जब दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हों, तब भारत जैसे बड़े उभरते देश की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। और जब बात BRICS जैसे प्रभावशाली बहुपक्षीय मंच की हो, तो भारत की भूमिका और भी अहम हो जाती है। पिछले डेढ़ दशक में भारत ने इस मंच को सिर्फ वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा तक सीमित रखने के बजाय विकास, सुरक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज जैसे व्यापक मुद्दों से जोड़ा है। इस साल 2026 में भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में इस मंच की अध्यक्षता कर चुका है। हर बार परिस्थितियां अलग थीं और हर बार भारत की प्राथमिकताएं भी अलग रहीं। लेकिन इन चारों अध्यक्षताओं में एक बात समान रही- भारत ने BRICS को केवल बातचीत के बजाय व्यावहारिक सहयोग (Practical Cooperation) और साझा कार्रवाई का मंच बनाया।
2012: वैश्विक आर्थिक संकट के बीच वित्तीय संस्थाओं में सुधार की नींव रखी गई।
2016: आतंकवाद, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग (BIMSTEC) पर जोर रहा।
2021: कोरोना काल में डिजिटल स्वास्थ्य, अंतरिक्ष तकनीक और बहुपक्षीय सुधार प्रमुखता से उभरे।
2026: बदलते वैश्विक माहौल और विस्तारित BRICS के बीच नवाचार, मजबूती और ग्लोबल साउथ की आवाज को नया आयाम देने की जिम्मेदारी है।
आइए देखते हैं कि भारत की पिछली तीन अध्यक्षताओं ने BRICS को किस तरह नई दिशा दी और 2026 में चौथी अध्यक्षता के क्या मायने हैं…
2012: नई दिल्ली से BRICS में व्यावहारिक सहयोग की नींव
भारत ने पहली बार 2012 में BRICS की अध्यक्षता की। 29 मार्च 2012 को नई दिल्ली में चौथा BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। इसकी थीम थी—“BRICS Partnership for Global Stability, Security and Prosperity”, यानी वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए BRICS साझेदारी। यह वह दौर था जब दुनिया 2008-09 के आर्थिक संकट से उबर रही थी। ऐसे समय में भारत ने BRICS को सिर्फ चर्चा का केंद्र न बनाकर इसे गरीबी उन्मूलन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास से जोड़ा।

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार: नई दिल्ली में जारी Delhi Declaration में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया। ‘Delhi Declaration’ के जरिए IMF में कोटा सुधार और वर्ल्ड बैंक में विकासशील देशों के निष्पक्ष प्रतिनिधित्व की जोरदार मांग उठाई गई।
NDB और CRA का बीजारोपण: भारत की पहल पर कृषि, स्वास्थ्य और विज्ञान में सहयोग शुरू हुआ। यही वैचारिक सोच आगे चलकर New Development Bank (NDB) और Contingent Reserve Arrangement (CRA) जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थानों के रूप में साकार हुई।
आतंकवाद पर रुख: भारत ने आतंकवाद को केवल क्षेत्रीय समस्या न मानकर वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया और साझा कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया।
इस लिहाज से 2012 का नई दिल्ली सम्मेलन BRICS के सफर में एक अहम पड़ाव था। इसने ब्रिक्स को केवल वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर परामर्श करने वाले मंच से आगे बढ़ाकर कृषि, स्वास्थ्य, विज्ञान और वित्तीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाया।

2016: गोवा में विकास, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग का विस्तार
भारत ने 2016 में दूसरी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली। 15-16 अक्टूबर 2016 को गोवा में आठवां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। इसकी थीम थी—“Building Responsive, Inclusive and Collective Solutions”, यानी जवाबदेह, समावेशी और सामूहिक समाधान तैयार करना। इस बार भारत ने ब्रिक्स के एजेंडे में विकास के साथ-साथ सुरक्षा को भी मजबूती से सामने रखा। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, सतत विकास, स्वास्थ्य के साथ-साथ सुरक्षा और कूटनीति का दायरा बढ़ाया:

NDB का संचालन व रिन्यूएबल एनर्जी: न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के पूर्ण संचालन का स्वागत किया गया और अक्षय ऊर्जा के लिए पहले कर्ज स्वीकृत किए गए। इससे BRICS की विकास वित्त संबंधी भूमिका को व्यावहारिक आधार मिला। ऊर्जा के क्षेत्र में नेताओं ने स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा तक पहुंच तथा ऊर्जा सुरक्षा को महत्वपूर्ण प्राथमिकता माना गया। साथ ही Agenda 2030 और Sustainable Development Goals को हासिल करने के लिए सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

आतंकवाद पर सख्त कूटनीति: भारत ने आतंकवाद की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए Financial Action Task Force (FATF) के मानकों को लागू करने पर विशेष जोर दिया। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दा था, क्योंकि वह लगातार आतंकवाद को किसी एक क्षेत्र तक सीमित समस्या के बजाय वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है।

BRICS-BIMSTEC Outreach Summit: यह भारत का एक ऐतिहासिक कूटनीतिक कदम था। BRICS को BIMSTEC (बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देश) से जोड़कर दक्षिण एशिया की प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर लाया गया। इस दौरान आतंकवाद, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, पर्यावरण, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके अलावा कृषि, कस्टम्स और राजनयिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाया गया।

स्वास्थ्य सुरक्षा: HIV और टीबी (TB) जैसी बीमारियों के खिलाफ साझा लड़ाई पर सहमति बनी।
इस तरह 2016 का गोवा सम्मेलन BRICS के दायरे को विकास वित्त से आगे बढ़ाकर सुरक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय सहयोग तक ले जाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव बना।

2021: कोरोना संकट के बीच डिजिटल, स्वास्थ्य और वैश्विक सुधार का एजेंडा
भारत ने 2021 में तीसरी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली। 9 सितंबर 2021 को 13वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। इसकी थीम थी-“BRICS @15: Intra-BRICS Cooperation for Continuity, Consolidation and Consensus”। यह अध्यक्षता ऐसे समय में हुई जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी के गंभीर प्रभावों से गुजर रही थी। स्वास्थ्य संकट के साथ अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक सहयोग की व्यवस्था भी दबाव में थी। भारत ने इस चुनौती के बीच BRICS के एजेंडे को चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित किया-

बहुपक्षीय व्यवस्था (Multilateral System) में सुधार: 2021 की अध्यक्षता में भारत ने multilateral system reform को प्रमुख प्राथमिकता बनाया। नई दिल्ली घोषणा में वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और जवाबदेह बनाने की जरूरत पर जोर दिया। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़े संस्थानों में सुधार की आवश्यकता को भी सामने रखा। भारत की अध्यक्षता में “Strengthening and Reforming the Multilateral System” पर संयुक्त बयान भी जारी हुआ। इसमें मौजूदा वैश्विक संस्थागत व्यवस्था की कमियों को स्वीकार करते हुए उसे अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की जरूरत पर बल दिया गया। यह पहल भारत की उस व्यापक कूटनीतिक सोच के अनुरूप थी, जिसमें बदलती वैश्विक वास्तविकताओं के हिसाब से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग लगातार की जाती रही है।

अंतरिक्ष तकनीक (Space Cooperation): 2021 में BRICS देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक भी हुई। इसके बाद BRICS Remote Sensing Satellite Constellation Agreement पर दस्तखत किए गए। इस पहल के जरिए रिमोट सेंसिंग डेटा और अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल से जलवायु अध्ययन, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने का रास्ता खुला। यह दिखाता है कि BRICS का सहयोग अब केवल पारंपरिक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और विज्ञान के क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा था।

डिजिटल हेल्थ और जल संसाधन: कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को भी नई दिशा मिली। भारत ने BRICS Digital Health Summit की शुरुआत की। इसके साथ ही पहली बार BRICS Water Ministers’ Meeting आयोजित की गई। भारत ने BRICS की कार्यप्रणाली को अधिक सरल और लोगों के लिए समझने योग्य बनाने की दिशा में भी काम किया। साथ ही कृषि अनुसंधान, डिजिटल तकनीक और लोगों के बीच संपर्क से जुड़े कार्यक्रमों का व्यापक कैलेंडर तैयार किया।

एक्शन प्लान: 2021 की अध्यक्षता में BRICS Counter-Terrorism Action Plan, BRICS Customs Mutual Assistance Agreement और Agricultural Research Platform को पूरी तरह चालू किया गया। इस तरह भारत की तीसरी अध्यक्षता ने महामारी के दौर में BRICS के सहयोग को स्वास्थ्य और डिजिटल तकनीक से लेकर कृषि, सुरक्षा और वैश्विक शासन सुधार तक विस्तार दिया।

2026: चौथी अध्यक्षता में भारत के सामने बदला हुआ BRICS
2026 में भारत ने चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है। लेकिन इस बार भारत के सामने BRICS का स्वरूप पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। 2012 में जब भारत ने पहली बार अध्यक्षता संभाली थी, तब BRICS का एजेंडा मुख्य रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और विकास सहयोग पर केंद्रित था। आज इसका दायरा कहीं ज्यादा व्यापक है और BRICS की सदस्यता भी बढ़ चुकी है। ऐसे समय में भारत की अध्यक्षता का महत्व केवल इसलिए नहीं है कि यह चौथी बार है, बल्कि इसलिए भी है कि अब भारत को एक अधिक विविध और विस्तारित मंच में साझा सहमति बनाने की जिम्मेदारी निभानी है।
All set for BRICS 2026!@BricsIndia2026 pic.twitter.com/nXqqoBmoAm
— Narendra Modi (@narendramodi) September 10, 2026
Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability पर जोर
भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता की थीम चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर आधारित है—Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability। यानी बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच देशों की क्षमता और मजबूती बढ़ाना, तकनीक और नवाचार को सहयोग का आधार बनाना, सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक साझेदारी मजबूत करना और सतत विकास को आगे बढ़ाना। इन प्राथमिकताओं के तहत भारत के सामने डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सतत विकास जैसे मुद्दों को BRICS के साझा एजेंडे से जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी है। भारत की अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की यात्रा, UPI जैसे डिजिटल भुगतान मॉडल और तकनीक के जरिए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सेवाएं पहुंचाने का अनुभव भी BRICS देशों के बीच साझा सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

2012 से 2026: बदलते BRICS में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत की चारों अध्यक्षताओं को एक साथ देखने पर BRICS की यात्रा में एक स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है।
-2012 में भारत ने संस्थागत और व्यावहारिक सहयोग की नींव मजबूत करने पर जोर दिया।
-2016 में भारत ने विकास वित्त के साथ आतंकवाद, ऊर्जा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय सहयोग को BRICS के एजेंडे से जोड़ा।
-2021 में भारत ने महामारी के बीच डिजिटल स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, तकनीक और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों को नई मजबूती दी।
-और 2026 में भारत के सामने चुनौती है कि इस विस्तारित मंच को नई वैश्विक परिस्थितियों में ज्यादा प्रभावी सहयोग के लिए इस्तेमाल किया जाए। यानी चार अध्यक्षताओं की यह यात्रा सिर्फ BRICS के बदलते एजेंडे की कहानी नहीं है। यह वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका की कहानी भी है।

2012 में जहां भारत ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार और संस्थागत सहयोग पर जोर दिया था, वहीं 2026 में उसका फोकस अधिक व्यापक है—Global South की आवाज को मजबूती देना, तकनीक और नवाचार के जरिए विकास को गति देना और बदलती वैश्विक चुनौतियों के बीच सहयोग का रास्ता तैयार करना।
New Delhi takes centre stage for BRICS 2026.
Leaders and delegations from across BRICS are arriving in the capital, bringing together ideas, priorities and a shared resolve for dialogue, cooperation and collective action.#BRICS2026 #BRICSIndia2026 #IndiaBRICSChairship pic.twitter.com/OZESoxFHAu
— BRICS 2026 (@BricsIndia2026) September 11, 2026
इसी वजह से भारत की चौथी BRICS अध्यक्षता को सिर्फ एक और अध्यक्षता के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह ऐसे समय में आई है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और विकासशील देशों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। 2012 में रखी गई संस्थागत सहयोग की नींव से लेकर 2016 की सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी, 2021 के डिजिटल और बहुपक्षीय सुधारों तथा 2026 के Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability के एजेंडे तक—भारत ने हर अध्यक्षता में BRICS को बदलती वैश्विक जरूरतों के अनुरूप नई दिशा देने की कोशिश की है।









