भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 में एक ऐसे समय हो रही है, जब यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है। भारत इस समूह की चौथी बार अध्यक्षता कर रहा है। 2026 की अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है। आज BRICS में 11 सदस्य देश हैं, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भारत के लिए BRICS सिर्फ एक कूटनीतिक मंच नहीं है। यह अपनी आर्थिक ताकत, डिजिटल क्षमता, कृषि उत्पादन, फार्मा उद्योग, स्टार्टअप इकोसिस्टम और ऊर्जा सहयोग को दुनिया के सामने रखने का भी अवसर है। खास बात यह है कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारत ने सिर्फ BRICS देशों के बीच ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। आइए डालते हैं एक नजर-

1. डिजिटल इंडिया: UPI ने बनाया भारत को दुनिया का डिजिटल पेमेंट लीडर
भारत की सबसे बड़ी ताकतों में आज उसका Digital Public Infrastructure यानी DPI शामिल है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण Unified Payments Interface (UPI) है। UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा real-time payment system है। 2025 में दुनिया के रियल-टाइम भुगतान लेनदेन में भारत की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत रही। अगस्त 2026 में UPI पर 24 अरब से ज्यादा लेनदेन हुए। यह व्यवस्था भारत के अलावा कई दूसरे देशों में भी पहुंच चुकी है और वर्तमान में 11 देशों में UPI की सुविधा उपलब्ध है।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल केवल बैंकिंग क्षेत्र तक सीमित नहीं है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी और आम उपभोक्ता तक, UPI ने डिजिटल भुगतान को बेहद आसान बनाया है। इसकी खासियत सिर्फ रफ्तार नहीं, बल्कि कम लागत, आसान इस्तेमाल और अलग-अलग भुगतान प्रणालियों के साथ जुड़ने की क्षमता भी है। यही वजह है कि भारत BRICS के भीतर सीमा-पार डिजिटल भुगतान और अलग-अलग भुगतान प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।।

भारत की डिजिटल ताकत केवल UPI तक सीमित नहीं है। आधार, डिजिलॉकर, DBT और ONDC जैसे डिजिटल मंचों ने भी देश के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को व्यापक बनाया है। इस कारण भारत का डिजिटल मॉडल अब केवल घरेलू सफलता की कहानी नहीं रह गया है, बल्कि BRICS देशों के बीच सहयोग का संभावित आधार भी बन रहा है।

2. दूध उत्पादन में भारत दुनिया में नंबर-1
कृषि और डेयरी के क्षेत्र में भी भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। 2024-25 में भारत का दूध उत्पादन बढ़कर करीब 247.87 मिलियन टन हो गया। दुनिया के कुल दूध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब एक-चौथाई है। भारत की यह उपलब्धि सिर्फ कृषि उत्पादन का आंकड़ा नहीं है। डेयरी क्षेत्र करोड़ों ग्रामीण परिवारों, किसानों और खास तौर पर महिलाओं की आजीविका से जुड़ा हुआ है। यह आंकड़ा बताता है कि सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, डेयरी और कृषि उत्पादन भी देश की वैश्विक आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

3. दाल उत्पादन में भी भारत की वैश्विक बढ़त
भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और प्रमुख उपभोक्ता है। 2024-25 में देश में दालों का उत्पादन करीब 25.68 मिलियन टन रहा। दालों की बढ़ती घरेलू मांग और उत्पादन क्षमता भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए दालों में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन शुरू किया है। इसका लक्ष्य 2030-31 तक दाल उत्पादन को 350 लाख टन तक बढ़ाना है। इससे भारत की कोशिश साफ है—अपनी बड़ी घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ दालों के आयात पर निर्भरता को भी कम करना। BRICS जैसे बड़े समूह में भारत की कृषि शक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं आने वाले वर्षों के प्रमुख वैश्विक मुद्दे हैं।

4. मिलेट्स में भी भारत की दुनिया में पहली पायदान
भारत की कृषि शक्ति का एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र मिलेट्स यानी मोटे अनाज हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया में मिलेट्स का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। 2024-25 में भारत में मिलेट्स का उत्पादन करीब 18.59 मिलियन टन रहा। बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य मोटे अनाज जलवायु के लिहाज से अधिक अनुकूल माने जाते हैं। ये कम पानी में भी उगाए जा सकते हैं और पोषण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में भारत की मिलेट्स क्षमता खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि, दोनों से जुड़ती है।

5. मसालों में भारत की वैश्विक बादशाहत
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक देश है। हल्दी, मिर्च, जीरा, धनिया, इलायची, काली मिर्च और कई अन्य भारतीय मसालों की दुनिया भर में मांग है। 200 से अधिक देशों तक भारतीय मसालों की पहुंच है। मसालों की यह ताकत भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक प्रभाव को भी मजबूत करती है। भारतीय मसाले केवल एक कृषि उत्पाद नहीं हैं, बल्कि भारतीय खान-पान और संस्कृति की दुनिया भर में पहचान का हिस्सा हैं। यही वजह है कि मसालों का क्षेत्र भारत की कृषि ताकत के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक पहुंच को भी दिखाता है।

6. फार्मा सेक्टर: दुनिया की दवा आपूर्ति में भारत की बड़ी भूमिका
फार्मास्युटिकल यानी दवा उद्योग भारत की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक शक्तियों में शामिल है। भारत को अक्सर “दुनिया की फार्मेसी” कहा जाता है और इसके पीछे मजबूत आंकड़े हैं। भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और वैश्विक जेनेरिक दवा आपूर्ति में उसकी हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। भारतीय दवा उद्योग उत्पादन की मात्रा के लिहाज से दुनिया में तीसरे स्थान पर है। भारतीय दवाएं दुनिया के 200 से अधिक देशों तक पहुंचती हैं। देश में बड़ी संख्या में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन होता है, जिससे भारत विकासशील देशों समेत दुनिया के कई हिस्सों को सस्ती और सुलभ दवाओं की आपूर्ति करता है। भारत की यह क्षमता BRICS सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सुरक्षा, सस्ती दवाओं की उपलब्धता और चिकित्सा आपूर्ति शृंखला आने वाले समय में BRICS सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बन सकते हैं।

7. वैक्सीन निर्माण में भी भारत की अहम भूमिका
दवाओं के साथ-साथ वैक्सीन निर्माण में भी भारत दुनिया के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। भारतीय वैक्सीन निर्माता कई महत्वपूर्ण टीकों की वैश्विक आपूर्ति में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री के जरिए भारत ने अपनी विनिर्माण और आपूर्ति क्षमता का प्रदर्शन किया। भारतीय वैक्सीन निर्माता UNICEF की वैक्सीन जरूरतों के लगभग 55-60 प्रतिशत की आपूर्ति करते हैं। इस क्षमता ने भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और वैक्सीन आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। यही कारण है कि BRICS के मंच पर स्वास्थ्य सहयोग और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।

8. दुनिया का सबसे बड़ा remittance recipient
भारत की एक और बड़ी वैश्विक ताकत विदेशों से आने वाला पैसा यानी remittances है। दुनिया के अलग-अलग देशों में काम करने वाले भारतीय हर साल बड़ी मात्रा में पैसा देश भेजते हैं। विश्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 2024 में भारत को करीब 137.7 अरब डॉलर, यानी लगभग 138 अरब डॉलर की रेमिटेंस मिली। इससे भारत दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्तकर्ता बना हुआ है। यह भारत की बड़ी प्रवासी आबादी और दुनिया भर में फैली कार्यबल की मौजूदगी का परिणाम है। अमेरिका, खाड़ी देशों, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में भारतीय पेशेवरों और कामगारों की मौजूदगी भारत के लिए विदेशी मुद्रा का महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई है। सीमा-पार भुगतान प्रणालियों के विस्तार के साथ भविष्य में भारत और दूसरे देशों के बीच पैसा भेजने की प्रक्रिया में डिजिटल माध्यमों की भूमिका और बढ़ सकती है।

9. युवा शक्ति: भारत की सबसे बड़ी demographic ताकत
भारत की ताकत उसकी बड़ी और युवा आबादी भी है। बड़ी युवा आबादी के साथ भारत के पास विशाल उपभोक्ता बाजार और कार्यबल है। यही वजह है कि 2026 की BRICS अध्यक्षता में भारत ने युवा शक्ति को महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में रखा है। BRICS युवा परिषद, युवा शिखर सम्मेलन और युवा मंत्रिस्तरीय बैठकों के जरिए युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और टिकाऊ विकास से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। भारत की कोशिश है कि उसकी युवा आबादी को केवल जनसांख्यिकीय लाभ के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार और आर्थिक विकास की ताकत के रूप में देखा जाए।

10. Startup और MSME: BRICS के नए आर्थिक एजेंडे में भारत की पहल
भारत ने BRICS के आर्थिक सहयोग को सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित रखने के बजाय स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को भी प्रमुखता दी है। 2026 की BRICS अध्यक्षता के दौरान भारत ने BRICS Incubator Network और BRICS Startup Innovation Fund जैसी पहलों का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के स्टार्टअप, उद्यमियों और नवाचार तंत्र के बीच सहयोग बढ़ाना है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे BRICS देशों के स्टार्टअप और उद्यमियों को एक-दूसरे के बाजार, तकनीक और निवेश के अवसरों से जुड़ने का रास्ता मिल सकता है। इसी तरह BRICS MSME Forum के जरिए छोटे और मध्यम उद्योगों को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़ने और सदस्य देशों के बीच कारोबारी सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। MSME क्षेत्र में वित्त, तकनीक तक पहुंच और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

11. Supply Chain और Global Value Chains में भारत की पहल
आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत और भरोसेमंद supply chains रणनीतिक ताकत बन चुकी हैं। ऐसे में भारत ने BRICS के भीतर लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति शृंखला सहयोग को भी प्राथमिकता दी है। BRICS के तहत Logistics Supply-Chain Cooperation Framework और Global Value Chains Action Plan 2026-2030 जैसे कदमों पर काम हुआ है। इनका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत, विविध और भरोसेमंद बनाना है। यह पहल भारत की उस रणनीति से भी जुड़ती है, जिसमें देश को वैश्विक विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला तंत्र में और मजबूत भूमिका दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।

12. सोलर एनर्जी और International Solar Alliance
ऊर्जा और जलवायु सहयोग के क्षेत्र में भी भारत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण International Solar Alliance यानी अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत भारत और फ्रांस की पहल पर हुई थी। इसे 2015 में COP21 के दौरान शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और सदस्य देशों में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को तेज करना है। भारत की BRICS अध्यक्षता में भी ऊर्जा बदलाव, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण पर सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसलिए भारत की जलवायु नेतृत्व क्षमता को केवल स्थापित सौर क्षमता के आधार पर देखने के बजाय सौर कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग के व्यापक संदर्भ में देखना अधिक उपयुक्त है।

13. BRICS को भारत सिर्फ आर्थिक मंच नहीं, Global South की आवाज के रूप में देख रहा
भारत की BRICS रणनीति का एक बड़ा हिस्सा ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना भी है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। 2026 की BRICS अध्यक्षता में भारत ने प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, युवा, महिला नेतृत्व वाले विकास, MSME, आपूर्ति शृंखला और टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों को एजेंडे में शामिल किया है। इससे साफ है कि भारत BRICS को सिर्फ आर्थिक सहयोग के मंच के रूप में नहीं, बल्कि विकासशील देशों की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने वाले मंच के रूप में भी देख रहा है।

14. भारत की असली ताकत: Digital + Demography + Development
BRICS में भारत की ताकत किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। एक तरफ UPI और Digital Public Infrastructure भारत को डिजिटल पेमेंट और तकनीक के क्षेत्र में अलग पहचान देते हैं, तो दूसरी तरफ दूध, दाल और मिलेट्स का विशाल उत्पादन देश की कृषि और खाद्य सुरक्षा क्षमता को दिखाता है। इसके साथ जेनेरिक दवाएं और वैक्सीन भारत को वैश्विक स्वास्थ्य आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण बनाते हैं। वहीं स्टार्टअप, MSME और युवा आबादी भारत के भविष्य के विकास इंजन हैं। रेमिटेंस, बड़ा घरेलू बाजार और मजबूत आर्थिक प्रदर्शन भारत की वैश्विक आर्थिक ताकत को और मजबूत करते हैं।

यही संयोजन भारत को BRICS में एक अलग तरह की भूमिका देता है। भारत केवल एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि तकनीक, कृषि, स्वास्थ्य, उद्यमिता और ग्लोबल साउथ सहयोग को एक साथ लेकर चलने वाला देश बनकर उभर रहा है। 2026 की BRICS अध्यक्षता में भारत इसी ताकत को सहयोग और साझेदारी के मॉडल में बदलने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का जोर इस बात पर है कि BRICS को केवल बयान जारी करने वाले मंच के बजाय नवाचार, मजबूत आपूर्ति शृंखला, डिजिटल सहयोग, टिकाऊ विकास और जन-केंद्रित विकास का प्रभावी मंच बनाया जाए।










