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मोदी राज में दुनिया के मंच पर बढ़ा भारत का कद, दिल्ली BRICS समिट में दिखेगी देश की नई ताकत

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ब्रिक्स समिट ब्राजील

नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit की मेजबानी भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं है, बल्कि यह उस भारत की वैश्विक ताकत का प्रदर्शन है जो पिछले एक दशक में अर्थव्यवस्था, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कूटनीति के मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका को लगातार मजबूत किया है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत अब केवल बड़ी शक्तियों का साझेदार भर नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बनने के साथ-साथ पूर्व और पश्चिम के बीच एक संतुलित कूटनीतिक पुल (Diplomatic Bridge) की भूमिका भी निभा रहा है।

2026 में BRICS की अध्यक्षता और नई दिल्ली में समिट की मेजबानी इसी बढ़ते प्रभाव की अगली कड़ी है। भारत की अध्यक्षता का आधिकारिक थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। यानी फोकस एक ऐसी वैश्विक साझेदारी पर है, जो आर्थिक मजबूती, इनोवेशन, आधुनिक तकनीक और सतत विकास को साथ लेकर चले।

BRICS में भारत का बढ़ा प्रभाव
ब्रिक्स पिछले कुछ वर्षों में तेजी से एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में उभरा है। इसके विस्तार के बाद इसका आर्थिक और रणनीतिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। ऐसे समय में भारत की अध्यक्षता उसे वैश्विक व्यवस्था से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं तय करने का बड़ा अवसर देती है। भारत ने अपनी अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ की चिंताओं को प्रमुखता से रखा है। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और तकनीक तक उन सभी विषयों को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिनका सीधा संबंध विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन से है। भारत का संदेश साफ है—वैश्विक विकास की कोई भी चर्चा तब तक अधूरी है, जब तक विकासशील देशों की जरूरतों को फैसलों में उचित स्थान न मिले।

दुनिया के सामने दिखेगी भारत की आर्थिक ताकत
ब्रिक्स का मंच भारत के लिए आर्थिक कूटनीति को आगे बढ़ाने का बड़ा माध्यम है। व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ भारत ने MSME सेक्टर को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने और व्यापार की प्रक्रिया को सुलभ बनाने पर जोर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, BRICS देशों के बीच आपस में होने वाला व्यापार (Merchandise Trade) वर्ष 2003 में करीब 84 अरब डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर 1.17 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि ब्रिक्स सदस्य देशों के लिए कितना बड़ा आर्थिक बाजार बन चुका है। भारत की रणनीति इस बढ़ते बाजार का सीधा लाभ भारतीय कंपनियों, विशेषकर छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स तक पहुंचाने की है। ‘BRICS आर्थिक साझेदारी 2030’ जैसे प्रयास इसी सोच का परिणाम हैं।

मेक इन इंडिया से Global Supply Chain तक
वर्तमान समय में वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाना चाहती हैं और किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपना रही हैं। भारत के लिए यह बदलाव एक बड़ा अवसर बनकर आया है। विशाल घरेलू बाजार, युवा कार्यबल, तेजी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में एक विश्वसनीय केंद्र बनाती हैं। ब्रिक्स में लचीली और विविध ग्लोबल वैल्यू चेन पर भारत का जोर ‘मेक इन इंडिया’ के विजन से सीधा जुड़ता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में उत्पादन और निवेश को बढ़ावा देना, रोजगार सृजन करना और भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में मजबूती से स्थापित करना है।

UPI से AI तक, Digital India का लोहा मानती दुनिया
मोदी सरकार के दौरान भारत में हुई डिजिटल क्रांति वैश्विक स्तर पर अध्ययन का विषय बनी है। UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) ने भारत को डिजिटल इकोनॉमी के क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित किया है। अब भारत का यही डिजिटल मॉडल ब्रिक्स सहयोग का मुख्य हिस्सा बन रहा है। भारत की अध्यक्षता में आर्टिफिशियली इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, Industry 4.0, डिजिटल कौशल, और अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों पर साझा काम आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत का लक्ष्य केवल तकनीक साझा करना नहीं, बल्कि खुद को एक बड़े डिजिटल उपभोक्ता बाजार से आगे बढ़ाकर वैश्विक स्तर पर तकनीकी समाधान (Tech Solutions) देने वाले देश के रूप में पेश करना है।

Energy Security पर भारत का स्पष्ट विजन
ब्रिक्स के एजेंडे में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। एनर्जी ट्रैक की थीम “Energy for All” रखी गई है, जो सस्ती, विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा की उपलब्धता पर बल देती है। भारत की पहल पर ‘BRICS Digital Centre of Excellence for Smart Grids and Energy Storage’ की शुरुआत की गई है। रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते दौर में स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए निर्णायक साबित होंगे। खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए किफायती ऊर्जा आर्थिक विकास की बुनियादी शर्त है, जिसे भारत ब्रिक्स के माध्यम से गति दे रहा है।

Health, Science और Youth पर केंद्रित एजेंडा
भारत ने ब्रिक्स सहयोग को केवल व्यापार और जियोपॉलिटिक्स तक सीमित न रखकर जन-केंद्रित बनाया है। Health Track के तहत मानसिक स्वास्थ्य (Mental Wellness), टीबी (TB) रिसर्च, डिजिटल हेल्थ और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिकता दी गई है। वहीं Science and Technology Track के अंतर्गत चेन्नई में आयोजित ‘ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) मंत्रीस्तरीय बैठक’ में ‘Chennai Declaration’ को अपनाया गया, जो संयुक्त शोध, युवा वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के साझा उपयोग पर जोर देती है। इसके साथ ही, युवाओं को उद्यमिता, कौशल विकास, शिक्षा, खेल और सामाजिक भागीदारी से जोड़ने के लिए विशेष रोडमैप तैयार किया गया है।

G20 के बाद BRICS में भी भारत का नेतृत्व
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता उसकी बहुपक्षीय और संतुलित विदेश नीति का प्रमाण है। जिस प्रकार जी20 की सफल अध्यक्षता के दौरान भारत ने ग्लोबल साउथ के मुद्दों को केंद्र में रखा था, वही दृष्टिकोण अब ब्रिक्स में भी दिखाई दे रहा है। BRICS, G20, SCO और QUAD जैसे अलग-अलग मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली किसी एक गुट या धड़े तक सीमित रहने के बजाय ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) की नीति पर मजबूती से कायम है।

मोदी सरकार की विदेश नीति
दिल्ली ब्रिक्स समिट प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति के लिए भी अहम पड़ाव है। भारत ने पिछले वर्षों में अमेरिका और यूरोप के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत किए हैं, वहीं रूस, पश्चिम एशिया और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भी सक्रिय रिश्ते बनाए रखे हैं। ब्रिक्स इसी व्यापक कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत का प्रयास है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखते हुए ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ साझेदारी की जाए। ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत को इस नीति को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच देती है।

वैश्विक कूटनीति में निर्णायक भूमिका
नई दिल्ली में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक व्यवस्था बड़े आर्थिक और रणनीतिक बदलावों से गुजर रही है। ऐसे में भारत के लिए यह सिर्फ मेजबानी का मौका नहीं, बल्कि अपनी बढ़ती ताकत और प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखने का अवसर है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप्स, रिन्यूएबल एनर्जी, साइंस और इनोवेशन जैसी भारत की क्षमताएं ब्रिक्स के एजेंडे से जुड़ रही हैं। वहीं ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देना भारत की कूटनीतिक प्राथमिकता बनी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अब केवल चर्चा में भाग लेने वाला देश नहीं रहा, बल्कि एजेंडा तय करने और व्यावहारिक समाधान देने वाली एक निर्णायक शक्ति बन चुका है। दिल्ली ब्रिक्स समिट इसी बदलते और समर्थ भारत की तस्वीर दुनिया के सामने रखेगा- एक ऐसा भारत जो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, तकनीक में अग्रणी है और वैश्विक कूटनीति में जिसकी आवाज न केवल सुनी जाती है, बल्कि प्रभाव भी डालती है।

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