18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक पटल पर सामरिक शक्ति और सांस्कृतिक आत्मगौरव का सशक्त प्रदर्शन किया। ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करवाकर सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध विश्व के 11 शक्तिशाली देशों को एक मंच पर लाना भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, सम्मेलन के भव्य राजकीय रात्रिभोज में विशुद्ध भारतीय सात्विक थाली और ‘श्री अन्न’ (मिलेट्स) के माध्यम से देश की समृद्ध पाक परंपरा ने ‘अतिथि देवो भवः’ के भाव को वैश्विक सम्मान दिलाया। इसके विपरीत, कूटनीतिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर मिली इस दोहरी सफलता को पचाने में असमर्थ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने घोषणापत्र को “सरकारी पीआर” बताकर और मेहमानों के खानपान पर ओछे विवाद खड़े करके अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है।
राहुल गांधी का सतही दृष्टिकोण: गंभीर कूटनीति के बीच मेन्यू और आंकड़ों की ओछी सियासत
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के बीच आतंकवाद और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर सामरिक मंथन के समय नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का सोशल मीडिया पर ‘छोले भटूरे’ की तस्वीर डालकर ’80 प्रतिशत मांसाहारी’ के छद्म आंकड़ों का हवाला देना उनके सतही दृष्टिकोण को उजागर करता है। एक गरिमामय राजनयिक आयोजन को शाकाहारी बनाम मांसाहारी के कृत्रिम विवाद में घसीटना कांग्रेस की विभाजनकारी वोटबैंक राजनीति का प्रतीक है। वैश्विक विमर्श के समय भोजन की थाली पर ऐसी सतही बयानबाजी नेता प्रतिपक्ष की राजनीतिक अपरिपक्वता को ही साबित करती है।
For the record: 80% of Indians are non-vegetarian.
Indian non-vegetarian food is delicious. As are my sister’s chole bhature. pic.twitter.com/8f6ziKjLan
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 13, 2026
थाली में समूचे अखंड भारत का स्वाद, कांग्रेस की अज्ञानता बेपर्दा
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राजकीय रात्रिभोज के जरिए विविधता को दबाया गया, जबकि वास्तविकता इसके एकदम उलट थी। मेन्यू में समूचे भारत के पारंपरिक स्वादों का संगम प्रस्तुत किया गया था। इसमें उत्तर भारत का पनीर लबाबदार और कश्मीर की गुच्ची, दक्षिण भारत का टमाटर रसम (सारू) और पोरियाल, पश्चिम भारत की गुजराती खांडवी और पुरानी दिल्ली के पारंपरिक मिष्ठान्न शामिल थे। जिसने भारत की बहुरंगी सांस्कृतिक और खानपान परंपरा का अध्ययन नहीं किया, वही अज्ञानी विपक्ष इतने विराट क्षेत्रीय संगम पर संकीर्ण सवाल उठा सकता है।
BRICS डिनर में क्या-क्या परोसा गया?🍽️🇮🇳
खंडवी मिलेफ्यू, खुम्ब गलौटी, पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, मिलेट पुलाव से लेकर जलेबी और शहतूत फिरनी तक—मेन्यू में दिखा भारत का खास स्वाद।
इंटरनेशनल मीडिया सेंटर से देखिए ये वीडियो 👇#BRICS2026 #BRICSSummit #BharatMandapam #IndianCuisine pic.twitter.com/1P7LtaHvS7
— Payall Singhh (@PayallSingh13) September 13, 2026
औपनिवेशिक हैंगओवर बनाम सांस्कृतिक आत्मगौरव: भारतीय विरासत से विपक्ष की चिढ़
दशकों तक कूटनीतिक आयोजनों में केवल पश्चिमी शैली (कॉन्टिनेंटल) का भोजन परोसना ही शिष्टाचार माना जाता था, जो औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक था। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पंच प्रण’ के तहत इस हीनभावना को तोड़कर विशुद्ध भारतीय, सात्विक और पारंपरिक थाली को आत्मगौरव के साथ विश्व के सम्मुख पेश किया। जब संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के विशेषज्ञ भारत के मिलेट्स, आयुर्वेद और पौधों पर आधारित खानपान को पर्यावरण व स्वास्थ्य के अनुकूल मान रहे हैं, तब कांग्रेस का इस पर उपहास उड़ाना उसकी भारतीय परंपराओं से दूरी को दर्शाता है।
रशियन जर्नलिस्ट के अनुसार ब्रिक्स मेन्यू का खाना बहुत स्वादिष्ट था और भारत के सभी इलाकों के खाने को दिखाया गया था। काश, यह सिर्फ़ दो दिन है, यह कम से कम तीन और दिन चल पाता।
जैसा कि कहा गया है, जिन्हें इनवाइट नहीं किया गया, वे सबसे ज़्यादा रो रहे हैं 😹 pic.twitter.com/VHVS3rWJc0
— Devendra Chandra (@drdevendchandra) September 14, 2026
कूटनीतिक प्रभाव पचा नहीं पा रहा विपक्ष, तुष्टिकरण की राजनीति बेनकाब
विश्व की 50 प्रतिशत आबादी और 40 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करने वाले 11 ब्रिक्स देशों ने भारत के रुख का पुरजोर समर्थन किया है। इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं द्वारा घोषणापत्र को महज ‘पीआर मार्केटिंग’ बताना उनकी हताशा और तुष्टिकरण की पुरानी मानसिकता को उजागर करता है। भाजपा ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब दुनिया भारत के आतंकवाद विरोधी रुख के साथ खड़ी है, तब कांग्रेस अपनी नकारात्मकता से देश के कूटनीतिक सामर्थ्य को नीचा दिखाने का प्रयास कर रही है।
नई दिल्ली में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कुछ ऐसे दृश्य जो टीवी चैनलों पर दिखाई नहीं दिए। pic.twitter.com/RcimYbvEJV
— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) September 14, 2026
शहीदों के बलिदान और आतंक पीड़ितों का घोर अपमान
पहलगाम आतंकी हमले की अंतरराष्ट्रीय निंदा को राजनीतिक मार्केटिंग बताना सीमा पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों और आतंक से पीड़ित निर्दोष नागरिकों के गहरे घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। यह कितनी अजीब बात है कि जब समूचा विश्व भारत के साथ खड़ा होकर सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता दिखा रहा है, तब देश का मुख्य विपक्षी दल अपनी ही सेना और सरकार के प्रयासों को कटघरे में खड़ा करके आतंक के आकाओं को राजनीतिक ऑक्सीजन देने का काम कर रहा है।
#WATCH | दिल्ली | ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, “दिल्ली घोषणापत्र जो आया है, इसमें आतंकवाद की निंदा की गई है। इसके अंदर पहलगाम की घटना की भी निंदा की गई है लेकिन क्या इसमें कहीं पर बताया गया… pic.twitter.com/fuFAfpO7OC
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 13, 2026
आतंकियों पर चीन के वीटो का दौर समाप्त, अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान
दशकों तक संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी आतंकियों और उनके संगठनों पर तकनीकी अड़ंगा (वीटो) लगाकर संरक्षण देने वाले चीन को भारत ने ब्रिक्स के मंच पर झुकने पर विवश कर दिया। ब्रिक्स में प्रत्येक निर्णय आम सहमति से लिया जाता है, इसके बावजूद चीनी नेतृत्व की उपस्थिति में घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद और पहलगाम हमले की स्पष्ट निंदा दर्ज कराना मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। इस कूटनीतिक घेराबंदी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का आतंक तंत्र पूरी तरह बेनकाब और अलग-थलग हो चुका है।
पी. चिदंबरम के संकीर्ण सवालों से खुली कांग्रेस की कूटनीतिक दृष्टिहीनता, बचाव में आई पार्टी
ब्रिक्स सम्मेलन से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भारत की वैश्विक भागीदारी पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा था कि उन्हें यह नहीं पता कि कितने राष्ट्राध्यक्ष भारत आ रहे हैं, लेकिन पिछले दो-तीन ब्रिक्स सम्मेलनों या क्वाड से भारत को क्या ठोस लाभ या नतीजा मिला, उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। भाजपा ने चिदंबरम के इस बयान पर प्रहार करते हुए कहा कि जिन्हें यूपीए शासन में केवल लाचार कूटनीति की आदत थी, उन्हें नए भारत की सामरिक उपलब्धियां नजर नहीं आ रहीं। चिदंबरम के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान से जब कूटनीतिक हलकों में पार्टी की किरकिरी हुई, तो असहज कांग्रेस को आनन-फानन में सफाई देने के लिए आगे आना पड़ा।
विश्व AI Summit में भोंडा और नग्न प्रदर्शन करने के बाद, आदत से मजबूर कांग्रेस ने एक बार फिर #BRICSSummit की पूर्व संध्या पर दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बयान दिया है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम साहब का यह कहना कि “BRICS Summit से क्या हासिल होगा?” न केवल उनकी सोच पर सवाल… pic.twitter.com/IXAlhJZ0AV
— BJP (@BJP4India) September 10, 2026
यूपीए के लाचार ‘डोजियर युग’ से मोदी के ‘निर्णायक कूटनीति युग’ तक का बदलाव
भाजपा ने कांग्रेस के इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि यूपीए के दस वर्षों में पाकिस्तान प्रायोजित बड़े हमलों के बाद केवल औपचारिक डोजियर सौंपे जाते थे, जिनका कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता था। इसके विपरीत, आज का भारत सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के सैन्य पराक्रम के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भी दुश्मनों को घेरने का सामर्थ्य रखता है। कागजी औपचारिकताओं का वह लाचार दौर अब निर्णायक कूटनीति में बदल चुका है।
यूएई-ईरान विवाद सुलझाकर सर्वसम्मत घोषणापत्र, भारतीय राजनय की मैराथन विजय
नई दिल्ली घोषणापत्र की सफलता भारतीय राजनय के अथक परिश्रम का प्रतिफल है। इससे पूर्व ईरान और यूएई के आपसी भू-राजनीतिक गतिरोध के कारण साझा बयान पर सहमति बनना कठिन दिख रहा था। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारतीय राजनयिकों ने देर रात 4 बजे तक मैराथन वार्ताएं चलाकर दोनों देशों के बीच मतभेदों को पाटा और घोषणापत्र पर 100 प्रतिशत सर्वसम्मति बनाई। जहां समूचा विश्व भारत की इस ‘संकटमोचक’ और सर्वमान्य मध्यस्थ भूमिका का लोहा मान रहा है, वहीं कांग्रेस का इसे पीआर बताना देश के राजनयिकों के पसीने और सामरिक सूझबूझ का अपमान है।
युद्ध के बीच दिल्ली में आमने-सामने… और मंच बना BRICS
ईरान और UAE के बीच पश्चिम एशिया में तनाव के बीच नई दिल्ली में BRICS का मंच एक अहम कूटनीतिक मुलाकात का गवाह बना
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच… pic.twitter.com/opp70u95Nh
— SignalX (@TheSignalX_) September 12, 2026
जम्मू-कश्मीर के अमन-चैन और विकास को वैश्विक मान्यता
पहलगाम हमले की बहुपक्षीय निंदा से यह स्पष्ट हो गया है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में लौटे अमन, विकास और रिकॉर्ड पर्यटन के नए दौर को दुनिया पहचान चुकी है। सीमा पार से कश्मीर की शांति को भंग करने के षड्यंत्रों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विफल कर भारत ने अपनी संप्रभुता को सिद्ध किया है। जब पूरा विश्व घाटी के शांतिप्रिय नागरिकों के साथ खड़ा है, तब कांग्रेस द्वारा इस विमर्श को कमजोर करना परोक्ष रूप से अलगाववादी ताकतों को बल देने जैसा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के दावे को मिला संबल
ब्रिक्स के इस साझा मंच पर वैश्विक संस्थाओं में तात्कालिक सुधारों की मांग पर भारत का नेतृत्व निर्विवाद रूप से उभरा। नई दिल्ली घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत जैसी उभरती शक्ति की स्थायी सदस्यता के समर्थन को पुरजोर ढंग से रेखांकित किया गया। मोदी सरकार भारत को विश्व की शीर्ष नीति-निर्धारक मेज पर स्थायी स्थान दिलाने के निर्णायक पड़ाव पर ले आई है, जबकि विपक्ष इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राष्ट्र के साथ खड़े होने के बजाय गैर-जरूरी विवादों में उलझा है।
स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता, किसी गुट का पिछलग्गू नहीं नया भारत
गंभीर वैश्विक तनावों और दो-ध्रुवीय विश्व दबावों के बीच भी भारत ने ब्रिक्स में अपनी शर्तों पर सुरक्षा और आर्थिक एजेंडा तय किया। देश न किसी महाशक्ति के दबाव में झुका और न किसी गुट का प्यादा बना, बल्कि ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प पर अडिग रहते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रमाणित किया। यूपीए काल के अनिर्णय और संकोच के विपरीत, आज का भारत आत्मविश्वास के साथ वैश्विक शक्ति संतुलन को दिशा दे रहा है।
BRICS में भारत ने सिर्फ मेजबानी नहीं की, बल्कि अहम फैसलों को नई दिशा दी। 🇮🇳
देखिए BRICS के 10 बड़े फैसले, जिन्होंने व्यापार और विकास को नई रफ्तार दी और वैश्विक मंच पर Global South की आवाज़ को और मजबूती दी। ⬇️ pic.twitter.com/7uG5UzG4DB
— BJP (@BJP4India) September 14, 2026
‘मिशन LiFE’ और वैश्विक पर्यावरण विमर्श से विपक्ष की अनभिज्ञता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘मिशन LiFE’ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) आज सतत विकास का वैश्विक पैमाना बन चुका है। मिलेट्स और शाकाहारी व्यंजन न्यूनतम जल खपत और नगण्य कार्बन उत्सर्जन के साथ तैयार होते हैं, जो पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देते हैं। जब विश्व के पर्यावरणविद भारत के पारंपरिक खानपान को ग्लोबल वार्मिंग से निपटने का व्यावहारिक मार्ग मान रहे हैं, तब कांग्रेस का इस पर व्यंग्य करना उसके आधुनिक वैज्ञानिक सोच और जलवायु विमर्श से कटे होने का स्पष्ट प्रमाण है।
भारतीय किसानों, अन्नदाताओं और ‘श्री अन्न’ की मेहनत का सम्मान
ब्रिक्स सम्मेलन में परोसा गया पारंपरिक भोजन देश के करोड़ों छोटे किसानों और बाजरा, ज्वार, रागी उपजाने वाले अन्नदाताओं के परिश्रम को वैश्विक मंच पर दी गई मान्यता थी। प्रधानमंत्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन के तहत जब भारत के स्थानीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, तो कांग्रेस ने उसका उपहास उड़ाकर सीधे तौर पर देश के पसीना बहाने वाले किसानों के सम्मान को आघात पहुंचाया।
ब्रिक्स के मेन्यू में मिलेट पुलाव से जलेबी तक शामिल
◆ भोजन में मोटे अनाज को प्रमुखता देते हुए कई तरह के शाकाहारी व्यंजन शामिल किए गए
◆ मेन्यू में खांडवी, मशरूम कबाब, पनीर, हिमालयी गुच्छी, दक्षिण भारतीय शैली की सब्जियां और दाल का हल्का शोरबा परोसा गया#BRICS2026 | BRICS 2026 pic.twitter.com/3hA47bQQsJ
— News24 (@news24tvchannel) September 12, 2026
महिला स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदियों के हुनर पर कांग्रेस का प्रहार
रात्रिभोज में उपयोग की गई कई सामग्रियां, पारंपरिक सजावट और हस्तशिल्प देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ योजना से जुड़ी बहनों द्वारा तैयार किए गए थे। केंद्र सरकार ने भारत की नारी शक्ति के आर्थिक सामर्थ्य को दुनिया के शीर्ष नेताओं के सामने गौरव के साथ प्रदर्शित किया। कांग्रेस नेताओं ने भोजन और व्यवस्था का मजाक उड़ाकर अनजाने में देश की लाखों परिश्रमी ग्रामीण महिलाओं और महिला उद्यमियों के हुनर को नीचा दिखाने का प्रयास किया है।
विदेशी मेहमानों ने की भारतीय आतिथ्य की सराहना, अपने ही देश में अलग-थलग पड़ा विपक्ष
ब्रिक्स में पधारे विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भारत के भव्य आतिथ्य, उत्कृष्ट व्यवस्था और स्वास्थ्यप्रद खानपान की खुले दिल से प्रशंसा की। कई विदेशी नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से पारंपरिक भारतीय व्यंजनों के स्वाद और पोषण की सराहना की। भाजपा ने कहा कि जब विदेशी मेहमान स्वयं भारतीय सत्कार से अभिभूत होकर कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं, तब केवल कांग्रेस ही उस पर अंगुली उठा रही है। इससे साफ है कि देश की मुख्य विपक्षी पार्टी अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की नजर में भी अपनी नकारात्मकता के कारण अलग-थलग पड़ चुकी है।
‘भारत मंडपम’ और नए भारत के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर विपक्ष की कुंठा
कभी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाला भारत आज ‘भारत मंडपम’ और ‘यशोभूमि’ जैसे विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटरों में 11 महाशक्तियों की सफल मेजबानी कर रहा है। नए संसद भवन से लेकर भारत मंडपम तक, कांग्रेस हर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विरोध करती आई है। विश्वस्तरीय आयोजन के सफल संचालन ने यह सिद्ध कर दिया है कि देश आधुनिक अवसंरचना और वैश्विक नेतृत्व दोनों में सक्षम है, जिसे विपक्ष अपनी राजनीतिक कुंठा के चलते स्वीकार नहीं कर पा रहा है।
2012 का ब्रिक्स समिट दिल्ली के ताज होटल के दरबार हॉल में हुआ था. आपमें से कई लोगों ने इस हॉल में शादियां अटेंड की होगी.
फिर किसी ने सोचा कि दिल्ली में इंटरनेशनल समिट आदि के लिए इंफ्रा बनाना है. अब हमारे पास विश्व स्तरीय भारत मंडपम है.
सोचने की ही दरिद्रता थी, जो अब नहीं है. pic.twitter.com/iObCbGlCJs
— Dilip Mandal (@Profdilipmandal) September 12, 2026
परिवारवादी डिप्लोमेसी के मुकाबले 140 करोड़ नागरिकों की जन-कूटनीति
दशकों तक देश की विदेश नीति लुटियंस दिल्ली के एक परिवार के व्यक्तिगत संपर्कों और पश्चिमी ड्राइंग रूमों तक सीमित रखी गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कूटनीति को उस संकीर्ण दायरे से निकालकर देश के जवानों, किसानों, स्थानीय कारीगरों और 140 करोड़ नागरिकों के सांस्कृतिक स्वाभिमान से जोड़ दिया है। आज जब विश्व मंचों पर भारत का किसान, आम नागरिक और स्थानीय उत्पाद वैश्विक एजेंडा तय कर रहे हैं, तो परिवारवादी राजनीति के पैरोकारों को अपनी दशकों पुरानी राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आ रही है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश को नीचा दिखाने की पुरानी टूलकिट बेनकाब
भाजपा ने कहा कि यह कांग्रेस का पुराना और आजमाया हुआ तरीका बन चुका है। राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो विदेशी धरती पर जाकर भारत के लोकतंत्र और संस्थाओं पर सवाल उठाते हैं और जब विदेशी मेहमान भारत आते हैं, तब उनके सामने देश के मेन्यू और कूटनीति पर कीचड़ उछालते हैं। देश के अंदर या बाहर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली इस नकारात्मक टूलकिट की राजनीति को देश की जागरूक जनता भली-भांति समझ चुकी है।
‘ब्रांड इंडिया’ और अर्थव्यवस्था को पंख, विकास विरोधी एजेंडा विफल
भारत मंडपम में आयोजित यह ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन केवल एक राजनयिक वार्ता नहीं थी, बल्कि भारत की ‘सॉफ्ट पावर’, हस्तशिल्प, स्थानीय कृषि और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम था। इससे देश के पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और वैश्विक निवेश को भारी बढ़ावा मिला है। ऐसे स्वर्णिम अवसर पर जब पूरा विश्व भारत को एक वैश्विक महाशक्ति और निवेश के मुख्य केंद्र के रूप में देख रहा है, तब कांग्रेस की बचकानी बयानबाजी सीधे तौर पर ‘ब्रांड इंडिया’ की साख को बट्टा लगाने और देश की आर्थिक प्रगति में रोड़ा अटकाने का कुत्सित प्रयास है।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक पटल पर अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों और सांस्कृतिक मूल्यों का निर्भीक नेतृत्व कर रहा है। सीमा पार आतंकवाद पर 11 देशों की मुहर से लेकर भारतीय आतिथ्य के वैश्विक सम्मान तक, हर मोर्चे पर देश की प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। दूसरी तरफ, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव के हर अवसर पर विरोध तलाशने वाली कांग्रेस एक बार फिर जनता के सामने बेनकाब हुई है। नकारात्मकता और तुष्टिकरण की यह राजनीति मोदी सरकार के ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प और दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को कभी डिगा नहीं सकती।









