कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने झूठ, जातीय विभाजन, दलित और मुस्लिम तुष्टिकरण को अपना सियासी मंत्र बना लिया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वीर सावरकर, मनुस्मृति और सनातन का अपमान उनका पैशन बन चुका है। इसके जरिए वो केंद्र की सत्ता में आना चाहते हैं। लेकिन राहुल गांधी के आधारहीन बयानों और अपमानजनक टिप्पणियों की वजह से देश की अलग-अलग अदालतों में कई मामले चल रहे हैं। चाहे मामला ‘चौकीदार चोर है’ से जुड़ा हो या ‘खड़गे शुद्धिकरण’ से, झूठ की गूंज ज्यादा देर तक टिकती नहीं है। बिना पुख्ता तथ्यों के ‘झूठ की गूंज की मियाद’ बहुत छोटी और सीमित होती है, क्योंकि सच सामने आते ही झूठ का अस्तित्व खत्म हो जाता है। इसलिए पिछले दो दिनों में राहुल गांधी को दो उच्च न्यायालयों से तगड़ा झटका लगा है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने खोली राहुल गांधी के झूठ की पोल
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (8 सितंबर) को राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला रद्द करने से इनकार किया। यह मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को “चोरों के सरदार” और “कमांडर-इन-थीफ” (चोरों का कमांडर) कहने वाली उनकी कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। राहुल गांधी ने इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन को चुनौती दी और तर्क दिया कि बीजेपी कार्यकर्ता द्वारा दायर शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पार्टी का नाम नहीं लिया था और किसी “पहचान योग्य या निश्चित वर्ग” को निशाना नहीं बनाया। ऐसे में कोई स्पष्ट पीड़ित व्यक्ति या समूह नहीं है जिसके पास मुकदमा चलाने का अधिकार (लोकस स्टैंडी) हो।
बॉम्बे हाई कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ा झटका, PM मोदी पर की थी टिप्पणी, कहा था ‘चौकीदार ही चोर’ है!
बॉम्बे हाई कोर्ट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने राहुल ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का केस रद्द करने से इनकार कर दिया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष pic.twitter.com/sgpDjrPsia
— Vijay Prakash Ray ‘विजय’ (@vijayprakash515) September 8, 2026
राहुल के खिलाफ मानहानि केस रद्द करने से इनकार
सिंगल-जज जस्टिस नितिन बोरकर ने राहुल गांधी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि एक रजिस्टर्ड राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी होने के नाते, बीजेपी निश्चित रूप से एक पहचान योग्य संस्था है। जज ने कहा, “शिकायतकर्ता का कहना है कि वह दो दशकों से बीजेपी का सक्रिय सदस्य रहा है। प्रधानमंत्री, जो बीजेपी के सदस्य हैं, उन्हें ‘कमांडर-इन-थीफ’ बताने वाले बयान को पहली नज़र में देखने पर यह नहीं कहा जा सकता कि यह टिप्पणी केवल पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक ही सीमित है। आरोप का असल मतलब क्या था और इसका पार्टी के सदस्यों पर क्या असर पड़ेगा, इस पर ट्रायल के दौरान विचार किया जाएगा। इसलिए यह कोर्ट विद्वान मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश में कोई गैर-कानूनी बात नहीं पाती है।”
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है. कोर्ट ने आज मंगलवार को सुनवाई करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर ‘कमांडर-इन-थीफ’ और ‘चोरों का सरदार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने को लेकर दर्ज आपराधिक… pic.twitter.com/j0OnGRiehx
— TV9 Bharatvarsh (@TV9Bharatvarsh) September 8, 2026
कोर्ट ने शशि थरूर के मामले में फैसले का दिया हवाला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शशि थरूर के मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि कोई राजनीतिक पार्टी अपने रजिस्ट्रेशन के कारण एक पहचान योग्य और निश्चित संस्था होती है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में यह तय किया जाना बाकी है कि कथित बयान का वास्तविक आशय क्या था और उसका पार्टी के सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा। इन सवालों पर ट्रायल के चरण में विचार किया जाएगा। बता दें कि इस साल फरवरी में कांग्रेस नेता की याचिका पर शिकायतकर्ता, राहुल गांधी और महाराष्ट्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया था।
PM मोदी के खिलाफ टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी को झटका, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामला रद्द करने से इनकार किया@Saketrai2000 https://t.co/9RTtz5onhV
— India TV (@indiatvnews) September 8, 2026
बीजेपी कार्यकर्ता ने की थी मानहानि की शिकायत
गौरतलब है कि यह शिकायत बीजेपी के कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का तर्क था कि राहुल गांधी की टिप्पणियां प्रधानमंत्री और उनके ज़रिए सत्ताधारी पार्टी और उसके सदस्यों पर निशाना साधने के लिए थीं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी को “चोरों का सरदार” कहने का मतलब असल में सभी बीजेपी सदस्यों को “चोर” बताना था, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं को मानहानि की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार मिला। महेश श्रीश्रीमाल की शिकायत पर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था।
‘चौकीदार चोर है’, टिप्पणी केस में राहुल गांधी को बॉम्बे HC से झटका, याचिका खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल के मानहानि केस को रद्द करने की मांग की थी. यह मामला 2018 की एक रैली में पीएम मोदी को लेकर… pic.twitter.com/nQ2WwRGl2i
— AajTak (@aajtak) September 8, 2026
राहुल गांधी की ओर से क्या दलील दी गई?
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समन और कार्यवाही जारी रखने को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का रुख किया और दलील दी कि शिकायत कानूनी रूप से मान्य नहीं है। उनकी ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सुदीप पासबोला ने कहा कि राहुल गांधी ने ट्वीट में बीजेपी या किसी राजनीतिक पार्टी का नाम नहीं लिया था और न ही किसी “पहचान योग्य या निश्चित समूह” को निशाना बनाया था। पासबोला ने तर्क दिया कि किसी स्पष्ट रूप से पीड़ित व्यक्ति या समूह के न होने पर शिकायतकर्ता के पास मुकदमा चलाने का अधिकार (लोकस स्टैंडी) नहीं था। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि केवल यह अर्थ निकालना कि बयान पार्टी कार्यकर्ताओं पर लागू होता है, आपराधिक मानहानि की कार्यवाही का आधार नहीं बन सकता। लेकिन सीनियर एडवोकेट सुदीप पासबोला की ये दलीलें राहुल गांधी को राहत दिलाने में नाकाम रहीं।
खड़गे शुद्धिकरण मामला : सबूत नहीं दे पाई कांग्रेस
उधर, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार (7 सितंबर) को हल्द्वानी खड़गे शुद्धिकरण मामले में राहुल गांधी और कांग्रेस को बड़ा झटका दिया। हाईकोर्ट ने मामले की स्वतंत्र जांच से जुड़ी याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के झूठ की गूंज की पोल खोलते हुए कहा कि आरोपों के समर्थन में कांग्रेस कोई सबूत नहीं दे पाई। हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर संतोष जताते हुए इसमें किसी तरह के दखल देने से इनकार कर दिया। राज्य सरकार की ओर से निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने कहा कि इस स्तर पर किसी अतिरिक्त न्यायिक निर्देश की जरूरत नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने दीजिए, पुलिस को अपना काम करने दीजिए।
🚨 बिग ब्रेकिंग न्यूज 🔥🔥
कांग्रेस की जातिवादी राजनीति को झटका
राहुल गांधी फिर बेइज्जत हुएकांग्रेस हाईकोर्ट में कोई सबूत नहीं दे पाई की मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद उस जगह का शुद्धिकरण किया गया था
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि वह उत्तराखंड पुलिस की जांच से संतोष है तथा… pic.twitter.com/ZkcasRsHKT
— संजीव झा 🚩 (@jhasanjeev95) September 8, 2026
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खारिज की स्वतंत्र जांच की मांग
गौरतलब है कि देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ की ओर से हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि सभा के उपरांत सार्वजनिक रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण किए जाने से समाज में वैमनस्यता फैलने की आशंका बढ़ गई है। इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग स्पष्टीकरण और धार्मिक बयानबाजी सामने आई थी, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे पर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था। याचिका में कहा गया है कि हल्द्वानी में शुद्धिकरण करने वालों की एफआईआर तो दर्ज कर ली गई, लेकिन कांग्रेसियों की एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
हल्द्वानी, उत्तराखंड: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुद्धिकरण मामले में कोर्ट ने स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच, CCTV फुटेज और साक्ष्य सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता के वकील रक्षित जोशी ने कहा, “हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष… pic.twitter.com/2qFqSWIYfL
— IANS Hindi (@IANSKhabar) September 7, 2026
जनहित याचिका राजनीतिक रूप से प्रेरित-एडवोकेट जनरल
उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है और मामले की जांच पहले से ही चल रही है। राज्य ने जनहित याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि मामले में 2 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें एक हल्द्वानी में और दूसरी मीडिया में छपी खबर के आधार पर जीरो एफआईआर बेंगलुरु में दर्ज हुई है। बेंगलुरू में दर्ज हुई एफआईआर जांच के लिए हल्द्वानी में ट्रांसफर कि जानी है। सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि पुलिस मामले में निष्पक्ष जांच करेगी।
खड़गे जी ने कथित “शुद्धिकरण” का मुद्दा संसद में मुद्दा उठाया था। 21 दिन बाद राहुल गांधी को याद आया कि इस मुद्दे से हिंदुओं को बांटा जा सकता है। लेकिन जिस दिन राहुल गांधी ने यह मुद्दा उठा कर प्रेस कॉन्फ्रेंस की उसी दिन मैंने ट्वीट किया था कि जब शुद्धिकरण का यज्ञ करने वालो में भी… https://t.co/WDc8J9srh3 pic.twitter.com/S2Vmab7Hci
— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) September 8, 2026
संसद मार्ग थाने में FIR दर्ज कराने पहुंचे कांग्रेस के दलित और आदिवासी सांसद
‘खड़गे शुद्धिकरण’ के खिलाफ कांग्रेस के दलित और आदिवासी सांसद 8 सितंबर को संसद मार्ग थाने में FIR दर्ज कराने पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के दलित और आदिवासी सांसदों ने ‘खड़गे शुद्धिकरण’ मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा है। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के 32 सांसद 9 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के स्थल पर कथित रूप से किए गए “शुद्धिकरण यज्ञ” के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपेंगे। दरअसल, कांग्रेस यूपी सहित पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव से दलितों का वोट हासिल करने के लिए इसे सियासी मुद्दा बनाना चाहती है।
‘Angry’ Congress MP @VarshaEGaikwad at Parliament Street Police Station, demanding FIR in Haldwani Shuddikaran incident. pic.twitter.com/eB3siqOMXt
— Rahul Gautam (@Scribe_Rahul) September 8, 2026
आइए जानते हैं कि राहुल गांधी दलित वोट हासिल करने के लिए किस तरह हिन्दुओं को आपस में ही लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं…
भारतीय राजनीति में दलित वोट बैंक को साधने की कवायद हमेशा से केंद्रीय बिंदु रहा है। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए दलित वोट बैंक पर कब्जे के लिए महासंग्राम शुरू हो चुका है। इस महासंग्राम में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी से पिछड़ती आ रही कांग्रेस अब आगे निकलने के लिए नई-नई रणनीति अपना रही है। इसी रणनीति के तहत उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ के विवाद को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बड़ा राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है। हालांकि, यह दांव अब कांग्रेस और खुद राहुल गांधी के लिए एक सियासी चक्रव्यूह बनता नजर आ रहा है, जो कई मोर्चों पर बैकफायर (Backfire) होता दिख रहा है।

हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली और शुद्धिकरण
दरअसल, 8 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी की ‘विजय शंखनाद’ रैली हुई थी, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी शिरकत की थी। आरोप है कि इस दौरान मंच और मैदान से ‘अल्लाह हू अकबर’ / ‘नारा-ए-तकबीर’ जैसे नारे लगाए गए। इस रैली के दो दिन बाद यानी 10 अगस्त 2026 को उस स्थल पर कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया गया। ‘श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ और स्थानीय हिंदू संगठनों ने रामलीला मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ/हवन किया। आयोजकों का तर्क था कि रामलीला मैदान धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र है और वहां राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम नारे लगाने से धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन हुआ है, जिससे पवित्रता खंडित हुई। दक्षिणपंथी संगठनों और स्थानीय लोगों ने उस मंच व स्थल पर गंगाजल छिड़काव का अनुष्ठान किया, जिसको लेकर राजनीतिक विवाद और प्रदर्शन हुए।
कलयुग में सनातन की धर्म ध्वजा दलित के हाथों ही लहराएगी
हल्द्वानी रामलीला मैदान पर जिहादी नारे लगवाने के बाद उक्त स्थान का शुद्धिकरण दलित और ओबीसी समाज के हाथों हुआ ।
नाम इस प्रकार है।👇
OBC अंकित पाल
SC नंदकिशोर आर्य
SC मोहित आर्य
SC विनोद आर्य pic.twitter.com/rCxO1abkdg— राजू वाल्मीकि चौहान (@RajuValmikiN) August 14, 2026
राहुल गांधी की भड़काने की कोशिश,एक्शन से बड़ा रिएक्शन होगा
कांग्रेस ने इस पूरी घटना को एक सियासी अवसर के रूप में देखा और मल्लिकार्जुन खड़गे के दलित समुदाय से होने से जोड़ दिया। राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे सीधे तौर पर ‘छुआछूत का दूसरा रूप’ और दलितों का अपमान करार दिया। राहुल ने मांग की कि ऐसा कृत्य करने वालों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि हम चाहते हैं कि उत्तराखंड में हमारे अध्यक्ष को न्याय मिले। हमने फैसला कर लिया है। अब उनके कोर्ट में बॉल है। अगर वो एक्शन लें, जो लेना चाहिए… बहुत अच्छा, अगर एक्शन नहीं लेंगे, तो हमारा कोई ना कोई रिएक्शन आएगा। एक्शन से बड़ा रिएक्शन होगा। राहुल गांधी ने इसे खड़गे की दलित पहचान से जोड़ते हुए बीजेपी और आरएसएस की कथित मानसिकता पर सवाल उठाए।
#WATCH दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, “राजस्थान में हमारे CLP नेता मंदिर जाते हैं, तो भाजपा नेता ‘शुद्धिकरण’ करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे जी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश और संविधान के लिए दिया है, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने जाते हैं, तो… pic.twitter.com/HonJ4sfWMA
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 29, 2026
आइए अब जानते हैं कि राहुल गांधी का झूठ कैसे बार-बार अदालतों की चौखट पर जाकर दम तोड़ देता है और उन्होंने कब-कब अदालतों के सामने सफाई दी है और लिखित माफी तक मांगी है …
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का राजनीतिक सफर ऐसी अनेक माफी/खेद से भरा पड़ा है, जहां उन्होंने पहले सनसनीखेज आरोप लगाए, फिर तथ्यों के अभाव में अदालतों के सामने सफाई दी, खेद जताया या लिखित माफी तक मांगनी पड़ी। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि उनकी राजनीति में तथ्यात्मक दृढ़ता की अपेक्षा राजनीतिक अपरिपक्वता अधिक दिखाई देती है। आलोचकों का कहना है कि राहुल गांधी के बयान पुख्ता तथ्यों से अधिक भावनाओं, सुनी-सुनाई बातों और राजनीतिक नारेबाजी पर आधारित होते हैं। एक तरफ राहुल गांधी कहते हैं- मैं ‘राहुल सावरकर’ नहीं राहुल गांधी हूं, कभी माफी नहीं मांगने वाला। वहीं दूसरी तरफ वह सुप्रीम कोर्ट में अवमानना मामले में तीन बार बिना शर्त माफी मांगते हैं।
बार-बार माफी राहुल गांधी की रणनीतिक और राजनीतिक विफलता
ताजा मामला केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान से जुड़ा है। चुनावी मंच से लगाए गए आरोपों पर वर्षों बाद राहुल गांधी को अदालत के समक्ष यह स्वीकार करना पड़ा कि उनका बयान तथ्यात्मक रूप से सही नहीं था और उन्हें उस पर खेद व्यक्त करना पड़ा। इससे पहले ‘चौकीदार चोर है’ मामले में भी उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में एक नहीं, बल्कि क्रमशः स्पष्टीकरण, खेद और अंततः बिना शर्त माफी वाला हलफनामा दाखिल करना पड़ा था। सवाल यह है कि क्या एक राष्ट्रीय नेता के लिए बार-बार ऐसी स्थिति में पहुंचना केवल राजनीतिक रणनीति की विफलता है, या फिर यह नेतृत्व की उस शैली का परिणाम है जिसमें आरोप पहले लगाए जाते हैं और तथ्यों की पड़ताल बाद में की जाती है? यही प्रश्न आज राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली के केंद्र में खड़ा दिखाई देता है। दरअसल, विपक्ष का दायित्व ही सरकार से कठिन प्रश्न पूछना है, किंतु लोकतंत्र की यही स्वतंत्रता तब अपनी गरिमा खो देती है, जब आरोप तथ्यों की कसौटी पर टिक नहीं पाते और भरी अदालत में अंतिम सांसें गिनने लगते हैं।
माफी नंबर 3: पनामा पेपर्स से कार्तिकेय चौहान को गलत जोड़ा
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान से राहुल की माफी का ताजा मामला जुड़ा है। चुनावी भाषण में राहुल गांधी ने उन्हें पनामा पेपर्स से जोड़ते हुए भ्रष्टाचार का संकेत दिया था। बाद में यह दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाया गया। मामला अदालत तक पहुंचा। वर्षों बाद जब विवाद न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ा, तब राहुल गांधी ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि यह एक गलती थी और उन्होंने माफी के लिए खेद व्यक्त किया। अदालत में उनके बयान का सार यही था कि यह तथ्यात्मक भूल थी और उनका उद्देश्य कार्तिकेय चौहान के बारे में गलत आरोप लगाना नहीं था। राजनीतिक दृष्टि से यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि चुनावी मंच पर बोले गए शब्द वर्षों बाद भी न्यायिक कसौटी पर परखे जाते हैं। अदालतें राजनीतिक भाषण और तथ्यात्मक आरोप के बीच स्पष्ट अंतर करती हैं।
माफी नंबर 2: ‘चौकीदार चोर है’ और सुप्रीम कोर्ट में तीन हलफनामे
राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित प्रकरण राफेल सौदे के दौरान दिया गया उनका नारा ‘चौकीदार चोर है’ रहा। चुनावी सभाओं में यह नारा कांग्रेस के अभियान का केंद्र बन गया। विवाद तब गहरा गया, जब राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से यह कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि ‘चौकीदार चोर है।’ यहीं से मामला राजनीतिक बहस से निकलकर न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ गया। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की। अदालत ने राहुल गांधी से जवाब मांगा। पहले हलफनामे में उन्होंने इसे चुनावी माहौल की गर्मा-गर्मी की टिप्पणी बताते हुए सफाई दी। अदालत संतुष्ट नहीं हुई। माफी के दूसरे हलफनामे में उन्होंने खेद व्यक्त किया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया कि केवल ‘रेग्रेट’ पर्याप्त नहीं है। अंततः तीसरे हलफनामे में राहुल गांधी को बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने स्वीकार किया कि अदालत के आदेश को गलत तरीके से उद्धृत करना उनकी भूल थी। राहुल गांधी के माफीनामा को मंजूर करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा था- “दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिना पुष्टि के आरोपी राहुल ने पीएम के बारे में कोर्ट के हवाले से ऐसी बात कही। भविष्य में वे ध्यान रखें। इतनी जिम्मेदार राजनीतिक स्थिति वाले व्यक्ति को सावधान रहना चाहिए।”
माफी नंबर 1: 1984 दंगों पर मां सोनिया की माफी का समर्थन
1984 के सिख विरोधी दंगों का प्रश्न भी राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन का संवेदनशील अध्याय रहा है। जब उनसे कांग्रेस की भूमिका पर माफी मांगने को कहा गया, तब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा पहले व्यक्त किए गए खेद और माफी का पुरजोर समर्थन किया। यानि एक तरह से सिख विरोधी दंगों के लिए राहुल गांधी ने भी मन से माफी मांगी। क्योंकि यह राजनीतिक रूप से स्वीकारोक्ति थी कि उस त्रासदी पर कांग्रेस नेतृत्व पहले ही खेद जता चुका है। आलोचकों ने इसे अपर्याप्त माना, जबकि समर्थकों ने इसे संस्थागत जिम्मेदारी की निरंतरता बताया। यह प्रसंग भी इस बात का उदाहरण है कि बड़े राजनीतिक मुद्दों पर शब्दों का चयन कितना महत्वपूर्ण होता है।
विश्वसनीयता ही कुशल नेतृत्व की सबसे बड़ी कसौटी
इन बयानों और घटनाओं में एक समानता स्पष्ट दिखाई देती है। पहले तीखा आरोप, फिर विवाद, उसके बाद अदालत, और अंततः सफाई, खेद या माफी। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार को चुनौती देना है, लेकिन चुनौती तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। क्योंकि नेतृत्व केवल लोकप्रियता का नाम नहीं है। एक बड़े नेता की पहचान उसके शब्दों की विश्वसनीयता से होती है। यदि किसी नेता का हर बड़ा आरोप अंततः अदालत में जाकर कमजोर पड़ जाए, तो उसके भविष्य के आरोपों की विश्वसनीयता भी स्वतः प्रभावित होती है। यही कारण है कि राजनीति में तथ्य, संयम और जिम्मेदारी को उतना ही महत्व दिया जाता है, जितना आक्रामकता को। यदि हर कुछ वर्षों में किसी राष्ट्रीय नेता को अपने ही बयानों पर अदालत के सामने सफाई देनी पड़े, तो इससे उनकी विश्वसनीयता प्रभावित होती है। राजनीति में भाषण का उद्देश्य केवल सुर्खियां बटोरना नहीं होता। वह जनमत निर्माण का माध्यम होता है। इसलिए जब कोई वरिष्ठ नेता बार-बार ऐसे आरोप लगाता है, जो बाद में प्रमाणित नहीं हो पाते, तो जनता धीरे-धीरे आरोपों की गंभीरता पर ही संदेह करने लगती है।
राहुल को पहले भी मुश्किल में डाल चुके हैं उनके बोल
‘मोदी सरनेम’ पर विवादित टिप्पणी
13 अप्रैल 2019 को कर्नाटक में चुनावी रैली में राहुल गांधी ने ‘मोदी सरनेम’ पर विवादित टिप्पणी की थी। राहुल ने कहा था, ‘नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?’ इस पर बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। सूरत सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को दोषी करार दिया। उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई।
वीर सावरकर पर भी विवादास्पद बोल
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 17 नवंबर, 2022 को राहुल गांधी ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि सावरकर ने सजा से डरकर अंग्रेजों से माफी मांग ली थी। ऐसा करके उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल समेत सभी को धोखा दिया। राहुल के इस बयान पर सावरकर के पौत्र रणजीत सावरकर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है। लखनऊ में एक अधिवक्ता ने भी इस मामले में केस दर्ज कराया है।
आरएसएस पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप
2014 में चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने आरएसएस को महात्मा गांधी की हत्या का जिम्मेदार ठहराते हुए टिप्पणी की थी। रैली महाराष्ट्र के भिवंडी में थी। वहीं के एक स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ता ने इस मामले में राहुल पर मामला दर्ज कराया था। यह मामला अभी लंबित है। हाल ही में लंदन में आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से करने के मामले में भी राहुल पर मामला दर्ज कराया गया है। 2018 में ठाणे की अदालत ने राहुल गांधी पर आरोप तय किए थे। ये मामला अब तक अदालत में चल रहा है।
भारत जोड़ो यात्रा में KGF-2 के गाने पर केस
भारत जोड़ो यात्रा में KGF-2 का गाना इस्तेमाल करने के खिलाफ राहुल गांधी के अलावा जयराम रमेश और सुप्रिया श्रीनेत के खिलाफ ये केस दर्ज कराया गया था। ये केस एमआरटी म्यूजिक कंपनी ने दर्ज कराया था। KGF-2 के म्यूजिक का कॉपीराइट इसी के पास है। कंपनी का आरोप है कि बिना परमिशन के गानों का इस्तेमाल किया गया। कॉपीराइट के इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेताओं के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था।
राफेल पर मुम्बई हाईकोर्ट में मानहानि का केस
नवंबर 2018 में, महाराष्ट्र भाजपा नेता महेश श्रीश्रीमल ने ‘कमांडर-इन-चोर’ वाले बयान को लेकर राहुल पर मानहानि का मुकदमा दायर किया था। महेश श्रीश्रीमल का ये कहना है कि राफेल विवाद के दौरान दिया गया राहुल का ये बयान नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना था। कुछ दिनों की सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। महेश श्रीश्रीमल का ये कहना है कि राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से संपर्क किया था और शिकायत को रद्द करने की मांग भी की थी। इस मामले की सुनवाई भी अभी शुरू नहीं हुई है।
राहुल ने नोटबंदी को लेकर अमित शाह पर टिप्पणी
23 जून, 2018 के एक ट्वीट के आधार पर राहुल के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया था। राहुल ने अपने ट्वीट में ये कहा था कि अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के निदेशक अमित शाह जी को बधाई। पुराने नोटों को नई दौड़ में बदलने में आपके बैंक को प्रथम पुरस्कार मिला 750 रुपये। पांच दिनों में करोड़! लाखों भारतीय जिनके जीवन को आपने नष्ट कर दिया, नोटबंदी आपकी इस उपलब्धि को सलाम करती है। #ShahZyadaKhaGaya”. राहुल के वकील अजीत जडेजा ने कहा है कि मामले पर अभी पूछताछ जारी है। केस की सुनवाई चल रही है।
असम मठ पर टिप्पणी पर लोक अदालत में मुकदमा
दिसंबर 2015 में राहुल के खिलाफ असम में आरएसएस के एक स्वयंसेवक ने आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था। आरएसएस के इस स्वयंसेवक ने केस दर्ज कर ये कहा था कि उन्हें असम के बरपेटा सतरा में जाने से ये कह कर रोक दिया गया था कि वो आरएसएस से जुड़े हुए हैं। उसी दौरान स्वयंसेवक संघ के सदस्य ने असम की लोक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। राहुल गांधी के वकील अंशुमन बोरा के मुताबिक यह मामला अभी भी लोकल कोर्ट में चल रहा है। ये मामला सुनवाई के अंतिम चरण में है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ करवा देता है विरोधियों की हत्या
फरवरी 2019 में राहुल और सीपीआई (एम) जनरल सीताराम येचुरी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था। ये मुकदमा महाराष्ट्र के आरएसएस कार्यकर्ता और वकील धृतिमान जोशी ने दायर किया था। धृतिमान जोशी ने याचिका में ये कहा था कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के 24 घंटे बाद राहुल ने ये बयान दिया था कि कोई आरएसएस और भाजपा की विचारधारा के खिलाफ बोलता है, तो उसे चुप कराने की कोशिश की जाती है। उस पर दवाब डाला जाता है। उसे पीटा जाता है। उसपर हमले कराए जाते हैं। यहां तक की उसे जान से भी मार दिया जाता है।
इन 7 मामलों में जमानत पर हैं कांग्रेस के युवराज
1. ‘मोदी सरनेम’ मानहानि मामलाः 23 मार्च 2023 को ‘मोदी सरनेम’ मानहानि मामले में 2 साल की सजा मिलने के बाद राहुल गांधी को जमानत मिली। अदालत ने 15 हजार रुपये के मुचलके पर उनकी जमानत मंजूर कर ली। राहुल को फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन की मोहलत दी है।
2. नेशनल हेराल्ड केसः राहुल गांधी को जिन मामलों में जमानत मिली है, उसमें सबसे प्रसिद्ध मामला नेशनल हेराल्ड का है। इस मामले में राहुल गांधी और सोनिया गांधी दोनों को ही 50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत मिली हुई है। यह केस दिसंबर 2015 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर किया था।
3. सभी मोदी चोर मामलाः 6 जुलाई 2019 को राहुल गांधी को पटना की एक अदालत ने मानहानि के एक मामले में जमानत दी थी। यह केस भाजपा नेता और बिहार के तात्कालीन डिप्टी सीएम ने उनकी एक टिप्पणी के बाद किया था। अपनी टिप्पणी में राहुल ने कहा था कि सभी मोदी चोर हैं।
4. सहकारी बैंक मामलाः 12 जुलाई 2019 को राहुल गांधी को मानहानि के मामले में अहमदाबाद की एक अदालत से जमानत मिली थी। यह मामला अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक ने दर्ज कराया था। दरअसल, राहुल ने आरोप लगाया था कि बैंक नोटबंदी के दौरान नोटों की अदला-बदली के एक घोटाले में शामिल था।
5. RSS गौरी लंकेश मामलाः मुंबई की एक अदालत में आरएसएस कार्यकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दाखिल किया था। इस मामले में 4 जुलाई 2019 को राहुल को जमानत मिली राहुल ने गौरी लंकेश की हत्या को ‘बीजेपी-आरएसएस विचारधारा’ से जोड़ते हुए टिप्पणी की थी। उन्हें इस मामले में 15 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिली थी।
6. RSS महात्मा गांधी मामलाः आरएसएस के एक और कार्यकर्ता ने महाराष्ट्र के भिवंडी में राहुल गांधी के खिलाफ केस किया था। इस मामले में राहुल को नवंबर 2016 में जमानत दी गई थी। राहुल गांधी ने कहा था कि RSS ने महात्मा गांधी की हत्या की है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें इस तरह की टिप्पणी के लिए फटकार लगाई थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि राहुल को मुकदमे का सामना करना पड़ेगा और अदालत में अपनी बात साबित करनी होगी
7. आरएसएस पर आरोप मामलाः आरएसएस ने राहुल गांधी के खिलाफ गुवाहाटी कोर्ट में मानहानि का केस दाखिल किया था। राहुल गांधी ने दावा किया था कि उन्हें दिसंबर 2015 में असम के बारपेट सतरा में प्रवेश करने से आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने रोका था। इस मामले में उन्हें सितंबर 2016 में 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी गई थी।









