Multi-Alignment से Global Leadership तक बदलती भूमिका
भारत आज वैश्विक मंच पर अपनी विदेश नीति के एक नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय कूटनीति ने शीतयुद्ध की पारंपरिक Non-Alignment की सीमाओं से आगे बढ़कर Multi-Alignment की ऐसी रणनीति विकसित की है, जिसमें भारत ने अलग-अलग शक्ति केंद्रों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप समानांतर और सक्रिय संबंध कायम रखे हैं।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि आज भारत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में केवल किसी मंच का सदस्य या सहभागी भर नहीं है। वह कई महत्वपूर्ण मंचों पर संवाद, सहमति और वैश्विक एजेंडा को दिशा देने वाला प्रमुख भागीदार है।
एक ओर भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ Quad में इंडो-पैसिफिक में स्थिरता और मुक्त एवं खुले समुद्री क्षेत्र की वकालत करता है, तो दूसरी ओर रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ SCO में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और संपर्क जैसे मुद्दों पर संवाद करता है। पश्चिम एशिया में I2U2 के माध्यम से भारत अपनी नई रणनीतिक भूमिका मजबूत कर रहा है, जबकि BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दे रहा है।
भारत की विदेश नीति अब किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय हर प्रमुख शक्ति केंद्र के साथ संवाद बनाए रखते हुए अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की है।
Multi-Alignment भारत की नई कूटनीति का आधार

बीते कुछ वर्षों में भारत की मौजूदा विदेश नीति का मूल मंत्र Strategic Autonomy है। इसका अर्थ किसी से दूरी बनाना नहीं, बल्कि अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता बनाए रखना है।
2023 में भारत की G20 अध्यक्षता
2023 में G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने केवल वैश्विक आर्थिक एजेंडे पर चर्चा नहीं की, बल्कि African Union को G20 का स्थायी सदस्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह संदेश गया कि भारत की प्राथमिकता केवल बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी जगह बनाना नहीं, बल्कि वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की भागीदारी को भी मजबूत करना है।
यही सोच Voice of Global South Summit में दिखाई दी। जहां भारत ने एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास किया। भारत आज केवल ‘Participant’ से आगे बढ़कर ‘Convenor’ और ‘Problem Solver’ की भूमिका निभा रहा है।
भारत का बढ़ता वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव

इससे पता चलता है कि भारत की विदेश नीति किसी एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। हिंद महासागर से इंडो-पैसिफिक, यूरेशिया से पश्चिम एशिया और ग्लोबल साउथ से वैश्विक अर्थव्यवस्था तक भारत एक साथ कई स्तरों पर सक्रिय है।
G20: वैश्विक अर्थव्यवस्था से आगे की भूमिका
G20 दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग का सबसे प्रभावशाली मंच है। भारत की 2023 की अध्यक्षता ने इसकी प्राथमिकताओं को विकासशील देशों की चिंताओं से जोड़ने का प्रयास किया।

‘One Earth, One Family, One Future’ के संदेश के साथ भारत ने जलवायु परिवर्तन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा तथा वैश्विक दक्षिण की विकास संबंधी जरूरतों को विमर्श के केंद्र में रखा।
अफ्रीकी संघ को G20 में स्थायी सदस्यता दिलाना भारत की उस कूटनीतिक क्षमता का उदाहरण था, जिसमें उसने विभिन्न समूहों के बीच सहमति बनाने की भूमिका निभाई।
BRICS: ग्लोबल साउथ की बढ़ती आवाज
BRICS भारत की Multi-Alignment रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यहां भारत अमेरिका जैसे पश्चिमी साझेदारों की अनुपस्थिति में रूस, चीन, ब्राजील और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संवाद करता है।

विस्तार के बाद BRICS का भौगोलिक और आर्थिक दायरा और व्यापक हुआ है। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और इंडोनेशिया जैसे देशों की भागीदारी ने इसे ग्लोबल साउथ के लिए और महत्वपूर्ण मंच बनाया है।
BRICS का New Development Bank (NDB) भी विकासशील देशों के लिए बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आया है।
Quad और I2U2: विश्व के प्रभावी रणनीतिक मंच
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग का महत्वपूर्ण मंच Quad
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का Quad आज इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है।

इसका दायरा केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा। वैक्सीन, स्वास्थ्य सुरक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियां, साइबर सुरक्षा, सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्र भी इसके एजेंडे का हिस्सा बन चुके हैं।
भारत ने लगातार साफ किया है कि Quad कोई सैन्य गठबंधन या ‘एशियन NATO’ नहीं है। इसकी प्राथमिकता मुक्त, खुले, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देना है।
I2U2: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक भूमिका
भारत, इज़राइल, UAE और अमेरिका का I2U2 एक अलग तरह का मिनीलैटरल मॉडल है।

यह मंच पारंपरिक सुरक्षा गठबंधन के बजाय खाद्य सुरक्षा, जल, ऊर्जा, तकनीक और निवेश जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में सहयोग पर केंद्रित है। इससे भारत की पश्चिम एशिया नीति में भी एक नया आयाम जुड़ा है, जहां कूटनीति को आर्थिक और तकनीकी साझेदारी के साथ जोड़ा जा रहा है।
SCO, BIMSTEC और IORA: यूरेशिया से हिंद महासागर तक
SCO: चुनौतीपूर्ण लेकिन जरूरी साझेदारी

Shanghai Cooperation Organisation (SCO) भारत की Multi-Alignment की जटिलता को सबसे स्पष्ट रूप से सामने लाता है। एक ही मंच पर भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ संवाद करना पड़ता है, जबकि रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ उसके महत्वपूर्ण रणनीतिक संबंध हैं। भारत SCO का उपयोग आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, मध्य एशिया से संपर्क और यूरेशियाई क्षेत्र में संवाद के लिए करता है।
BIMSTEC: दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सेतु

BIMSTEC भारत की ‘Act East Policy’ का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय आधार है। बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों को जोड़ने वाला यह मंच भारत को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच आर्थिक, संपर्क और रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर देता है।
IORA: हिंद महासागर की रणनीतिक धुरी
Indian Ocean Rim Association (IORA) भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि हिंद महासागर भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकॉनमी, आपदा प्रबंधन और व्यापारिक संपर्क के माध्यम से IORA भारत की समुद्री कूटनीति को मजबूत करता है।

केवल मंचों में भागीदारी नहीं, नए मंचों का निर्माण
भारत की बदलती भूमिका का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह केवल मौजूदा संस्थाओं में प्रभाव बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उसने स्वयं ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच और पहलें विकसित की हैं, जिनका उद्देश्य वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक सहयोग तैयार करना है।
International Solar Alliance- ISA

भारत और फ्रांस की पहल से शुरू हुआ International Solar Alliance सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है। इसका मुख्यालय भारत में है और यह विकासशील देशों में सौर ऊर्जा की पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है।
Coalition for Disaster Resilient Infrastructure- CDRI

CDRI का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे के बीच बुनियादी ढांचे को अधिक लचीला बनाना है। नई दिल्ली स्थित इसका सचिवालय भारत की उस भूमिका को दर्शाता है जिसमें वह वैश्विक चुनौतियों के लिए समाधान-आधारित साझेदारी तैयार कर रहा है।
Global Biofuels Alliance- GBA

2023 में G20 के दौरान शुरू हुआ Global Biofuels Alliance स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ ईंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भारत की एक प्रमुख पहल है।
IMEC: कनेक्टिविटी की नई परिकल्पना
India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) भारत की कनेक्टिविटी कूटनीति का एक महत्वाकांक्षी उदाहरण है। इसका लक्ष्य भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच व्यापार, परिवहन और आर्थिक संपर्क को मजबूत करना है।

Multi-Alignment ही भारत की असली ताकत
भारत की मौजूदा विदेश नीति को केवल ‘Multi-Alignment’ कह देना इसके व्यापक स्वरूप को पूरी तरह नहीं समझाता। भारत एक साथ अमेरिका के साथ तकनीक और रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। रूस के साथ ऊर्जा और रणनीतिक संबंध बनाए हुए है। यूरोप के साथ व्यापार और कनेक्टिविटी पर आगे बढ़ रहा है। खाड़ी देशों के साथ निवेश और ऊर्जा साझेदारी मजबूत कर रहा है। और BRICS तथा SCO में चीन के साथ संवाद भी जारी रख रहा है।
G20 में ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने से लेकर BRICS में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग, Quad में इंडो-पैसिफिक साझेदारी से लेकर SCO में यूरेशियाई संवाद और ISA, CDRI तथा GBA जैसी पहलों के जरिए नए वैश्विक मंच तैयार करने तक, भारत की भूमिका लगातार विस्तृत हुई है।
आज का भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए दुनिया के साथ साझेदारी बढ़ा रहा है। वह न किसी एक ध्रुव के साथ बंधा है, न किसी दूसरे से अलग-थलग है। यही भारत की नई कूटनीतिक पहचान है।









