नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया की आर्थिक और रणनीतिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। इस पूरे परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेशन फर्स्ट की नीति, विकसित भारत बनाने की नीयत और हर भारतवासी के विकास और कल्याण की निष्ठा के चलते नए भारत की स्थिति विशिष्ट है। दरअसल, भारत अमेरिका, रूस, खाड़ी देशों और चीन के साथ संवाद और साझेदारी रखने वाली बड़ी इकोनॉमी है, लेकिन किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं है। यही संतुलन भारत को BRICS के भीतर एक ऐसे महासेतु की भूमिका देता है, जो अलग-अलग ध्रुवों के बीच संवाद और सहयोग की संभावनाएं तलाश सकता है। भारत को इसी कारण 11 सदस्यीय ब्रिक्स के भीतर एक ‘Balanced Bridge Power’ के रूप में देखा जाता है। जिस समय BRIC की अवधारणा सामने आई थी, उस समय भारत की नाममात्र की GDP लगभग 480 अरब डॉलर और विदेशी मुद्रा भंडार करीब 38 अरब डॉलर ही था। आज पीएम मोदी मॉडल के चलते भारत की GDP 4.15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक और विदेशी मुद्रा भंडार करीब 729 अरब डॉलर से भी ज्यादा है।
पीएम मोदी की संतुलित विदेश नीति ने बढ़ाई हमारी वैश्विक भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की बड़ी विशेषता है कि भारत ने किसी एक शक्ति-गुट के पीछे चलने के बजाय लगभग हर महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति-केंद्र के साथ Nation First के मंत्र पर संबंध बनाए और अपनी भूमिका बढ़ाई है। G20 में नेतृत्व, BRICS में Global South की आवाज, SCO में रणनीतिक संतुलन, QUAD में Indo-Pacific की सुरक्षा, BIMSTEC में क्षेत्रीय संपर्क, SAARC में राष्ट्रीय हितों की स्पष्ट प्राथमिकता, IBSA में विकास साझेदारी और I2U2 में तकनीक-निवेश की नई कूटनीति इन सभी को एक साथ रखें तो मोदी-इरा में भारत की विदेश नीति के व्यापक मायने सामने आते हैं। भारत अब दुनिया के मंचों पर केवल अपनी बात रखने वाला देश नहीं, बल्कि कई मंचों पर एजेंडा तय करने, सहमति बनाने और वैश्विक विचार-मंथन की दिशा प्रभावित करने वाली शक्ति के रूप में दिखाई देता है। इस बदलाव के पीछे पीएम मोदी मॉडल, उनकी दूरदृष्टि, देश को आगे ले जाने का इरादा और निरंतर बिना थके परिश्रम है। पीएम मोदी के इसी विजन के चलते डिजिटल भुगतान, DBT, DPI (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर), विनिर्माण और बुनियादी ढांचे के विस्तार की ऐसी श्रृंखला बनी है, जिसने भारत को ‘स्केल से डिलीवरी’ यानी बड़े पैमाने की क्षमता को वास्तविक परिणामों में बदलने वाला देश बनाया है।
आइए, 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के मौके पर हिंदुस्तान की सरजमीं से वैश्विक मंचों पर भारत के लगातार बढ़ते परचम को मोदी मॉडल के इन 18 बिंदुओं से समझते हैं…
1. G20: भारत की आवाज को वैश्विक आर्थिक नेतृत्व तक पहुंचाया
G20 दुनिया की प्रमुख इकोनॉमीज का सबसे प्रभावशाली मंच है। पिछले 12 वर्षों में पीएम मोदी ने इस मंच को भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत करने के एक बड़े अवसर में बदला है। 2023 में भारत की अध्यक्षता के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र पर सर्वसम्मति बनाना, अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य बनवाने की पहल और Global South की चिंताओं को G20 के केंद्र में लाना, पीएम मोदी की सक्रिय कूटनीति की बड़ी उपलब्धियां रहीं। पीएम मोदी ने G20 को केवल आर्थिक चर्चाओं का मंच न रहने देकर विकास, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, जलवायु, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं से जोड़ा। भारत की अध्यक्षता के दौरान जिस तरह विकसित और विकासशील देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश हुई, उसने नरेन्द्र मोदी को भारत के प्रधानमंत्री से आगे एक ऐसे वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया, जिसकी बात अलग-अलग शक्ति समूहों के बीच सुनी जाती है।
2. SCO: चीन और रूस के बीच भारत का रणनीतिक संतुलन
Shanghai Cooperation Organization में भारत का पूर्ण सदस्य बनना 2017 में पीएम मोदी की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि रही। यह वह मंच है जहां भारत को रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ एक ही मेज पर बैठने का अवसर मिला। यह आतंकवाद, सुरक्षा, ऊर्जा तथा क्षेत्रीय संपर्क जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखने का विराट मंच है। भारत की SCO अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए सहयोग को सुरक्षा से आगे डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, पारंपरिक चिकित्सा, युवा और सांस्कृतिक संपर्क तक विस्तार देने पर जोर दिया। चीन के साथ सीमा विवाद और पाकिस्तान के साथ तनाव के बावजूद मोदी सरकार ने SCO में संवाद के रास्ते खुले रखे। यह पीएम मोदी की बहुस्तरीय कूटनीति का उदाहरण ही है कि जहां प्रतिद्वंद्वी देशों के साथ भी राष्ट्रीय हितों के लिए संवाद कायम रखा जाता है।
3. QUAD: मोदी के चलते Indo-Pacific में भारत की नई सामरिक पहचान
अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत का QUAD पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति का अहम रणनीतिक मंच बनकर उभरा है। पीएम मोदी ने QUAD को केवल चीन के प्रभाव का मुकाबला करने वाले सुरक्षा मंच के रूप में सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे वैक्सीन, समुद्री सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण तकनीक, आपूर्ति शृंखला और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत की स्थिति यहां इसलिए भी विशेष है, क्योंकि वह अमेरिका के साथ गहरी रणनीतिक साझेदारी करता है, लेकिन अपनी विदेश नीति की स्वतंत्रता भी बनाए रखता है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह स्पष्ट किया कि Indo-Pacific की सुरक्षा और स्थिरता में भारत कोई बाहरी खिलाड़ी नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र की शक्ति-संरचना का केंद्रीय स्तंभ है।
4. BIMSTEC: मोदी की ‘Neighbourhood First’ और ‘Act East’ नीति बनी सेतु
BIMSTEC को पिछले दशक में नई गति देने में पीएम मोदी की विदेश नीति का बहुत योगदान रहा है। दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को बंगाल की खाड़ी के माध्यम से जोड़ने वाला यह संगठन भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद भी महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान की मौजूदगी न होने के कारण यह मंच उन क्षेत्रीय परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी देता है, जिन्हें SAARC की राजनीतिक जटिलताओं ने धीमा किया है। मोदी सरकार ने BIMSTEC में आतंकवाद-रोधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, आपदा प्रबंधन, कनेक्टिविटी और डिजिटल सहयोग को बढ़ावा दिया है। पीएम मोदी की Neighbourhood First और Act East नीतियों ने BIMSTEC को भारत की क्षेत्रीय रणनीति में अहम स्थान दिया है। इसके माध्यम से भारत केवल अपने पड़ोस में प्रभाव नहीं बढ़ा रहा, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया तक अपनी रणनीतिक और आर्थिक पहुंच को भी मजबूत कर रहा है।
5. SAARC: मोदी की कूटनीति में सहयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभालते ही 2014 में SAARC देशों के नेताओं को अपने शपथग्रहण समारोह में आमंत्रित कर Neighbourhood First का संदेश दिया था। लेकिन पाकिस्तान के साथ आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े विवादों के कारण SAARC की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। पाक के चलते SAARC की कहानी पिछले 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति की एक अलग तस्वीर भी पेश करती है। मोदी सरकार ने यहां एक महत्वपूर्ण नीति अपनाई। क्षेत्रीय सहयोग की इच्छा बनाए रखते हुए आतंकवाद के प्रश्न पर समझौता नहीं किया और BIMSTEC जैसे वैकल्पिक क्षेत्रीय मंचों को अधिक सक्रिय बनाया। इसलिए SAARC में पीएम मोदी का योगदान किसी संस्थागत विस्तार के रूप में नहीं, बल्कि यह तय करने के रूप में देखा जाना चाहिए कि भारत की क्षेत्रीय कूटनीति सहयोग के लिए खुली रहेगी, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर यह कतई मंजूर नहीं है।
6. IBSA : मोदी-इरा में ग्लोबल साउथ के विकास को नई ताकत
भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका का IBSA मंच तीन बड़े लोकतांत्रिक देशों को जोड़ता है और Global South के विकास, गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, संयुक्त राष्ट्र सुधार तथा South-South Cooperation जैसे मुद्दों पर साझा आवाज देता है। पीएम मोदी ने भारत की विकास-क्षमता और अनुभव को इस मंच के माध्यम से विकासशील देशों के साथ साझा करने की नीति को मजबूती दी। भारत का डिजिटल सार्वजनिक ढांचा, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी अब उसकी विदेश नीति की नई पहचान बन चुके हैं। मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों के साथ संबंधों को केवल सहायता या कूटनीति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि भारत को एक ऐसे विकासित साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया, जो अपने अनुभव और तकनीक को दूसरे विकासशील देशों के साथ साझा कर सकता है। यही सोच IBSA जैसे मंचों पर भारत के महत्व को बहुत अधिक बढ़ाती है।
7. I2U2: मोदी की ‘मिनिलैटरल डिप्लोमेसी’ का नया अध्याय
भारत-इजरायल-UAE-अमेरिका यानी I2U2 पीएम मोदी की उस नई कूटनीतिक सोच की मिसाल है, जिसमें बड़े पारंपरिक संगठनों के साथ छोटे लेकिन परिणाम केंद्रित समूहों को भी महत्व दिया गया है। पीएम मोदी ने इजरायल के साथ भारत की रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी तथा UAE के साथ तेजी से बढ़ते आर्थिक संबंधों को अमेरिका के साथ भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी से जोड़कर एक नया सहयोग-इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया। I2U2 में खाद्य सुरक्षा, जल, ऊर्जा, स्वास्थ्य, तकनीक, निवेश और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों पर जोर है। इसका महत्व इसलिए भी है, क्योंकि भारत एक ही समय में अमेरिका, इजरायल और अरब जगत के महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहा है। पीएम मोदी की कूटनीति ने पुराने मित्रों को बनाए रखते हुए नए रणनीतिक साझेदार जोड़ने और अलग-अलग क्षेत्रों की ताकत को भारत के हित में जोड़ने की क्षमता दिखाई है।
8. BRICS: आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और Global South की आवाज
BRICS में भारत की भूमिका मोदी सरकार के दौर में लगातार महत्वपूर्ण हुई है। पीएम मोदी के समक्ष ब्रिक्स का यह तीसरा शिखर सम्मेलन भारत में हो रहा है। उन्होंने इस मंच को किसी पश्चिम-विरोधी ध्रुव के रूप में देखने के बजाय हमेशा भारत के लिए एक स्वतंत्र रणनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल किया है। वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और Global South की आवाज को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भारत ने अपनी स्वतंत्र स्थिति रखी। BRICS के विस्तार के साथ इसका भू-राजनीतिक महत्व और बढ़ा है और भारत अब इसके भीतर चीन तथा रूस जैसी शक्तियों के साथ संवाद करते हुए अपने हितों की रक्षा कर रहा है। पीएम मोदी की खासियत यही रही कि उन्होंने पश्चिम के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और BRICS में भारत की सक्रियता, दोनों को एक साथ आगे बढ़ाया है, जिससे भारत किसी एक खेमे में बंधने के बजाय अपनी स्वतंत्र वैश्विक पहचान बना सका है।
View this post on Instagram
9. ISA: अंतर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा से आपदा-रोधी ढांचे तक
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी शुरुआत भारत और फ्रांस ने मिलकर 30 नवंबर 2015 को पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP21) के दौरान की थी। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का भारत के कूटनीतिक प्रभाव में विशेष महत्व है और इसका मुख्यालय भारत में है। इसी तरह 2019 में पीएम मोदी द्वारा घोषित Coalition for Disaster Resilient Infrastructure आज विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए साझा मंच देता है। इन पहलों का महत्व इसलिए है क्योंकि इनमें शक्ति-राजनीति से अधिक साझा वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर जोर है। भारत इस तरह विकास, जलवायु और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों को अपनी विदेश नीति के सक्रिय उपकरण में बदल रहा है।
10. Foreign policy से दुनिया की बड़ी मेज पर भारत
भारत की विदेश नीति का सबसे बड़ा परिवर्तन शायद यही है कि अब उसे किसी एक शक्ति-गुट के साथ खड़े होकर अपनी भूमिका परिभाषित करने की जरूरत नहीं है। वह अलग-अलग मंचों पर अपनी जरूरत और हित के अनुसार साझेदारी कर सकता है और साथ ही वैश्विक सहयोग के नए मंच भी बना सकता है। 2026 की BRICS अध्यक्षता इसी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। दिल्ली में होने वाला सम्मेलन इसलिए केवल 11 देशों के नेताओं का जमावड़ा नहीं, बल्कि उस भारत का प्रदर्शन है जो अब वैश्विक व्यवस्था का दर्शक नहीं, सक्रिय निर्माता बनना चाहता है। यही भारत की नई कूटनीतिक पहचान है। सिर्फ मेज पर बैठना नहीं, बल्कि मेज को उपयोगी बनाना। सिर्फ किसी मंच का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि नए मंच खड़े करना। सिर्फ अपनी आवाज सुनाना नहीं, बल्कि अलग-अलग आवाजों को साथ लाने की क्षमता दिखाना। BRICS की नई दिल्ली बैठक इसी बदलते भारत का जीवंत आईना है और उसकी बढ़ती वैश्विक हैसियत का सबसे बड़ा मंच भी है।
11. GDP आंकड़ों में बदलता भारत और विदेशी मुद्रा का अपार भंडार
भारत की आर्थिक यात्रा BRICS के सामने उसकी विश्वसनीयता का सबसे मजबूत आधार है। साल 2000 के आसपास लगभग 38 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार और 480 अरब डॉलर की GDP वाला भारत पीएम मोदी के नेतृत्व में 2026 में 729 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा भंडार और 4.15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था तक पहुंच चुका है। इसी अवधि में भारत की आर्थिक रैंकिंग में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है। 2026 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत है, जो उसकी मौजूदा आर्थिक गति का महत्वपूर्ण संकेत है। इस परिवर्तन का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि भारत ने आर्थिक विस्तार के साथ-साथ वित्तीय पहुंच और सामाजिक परिणामों को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया है।
12. UPI की अभूतपूर्व सफलता से दुनिया में फैला डिजिटल संदेश
पीएम मोदी के विजनरी मॉडल की दुनिया को सबसे बड़ी दैन यूपीआई है। UPI आज बड़े पैमाने पर संचालित होने वाली ऐसी पब्लिक डिजिटल भुगतान प्रणाली के रूप में सामने आया है, जिसका अनुभव अन्य विकासशील देशों के लिए भी उपयोगी बन रहा है। वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी लगभग 48-49 प्रतिशत है। एक वर्ष में 129 अरब से अधिक लेनदेन हुए हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत का डिजिटल मॉडल केवल भुगतान तक सीमित नहीं है। Aadhaar, India Stack और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने इसे एक व्यापक आर्थिक मंच का रूप दिया है। 24 देशों के साथ सहयोग समझौते इस बात का संकेत हैं कि भारत का डिजिटल अनुभव अब अपनी सीमाओं से बाहर भी पहुंच बनाने की क्षमता रखता है।
13. PM जनधन योजना भारत के लिए क्रांतिकारी पहल
जनधन योजना पीएम मोदी मॉडल की वह ऐतिहासिक पहल है, जिसे भारतवासियों और देश के बैंकिंग सेक्टर के क्रांतिकारी कहा जा सकता है। दरअसल, यह देश में वित्तीय समावेशन को सरकारी योजना से आगे ले जाकर आर्थिक अवसंरचना में बदलने का उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 59 करोड़ से अधिक बैंक खाते खुल चुके हैं। इसका महत्व केवल खातों की संख्या में नहीं, बल्कि इस बात में है कि बड़ी आबादी को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने के बाद प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान जैसी व्यवस्थाओं को उसी आधार से जोड़ा गया है। इस तरह बैंक खाता, डिजिटल भुगतान और सरकारी सहायता के बीच एक ऐसा तंत्र तैयार हुआ, जिसने आर्थिक भागीदारी को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया है।
14. DBT के ‘डिलीवरी आर्किटेक्चर’ पीएम, करप्शन हुआ जीरो
भारत के डिजिटल बदलाव का एक बड़ा परिणाम कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी में दिखाई देता है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से अब तक 53 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हस्तांतरण हुआ है और डुप्लीकेट तथा फर्जी लाभार्थियों को हटाने से 5.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित बचत हुई है। इससे सरकारी योजनाओं में करप्शन जीरो हुआ है। यह केवल राजकोषीय बचत का आंकड़ा नहीं है। इसका बड़ा अर्थ यह है कि तकनीक को शासन के साथ जोड़कर सरकारी संसाधनों को लक्षित लाभार्थियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की क्षमता विकसित हुई है। यही वह ‘डिलीवरी आर्किटेक्चर’ है जिसे भारत अपनी विकास यात्रा की विशिष्ट उपलब्धि के रूप में BRICS के सामने रख सकता है।
15. GDP वृद्धि को अवसरों में बदला, 25 करोड़ गरीबी से बाहर
भारत की आर्थिक कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसे केवल GDP के आकार से नहीं मापा जा सकता। बहुआयामी गरीबी का अनुपात 2013-14 के 29.17 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 11.28 प्रतिशत रह गया और 25 करोड़ से अधिक लोगों के बहुआयामी गरीबी से बाहर हो गए। यानी आर्थिक वृद्धि को सामाजिक परिणामों में बदलने की कोशिश प्रधानमंत्री मोदी के विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी है। BRICS जैसे मंच पर यह अनुभव इसलिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि विकासशील देशों के लिए असली चुनौती केवल आर्थिक वृद्धि हासिल करना नहीं, बल्कि उस वृद्धि को व्यापक सामाजिक अवसरों में बदलना है।
16. Chip से लेकर शिप और स्पेस तक मोदी ने दिलाई वैश्विक पहचान
पिछले एक दशक में पीएम मोदी के प्रोत्साहन ने भारत को वैश्विक तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्र की अग्रणी महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है। ‘चिप से लेकर शिप और स्पेस’ तक फैली भारत की यह विकास यात्रा देश के अभूतपूर्व कायाकल्प की गवाह है। चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग और सूर्य का अध्ययन करने वाले आदित्य-L1 मिशन की वैश्विक सफलता के बाद, भारत अब अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के साथ अंतरिक्ष में इतिहास रचने की दहलीज पर है। जिसने वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में भारत का दबदबा कायम कर दिया है। यह आत्मनिर्भर विजन उस सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में भी स्पष्ट रूप से झलकता है, जिसके बारे में पहले कभी गंभीरता से विचार नहीं किया गया था। मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) और हालिया ‘सेमीकॉन 2.0’ नीति के तहत लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपए के निवेश से देश में कई अत्याधुनिक चिप विनिर्माण इकाइयां आकार ले रही हैं, जो वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में भारत को एक बड़े खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने वाली हैं।
17. Vocal for Local और आत्मनिर्भर भारत के विजन पर फोकस
पीएम मोदी के विजनरी मॉडल की दो और शक्तिशाली रणनीति हैं, जो देश की इकोनॉमी और रोजगार दोनों में इजाफा कर रही हैं। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन आज भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती और वैश्विक पहचान दिला रहा है। इस मंत्र से देश के स्थानीय कारोबार, कुटीर उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को भारी प्रोत्साहन मिला है, जिससे घरेलू मांग बढ़ने के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी भारतीय वस्तुओं का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। खादी एवं ग्रामोद्योग का ही उदाहरण लें तो इसका कुल कारोबार बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1,87,105 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो ग्रामीण स्तर पर आर्थिक समृद्धि और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है। इसके अलावा, सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं के कारण आज इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम हुई है तथा भारत ‘लोकल से ग्लोबल’ की राह पर अग्रसर होकर दुनिया का एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है।
18. World की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति बनेगी भारत की ताकत
पीएम मोदी हमेशा देश के चार स्तंभों में से एक युवा शक्ति को मानते हैं। जेन-जी से लेकर युवा शक्ति तक भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसकी यही जनसांख्यिकी है। आंकड़े बताते हैं कि 2030 तक देश की कामकाजी आबादी लगभग 100 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो विश्व में सबसे बड़ी होगी। यही युवा शक्ति भारत को मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, सर्विस और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाएगी। पीएम मोदी के विजन से निकले स्किल इंडिया, नई शिक्षा नीति, डिजिटल स्किलिंग और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों के जरिए इस जनसंख्या को कुशल मानव संसाधन में बदला जा रहा है। भारत अब केवल श्रम देने वाला देश नहीं, बल्कि कौशल, इनोवेशन और स्पेस साइंस का केंद्र बनता जा रहा है। 2047 की ओर बढ़ता भारत केवल युवा शक्ति ही नहीं बनेगा, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनेगा जो समावेशी विकास, टिकाऊ प्रगति और वैश्विक नेतृत्व का नया मानक गढ़ेगा। यही प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत विजन की असली शक्ति और पहचान है।









