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ब्रिक्स सम्मेलन 2026: मोदी के नेतृत्व में दिल्ली बनेगी ग्लोबल पावर सेंटर; जुटेंगे 26 राष्ट्राध्यक्ष, पाकिस्तान अलग-थलग

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के सर्वोच्च शिखर पर आरूढ़ होने जा रहा है। ऐतिहासिक जी-20 सम्मेलन की अभूतपूर्व सफलता के बाद, 12-13 सितंबर 2026 को राजधानी नई दिल्ली के अत्याधुनिक ‘भारत मंडपम’ में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। 1 जनवरी 2026 से समूह की चौथी अध्यक्षता संभाल रहा भारत ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ (मानवता प्रथम) के मंत्र के साथ पूरी दुनिया को नई दिशा देने के लिए तैयार है। यह सम्मेलन केवल उभरती आर्थिक ताकतों का जमावड़ा भर नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के उस वैश्विक प्रभाव की पुष्टि है जिसके तहत युद्ध और खेमेबाजी में बंटी दुनिया अब शांति और समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है।

ब्रिक्स की ऐतिहासिक 20वीं वर्षगांठ: 2001 की आर्थिक अवधारणा से 2026 तक भारत बना मार्गदर्शक धुरी
वर्ष 2001 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की क्षमता को देखते हुए पहली बार ‘BRIC’ शब्द गढ़ा गया था। इन देशों की बढ़ती आर्थिक ताकत और रणनीतिक प्रभाव ने वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर इसे एक औपचारिक संवाद मंच का रूप दिया। एक आर्थिक अवधारणा से शुरू हुआ यह सफर आज अपने 20 गौरवशाली वर्ष (2006-2026) पूरे कर चुका है। 2010 में दक्षिण अफ्रीका और हाल ही में नए सदस्यों के जुड़ने के बाद यह मंच आज ‘BRICS’ बनकर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को वैश्विक मंच पर नई शक्ति दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस समूह को महज एक आर्थिक गठजोड़ से आगे ले जाकर ग्लोबल साउथ के कल्याण और विश्व शांति का सबसे प्रभावी मंच बना दिया है।

ग्लोबल साउथ की निर्विवाद आवाज बना भारत: समावेशी विकास का मोदी मॉडल
जिस तरह जी-20 की भारतीय अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाकर इतिहास रचा था, उसी प्रतिबद्धता को नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन में भी आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत आज विकासशील और अविकसित देशों यानी ‘ग्लोबल साउथ’ की सबसे मुखर आवाज बनकर उभरा है। खाद्य सुरक्षा, सस्ती दवाओं की आपूर्ति, जलवायु न्याय, तकनीक का लोकतंत्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में निष्पक्ष प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भारत ने कमजोर देशों के हितों को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में ला खड़ा किया है।

चौथी बार भारत के पास कमान: ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ और ‘RICS’ विजन से गढ़ेगा नया युग
वर्ष 2012, 2016 और 2021 के सफल सम्मेलनों के बाद, भारत चौथी बार इस शक्तिशाली मंच की कमान संभाल रहा है। मोदी सरकार ने इस अध्यक्षता को रस्मी बैठकों से ऊपर उठाकर ‘मानवता केंद्रित’ दृष्टिकोण प्रदान किया है। भारत की अध्यक्षता का मूल आधार आधिकारिक थीम RICS यानी लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और सतत विकास (Sustainability) पर टिका है। भारत का यह विजन ब्रिक्स को टकराव के बजाय साझा विकास का सबसे बड़ा वैश्विक माध्यम बना रहा है।

11 पूर्ण सदस्य और 10 साझेदार देश: विस्तारित ब्रिक्स में गूंजेगी भारत की आवाज
वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से शुरू हुआ यह सफर अब 11 पूर्ण सदस्य देशों तक पहुंच चुका है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ अब मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) इस समूह की मजबूत शक्ति हैं। इसके अलावा 10 साझेदार देश भी इस विशाल मंच का हिस्सा बन रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की प्रभावी विदेश नीति का ही नतीजा है कि एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के देश एक छत के नीचे आकर भारत के नेतृत्व पर भरोसा जता रहे हैं।

महाशक्तियों का जमावड़ा: भारत मंडपम में जुटेंगे दुनिया के शीर्ष दिग्गज
नई दिल्ली में आयोजित हो रहे इस 18वें शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 26 राष्ट्राध्यक्ष, सरकार प्रमुख और आउटरीच देशों के प्रतिनिधि आ रहे हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हैं। संयुक्त अरब अमीरात की ओर से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा तथा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की उपस्थिति इस आयोजन को ऐतिहासिक आयाम दे रही है।

तिरंगे की रोशनी में नहाया भारत मंडपम: महाशक्तियों के स्वागत के लिए सजकर तैयार विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर
शिखर सम्मेलन के मुख्य आयोजन स्थल ‘भारत मंडपम’ को वैश्विक गरिमा और भारतीय भव्यता के संगम के रूप में सजाया गया है। वास्तुशिल्प का यह अत्याधुनिक केंद्र रात में तिरंगे और ब्रिक्स की विशेष थीम आधारित रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा है। भारत मंडपम के प्रवेश द्वार से लेकर सम्मेलन कक्षों तक भारतीय परंपरा, वास्तुकला और तकनीकी उन्नति का शानदार तालमेल दिखाई दे रहा है। नेताओं के आगमन के लिए लेवल-2 पर भव्य रेड कार्पेट गलियारा तैयार किया गया है, जबकि हॉल-14 में ‘भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी’ के जरिए भारत की डिजिटल और अंतरिक्ष उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले विशेष जोन बनाए गए हैं। इसके अलावा बाहरी लॉन में संयुक्त पौधरोपण के लिए हरियाली से युक्त मंच और लेवल-3 पर स्टेट-ऑफ-द-आर्ट बैंक्वेट हॉल को भारतीय हस्तशिल्प और कलाकृतियों से सुसज्जित किया गया है, जो दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। 

कूटनीति का मोदी मॉडल: युद्ध नहीं संवाद का मार्ग, रूस ने भी माना शांतिदूत
रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान को लेकर जहां पश्चिमी देश केवल प्रतिबंधों की राजनीति कर रहे थे, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन के सामने खुलकर स्पष्ट किया था कि दुनिया को ‘एंडलेस वॉर’ (अंतहीन युद्ध) नहीं बल्कि ‘एंड ऑफ वॉर’ (युद्ध का अंत) चाहिए। सम्मेलन से ठीक पहले रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव का यह बयान कि “यूक्रेन विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की भारत की हर पहल का रूस स्वागत करेगा और दोनों देशों की सोच एक जैसी है”, यह प्रमाणित करता है कि भारत आज विश्व में शांति का सबसे भरोसेमंद सेतु बन चुका है।

विरोधी खेमों को एक मेज पर लाने का सामर्थ्य: ईरान और यूएई होंगे आमने-सामने
पश्चिम एशिया के जटिल हालात के बीच ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे विभिन्न रणनीतिक हितों वाले देशों को एक साथ बैठाना भारत के कूटनीतिक दबदबे का जीवंत प्रमाण है। जहां मई महीने में विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मतभेदों के चलते साझा बयान पर पेंच फंसा था, वहीं भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी में दोनों देश एक ही मेज पर संवाद करेंगे। तनाव कम करने और विरोधी पक्षों के बीच बातचीत के द्वार खुले रखने में भारत का यह प्रयास मील का पत्थर सिद्ध होगा।

सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय वार्ताओं पर नजर: मोदी-शी और मोदी-पुतिन बैठकें तय करेंगी वैश्विक दिशा
मुख्य सम्मेलन के साथ-साथ हैदराबाद हाउस, 7 लोक कल्याण मार्ग और सेवा तीर्थ में होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी और रक्षा आपूर्ति पर गहन बातचीत होगी। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री मोदी की संभावित उच्चस्तरीय वार्ता सीमा पर स्थिरता, विश्वास बहाली और व्यापारिक संतुलन के लिहाज से अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है। भारत की संतुलित विदेश नीति ने यह सुनिश्चित किया है कि वैश्विक मंच पर भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना हर महाशक्ति के साथ बराबरी की मेज पर बैठे।

01 सितंबर 2025

किन ऐतिहासिक फैसलों और समझौतों पर लगेगी मुहर: ‘ब्रिक्स पे’ और नई दिल्ली घोषणापत्र
इस 18वें शिखर सम्मेलन के समापन पर ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया जाएगा, जिसमें बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और आतंक विरोधी कड़े रुख की रूपरेखा होगी। इसके अलावा कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगने के पूरे आसार हैं। डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए सदस्य देश अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटाने और स्वदेशी डिजिटल भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के लिए ‘ब्रिक्स पे’ फ्रेमवर्क पर आगे बढ़ेंगे। वहीं आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा पार आतंकी नेटवर्क पर जीरो टॉलरेंस की नीति को भी दस्तावेज का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा। साथ ही न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के फंड और पहुंच का दायरा बढ़ाकर विकासशील देशों को आसान शर्तों पर बुनियादी ढांचा ऋण उपलब्ध कराने की सहमति बनेगी।

ब्रिक्स विरोधी गुट नहीं, विकास का इंजन: पश्चिमी देशों से टकराव की रणनीति खारिज
प्रधानमंत्री मोदी के स्पष्ट रुख के कारण ब्रिक्स कभी भी अमेरिका या पश्चिमी देशों के खिलाफ खड़े किसी मंच के रूप में तब्दील नहीं हुआ। भारत ने इसे एक रचनात्मक, व्यावहारिक और आर्थिक प्रगति के मंच के रूप में स्थापित किया है। भारत का प्राथमिक एजेंडा संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में लोकतांत्रिक सुधार, न्यू डेवलपमेंट बैंक का सशक्तिकरण, स्थानीय मुद्राओं में परस्पर व्यापार, सीमा पार डिजिटल भुगतान नेटवर्क का सरलीकरण तथा अवैध वित्तीय प्रवाह पर कठोर प्रहार करना है।

वैश्विक उत्सव में कांग्रेस का ‘नाराज फूफा’ अवतार: चिदंबरम के बयान पर भाजपा का करारा प्रहार
एक तरफ जहां पूरी दुनिया भारत के भव्य राजनयिक आयोजन का लोहा मान रही है, वहीं विपक्ष अपनी पुरानी नकारात्मक मानसिकता से उबर नहीं पा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सम्मेलन की उपलब्धियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि ब्रिक्स की पिछली बैठकों से भारत को कोई ठोस लाभ नहीं हुआ है। कांग्रेस के इस संकीर्ण दृष्टिकोण पर कड़ा पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने विपक्षी पार्टी की तुलना शादी-ब्याह में बिना वजह मुंह फुलाने वाले ‘नाराज फूफा’ से कर दी। उन्होंने दो टूक कहा कि चिदंबरम का यह बयान राहुल गांधी के इशारे पर दिया गया है, जो देश की हर ऐतिहासिक वैश्विक सफलता पर केवल मीन-मेख निकालना और मातम मनाना जानते हैं।

चिदंबरम के सवाल पर आंकड़ों का करारा जवाब: 10 वर्षों में 4 गुना बढ़ा ब्रिक्स से भारत का व्यापार
ब्रिक्स से भारत को क्या मिला, इस पर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के आरोपों को ठोस आर्थिक आंकड़ों ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। मोदी सरकार के पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 2015 के 102 अरब डॉलर से लगभग चार गुना बढ़कर 2025 में 400 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, भारत में आने वाले कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI IN) में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 2015 के 4.7 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जबकि भारतीय कंपनियों द्वारा ब्रिक्स देशों में किया जाने वाला निवेश (FDI OUT) 2 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत के पार निकल चुका है। इसके अतिरिक्त, रूस और खाड़ी के ब्रिक्स देशों की बदौलत भारत अपनी रणनीतिक ऊर्जा जरूरतों को निर्बाध और किफायती दामों पर सुरक्षित कर रहा है। वित्तीय मोर्चे पर रुपया और स्थानीय मुद्राओं में परस्पर व्यापार, यूपीआई (UPI) कनेक्टिविटी और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) से मिल रहे फंड ने भारत की आर्थिक स्वायत्तता को नई मजबूती दी है, जो विपक्ष के बेबुनियाद दावों का सबसे सटीक और तथ्यात्मक उत्तर है।

भारत में कूटनीतिक उत्सव, पाकिस्तान में पसरा मातम: मुनीर-शहबाज की सिट्टी-पिट्टी गुम
एक तरफ जब भारत की राजधानी में दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के शासनाध्यक्ष जुट रहे हैं, वहीं सीमा पार पाकिस्तान में मातम पसरा हुआ है। वर्षों से ब्रिक्स में प्रवेश के सपने देख रहे पाकिस्तान को भारत की कठोर कूटनीतिक घेराबंदी के चलते प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया गया। चीन द्वारा भी एससीओ में स्पष्ट संकेत दिए जाने के बाद, ब्रिक्स से बाहर रखे जाने पर शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर बुरी तरह बौखलाए हुए हैं। आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश को वैश्विक मंचों पर किनारे लगाकर भारत ने अपनी अंतरराष्ट्रीय साख का लोहा मनवाया है।

राजघाट पर बापू को नमन: विश्व शांति और अहिंसा का उद्घोष करेंगे वैश्विक नेता
सम्मेलन के दौरान कूटनीतिक बैठकों से इतर एक अत्यंत भावुक और गरिमामय क्षण वह होगा जब दुनिया के शीर्ष नेता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित सभी राष्ट्राध्यक्ष बापू को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। खादी का अंगवस्त्रम धारण कर वैश्विक नेताओं का यह सामूहिक नमन पूरी दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देगा कि चाहे कितने भी गंभीर मतभेद हों, विश्व का अंतिम कल्याण और शांति केवल संवाद, संयम और अहिंसा के गांधीवादी मार्ग से ही संभव है।

भारतीय संस्कृति और खान-पान का जलवा: डिनर टेबल पर सजेगा ‘श्रीअन्न’ का अनूठा स्वाद
भारत मंडपम के लेवल-3 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित गाला डिनर में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पाक-कला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। विदेशी मेहमानों को भारत के पारंपरिक ‘श्रीअन्न’ (मिलेट्स जैसे ज्वार, बाजरा, रागी) से तैयार विशेष पौष्टिक व्यंजन परोसे जाएंगे। कश्मीर के केसरिया काहवे से लेकर दक्षिण भारत के पारंपरिक मसालों और उत्तर भारतीय शाही पकवानों का स्वाद दुनिया के दिग्गज चखेंगे। भोजन के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के शास्त्रीय संगीत, वाद्ययंत्रों और लोकनृत्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विदेशी मेहमानों को भारत की विविधता और आतिथ्य की अनूठी अनुभूति कराएंगी।

उपहारों में झलकेगा भारत का गौरव: ओडीओपी (ODOP) से सजे स्मृति चिन्ह ले जाएंगे राष्ट्राध्यक्ष
प्रधानमंत्री मोदी की ‘लोकल फॉर वोकल’ मुहिम की छाप इस सम्मेलन के स्मृति चिन्हों में भी दिखेगी। सभी 26 विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों को विदाई उपहार के रूप में ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) पहल के तहत तैयार हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद भेंट किए जाएंगे। इनमें कश्मीर की पश्मीना शॉल, वाराणसी का रेशमी ब्रोकेड, कन्नौज का प्राकृतिक इत्र, राजस्थान की मीनाकारी कलाकृतियां और विशेष रूप से तैयार किए गए खादी उत्पाद शामिल होंगे। यह केवल उपहार नहीं, बल्कि भारत के पारंपरिक कारीगरों, बुनकरों और स्वदेशी शिल्पकारों की कला को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने का सशक्त माध्यम बनेगा।

जन-कल्याणकारी तकनीक: एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य क्रांति
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता तकनीक को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर जन-जन तक पहुंचाने पर केंद्रित है। खेतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग, डिजिटल हेल्थ का विस्तार और स्मार्ट शहरों का निर्माण भारत के तकनीकी विजन के प्रमुख अंग हैं। भारत अपने स्वदेशी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के मॉडल को ब्रिक्स देशों के साथ साझा कर ग्लोबल साउथ के करोड़ों लोगों के जीवन को सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पर्यावरण संरक्षण और अन्नदाता का सम्मान: सौर ऊर्जा और बीजों पर किसानों का अधिकार
सतत विकास के मोर्चे पर भारत ने पर्यावरण और किसान दोनों को केंद्र में रखा है। स्वच्छ ऊर्जा, सौर ऊर्जा ग्रिड, हरित ईंधन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ भारत ने वैश्विक मंच पर किसानों के बीजों पर पारंपरिक अधिकार का संरक्षण करने का एजेंडा मजबूती से उठाया है। पर्यावरण संरक्षण और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की भारत की यह नीति ब्रिक्स देशों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

देश के विनिर्माताओं और निर्यातकों के लिए खुलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार का द्वार
यह शिखर सम्मेलन केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और देश के व्यापारिक हितों को बहुत बड़ा प्रोत्साहन देने जा रहा है। 26 देशों के प्रतिनिधिमंडलों और व्यापारिक मिशनों के आगमन से देशभर के उद्यमियों, विनिर्माताओं और एमएसएमई सेक्टर को अरबों डॉलर के नए बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटोमोबाइल, वस्त्र उद्योग, मशीनरी, रसायन तथा सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के निर्यातकों को ब्रिक्स साझेदार देशों में शुल्क-मुक्त अथवा रियायती व्यापार के व्यापक अवसर प्राप्त होंगे, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि दर को नई गति मिलेगी।

दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

12 सितंबर 2026 (पहला दिन):

  • दोपहर 02:00 बजे: ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों का भारत मंडपम के लेवल-2 पर औपचारिक स्वागत और आधिकारिक फोटो सेशन।
  • दोपहर 02:35 बजे: समिट हॉल में ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर बंद कमरे में गंभीर रणनीतिक बैठक।
  • शाम 04:25 बजे: हॉल-14 में नेताओं द्वारा ‘भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी’ का अवलोकन।
  • शाम 05:05 बजे: भारत मंडपम के बाहरी लॉन में संयुक्त ग्रुप फोटो शूट।
  • शाम 05:10 बजे: वैश्विक नेताओं द्वारा संयुक्त पौधरोपण कार्यक्रम।
  • शाम 07:30 बजे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित भव्य गाला डिनर के साथ पहले दिन का समापन।

13 सितंबर 2026 (दूसरा दिन):

  • सुबह 08:30 बजे: राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि और बापू को नमन।
  • सुबह 09:55 बजे: ब्रिक्स साझेदार देशों के नेताओं का भारत मंडपम आगमन।
  • सुबह 10:35 बजे: सभी आमंत्रित और साझेदार देशों के नेताओं का संयुक्त ग्रुप फोटो सत्र।
  • सुबह 10:50 बजे: 18वें शिखर सम्मेलन के ओपन सेशन का औपचारिक शुभारंभ, जिसमें नई दिल्ली घोषणापत्र और प्रमुख समझौतों पर अंतिम मुहर लगेगी।

जमीन से आसमान तक अभेद्य सुरक्षा चक्र: ‘ऑपरेशन ब्रिक्स कवच’ और एंटी-ड्रोन ग्रिड
सुरक्षा एजेंसियों ने जी-20 की तर्ज पर दिल्ली को पूरी तरह अभेद्य किले में बदल दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की स्वाट टीमों ने ‘ऑपरेशन ब्रिक्स कवच’ के तहत संयुक्त मेगा रिहर्सल पूरी कर ली है। डीआरडीओ द्वारा विकसित अत्याधुनिक स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स राजधानी के एयरस्पेस पर नो-फ्लाई जोन की निगरानी कर रहे हैं। यातायात और फील्ड सुरक्षा के लिए 5,000 ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और पूरी व्यवस्था को 9 जोन व 27 सेक्टरों में बांटा गया है। इसके अलावा 298 पीसीआर वैन नई दिल्ली व दक्षिण-पश्चिम जिलों में और 900 से अधिक पीसीआर वैन पूरी दिल्ली में 24 घंटे अलर्ट मोड पर तैनात की गई हैं।

आम जनता के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी: क्या खुला रहेगा, कहां रहेगी पाबंदी
वीवीआईपी आवागमन को सुरक्षित रखने और नागरिकों की सुविधा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट योजना बनाई है। 11 से 13 सितंबर तक लुटियंस दिल्ली और भारत मंडपम के आसपास भारी और व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, हालांकि आवश्यक सेवाओं और एंबुलेंस को पूरी छूट रहेगी। दिल्ली मेट्रो की सेवाएं सभी लाइनों पर सुचारू रूप से चलती रहेंगी, केवल सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर सुरक्षा कारणों से विशेष समय पर निकास सीमित रह सकता है। आम वाहनों के आवागमन के लिए रिंग रोड और आउटर रिंग रोड पर 22 डायवर्जन प्वाइंट्स बनाए गए हैं।

13 लग्जरी होटल बने अभेद्य छावनी: जानिए किस होटल में ठहरेंगे कौन से वैश्विक मेहमान

  • द ओबेराय: इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, इथियोपिया के प्रधानमंत्री, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति, ईरान के राष्ट्रपति और थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री
  • द लीला पैलेस: अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, सऊदी अरब के विदेश मंत्री, बहरीन के विदेश मंत्री और ब्राजील के विदेश मंत्री
  • आईटीसी मौर्या: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री
  • द ललित: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति और बुरुंडी के राष्ट्रपति
  • ताज मानसिंह: फिलीपींस के राष्ट्रपति, वियतनाम के प्रधानमंत्री, क्यूबा के विदेश मंत्री, उरुग्वे के विदेश मंत्री, डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक और डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक
  • ताज पैलेस: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बेलारूस के राष्ट्रपति
  • ली मेरिडियन: मलेशिया के प्रधानमंत्री, नाइजीरिया के विदेश मंत्री, युगांडा के उपराष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
  • होटल शेरेटन: मिस्र के राष्ट्रपति
  • द इंपीरियल: लातिन अमेरिकी और अफ्रीकी साझेदार देशों के उच्चस्तरीय मंत्री व प्रतिनिधि
  • शांग्री-ला एरोस: न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल
  • द क्लैरिजेस: दक्षिण-पूर्व एशियाई साझेदार देशों के विशेष राजनयिक दूत
  • हयात रीजेंसी: वैश्विक स्वास्थ्य एवं तकनीकी मंचों के अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक
  • अशोक होटल: सम्मेलन में भाग ले रहे अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधि, थिंक टैंक और आउटरीच डेलीगेट्स

भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्व बंधुत्व की निर्णायक जीत
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल 11 सदस्यों और 10 साझेदार देशों की औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का प्रत्यक्ष प्रमाण है जहां भारत स्वयं को ‘विश्व मित्र’ और ‘विश्व बंधु’ के रूप में स्थापित कर चुका है। एक धड़े में बंटने से इनकार करते हुए, भारत ने अपनी संप्रभु विदेश नीति, शांतिप्रिय कूटनीति और मजबूत आर्थिक सामर्थ्य से यह सिद्ध कर दिया है कि 21वीं सदी के बड़े वैश्विक संकटों का समाधान नई दिल्ली की सहमति के बिना संभव नहीं है। दिल्ली के भारत मंडपम से उठने वाली भारत की यह गूंज आने वाले दशकों तक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवीय मूल्यों को नई गति प्रदान करेगी।

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