ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक समावेशी और संतुलित दिशा देने में मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभा रहा है। 11 सदस्य देशों वाला यह विस्तारित समूह (BRICS+) पश्चिमी देशों के ऐतिहासिक आर्थिक वर्चस्व के सामने ‘ग्लोबल साउथ’ को एक मजबूत विकल्प प्रदान कर रहा है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” थीम पर आधारित है। भारत की रणनीति इस संगठन को किसी पश्चिमी-विरोधी गुट के बजाय एक समावेशी मंच के रूप में संचालित करने की है। ब्रिक्स के इतिहास में भारत के नेतृत्व में कई ऐसी ऐतिहासिक पहलें और बदलाव पहली बार हो रहे हैं, जो इस संगठन के स्वरूप और वैश्विक प्रभाव को नई दिशा देने वाले हैं।

विस्तारित ब्रिक्स (BRICS+) की पहली बार भारत द्वारा अध्यक्षता
भारत ने इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता की थी, तब इसमें केवल 5 देश (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) थे। यह इतिहास में पहला अवसर है जब भारत 11 पूर्ण सदस्यों और दर्जनों साझेदार देशों वाले विस्तारित ‘ब्रिक्स+’ (BRICS+) की अध्यक्षता और मेजबानी कर रहा है। इतने बड़े और विविध मंच का नेतृत्व करना भारत के कूटनीतिक कद को दर्शाता है।

भारत ने दी ब्रिक्स की नई संकल्पना और परिभाषा
भारत ने पहली बार ब्रिक्स शब्द को केवल पांच संस्थापक देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के नाम के बजाय एक वैश्विक दृष्टिकोण (Vision) के रूप में पुनर्परिभाषित किया है। भारत ने ब्रिक्स के अक्षरों को “Building Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण) के एक नए अर्थ से जोड़ा है। आधिकारिक ब्रिक्स 2026 वेबसाइट के अनुसार, भारत का नेतृत्व चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
R – Resilience (लचीलापन): वैश्विक सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत बनाना ताकि वे भविष्य के किसी भी संकट को झेल सकें।
I – Innovation (नवाचार): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में मिलकर काम करना।
C – Cooperation (सहयोग): वैश्विक दक्षिण (Global South) के विकासशील देशों के बीच आपसी व्यावहारिक सहयोग को गहरा करना।
S – Sustainability (स्थिरता): हरित ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल (Sustainable) विकास को बढ़ावा देना।

ब्रिक्स का जन-केंद्रित और “मानवता प्रथम” दृष्टिकोण
पारंपरिक रूप से ब्रिक्स को केवल सरकारों, वित्तीय संस्थानों और भू-राजनीति तक सीमित माना जाता था। भारत ने पहली बार ब्रिक्स में “Humanity First” (मानवता प्रथम) की सोच शामिल की है, जिसके तहत ब्रिक्स को सिर्फ उच्च-स्तरीय वार्ताओं तक सीमित न रखकर आम लोगों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSMEs), युवाओं और महिलाओं के व्यापारिक गठबंधन (BRICS Women’s Business Alliance) से सीधे जोड़ा जा रहा है।

DPI / UPI मॉडल को ब्रिक्स का एजेंडा बनाना
ब्रिक्स में पहली बार भारत का UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल ब्रिक्स के सभी सदस्यों और ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के लिए मुख्य प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण का आधार बन रहा है। भारत किसी रेडी-मेड सिस्टम को थोपने के बजाय एक ‘ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी मॉडल’ दे रहा है, जिससे विकासशील देश अपना खुद का UPI जैसा डिजिटल पेमेंट और गवर्नेंस सिस्टम बना सकें।

500 से ज्यादा निवेशक,वित्त मंत्री और कारोबारी नेताओं की भागीदारी
भारत की अध्यक्षता में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में 500 से ज्यादा निवेशक, वित्त मंत्री और कारोबारी नेता भाग ले रहे हैं। इसका फोकस बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, डिजिटल क्षमता, सीमा पार निवेश और भुगतान प्रणाली पर है। भारत ने ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क और ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड जैसे प्रस्ताव भी आगे बढ़ाए हैं, ताकि ब्रिक्स देशों के स्टार्टअप और MSMEs को आपस में जोड़कर पूंजी और बाजार उपलब्ध कराया जा सके।

‘ब्रिज-बिल्डर’ की भूमिका निभा रहा भारत
वैश्विक गुटबाजी और तनाव के बीच यह पहली बार हो रहा है कि भारत एक ऐसे मेजबान के रूप में उभरा है जो रूस, चीन और मध्य पूर्व के देशों को एक मंच पर ला रहा है, साथ ही यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि यह संगठन किसी पश्चिमी देश या अमेरिका-विरोधी आक्रामक गुट के रूप में न देखा जाए। भारत का यह ‘ब्रिज-बिल्डर’ (सकारात्मक मध्यस्थ) वाला रुख वैश्विक मंच पर पहली बार ब्रिक्स को एक जिम्मेदार और समावेशी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।

गलवान घाटी में झड़प के बाद जिनपिंग का पहला भारत दौरा
ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। जिनपिंग का यह 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत का पहला दौरा होगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की भी उम्मीद है। 15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों के मारे जाने की बात मानी थी।










