7 अक्टूबर 2001 को जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी, तब राज्य विनाशकारी भुज भूकंप की विभीषिका से जूझ रहा था। उस कठिन परिस्थिति से आरंभ हुई यह प्रशासनिक यात्रा वर्ष 2026 में अपने 25 वर्ष पूरे कर चुकी है। एक राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के रूप में लगातार ढाई दशक तक किसी निर्वाचित संवैधानिक पद पर बने रहना स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास का एक दुर्लभ और प्रभावशाली अध्याय है। यह कालखंड केवल सत्ता की निरंतरता का नहीं, बल्कि ‘आपदा में अवसर’ तलाशने, नीतिगत जड़ता को समाप्त करने और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और निर्णायक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का दस्तावेज है। गुजरात के पुनर्निर्माण से शुरू होकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराने और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प तक, नरेंद्र मोदी की जनसेवा के इन 25 वर्षों के प्रमुख पड़ावों और ऐतिहासिक निर्णयों का क्रमिक विवरण इस प्रकार है:
1. 7 अक्टूबर 2001: गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली शपथ
7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार किसी निर्वाचित संवैधानिक पद का दायित्व संभालते हुए गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। संगठन के शिल्पी से सीधे शासन के शीर्ष पर पहुंचे मोदी के सामने राजनीतिक अनिश्चितता और शिथिल पड़ी नौकरशाही को सक्रिय करने की दोहरी चुनौती थी। सत्ता संभालते ही उन्होंने प्रशासनिक तंत्र में परिणामों पर आधारित कार्यसंस्कृति की नींव रखी। नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए तकनीक आधारित मंच ‘स्वागत’ (SWAGAT – State Wide Attention on Public Grievances by Application of Technology) शुरू किया गया, जिसे आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र (UN) के लोक सेवा सम्मान से सराहा गया। इसके साथ ही शासन में नवीनता लाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वार्षिक ‘चिंतन शिविर’ की शुरुआत हुई, जिसने राज्य में पारदर्शी कार्यशैली का मार्ग प्रशस्त किया।
गौरवशाली नेतृत्व के 8,934 दिन… नाम, नरेन्द्र दामोदरदास मोदी!
लगभग 25 वर्षों की जनसेवा की इस यात्रा में एक ही संकल्प स्पष्ट दिखता है — नया भारत, मजबूत भारत।
साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ ही नवनिर्माण का सफर शुरू हुआ। गुजरात विकास की ऐसी मिसाल बना, जिसने… pic.twitter.com/0gOKKT7gCR
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2. 2001: भुज भूकंप के मलबे से गुजरात का पुनरुद्धार
26 जनवरी 2001 को आए विनाशकारी भुज भूकंप से समूचा कच्छ क्षेत्र खंडहर बन चुका था। मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद नरेंद्र मोदी ने संकट प्रबंधन को आपातकालीन राहत से आगे ले जाकर ‘बिल्ड बैक बेटर’ (Build Back Better) के दृष्टिकोण में ढाला। गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (GSDMA) के माध्यम से राहत और पुनर्वास को संस्थागत रूप दिया गया। भूकंपरोधी टाउन प्लानिंग के तहत नए भुज, अंजार और भचाऊ जैसे शहरों का पुनर्निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ। बेघर परिवारों को पक्के आवास, आधुनिक स्कूल और अस्पताल सौंपे गए। साथ ही कच्छ के बंजर रण को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए ‘रण उत्सव’ की परिकल्पना इसी दौर में जन्मी, जिससे आपदा को अवसर में बदलने का यह प्रयास वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बना।
3. 22 दिसंबर 2002: दूसरे कार्यकाल की शपथ और विकास का नया जनादेश
आपदा प्रबंधन की सफलता के बाद दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर नरेंद्र मोदी ने 22 दिसंबर 2002 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस कार्यकाल में उन्होंने राज्य को वित्तीय घाटे से उबारने के लिए कड़े वित्तीय अनुशासन और नीतिगत सुधारों को प्राथमिकता दी। सूखे से जूझते कृषि क्षेत्र में नई जान फूंकने के लिए ‘कृषि महोत्सव’ की शुरुआत हुई, जिसमें वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी सीधे गांवों में जाकर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card), सूक्ष्म सिंचाई और उन्नत बीजों के प्रयोग के लिए प्रेरित करते थे। लाखों चेकडैम और जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से राज्य की कृषि विकास दर दहाई अंक के करीब पहुंची और नर्मदा नहर नेटवर्क का विस्तार तेज हुआ।

4. 2003: वाइब्रेंट गुजरात समिट – दुनिया से जुड़ता राज्य
पूंजी निवेश आकर्षित करने और औद्योगीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से 2003 में पहली बार ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ का आयोजन हुआ। यह किसी भी भारतीय राज्य द्वारा वैश्विक उद्योगपतियों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं को सीधे अपने यहां आमंत्रित करने का अभिनव प्रयोग था। सिंगल-विंडो सिस्टम और पारदर्शी नीतियों के चलते दुनिया की शीर्ष कंपनियों ने राज्य का रुख किया। इस द्विवार्षिक मंच ने गुजरात को पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ा, जो बाद में अन्य राज्यों के लिए निवेश जुटाने का मानक ढांचा बना।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का दूरदर्शी नेतृत्व सदैव साहसिक विचारों को धरातल पर साकार करने के लिए जाना जाता है।
वर्ष 2003 में शुरू किया गया वाइब्रेंट गुजरात गुजरात को विश्व से जोड़ने और भारत की विकास यात्रा को गति देने की परिकल्पना के साथ शुरू हुआ था। pic.twitter.com/4IE1AEMmLp
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5. 2003: ज्योतिग्राम योजना – ग्रामीण सशक्तिकरण और 24 घंटे बिजली
ग्रामीण जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 2003 में ‘ज्योतिग्राम योजना’ लागू की गई। पहले गांवों में अनियमित आपूर्ति और लो-वोल्टेज की बड़ी समस्या थी। इस योजना के अंतर्गत कृषि फीडरों और घरेलू बिजली फीडरों को तकनीकी रूप से अलग किया गया। फलस्वरूप राज्य के 18,000 से अधिक गांवों को चौबीसों घंटे निर्बाध थ्री-फेज घरेलू बिजली और किसानों को तय समय पर उच्च-गुणवत्ता वाली सिंचाई बिजली मिलने लगी। इस कदम से गांवों में लघु उद्योग, वेल्डिंग इकाइयां, आटा चक्कियां और कंप्यूटर शिक्षा सुलभ हुई, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर सुधरा और शहरों की ओर पलायन थमा।
2001 ➔ 2026: 25 वर्षों की ऐतिहासिक विकास यात्रा! 🇮🇳⚡
इस अभूतपूर्व विकास यात्रा में वाइब्रेंट गुजरात, साबरमती रिवरफ्रंट, अटल सेतु, स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, सर्जिकल स्ट्राइक, जीएसटी, धारा 370 का खात्मा, भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण, आत्मनिर्भर भारत, चंद्रयान-3 का सफल… pic.twitter.com/BSr4MVByrQ
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6. 2005: साबरमती रिवरफ्रंट – शहरी पुनर्विकास का नया मॉडल
अहमदाबाद से गुजरने वाली साबरमती नदी जो लंबे समय से गंदगी और सीवेज की मार झेल रही थी, उसे 2005 में ‘साबरमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट’ के जरिए नया जीवन दिया गया। नदी के दोनों किनारों पर पक्के तटबंध बनाए गए, शहर के सीवेज नेटवर्क को डायवर्ट कर शोधन संयंत्रों से जोड़ा गया और नर्मदा नहर से जल लाकर नदी को अविरल बनाया गया। प्रभावित झुग्गीवासियों को पक्के फ्लैटों में गरिमापूर्ण पुनर्वास मिला। विस्तृत वॉकवे, हरित पार्क और बोटिंग सुविधाओं के साथ तैयार यह स्थल भारत में पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक शहरी बुनियादी ढांचे के सुंदर समन्वय का प्रतीक बना।
🚨 अहमदाबाद का साबरमती रिवरफ्रंट देखिए!
साबरमती रिवरफ्रंट का ये बदला हुआ रूप सच में काफी शानदार लग रहा है। शहर की खूबसूरती और विकास दोनों साथ दिख रहे हैं।
ऐसा काम सिर्फ अहमदाबाद में नहीं, देश के बाकी शहरों में भी होना चाहिए। हर शहर में नदी और आसपास के इलाकों को साफ-सुंदर बनाया… pic.twitter.com/vzL58bVQVt
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7. 2007: गिफ्ट सिटी – देश का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर नरेंद्र मोदी ने 2007 में गांधीनगर के पास ‘गिफ्ट सिटी’ (GIFT City) की आधारशिला रखी। इसका उद्देश्य भारतीय प्रतिभा और कारोबार को सिंगापुर, दुबई और लंदन जैसे वैश्विक केंद्रों का घरेलू विकल्प उपलब्ध कराना था। भूमिगत यूटिलिटी टनल, स्वचालित कचरा निस्तारण और डिस्ट्रिक्ट कूलिंग प्रणाली से लैस यह देश का पहला ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहर बना। कालांतर में इसे भारत के प्रथम अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) के रूप में मान्यता मिली, जहां आज वैश्विक बैंक, विदेशी शेयर बाजार और फिनटेक कंपनियां संचालित हो रही हैं।
#DECODE | गिफ्ट सिटी ने सिंगापुर और हांग कांग को कैसे पीछे छोड़ा?
Command & Control Centre गिफ्ट सिटी का Brain
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8. 25 दिसंबर 2007: तीसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ – औद्योगीकरण की छलांग
दिसंबर 2007 में चुनावी जीत की हैट्रिक के बाद नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2007 को तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला। जब पश्चिम बंगाल के सिंगूर में विरोध के चलते टाटा मोटर्स का नैनो प्रोजेक्ट संकट में पड़ा, तब मोदी ने त्वरित निर्णय लेते हुए साणंद में भूमि और सभी अनुमतियां तत्काल उपलब्ध कराईं। इस कदम ने गुजरात को प्रमुख ऑटोमोबाइल क्लस्टर में तब्दील कर दिया, जहां आगे चलकर फोर्ड, मारुति सुजुकी और होंडा जैसी कंपनियों ने अपने कारखाने लगाए। इसी दौर में उन्होंने प्राथमिक शिक्षा में शत-प्रतिशत दाखिले के लिए ‘शाला प्रवेशोत्सव’ और बालिकाओं के लिए ‘कन्या केलवणी’ अभियान का स्वयं नेतृत्व किया, जिससे ड्रॉपआउट दर न्यूनतम स्तर पर आ गई।
9. 2010–12: चरणका सोलर पार्क और हरित ऊर्जा की शुरुआत
जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक विमर्श के शुरुआती दौर में ही गुजरात ने 2009 में देश का पहला स्वतंत्र ‘जलवायु परिवर्तन विभाग’ स्थापित कर लिया था। 2010 से 2012 के दौरान पाटन जिले के चरणका रेगिस्तान में 500 मेगावाट से अधिक क्षमता वाला विशाल सोलर पार्क विकसित किया गया, जो उस समय एशिया के अग्रणी सौर ऊर्जा संयंत्रों में था। इसके साथ ही नर्मदा नहरों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर ‘कैनाल-टॉप सोलर प्लांट’ का सफल प्रयोग किया गया। इससे भूमि अधिग्रहण के बिना स्वच्छ बिजली बनी और जलवाष्पीकरण रुकने से लाखों लीटर पेयजल की बचत हुई।
10. 26 दिसंबर 2012: चौथी बार मुख्यमंत्री की शपथ – निरंतर जनादेश
सुशासन और बुनियादी ढांचे के विस्तार के आधार पर नरेंद्र मोदी ने 26 दिसंबर 2012 को चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस कार्यकाल में उन्होंने प्रशासनिक विकेंद्रीकरण करते हुए कई नए जिलों और तालुकों का गठन किया ताकि जनसुविधाएं लोगों के दरवाजे तक पहुंच सकें। सौराष्ट्र के 115 बांधों को नर्मदा के अधिशेष जल से भरने वाली महत्वाकांक्षी ‘सौनी योजना’ (SAUNI Yojana) का खाका इसी समय तैयार हुआ। गुजरात में लगातार बनी राजनीतिक स्थिरता और विकास के ठोस परिणामों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व के निर्विवाद विकल्प के रूप में खड़ा किया।
11. 26 मई 2014: भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पहला जनादेश
तीन दशकों के गठबंधन दौर के बाद 2014 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिले स्पष्ट बहुमत के साथ 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण में सार्क (SAARC) देशों के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति ने उनकी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने स्वयं को ‘प्रधान सेवक’ बताते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ का दृष्टिकोण सामने रखा। पुराने योजना आयोग के स्थान पर सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए ‘नीति आयोग’ का गठन किया गया, जिससे राज्यों को राष्ट्रीय नीति-निर्माण में बराबर का साझेदार बनाया गया।
2014 में इसी दिन @narendramodi ने पहली बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
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12. 2014–15: जनभागीदारी से सामाजिक बदलाव की नींव
प्रधानमंत्री के पहले वर्ष में सरकारी योजनाओं को लोक-आंदोलन का स्वरूप दिया गया। आर्थिक अस्पृश्यता मिटाने के लिए ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ के तहत 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए। 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुए ‘स्वच्छ भारत अभियान’ ने 11 करोड़ से अधिक ग्रामीण शौचालयों का निर्माण कराकर स्वच्छता को जन-संस्कार में बदला। घरेलू विनिर्माण को गति देने हेतु ‘मेक इन इंडिया’, छोटे उद्यमियों के लिए कोलेटरल-फ्री ऋण हेतु ‘मुद्रा योजना’ और लैंगिक असंतुलन दूर करने के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान शुरू किए गए, जिनसे सामाजिक चेतना में बड़ा परिवर्तन आया।
13. 2015–16: डिजिटल तंत्र और सामाजिक कल्याण का समन्वय
प्रौद्योगिकी को कल्याणकारी नीतियों का माध्यम बनाते हुए जुलाई 2015 में ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन प्रारंभ किया गया। ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया और डेटा सुलभ कराया गया। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा तैयार UPI (Unified Payments Interface) ने डिजिटल लेन-देन को सामान्य नागरिक की दिनचर्या का हिस्सा बना दिया। मई 2016 में लागू ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ ने 10 करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देकर चूल्हे के धुएं से राहत दी। इसके साथ ही युवाओं को रोजगारपरक बनाने के लिए ‘स्किल इंडिया’ और स्वरोजगार के लिए ‘स्टार्टअप इंडिया’ को गति दी गई।
14. 29 सितंबर 2016: सर्जिकल स्ट्राइक – राष्ट्रीय सुरक्षा में दृढ़ दृष्टिकोण
18 सितंबर 2016 को उरी सैन्य छावनी पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सुरक्षा नीति में निर्णायक बदलाव दिखा। 29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना के स्पेशल फोर्सेज ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर आतंकियों के कई लॉन्च पैड्स को ध्वस्त कर दिया। इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने देश की रक्षा रणनीति में प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण स्थापित किया। भारत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह सीमा पार जाकर भी सटीक कार्रवाई करने की क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति रखता है।
15. 2017: जीएसटी – ‘एक राष्ट्र, एक कर’ का आर्थिक सुधार
1 जुलाई 2017 की मध्यरात्रि को संसद के सेंट्रल हॉल से वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया। यह आजादी के बाद का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार था। राज्यों और केंद्र के 17 से अधिक करों व दर्जनों सेस को समाप्त कर पूरे देश में एकल कर व्यवस्था लागू की गई। वाणिज्यिक वाहनों के लिए राज्यों की सीमाओं पर बने चेकपोस्ट हटने से लॉजिस्टिक्स लागत घटी और सामान की आवाजाही तेज हुई। जीएसटी काउंसिल के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच आम सहमति से निर्णय लेने की नई संघीय व्यवस्था अस्तित्व में आई, जिससे कर प्रणाली पारदर्शी हुई।
🚨 BIG BREAKING: INDIA’S GROSS GST COLLECTION CROSSES ₹2.11 LAKH CRORE! 🚨
Another strong month for the Indian economy. 🇮🇳
📍 Total Gross GST: ₹2,11,205 crore (↑ 15.4% YoY)
📍 Net GST revenue rose 15.8% year-on-year to Rs 1.81 lakh crore, up from Rs 1.57 lakh crore a… pic.twitter.com/95z4A1sg9b
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16. 2018: आयुष्मान भारत – विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा
कमजोर तबके को इलाज के खर्च से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए 23 सितंबर 2018 को ‘आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ का शुभारंभ हुआ। इसके अंतर्गत देश के 12 करोड़ से अधिक परिवारों (लगभग 55 करोड़ नागरिकों) को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई। प्राथमिक चिकित्सा को सुलभ बनाने के लिए देश भर में 1.5 लाख से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ स्थापित किए गए। इस व्यवस्था ने कैंसर, हृदय और गुर्दा रोग जैसी जटिल बीमारियों के उपचार को साधारण परिवारों की क्षमता के भीतर ला खड़ा किया।
Health security is standardizing transformed care across Uttar Pradesh! 🏥✨
Through massive welfare pushes and healthcare expansion, millions of families are now protected under state and central health initiatives:
🔹5.64+ Crore Ayushman Cards Issued: UP leads the nation,… https://t.co/8xqhY44mP9 pic.twitter.com/ki6FDvKfla
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17. 30 मई 2019: प्रधानमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल – अटूट जनविश्वास
2019 के आम चुनावों में मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी की नीतियों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए बिचौलिया-मुक्त शासन पर पुनः विश्वास जताते हुए भाजपा को 303 सीटें दीं। 30 मई 2019 को उन्होंने दूसरे कार्यकाल की शपथ ली। इस भारी जनसमर्थन ने स्पष्ट किया कि कल्याणकारी योजनाओं की सीधी पहुंच और राष्ट्रीय हितों पर लिए गए साहसिक निर्णयों को जनमानस का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। इसके साथ ही सरकार ने बुनियादी विकास और सामाजिक सुरक्षा के लक्ष्यों को और तेज करने का मार्ग चुना।
18. 5 अगस्त 2019: अनुच्छेद 370 की समाप्ति – वैधानिक एकीकरण
5 अगस्त 2019 को संसद के दोनों सदनों की सहमति से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35A के प्रावधानों को निष्प्रभावी किया गया। राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया। इस निर्णय से भारतीय संविधान, केंद्रीय कानून और आरक्षण नीतियां घाटी में पूर्ण रूप से लागू हो गईं। दशकों से व्याप्त अलगाववाद की कमर टूटी, पथराव की घटनाओं पर विराम लगा और क्षेत्र में त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव, पर्यटन व नए औद्योगिक निवेश के माध्यम से मुख्यधारा के विकास का संचार हुआ।
19. 15 अगस्त 2019: जल जीवन मिशन – हर घर नल से स्वच्छ जल
73वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से ‘जल जीवन मिशन’ का शंखनाद किया गया। अगस्त 2019 तक देश के केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल से पानी उपलब्ध था। मिशन मोड पर काम करते हुए कुछ ही वर्षों में 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को पाइपलाइन से जोड़ा गया। इस व्यवस्था ने विशेषकर महिलाओं को दूर-दराज से पानी भरकर लाने के दैनिक श्रम से मुक्ति दिलाई और दूषित पानी से होने वाली बीमारियों में कमी लाकर ग्रामीण स्वास्थ्य को मजबूत किया।
हर घर जल: ग्रामीण जल संकट को सफलता की कहानी में बदलने वाला एक मिशन…
पीएम श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन से हर घर जल का सपना साकार हो रहा है। इस योजना ने ग्रामीण भारत के करोड़ों लोगों के जीवन में नई क्रांति ला दी है।
जिन लोगों को पीने के पानी के लिए कई-कई… pic.twitter.com/Z7vk4KVsx0
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20. 2020: आत्मनिर्भर भारत – आपदा के समय आर्थिक संबल
वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के अप्रत्याशित संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश को ‘आत्मनिर्भर भारत’ का दृष्टिकोण दिया और 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की। देश में पीपीई किट, मास्क, वेंटिलेटर और स्वदेशी टीकों का तीव्र गति से उत्पादन हुआ और 220 करोड़ से अधिक टीके नागरिकों को निःशुल्क लगाए गए। संकटकाल में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के जरिए 80 करोड़ जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया गया, जिससे वैश्विक मंदी के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनी रही।
21. 2021: पीएम गति शक्ति – मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का समन्वय
अक्टूबर 2021 में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में मंत्रालयों के बीच तालमेल की कमी दूर करने के लिए ‘पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ शुरू किया गया। रेलवे, सड़क, बंदरगाह, उड्डयन और दूरसंचार जैसे 16 विभागों को एक साझा जीआईएस (GIS) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया। इससे बार-बार सड़कों की खुदाई, परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि की समस्या पर लगाम लगी। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समन्वय से देश में लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और उद्योगों की कार्यकुशलता बढ़ाने का ठोस आधार बना।
22. 23 अगस्त 2023: चंद्रयान-3 – चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा
23 अगस्त 2023 को इसरो के ‘चंद्रयान-3’ के लैंडर ‘विक्रम’ ने चंद्रमा के दुर्गम दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। भारत इस क्षेत्र में कदम रखने वाला दुनिया का पहला और चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला चौथा देश बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को राष्ट्र के वैज्ञानिक सामर्थ्य की विजय बताते हुए लैंडिंग पॉइंट का नाम ‘शिव शक्ति’ रखा और 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ घोषित किया। इसने देश के अंतरिक्ष अनुसंधान और निजी स्पेस सेक्टर के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले।
#WATCH | चंद्रयान-3 ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बना दिया। आदित्य L-1 सूरज के रहस्यों का पता लगा रहा है। पिछले साल, एक भारतीय ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का दौरा किया। आगे की बात करें तो, हमारा लक्ष्य 2035 तक एक भारतीय स्पेस स्टेशन बनाना और 2040 तक… pic.twitter.com/JxOHUk1KBp
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23. 2023: भारत की जी-20 अध्यक्षता – कूटनीतिक समन्वय की छाप
वर्ष 2023 में भारत ने जी-20 की अध्यक्षता ‘वसुधैव कुटुंबकम – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के ध्येय वाक्य के साथ संभाली। इसे राजधानी तक सीमित न रखकर देश के 60 शहरों में 200 से अधिक बैठकों के जरिए जनभागीदारी से जोड़ा गया। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में भू-राजनीतिक तनावों के बीच सर्वसम्मति से साझा घोषणापत्र पारित हुआ। भारत के प्रयासों से 55 देशों के अफ्रीकी संघ (African Union) को समूह का स्थायी सदस्य बनाया गया। साथ ही स्वच्छ ईंधन के लिए ‘ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस’ और रणनीतिक आर्थिक गलियारे (IMEC) की नींव रखी गई।
24. 17 सितंबर 2023: पीएम विश्वकर्मा योजना – पारंपरिक कारीगरों को संबल
17 सितंबर 2023 को पारंपरिक शिल्पकारों और दस्तकारों के सशक्तीकरण के लिए 13,000 करोड़ रुपये के बजट वाली ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ प्रारंभ की गई। इसमें बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, राजमिस्त्री और बुनकर जैसे 18 पारंपरिक शिल्पों के कारीगरों को शामिल किया गया। योजना के अंतर्गत आधुनिक टूलकिट के लिए वित्तीय अनुदान, कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, पहचान पत्र और रियायती ब्याज दर पर बिना गारंटी का कर्ज उपलब्ध कराया गया, ताकि सदियों पुरानी हस्तकला परंपरा को आधुनिक बाजार और मूल्य श्रृंखला से जोड़ा जा सके।
पीएम विश्वकर्मा योजना का सबसे बड़ा लाभ समाज के उस तबके को हुआ है, जिन्हें दशकों तक अनदेखा किया गया।
हमारे विश्वकर्मा भाई-बहनों के पास हुनर तो था, लेकिन पिछली सरकारों के पास उनके हुनर को आगे बढ़ाने का कोई प्लान नहीं था। उनका जीवन बेहतर बनाने की कोई योजना नहीं थी।
हमने उनकी… pic.twitter.com/3laPRksaZ0
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25. सितंबर 2023: नारी शक्ति वंदन अधिनियम – विधायी संस्थाओं में 33% आरक्षण
नए संसद भवन के प्रथम विशेष सत्र में दशकों से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संविधान संशोधन) के रूप में संसद के दोनों सदनों से भारी समर्थन से पारित कराया गया। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गईं। यह निर्णय नीति-निर्माण के सर्वोच्च स्तर पर महिलाओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने और ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) के दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देने वाला बड़ा वैधानिक कदम बना।
अब नेतृत्व की बारी है,
नारी शक्ति वंदन की जिम्मेदारी है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में उनका अधिकार दिलाकर भारत को अधिक सशक्त, समावेशी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। pic.twitter.com/agZiK6iniU
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) April 12, 2026
26. 22 जनवरी 2024: अयोध्या में श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा
सदियों के इंतजार और न्यायिक प्रक्रिया के समापन के उपरांत 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में विधि-विधान से संपन्न हुई। राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने इसे आगामी सदियों के सक्षम और सांस्कृतिक रूप से जागृत भारत की आधारशिला बताया। इस पूरे कालखंड में सरकार ने ‘विकास भी, विरासत भी’ के सूत्र पर चलते हुए काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल महालोक और केदारनाथ पुनर्निर्माण जैसे सांस्कृतिक स्थलों का भी कायाकल्प किया।
अद्भुत, अलौकिक क्षण!
सपना हुआ साकार!करोड़ों भारतवासियों🇮🇳 के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के भव्य-दिव्य और नव्य मंदिर🛕 का अयोध्या धाम में निर्माण होना रामराज्य की ओर बढ़ते भारत का एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस खुशी को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है! प्रधानमंत्री श्री… pic.twitter.com/MRpyn0qUjA
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) January 22, 2024
27. 13 फरवरी 2024: पीएम सूर्य घर योजना – सौर ऊर्जा का विस्तार
आम नागरिकों को बिजली बिल से राहत देने और स्वच्छ ऊर्जा को घर-घर पहुंचाने के लिए 13 फरवरी 2024 को 75,000 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ शुरू की गई। इसका लक्ष्य 1 करोड़ परिवारों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाना है। सरकार द्वारा सीधी सब्सिडी उपलब्ध कराई गई, जिससे परिवारों को प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल रही है और अधिशेष बिजली ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त आय का जरिया बना है। यह पहल देश के कार्बन उत्सर्जन को घटाने में मददगार सिद्ध हो रही है।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने Energy Security के अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है।
काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं।
इससे हर रोज तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों… pic.twitter.com/kxiKUx7Or7
— Amit Malviya (@amitmalviya) December 6, 2025
28. 9 जून 2024: प्रधानमंत्री के रूप में तीसरा कार्यकाल – ऐतिहासिक निरंतरता
2024 के लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिले बहुमत के बाद नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। स्वतंत्र भारत में लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले वे दूसरे राजनेता बने। कार्यभार संभालते ही उन्होंने सबसे पहले किसानों के हित में ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ की किस्त जारी करने का निर्णय लिया। यह तीसरा कार्यकाल देश में नीतिगत निरंतरता और भारत को शीर्ष तीन वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने के रोडमैप को समर्पित है।
29. सितंबर 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन – आतंकवाद पर साझा रुख और कूटनीतिक संतुलन
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के कूटनीतिक संतुलन और सामरिक स्वायत्तता का प्रभावी प्रदर्शन किया। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की मध्यस्थता से ईरान और यूएई सहित सभी 11 सदस्य राष्ट्र ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर सहमत हुए। भारत के रुख के अनुरूप सीमा पार आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और आतंकियों के पनाहगाहों के विरुद्ध कड़ा संदेश दिया गया तथा पहलगाम आतंकी घटना की भर्त्सना के साथ ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन’ (CCIT) को शीघ्र अपनाने पर सहमति बनी। साथ ही तमिलनाडु के रामनाथस्वामी मंदिर की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में वैश्विक नेताओं के स्वागत से भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ।
#WATCH | दिल्ली | ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत ने ब्रिक्स के मंच से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है। हमारा प्रयास रहा है कि ब्रिक्स सहयोग केवल सरकारों तक सीमित ना रहे, हमारे एंटरप्रेन्योर, किसान, रिसर्चर्स, महिलाएं,… pic.twitter.com/7MCGNmj01I
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 13, 2026
30. 7 अक्टूबर 2026: सेवा के 25 साल और ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा
7 अक्टूबर 2001 को मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ यह सफर 7 अक्टूबर 2026 को लगातार 25 वर्ष पूरे करने जा रहा है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बिना किसी अंतराल के ढाई दशक तक निर्वाचित सरकार के मुखिया (मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री) के रूप में जनता का विश्वास बनाए रखना अपने आप में दुर्लभ उदाहरण है। भुज के पुनर्निर्माण से लेकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक और गांव-गांव बिजली से लेकर हर घर सौर ऊर्जा तक, यह यात्रा निरंतर बदलाव और जनसेवा की रही है। सेवा के इस मजबूत आधार पर देश अब वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है।










