नई दिल्ली इस समय दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक ताकतों की बड़ी कूटनीतिक हलचल का केंद्र बनी हुई है। 12 और 13 सितंबर 2026 को भारत की मेजबानी में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस साल चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक बदलाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ की आवाज और भारत की नेतृत्वकारी भूमिका के लिहाज से खास महत्व रखता है।
All set for BRICS 2026!@BricsIndia2026 pic.twitter.com/nXqqoBmoAm
— Narendra Modi (@narendramodi) September 10, 2026
इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की कमान संभाल चुका है। भारत को बार-बार मिली यह जिम्मेदारी वैश्विक मंच पर उसकी सक्रिय और प्रभावी भूमिका को दिखाती है। ब्रिक्स आज एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक अपनी पहुंच रखने वाला एक बड़ा वैश्विक समूह बन चुका है। 11 पूर्ण सदस्य देशों के साथ इसका दायरा पहले के मुकाबले काफी व्यापक हो गया है और पूरी दुनिया की नजरें इस सम्मेलन पर टिकी हैं।
This is Delhi. This is the moment.
With its heritage glowing and Bharat Mandapam gearing up, the capital puts the finishing touches in place for the 18th BRICS Summit.#BRICS2026 #BRICSIndia2026 #IndiaBRICSChairship pic.twitter.com/2HBXHFfnD0
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चार देशों के समूह से वैश्विक ताकत तक पहुंचा ब्रिक्स
ब्रिक्स की कहानी वर्ष 2001 में शुरू हुई, जब गोल्डमैन सैक्स के एक शोध पत्र में ‘ब्रिक’ शब्द का इस्तेमाल ब्राजील, रूस, भारत और चीन के लिए किया गया था। अनुमान लगाया गया था कि आने वाले दशकों में ये देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होंगे। समय के साथ आर्थिक अनुमान से निकली यह अवधारणा एक औपचारिक समूह में बदल गई। वर्ष 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के बीच राजनीतिक सहयोग के मंच के रूप में ब्रिक की औपचारिक स्थापना हुई। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका विस्तार ब्रिक्स के रूप में हुआ। इसके बाद ब्रिक्स का एजेंडा भी लगातार बड़ा होता गया। आर्थिक सहयोग के साथ विकास, वित्त, स्वास्थ्य, जलवायु, तकनीक, व्यापार, ऊर्जा और आतंकवाद जैसे मुद्दे भी इसके एजेंडे में शामिल होते गए।

अब 11 देशों की ताकत है ब्रिक्स
आज ब्रिक्स में 11 पूर्ण सदस्य देश हैं—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। इन देशों का विस्तार समूह को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा व्यापक बनाता है। इन 11 देशों की आबादी दुनिया की कुल आबादी का करीब 49.5 प्रतिशत है। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इनकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत और विश्व व्यापार में करीब 26 प्रतिशत है। यानी ब्रिक्स की ताकत केवल सदस्य देशों की संख्या में नहीं है। इसमें बड़े बाजार, प्राकृतिक संसाधन, ऊर्जा क्षमता, तकनीकी सामर्थ्य और अलग-अलग विकास अनुभव एक साथ आते हैं। यही विविधता इसे वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक बातचीत का महत्वपूर्ण मंच बनाती है।
With 11 Member Countries and 10 Partner Countries, BRICS seeks to deepen dialogue and cooperation, advance shared priorities and support a more inclusive and representative global governance architecture under India’s Chairship.#BRICS2026 #BRICSIndia2026 #IndiaBRICSChairship pic.twitter.com/2pOYKDwlZN
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भारत की चौथी बार अध्यक्षता, विकास और नवाचार पर जोर
भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। भारत की इस साल की अध्यक्षता का मार्गदर्शक विषय है—“सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण”। इसका सीधा जोर ऐसे ब्रिक्स पर है जो केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि व्यावहारिक और परिणाम देने वाले सहयोग को आगे बढ़ाए। भारत विकास, स्थिरता और नवाचार को ब्रिक्स के एजेंडे के केंद्र में रख रहा है। भारत की कोशिश यह भी है कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को ज्यादा मजबूती मिले। इसके लिए ब्रिक्स को एक रचनात्मक, समाधान-केंद्रित और परिणामोन्मुख मंच के तौर पर मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
From innovation to action.
Through knowledge sharing, mentorship, digital infrastructure and AI, India’s BRICS Chairship 2026 is fostering collaboration, strengthening capabilities and enabling new solutions.
🎥 Watch as we build a future-ready BRICS, together.#BRICS2026… pic.twitter.com/KLyKkNdNxC
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25 शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें
भारत की अध्यक्षता के दौरान देश के 25 शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन बैठकों में ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों—राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क—पर काम आगे बढ़ाया गया। इन बैठकों का फोकस केवल कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहा। कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, शहरों के विकास, एमएसएमई, स्टार्टअप, विज्ञान, कौशल, युवा, खेल तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी ठोस पहल सामने आईं।

कृषि में तकनीक और प्राकृतिक खेती पर सहयोग
भारत की अध्यक्षता में कृषि के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल आगे बढ़ी हैं। ब्रिक्स उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए प्राकृतिक, जैविक और पुनर्स्थापनात्मक कृषि पद्धतियों पर संयुक्त शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान की दिशा में सहमति बनी है। डिजिटल कृषि पर ब्रिक्स नेटवर्क के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय प्रणाली, भू-स्थानिक तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित निगरानी और उन्नत आंकड़ा विश्लेषण के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है। इसका प्रारंभिक समन्वय आईआईटी दिल्ली करेगा। ब्रिक्स एग्रीन के जरिए बीज, जर्मप्लाज्म और कृषि इनपुट के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इसका जोर किसान-केंद्रित सहयोग पर रहेगा।
For a greener, healthier future.
India’s BRICS Chairship 2026 is turning commitment into action – advancing clean power, solar energy and clean fuels, promoting the right to seed, strengthening health and restoring land.
Sustainable action, shared progress.#BRICS2026… pic.twitter.com/k8acknkQo7
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स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली पर भी बड़ा फोकस
भारत की अध्यक्षता में स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कई पहल सामने आई हैं। स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए 2026–2029 का ब्रिक्स रोडमैप शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य मोटापे और अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए जागरूकता, तकनीकी सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। इसमें जीवन के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखते हुए रोकथाम पर जोर दिया गया है। पारंपरिक, सहायक और एकीकृत चिकित्सा पर विशेषज्ञ कार्य समूह भी बनाया गया है। इसमें शोध, नीतिगत संवाद, क्षमता विकास, डिजिटल ज्ञान मंच और पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान के संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं।

मानसिक स्वास्थ्य में भारत को मिली अहम भूमिका
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में ब्रिक्स प्रशिक्षण हब नेटवर्क और उत्कृष्टता केंद्रों के नेटवर्क के जरिए सहयोग बढ़ाने की पहल की गई है। भारत के निम्हान्स को इस पहल के समन्वय केंद्र के रूप में नामित किया गया है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपलब्ध मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाना और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से शामिल करना है। प्रशिक्षण, कौशल विकास और मानकीकृत कार्यप्रणाली पर जोर दिया जाएगा।

युवाओं और कौशल पर भारत की पहल
भारत की अध्यक्षता में कौशल विकास और रोजगार-योग्यता को भी ब्रिक्स सहयोग के केंद्र में रखा गया है। ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ के जरिए क्षमता विकास, महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी, कौशल और रोजगार-योग्यता तथा डिजिटल सार्वजनिक ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। युवा सहयोग के लिए ब्रिक्स यूथ कोऑपरेशन फ्रेमवर्क 2026 को अपनाया गया है। इसका मकसद युवाओं के बीच संवाद, अनुभव साझा करने और व्यावहारिक सहयोग को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। खेल तकनीक के क्षेत्र में भी नया कार्य समूह बनाया गया है। इसके जरिए तकनीकी जानकारी, शोध और बेहतर कार्यप्रणालियों का सदस्य देशों के बीच आदान-प्रदान किया जाएगा।

ऊर्जा के क्षेत्र में स्मार्ट ग्रिड और भंडारण पर जोर
ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भी ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाया गया है। स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण से जुड़े मार्गदर्शक सिद्धांत अपनाए गए हैं। इसके साथ स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र शुरू किया गया है। यह सदस्य देशों को तकनीकी ज्ञान, नीतिगत अनुभव और बेहतर कार्यप्रणालियां साझा करने का मंच देगा। यह पहल ऊर्जा व्यवस्था को ज्यादा मजबूत, लचीला और भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

शहरों के विकास में भी साथ आए ब्रिक्स देश
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच टिकाऊ शहरी परिवहन और मजबूत शहरी ढांचे पर भी भारत ने विशेष ध्यान दिया है। ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब को एक वर्चुअल सहयोग मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसके जरिए शहरी नियोजन, डिजाइन, निवेश, निर्माण और रखरखाव से जुड़े अनुभव साझा किए जाएंगे। साथ ही जलवायु और आपदा जोखिम को शहरी ढांचे में शामिल करने के लिए स्वैच्छिक सिद्धांत अपनाए गए हैं। ब्रिक्स अर्बन रिसर्च एंड नॉलेज नेटवर्क भी बनाया गया है। इससे व्यावहारिक शोध और सदस्य देशों के बीच ज्ञान के निरंतर आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

एमएसएमई और स्टार्टअप को मिलेगा बड़ा मंच
भारत की अध्यक्षता में छोटे कारोबार और स्टार्टअप को भी ब्रिक्स सहयोग से जोड़ने पर जोर दिया गया है। ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग पोर्टल एक साझा डिजिटल मंच के रूप में काम करेगा। इससे एमएसएमई, तकनीकी केंद्र, व्यापार संगठन, वित्तीय संस्थान और प्रशिक्षण संस्थान एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। बाजार और वित्त तक पहुंच बढ़ाना तथा छोटे कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने में मदद करना इसका अहम उद्देश्य है। ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क भी स्थापित किया गया है। यह अलग-अलग देशों के स्टार्टअप और इन्क्यूबेटरों को जोड़ने में मदद करेगा। शुरुआती और विकास चरण के स्टार्टअप के लिए ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड की पहल भी की गई है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की कोशिश
आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला बनाना है। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने इस दिशा में भी सहयोग बढ़ाया है। ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई-चेन सहयोग ढांचे के जरिए परिवहन, माल ढुलाई और शिपिंग से जुड़े अनुभव साझा किए जाएंगे। इसका उद्देश्य कमजोर संपर्क और असंगठित आपूर्ति श्रृंखलाओं की समस्याओं को कम करना है। ग्लोबल वैल्यू चेन पर 2026–2030 की कार्ययोजना के जरिए सदस्य देशों के बीच बाजारों को खोलने, आर्थिक विविधीकरण और आपसी तालमेल को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है।

व्यापार सुगम बनाने पर भी जोर
सीमा शुल्क मामलों में सहयोग और परस्पर प्रशासनिक सहायता से जुड़े समझौते को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसका मकसद व्यापार को तेज करना और लेनदेन की लागत कम करना है। इससे सीमाओं को ज्यादा सुरक्षित बनाने, व्यापार सुविधा और कारोबार करने में आसानी को बढ़ावा देने तथा अवैध व्यापार पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय मानक निकायों के बीच सहयोग को भी संस्थागत रूप दिया गया है। इससे मानकों के विकास और उन्हें लागू करने में तालमेल बढ़ेगा तथा व्यापार में आने वाली तकनीकी बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।

विज्ञान और तकनीक में साझा प्रयास
ब्रिक्स विज्ञान एवं अनुसंधान रिपॉजिटरी को भी समर्थन दिया गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के वैज्ञानिक ज्ञान को सुरक्षित रखना और आपस में साझा करना है। भारत की अध्यक्षता में तकनीक और नवाचार को ब्रिक्स के भविष्य के सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। डिजिटल कृषि से लेकर स्मार्ट ग्रिड और स्टार्टअप तक, कई नई पहलों में तकनीक को सीधे विकास से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।

भारत पहले भी बदल चुका है ब्रिक्स का एजेंडा
भारत की 2026 की अध्यक्षता पहली बार नहीं है जब नई दिल्ली ने ब्रिक्स को नई दिशा देने की कोशिश की हो। 2012 में नई दिल्ली में हुए चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए साझेदारी पर जोर दिया गया था। उस दौरान नए विकास बैंक की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा हुई। स्थानीय मुद्रा में ऋण सुविधा से जुड़े समझौते और आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था की नींव ने आगे चलकर ब्रिक्स की वित्तीय सहयोग व्यवस्था को मजबूत किया। 2016 में गोवा में हुए आठवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, व्यापार, नवाचार और ऊर्जा जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया। कृषि अनुसंधान, रेलवे अनुसंधान, खेल और युवाओं से जुड़े सहयोग के लिए भी नई व्यवस्थाएं आगे बढ़ीं। 2021 में भारत ने वर्चुअल माध्यम से 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। उस समय स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद-रोधी प्रयास और सतत विकास पर जोर दिया गया। ब्रिक्स वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा दूरसंवेदी उपग्रह समूह जैसी पहलों ने सहयोग का दायरा और बढ़ाया।

विस्तार के साथ बढ़ी ब्रिक्स की ताकत
जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के पूर्ण सदस्य बनने से ब्रिक्स का दायरा तेजी से बढ़ा। जनवरी 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के साथ पूर्ण सदस्यों की संख्या 11 हो गई। इसके अलावा साझेदार देशों के लिए भी नई व्यवस्था बनाई गई। 2025 में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इस ढांचे से जुड़े। इससे ब्रिक्स का नेटवर्क एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरेशिया तक और मजबूत हुआ। अब यह समूह केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ के व्यापक सहयोग का माध्यम बनता जा रहा है।

दिल्ली समिट पर दुनिया की नजर
भारत की 2026 की अध्यक्षता ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया आर्थिक बदलाव, तकनीकी तेजी, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और जलवायु चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे दौर में ब्रिक्स के सामने सिर्फ अपना विस्तार करने की नहीं, बल्कि अपने सहयोग को ज्यादा प्रभावी बनाने की चुनौती भी है। दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है। भारत की कोशिश है कि ब्रिक्स की बढ़ती सदस्यता को ठोस सहयोग और व्यावहारिक नतीजों में बदला जाए। भारत के लिए ब्रिक्स केवल एक अंतरराष्ट्रीय समूह की अध्यक्षता करने का अवसर नहीं है। यह ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने, विकास और नवाचार को आगे बढ़ाने तथा वैश्विक संस्थाओं में ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग को प्रभावी तरीके से सामने रखने का मंच भी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता का फोकस इसी व्यापक सोच पर है। दिल्ली समिट से यह संदेश देने की कोशिश होगी कि बदलती दुनिया में भारत केवल एक सहभागी देश नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग की दिशा तय करने वाली प्रमुख शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।










