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और जिम्मेदार वैश्विक सहयोग का समर्थन किया।
10. AI, साइबर सुरक्षा और वित्तीय सहयोग
घोषणा में AI, क्वांटम तकनीक और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। गुजरात की GIFT City में BRICS Risk Lab स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
बड़ी सफलता के पीछे भारत की निरंतर कूटनीतिक भागीदारी
ब्रिक्स देश शनिवार सुबह 4 बजे तक चली गहन बातचीत के बाद एक संयुक्त बयान पर आम सहमति पर पहुंचे। बातचीत के दौरान कई विवादास्पद मुद्दों पर मतभेद सामने आए। भारत ने परस्पर विरोधी स्थितियों को पाटने और सदस्यों के बीच आम सहमति बनाने के लिए लगातार विचार विमर्श करता रहा। इस बड़ी सफलता के पीछे भारत की साल भर की निरंतर कूटनीतिक भागीदारी रहीं। इसमें अंतिम चार दिनों के भीतर शेरपा स्तर पर चौबीसों घंटे चलीं गहन मैराथन वार्ताएं भी शामिल थीं। इस आम सहमति को लेकर सदस्य देशों का ओपिनियन शुरुआत में पश्चिम एशिया, विशेषकर ईरान और यूएई के बीच जारी क्षेत्रीय तनाव की भाषा को लेकर काफी कड़ा और विभाजित था। लेकिन अंततः सभी इस पर सहमत हुए कि बहुपक्षवाद को मजबूत करने, एकतरफा प्रतिबंधों व टैरिफ का विरोध करने और ‘ग्लोबल साउथ’ को वैश्विक मंचों पर समान भागीदारी दिलाने के लिए कूटनीति और संवाद ही एकमात्र रास्ता हैं।
सालभर चलीं 400 से अधिक बैठकों का सुखद परिणाम
नई दिल्ली की धरती पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर बनी अभूतपूर्व आम सहमति वैश्विक कूटनीति के इतिहास में भारत के एक परिपक्व और चतुर रणनीतिकार के रूप में उभरने की गाथा है। वैश्विक व्यापार प्रतिबंधों पर बंटे हुए बहुध्रुवीय नेतृत्व को एक मंच पर लाना किसी जटिल कूटनीतिक चक्रव्यूह को भेदने जैसा था। भारत ने यहां सीधे टकराव से बचते हुए ‘संवाद और कूटनीति’ की उस चिरंतन नीति को आगे बढ़ाया, जिसने धुर विरोधी देशों को भी अपने वैचारिक मतभेद भूलकर एक साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य कर दिया। यह सफलता महज किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि भारत की अध्यक्षता के दौरान साल भर चलीं 400 से अधिक अनवरत बैठकों और बैठकों के अंतिम दौर में तड़के सुबह 4 बजे तक चलीं मैराथन वार्ताओं की परिणति थी।
संयुक्त घोषणा पत्र पर आम सहमति इसलिए है महत्वपूर्ण
• यह सफलता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सभी एक ही मंच का हिस्सा हैं, इसके बावजूद कि कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर उनके बीच गहरे मतभेद और परस्पर विरोधी स्थितियां हैं।
• पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों और बढ़ते तनाव के बीच, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के बीच आम सहमति बनाना एक विशेष रूप से जटिल कूटनीतिक चुनौती थी।
• भारत की कूटनीतिक कुशलता ने यह सुनिश्चित किया कि ये मतभेद ब्रिक्स प्रक्रिया को पटरी से न उतारें, जिससे सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक स्थितियों में भारी अंतर के बावजूद एक संयुक्त बयान पर आम सहमति का मार्ग प्रशस्त हुआ।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से पाक को झटका
भारत की इस कूटनीतिक बिसात ने न केवल विस्तारित ब्रिक्स समूह की एकता को बिखरने से बचाया, बल्कि पश्चिमी देशों के प्रभुत्व के समानांतर ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं को भी वैश्विक एजेंडे के केंद्र में स्थापित कर दिया। ब्रिक्स में आने के लिए आतुर पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से करारा झटका लगा है। पहलगाम हमले ने भी पाकिस्तान के एक बार फिर एक्सपोज किया है। इसके अलावा एकतरफा कार्बन टैरिफ का सामूहिक विरोध, सभी सदस्य देशों का एक सुर में बोलना भारत की विचार-नेतृत्व की क्षमता को दर्शाता है।
मोदी-जिनपिंग-पुतिन त्रिशक्ति ने हर गतिरोध को लचीलेपन में बदला
प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत रसूख और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बने सौहार्दपूर्ण समन्वय ने वार्ता की मेज पर मौजूद हर गतिरोध को लचीलेपन में बदल दिया। यह घोषणापत्र साबित करता है कि वर्तमान की जटिल और खंडित वैश्विक व्यवस्था को पुरानी और रूढ़िवादी संस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि भारत जैसे न्यायसंगत और समावेशी मार्गदर्शक की कूटनीति ही आज दुनिया को एक ठोस और व्यावहारिक दिशा दे सकती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की इथियोपिया और मलेशिया के साथ हुई द्विपक्षीय बैठकों ने इन देशों के साथ भारत के रिश्तों को एक नई दिशा दी है। दोनों देशों ने भारत के साथ मजबूत रक्षा सहयोग की इच्छा जताई। इसमें संयुक्त रूप से कर्मियों की ट्रेनिंग और भारत से रक्षा उपकरणों की खरीद पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने भारतीय उद्योग और निवेश का स्वागत किया। इथियोपिया ने खास तौर पर भारतीय माइनिंग और मलेशिया के साथ सेमीकंडक्टर सेक्टर पर चर्चा हुई।
2030 तक ब्रिक्स देशों से भारत का कारोबार दोगुना बढ़ जाएगा
एक आम पूछा जाने वाला सवाल यह भी है कि ब्रिक्स से भारत को क्या लाभ होने वाला है? दरअसल, ब्रिक्स घोषणा-पत्र के बाद स्थानीय मुद्रा में भुगतान से लेन-देन लागत घटेगी। 2025-26 में भारत से ब्रिक्स देशों को निर्यात 96 अरब डॉलर (8.5 लाख करोड़ रुपए) था। विश्लेषकों का अनुमान है कि ये 2030 तक करीब 200 अरब डॉलर (17.7 लाख करोड़ रुपए) तक हो सकता है। ब्रिक्स घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ का विरोध है। ये दरअसल, अमेरिकी नीति के लिए खिलाफ ब्रिक्स का सांकेतिक राजनीतिक संदेश है। ब्रिक्स का कहना है कि विरोध किसी देश से नहीं, एकतरफा व्यापारिक कदमों के सिद्धांत से है। भारत की सफलता पश्चिम एशिया संघर्ष ईरान-सऊदी-यूएई को राजी करना भी है। भारत ने ऐसे शब्द चुने, जिनसे किसी की ‘रेड लाइन’ क्रास नहीं हुई। साझा बयान को तीनों देशों की साझा सहमति मानना चाहिए।
Swagatam BRICS leaders for the 2026 Summit. pic.twitter.com/SkmO9rV2Kf
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026









