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BRICS में भारत का Peace & Development एजेंडा: शांति से समृद्धि तक नई वैश्विक सोच

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जब दुनिया युद्ध, संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से जूझ रही है, तब भारत BRICS के मंच से एक स्पष्ट और सकारात्मक वैश्विक संदेश सामने रख रहा है- शांति विकास की पहली शर्त है। भारत की सोच है कि वैश्विक व्यवस्था टकराव से नहीं, संवाद और सहयोग से आगे बढ़े और विकास का लाभ Global South तक पहुंचे। भारत का यही वो विजन है जो BRICS को आर्थिक सहयोग के मंच से आगे ले जाकर Peace, Development और Global Cooperation के प्रभावी मंच में बदल सकता है।

युद्ध के दौर में भारत का संदेश- This is not an era of war

आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती युद्धों का पूरे विश्व पर हो रहा प्रभाव हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष से लेकर पश्चिम एशिया तक, क्षेत्रीय संघर्षों ने खाद्य, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसका सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ा है। भारत लंबे समय से इस चुनौती का समाधान संवाद और कूटनीति में देखता आया है। अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था।

भारत का संदेश केवल युद्ध रोकने तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री ने 2025 में संसद में कहा था:

Peace से Development की भारत की सोच 

भारत के लिए Peace और Development दो अलग-अलग एजेंडे नहीं हैं। जहां युद्ध होता है, वहां विकास की गति रुकती है; संसाधन शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रोजगार से हटकर संघर्ष और सुरक्षा की ओर चले जाते हैं।

BRICS के घोषणा-पत्रों में भी वैश्विक संघर्षों पर चिंता व्यक्त करते हुए विकासशील देशों के लिए डेवलपमेंट फंड की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके साथ ही राजनीतिक-कूटनीतिक उपायों और conflict prevention पर जोर रहा है।

इससे भारत की सोच को और मजबूती मिली है। भारत का मानना रहा है कि दुनिया में स्थायी शांति होगी, तो ही Global South अपने विकास लक्ष्यों को तेजी से हासिल कर सकेगा।

प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध के संदेश को आधुनिक वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा था:

यह केवल सांस्कृतिक संदेश नहीं, बल्कि भारत की उस वैश्विक सोच का प्रतीक है जिसमें शांति, करुणा, संवाद और मानवता को प्राथमिकता दी गई है। 

BRICS में भारत का एजेंडा- संघर्ष नहीं, संवाद

BRICS का विस्तार इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण Global South platforms में से एक बना चुका है। ऐसे समय में जब पूरा विश्व विभिन्न शक्ति-ध्रुवों में बंटा दिखाई दे रहा है, भारत के सामने चुनौती है कि BRICS को किसी विरोधी ब्लॉक की तरह नहीं, बल्कि सहयोग और संवाद के मंच के रूप में आगे बढ़ाया जाए।

भारत का जोर ऐसे BRICS पर है जो:

  • अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का माध्यम बने,
  • संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दे,
  • अंतरराष्ट्रीय कानून और UN Charter का सम्मान करे,
  • सुरक्षित समुद्री मार्गों और वैश्विक व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करे, 
  • आतंकवाद के खिलाफ साफ रुख अपनाए और
  • Global South के विकास को प्राथमिकता में रखे

यूक्रेन संकट पर भारत लगातार dialogue and diplomacy के माध्यम से व्यापक और स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। 2024 में यूक्रेन यात्रा के दौरान भी भारत ने शांतिपूर्ण समाधान और संवाद-कूटनीति को अपनी प्राथमिकता बताया था।

इसलिए BRICS में भारत की भूमिका किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने की नहीं, बल्कि शांति के लिए संवाद का पुल मजबूत करने की है।

Global South की आवाज से Global Decision-Making तक

BRICS की सबसे बड़ी ताकत इसकी सामूहिक आर्थिक शक्ति है। जनसंख्या के हिसाब से भी इसमें Global South की आवाज को मजबूती देने की क्षमता है।

भारत लंबे समय से कहता रहा है कि विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में केवल नीतियों के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाले साझेदार के रूप में स्थान मिलना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार से लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व, डेवलपमेंट फंड, क्लाइमेट फंड, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के साथ ही तकनीकी सहयोग तक, Global South की प्राथमिकताएं आज वैश्विक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा था:

यही कारण है कि भारत BRICS को ऐसी अधिक समावेशी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के माध्यम के रूप में देखता है।BRICS के घोषणा-पत्रों में भी अधिक प्रतिनिधित्व वाली, निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, सतत विकास और inclusive growth को BRICS सहयोग के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल किया गया था।

Economic Cooperation से Global Resilience तक

शांति की मजबूत नींव के साथ आर्थिक स्थिरता और विकास पर भी फोकस जरूरी है। भारत के लिए BRICS का महत्व इसलिए भी बढ़ता है क्योंकि यह व्यापार, निवेश, फाइनेंस, डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को बढ़ा रहा है। 

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, भुगतान प्रणालियों में सहयोग, वित्तीय संस्थाओं के बीच संपर्क, सप्लाई चेन की मजबूती और नए निवेश अवसर BRICS देशों की आर्थिक resilience को मजबूत कर सकते हैं।

दुनिया ने महामारी और युद्धों के दौरान देखा है कि वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान का सबसे बड़ा असर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा था। इसलिए भारत का जोर ऐसी साझेदारी पर है जो संकट के समय भी विकास की गति को बनाए रख सके।

भारत का BRICS विजन साफ है:

Peace creates stability.
Stability enables development.
And development creates lasting peace.

People-Centric BRICS- लाभ आम लोगों तक पहुंचे

भारत के नजरिए से देखें तो BRICS केवल राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों का मंच नहीं है। इसकी वास्तविक सफलता तब होगी जब इसका लाभ युवाओं, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्यमियों और आम नागरिकों तक पहुंचे।

शिक्षा, कौशल, डिजिटल तकनीक, AI, खेल, संस्कृति, अकादमिक सहयोग और नागरिक समाज के बीच संपर्क BRICS को people-centric बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यही कारण है कि भारत की BRICS सोच में people-to-people cooperation को महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। एक ऐसा BRICS जो केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि नई पीढ़ी के लिए शिक्षा, innovation, technology और entrepreneurship के अवसर पैदा करे। 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप तभी एक प्रभावी BRICS बन सकता है।

भारत का BRICS विजन- शांति और विकास के साथ

BRICS के विस्तार के साथ इसका वैश्विक प्रभाव बढ़ा है, लेकिन इसकी वास्तविक शक्ति सदस्य देशों की संख्या में नहीं, बल्कि साझा चुनौतियों पर साझा समाधान तैयार करने की क्षमता में है। भारत के सामने अवसर है कि वह BRICS को शक्ति-प्रतिस्पर्धा के एक और मंच के बजाय संवाद, विकास और सहयोग की वैश्विक प्रयोगशाला के रूप में आगे बढ़ाए।

भारत की विदेश नीति की विशेषता है: अलग-अलग मंचों पर सक्रिय भागीदारी, रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों के साथ वैश्विक हितों के बीच संतुलन।

शांति से विकास, विकास से समृद्धि और समृद्धि से स्थिरता

दुनिया आज जिस मोड़ पर खड़ी है, वहां केवल सैन्य शक्ति या आर्थिक शक्ति पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता है विश्वास, संवाद, सहयोग और साझा विकास की।

भारत का Peace & Development एजेंडा इसी नई वैश्विक सोच को सामने रखता है। युद्ध के स्थान पर संवाद, टकराव के स्थान पर सहयोग, अस्थिरता के स्थान पर स्थिरता और असमानता के स्थान पर समावेशी विकास।

BRICS के मंच से भारत का संदेश इसलिए केवल सदस्य देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है- स्थायी शांति विकास की पहली शर्त है।

यही वो विजन है जो BRICS को 21वीं सदी में Global South की आवाज से आगे बढ़ाकर शांति, विकास और अधिक संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की निर्णायक शक्ति बना सकती है।

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