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ब्रिक्स से भारत की उम्मीदें: जानिए आम जनता के लिए क्यों खास है?, कैसे होगा प्रत्यक्ष लाभ?

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दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है। व्यापार युद्ध, प्रतिबंध, डॉलर की मजबूती, महंगे कच्चे तेल, आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और वैश्विक भुगतान व्यवस्था में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने देशों को नए आर्थिक विकल्प तलाशने के लिए मजबूर किया है। इस चुनौतीपूर्ण दुनिया में भारत की आर्थिक कूटनीति इस समय एक नए मोड़ पर है, जहाँ वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच नई दिल्ली एक मजबूत और संतुलित आर्थिक नेतृत्व के रूप में उभर रही है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (2026) की मेजबानी करते हुए भारत ने ब्रिक्स (BRICS) को केवल राजनीतिक चर्चा का मंच न बनाकर व्यावहारिक आर्थिक प्रगति, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की मजबूती और समावेशी विकास का माध्यम बनाया है।

ब्रिक्स से भारत की बढ़ती उम्मीदें
वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों के बीच ब्रिक्स के विस्तार से भारत की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य देशों के शामिल होने से भारत के सामने नए अवसर के द्वार खुल रहे हैं। इसका लाभ उठाने के लिए भारत भी रणनीतिक लक्ष्यों को साध रहा है। भारत रूस और चीन जैसे देशों के साथ संतुलन बना रहा है। ब्रिक्स जैसा मंच जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच उच्चस्तरीय संवाद का रास्ता देता है। इस रास्ते पर चलकर भारत अपने लिए नए-नए अवसरों की तलाश कर रहा है।

आइए जानते हैं नई आर्थिक कूटनीति में भारत ब्रिक्स के माध्यम से कैसे अपने लिए अधिक से अधिक विकल्प और अवसर पैदा करने की कोशिश कर रहा है…

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान प्रणालियां: भारत का लक्ष्य ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में डॉलर की निर्भरता को कम करते हुए स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपये) में लेन-देन को बढ़ावा देना है, जिससे विदेशी मुद्रा जोखिम कम हो। हालांकि भारत के लिए मुद्दा ‘डॉलर खत्म करना’ नहीं बल्कि भुगतान के विकल्प बढ़ाना और जोखिम कम करना है। दिलचस्प बात यह है कि रूस ने भी हाल में कहा है कि उसका उद्देश्य आवश्यक रूप से de-dollarisation नहीं बल्कि स्वीकार्य भुगतान विकल्पों की उपलब्धता है।

CBDC प्रणालियों को आपस में जोड़ने पर जोर: भारत ब्रिक्स देशों की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को जोड़ने की संभावना पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य साझा मुद्रा बनाना नहीं बल्कि सीमा-पार (cross-border) भुगतान को तेज और सस्ता बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्रिक्स सदस्यों के बीच आपसी व्यापार निपटाने के लिए डिजिटल मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UPI का विस्तार : भारत विशेष रूप से यूनिफ़ाइड पेमेंट इंटरफ़ेस (UPI) की सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहता है। भारत चाहता है कि अलग-अलग देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम हो। अगस्त 2026 में UPI ने लगभग 24.51 अरब transactions, करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये मूल्य के साथ नया स्तर हासिल किया। UPI फिलहाल 11 देशों में उपलब्ध है।

ब्रिक्स देशों में निर्यात के नए अवसर: भारत ब्रिक्स देशों के बड़े बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाने और फार्मास्यूटिकल्स तथा इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात पर जोर देकर अपना निर्यात बढ़ाना चाहता है। यूएई, रूस, चीन और सऊदी अरब जैसे ब्रिक्स सदस्य देशों में अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाश रहा है। भारत ब्रिक्स मंच के माध्यम से सदस्य देशों से गैर-शुल्क बाधाओं (Non-tariff barriers) को हटाने और बाजार की अनुमति को आसान बनाने की मांग कर रहा है।

एमएसएमई और छोटे व्यवसायों का सशक्तिकरण: भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का प्रमुख उद्देश्य छोटे एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना है। इसके लिए ‘BRICS MSME Portal’ और इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म जैसे प्रस्ताव रखे गए हैं। भारत छोटे और मध्यम उद्योगों को बेहतर व्यापार वित्त और लॉजिस्टिक्स सहायता देकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल करने पर जोर दे रहा है। 

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) से बुनियादी ढांचा वित्तपोषण: भारत अपने सतत विकास (Clean Energy), जल शोधन और बुनियादी ढांचे (मेट्रो रेल प्रणालियों, क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS)) के विकास के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) से वित्तीय संसाधनों का तेजी से विस्तार चाहता है।
यह संस्था उभरती अर्थव्यवस्थाओं को आपस में सहयोग करने और वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अपनी हिस्सेदारी व निर्णय क्षमता मजबूत करने का मंच देती है।

कृषि और खाद्य सुरक्षा में डिजिटल तकनीक: भारत चाहता है कि सभी ब्रिक्स देश मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology) का उपयोग खेती में बढ़ाएं। ब्रिक्स देशों के बीच ब्रिक्स कृषि कार्य समूह के तहत भारत यह उम्मीद करता है कि डिजिटल तकनीकों और डेटा-साझाकरण के माध्यम से छोटे किसानों की उत्पादकता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जाए। भारत की अध्यक्षता में अपनाए गए ‘इंदौर घोषणा-पत्र’ (Indore Declaration) में डिजिटल कृषि को लेकर प्रमुख अपेक्षाएं और लक्ष्य तय किए गए हैं।

ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका मजबूत करना : भारत ब्रिक्स मंच का उपयोग विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ (Global South) की साझा आवाज को बुलंद करने और वैश्विक शासन में सुधार लाने के लिए एक प्रभावी माध्यम के रूप में कर रहा है। 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (जिसका मुख्य विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता” है) इसी उद्देश्य पर केंद्रित है। भारत ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच एक सेतु की भूमिका निभा रहा है। नए सदस्य देशों और साझीदार देशों के जुड़ने से ब्रिक्स का विस्तार हुआ है, जिससे भारत को विभिन्न महाद्वीपों के विकासशील देशों के साथ नेटवर्क मजबूत करने का अवसर मिला है।

आम जनता और मध्यम वर्ग को होने वाला प्रत्यक्ष लाभ
अक्सर अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों को केवल कूटनीतिज्ञों की बात माना जाता है, लेकिन ब्रिक्स में बनी नीतियां सीधे आम नागरिक और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी बढ़ने से सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों की जेब और जीवन स्तर पर सकारात्मक असर पड़ता है।

आइए जानते हैं ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ने से आम जनता और मध्यम वर्ग को कौन-कौन से प्रत्यक्ष लाभ हो सकते हैं…

सस्ता पेट्रोल-डीजल: ब्रिक्स में रूस, सऊदी अरब और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इनसे स्थानीय मुद्रा में व्यापार होने से देश को सस्ता ईंधन मिलता है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई की कीमतें नियंत्रित रहती हैं।

रुपया में मजबूती: भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। तेल सस्ता होने पर विदेशी भुगतान के लिए ज्यादा अमेरिकी डॉलर की जरूरत नहीं होती है। बाजार में डॉलर की मांग कम होने से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होता है। 

महंगाई की मार से बचाव: ब्रिक्स सदस्यों (जैसे रूस, यूएई) के साथ कच्चे तेल, उर्वरक और कृषि उत्पादों का निर्बाध व्यापार रहने से देश में जरूरी वस्तुओं के दाम नियंत्रण में रहते हैं। घरेलू बाजार में दालों और सब्जियों की कीमतों को बढ़ने से रोकता है। भारत में ब्राजील और रूस जैसे देशों से रियायती दरों पर खाद्य तेल का आयात होता है।

तकनीकी नौकरियां: डिजिटल कॉमर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स में साझा सहयोग से भारत के युवाओं के लिए आईटी (IT) और सर्विस सेक्टर में लाखों नए रोजगार पैदा हो रहे हैं। एमएसएमई पोर्टल और व्यापार सुगमीकरण से छोटे कारोबारियों को नए विदेशी बाजार मिलेंगे, जिससे देश में नए रोजगार और स्टार्टअप के अवसर बनेंगे।

विशाल बाजार तक पहुंच: ब्रिक्स दुनिया की लगभग 50% आबादी और 40% वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय स्टार्टअप, एमएसएमई (MSMEs) और छोटे व्यापारियों के लिए इन देशों में व्यापार करना और सामान निर्यात करना बेहद आसान हो जाता है।

त्वरित भुगतान और कम ट्रांजैक्शन फीस: भारत ब्रिक्स देशों के बीच इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम (जैसे यूपीआई को अन्य देशों के नेटवर्क से जोड़ना) को बढ़ावा दे रहा है। विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों या वहां काम करने वाले मध्यमवर्गीय लोगों के लिए भारत पैसे भेजना या वहां भुगतान करना बेहद सस्ता और त्वरित हो जाएगा। इसके साथ ही भारत आने और जाने वाले पर्यटकों को भुगतान करना आसान होगा। 

बेहतरीन विश्वस्तरीय सुविधाएं : भारत न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) से कर्ज लेने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। इस पैसे का इस्तेमाल भारत में मेट्रो रेल, स्वच्छ पेयजल, हाईवे और ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है। वैश्विक बैंकों के मुकाबले एनडीबी से मिलने वाले आसान ऋणों के कारण सरकार आम जनता पर बिना अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाले बेहतरीन विश्वस्तरीय सुविधाएं दे पाती है।

स्वास्थ्य और सस्ती दवाएं: भारत जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक है। ब्रिक्स नेटवर्क के जरिए अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों में भारतीय दवाओं की मांग बढ़ने से घरेलू दवा उद्योग मजबूत होता है, जिससे आम भारतीयों को भी देश में सस्ती और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।

भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” का प्रमाण
अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मजबूत रिश्तों को बनाए रखते हुए, रूस, चीन और खाड़ी देशों के साथ ब्रिक्स के मंच पर एक साथ काम करना भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” (Strategic Autonomy) का सबसे बड़ा उदाहरण है। भारत न केवल एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज बनकर अपने आर्थिक और सामाजिक हितों को मजबूती से सुरक्षित कर रहा है।

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