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PLI स्कीम इकोनॉमी को दे रही बूस्टर डोज, GDP में 4% हो सकती है वृद्धि

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PLI scheme यानी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से सालाना आधार पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई पीएलआई योजना के तहत अगले पांच सालों में लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन की पेशकश करके प्रमुख क्षेत्रों में मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना को इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और दवा क्षेत्र से सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया मिली है। घरेलू उत्‍पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनियों को उत्‍पादन आधारित प्रोत्‍साहन (PLI) योजना के तहत नकद सहायता की घोषणा की है। अभी तक करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की PLI का ऐलान हो चुका है। देश में पीएलआई स्कीम के लिए फिलहाल 14 क्षेत्रों का चुनाव किया गया है। आगे इसमें और क्षेत्रों को शामिल किए जाने की संभावना है। 

अगले 5 साल में 6 लाख से ज्‍यादा नौकरियां पैदा होंगी

इस योजना के तहत अगले 5 साल में 6 लाख से ज्‍यादा नौकरियां पैदा होंगी। अभी तक चिप बनाने के लिए कंपनियों को 76 हजार करोड़ की नकद सहायता दी गई है। इसके अलावा ऑटो, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, कपड़ा सहित विभिन्‍न क्षेत्रों के लिए PLI की घोषणा की जा चुकी है। सरकार ने पीएलआई स्कीम को मार्च 2020 में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात बिलों में कटौती करने के लिए शुरू की। इसका उद्देश्य घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पादों की बिक्री में वृद्धि पर कंपनियों को प्रोत्साहन देना है। 

पीएलआई स्कीम से 5 सालों में 520 बिलियन डॉलर का प्रोडक्शन भारत में होने का अनुमान

देश में पीएलआई स्कीम के लिए 14 क्षेत्रों का चुनाव किया गया है। इनमें ऑटोमोबाइल, लैपटॉप, मोबाइल फोन और दूरसंचार उपकरण, व्हाइट गुड्स इंडस्ट्री, रासायनिक सेल, टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्शन सहित आईटी हार्डवेयर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके तहत सरकार देश में मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को 1.97 लाख करोड़ का अलग-अलग मद में प्रोत्साहन देगी। भारत में विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करने के अलावा, इस योजना का उद्देश्य स्थानीय कंपनियों को मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना या विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। बजट में पीएलआई स्कीम से जुड़ी योजनाओं के लिए करीब 2 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रोडक्शन का औसतन 5 प्रतिशत इंसेंटिव के रूप में दिया गया है। यानि सिर्फ पीएलआई स्कीम के द्वारा ही आने वाले 5 सालों में लगभग 520 बिलियन डॉलर का प्रोडक्शन भारत में होने का अनुमान है।

PLI स्कीम से 5 साल में सरकार को हो सकती है 40 लाख करोड़ रुपये की कमाई

प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) से 14 सेक्टर्स में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। क्रिसिल की एनालिसिस रिपोर्ट के अनुसार इस स्कीम से अगले 5 साल में सरकार को 35-40 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। इस स्कीम के तहत सरकार लोकल मैन्युफैक्चरिंग में लगी कंपनियों को 1.8 लाख करोड़ रुपए के इंसेंटिव्स या सब्सिडी देगी। सरकार ने इस स्कीम का ऐलान चीन को टक्कर देने के लिए उस वक्त किया था जब कोरोना सबसे तेजी से बढ़ रहा था।

मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने वाली कंपनियों को मिलेंगे 2.7 लाख करोड़

क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अगले 24 से 30 महीनों में शुरू होने की उम्मीद है जिनमें 2 से 2.7 लाख करोड़ रुपए का निवेश हो सकता है। इसमें बड़े पैमाने पर इंसेंटिव मिलने की उम्मीद है क्योंकि यह सभी मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम के सामान और आईटी हार्डवेयर को बनाएंगी। क्रिसिल की मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव आशु सुयश ने कहा कि PLI स्कीम इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। रिपोर्ट के अनुसार 2021-22 में इंडस्ट्रियल इनवेस्टमेंट में कामकाजी पूंजी के 45-50% तक बढ़ने की संभावना है। 

बैंकों को होगा फायदा

इससे बैंकिंग सेक्टर को भी फायदा होगा। बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट डिमांड 400-500 बेसिस प्वाइंट बढ़ जाएगी। 2020-21 की पहली छमाही में क्रेडिट ग्रोथ की वृद्धि दर 0.8% थी, यह तीसरी तिमाही में 3% हो गई। चौथी तिमाही में भी इसमें इतनी ही बढ़ोतरी की उम्मीद है। बैंक क्रेडिट ग्रोथ का मतलब बैंकों द्वारा कंपनियों, बिजनेसमैन या आम लोगों को दिए जाने वाले उधार से है। यानी लोन में ग्रोथ क्रेडिट तब बढ़ता है जब इंडस्ट्रियल रिफॉर्म होते हैं। लोग बैंक से जितना कर्ज लेते हैं बैंक क्रेडिट ग्रोथ उतनी ही ज्यादा बढ़ती है।

मैनुफैक्चरिंग कंपनियां क्षमता बढ़ा रही 

पीएलआई योजना में बढ़े हुए राजस्व के लिहाज से हर साल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग चार प्रतिशत की वृद्धि करने की क्षमता है। मैनुफैक्चरिंग कंपनियां मजबूत रिटर्न की वजह से क्षमता बढ़ा रही हैं और यह रजिस्टर्ड नई मैनुफैक्चरिंग कंपनियों की संख्या से स्पष्ट है। विनिर्माण कंपनियों का रजिस्ट्रेशन पिछले सात सालों में अबतक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और कुल रजिस्ट्रेशन में विनिर्माण कंपनियों की हिस्सेदारी भी पिछले एक दशक में लगभग उच्चतम स्तर पर है। 

अलग-अलग सेक्टर के लिए है पीएलआई स्कीम

सरकार की तरफ से मैनुफैक्चरिंग के अलावा सेमीकंडक्टर, डिफेंस कंपनियों, टेलीकॉम सेक्टर, स्टील, बैटरी सेल के प्रोडक्शन, ड्रोन जैसे सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम की घोषणा की गई है। इसके अलावा गारमेंट और अपैरल सेक्टर के लिए भी पीएलआई स्कीम की तैयारी है। 

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में पीएलआई योजना में करोड़ों रुपये निवेश की प्रतिबद्धता

वर्ष 2022 में अडाणी कॉपर ट्यूब्स, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और विप्रो एंटरप्राइजेज सहित 15 फर्मों को इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत लाभार्थी के तौर पर चुना गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि इन कंपनियों ने कुल मिलाकर 1,368 करोड़ रुपए का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है और इनका चयन अभी अस्थाई रूप से है। इन 15 कंपनियों में से छह कंपनियों ने एयर कंडीशनर कलपुर्जों के विनिर्माण के लिए 908 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है और दूसरी ओर नौ कंपनियां 460 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एलईडी लाइट घटकों का विनिर्माण करेंगी। इन 15 कंपनियों ने पांच वर्षों में कुल 25,583 करोड़ रुपए के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है जिससे करीब 4,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। पिछले साल नवंबर में डायकिन, पैनासोनिक, सिस्का और हैवल्स सहित 42 फर्मों को इस योजना के पहले चरण में चुना गया था जिन्होंने 4,614 करोड़ रुपए के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी।

PLI के जरिए ऑटो सेक्टर को ‘ऑक्सीजन’ दे रही सरकार 

लंबे समय से सेमीकंडक्टर की कमी से जूझ रहे ऑटो उद्योग को सरकार ‘ऑक्सीजन’ देने का काम कर रही है। भारत के वाहन कलपुर्जा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने और सेमीकंडक्टर की कमी से निजात दिलाने के लिए सरकार ने 70 कंपनियों को उत्पादन प्रोत्साहन योजना (PLI) के लिए चुना है। इससे वाहन कलपुर्जा उद्योग में 7.5 लाख नए रोजगार मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन कलपुर्जा उद्योग में अगले पांच साल में 2.31 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त उत्पादन हो सकेगा। पीएलआई स्कीम के तहत चुने गए वाहन कलपुर्जा में करीब 8 से 13 फीसदी कंपोनेंट्स ऐसे हैं जो सेफ्टी, फ्लेक्स फ्यूल, CNG, LNG, माइलेज बढ़ाने वाले कलपुर्जे और सेंसर से संबंधित हैं, जबकि इनमें से 13 से 18 फीसदी हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिकल वाहन से संबंधित हैं। 

फार्मा सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम से देश में सस्ती होंगी दवाएं 

फार्मा सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम से फार्मास्युटिकल क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपए का निवेश आने का अनुमान है। योजना से घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को लाभ होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों के लिये व्यापक स्तर पर सस्ती दवाएं उपलब्ध होंगी। दवाओं के लिये पीएलआई योजना से देश में हाई वैल्यू प्रोडक्ट्स के उत्पादन की उम्मीद है। साथ ही निर्यात में वैल्यू एडिशन बढ़ेगा। अगले छह साल 2022-23 से 2027-28 के दौरान बिक्री में 2,94,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि और निर्यात में 1,96,000 करोड़ रुपए का की अतिरिक्त बढोतरी होने का अनुमान है।

ड्रोन और ड्रोन कम्पोनेंट्स के लिए PLI Scheme, 5000 करोड़ रुपये निवेश होगा 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने एवं देश की सुरक्षा के साथ ही अन्य क्षेत्र में ड्रोन के महत्व को समझते हुए वर्ष 2021 में ड्रोन पालिसी को लागू किया जिसके कारण इसके इस्तेमाल को लेकर नियमन आसान हुआ। उसके बाद इस क्षेत्र में पीएलआई स्कीम की घोषणा की गई और इससे अगले तीन वर्षों में करीब 5000 करोड़ रुपए का निवेश आएगा। ड्रोन उद्योग का वार्षिक बिक्री कारोबार वित्त वर्ष 2020-21 में 60 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 900 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इस क्षेत्र के विकास से ड्रोन निर्माण उद्योग में अगले तीन साल में 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। पीएलआई योजना के अलावा भारत सरकार ने 2030 तक भारत को वैश्विक ड्रोन हब बनाने के लिए सुधार सहित कई कदम उठाए हैं। इसमें उदारीकृत ड्रोन नियम, 2021 की अधिसूचना शामिल है।

स्टील मैन्युफैक्चरिंग के लिए के लिए PLI स्कीम 

केंद्र सरकार ने विशेष प्रकार के स्टील की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रेडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI)  पेश किया है। केंद्र सरकार विशेष स्टील के प्रोडक्शन के लिए एक समान प्रोत्साहन देने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही इसमें ज्यादा ग्रेड शामिल करने पर भी सोचा जा रहा है, खासकर रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सामान के लिए। देश में विशेष स्टील के प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने 6,322 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना को मंजूरी दी थी। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से करीब 40,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को आकर्षित किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इससे 5.25 लाख रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। 

कपड़ा क्षेत्र के लिये 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के 61 प्रस्तावों को मंजूरी

मोदी सरकार ने कपड़ा क्षेत्र के लिये उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत गिन्नी फिलामेंट्स, किम्बर्ली क्लार्क इंडिया प्राइवेट लि. और अरविंद लि. समेत विभिन्न कंपनियों के 61 आवेदनों को मंजूरी दे चुकी है। इससे 19,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आने की उम्मीद है। इससे अनुमानित कारोबार 1,84,917 करोड़ रुपये का होगा जबकि 2,40,134 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। सरकार ने देश की विनिर्माण क्षमता और निर्यात को बढ़ाने को लेकर पांच साल से अधिक समय में 10,683 करोड़ रुपये के वित्तीय व्यय की मंजूरी के साथ मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) कपड़े, एमएमएफ परिधान, तकनीकी वस्त्र समेत कपड़ा क्षेत्र के लिये पीएलआई योजना को मंजूरी दी है।

गारमेंट और अपैरल इंडस्ट्री के लिए जल्द आएगी नई PLI स्कीम

आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए अब जल्द ही गारमेंट और अपैरल इंडस्ट्री को भी पीएलआई स्कीम (PLI Scheme) का ऐलान हो सकता है। ये स्कीम इस साल अक्टूबर तक लॉन्च की जा सकती है। इस स्कीम के तहत गारमेंट और अपैरल इंडस्ट्री को और बढ़ावा मिलेगा। इस स्कीम में 4000 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। इससे पहले टेक्सटाइल सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम को लॉन्च किया था लेकिन ये नई वाली स्कीम टेक्सटाइल सेक्टर को और ज्यादा राहत दे सकती है। 

टेलीकॉम सेक्टर के लिए PLI स्कीम 

टेलीकॉम सेक्टर के लिए PLI स्कीम को सरकार ने एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार ने पीएलआई स्कीम में बड़ा बदलाव करते हुए मौजूदा इंसेंटिव को 1% और बढ़ा दिया है। इसके साथ ही लिस्ट में टेलीकॉम और नेटवर्किंग के कई नए प्रोडक्ट जोड़े गए हैं। बढ़ाई गई डेट के मुताबिक सरकार ने नए आवेदकों से 21 जून से आवदेन मांगा है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई रखी गई है। दूरसंचार विभाग ने 24 फरवरी 2021 को 12,195 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को अधिसूचित किया था। 14 अक्टूबर, 2021 को 8 घरेलू और 7 वैश्विक कंपनियों सहित 16 एमएसएमई और 15 गैर-एमएसएमई सहित कुल 31 कंपनियों को मंजूरी दी गई थी। केंद्रीय बजट 2022-23 में मौजूदा पीएलआई योजना के हिस्से के रूप में डिजाइन-आधारित विनिर्माण के लिए एक योजना शुरू करने का प्रस्ताव किया गया था। अब चयनित पीएलआई आवेदकों सहित हितधारकों से फीडबैक के आधार पर मौजूदा पीएलआई योजना को एक वर्ष तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। 

डिफेंस में सेमीकंडक्टर पीएलआई स्कीम 

सरकार की जितनी भी डिफेंस कंपनियां है, उन्होंने सेमीकंडक्टर पीएलआई स्कीम के लिए निवेश कर दिया है। इसके अलावा दूसरी पीएसयू कंपनियों ने भी इस स्कीम के तहत अप्लाई किया है। इस स्कीम के तहत सरकार को अभी 5 प्रस्ताव मिल चुके हैं। सरकार को सेमीकंडक्टर पीएलआई स्कीम के तहत जो 5 प्रस्ताव मिले हैं, उनकी वैल्यूएशन 1.53 लाख करोड़ रुपए की है। इसके अलावा सरकार दूसरी कंपनियों से भी बातचीत कर रही है, वहीं विदेशी कंपनियों ने इस स्कीम में निवेश करने का इंटरेस्ट दिखाया है। इस पीएलआई स्कीम की वैल्यूएशन 76000 करोड़ रुपए है। दिसंबर 2022 तक इस स्कीम के तहत मिले सभी आवेदन के वैल्यूएशन का काम पूरा हो जाएगा और बाद में कंपनियों के नामों का ऐलान होगा। 

पीएलआई स्कीम से बढ़ेगा रोजगार का अवसर  

जिन सेक्टर के लिए पीएलआई योजना बनाई गई है, उन सेक्टर में अभी जितनी वर्क फोर्स काम कर रही है, वो करीब-करीब दोगुनी हो जाएगी। इंडस्ट्री को तो प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट में लाभ होगा ही, देश में आय बढ़ने से जो डिमांड बढ़ेगी, उसका भी लाभ होगा, यानि दोगुना फायदा। वहीं इस स्कीम का एक व्यापक असर देश की MSME सेक्टर पर होने वाला है। दरअसल, हर सेक्टर में जो सहायक यूनिट बनेंगे, उनको पूरी वैल्यू चेन में नए सप्लायर बेस की जरूरत होगी। ये जो सहायक यूनिट होंगे, ज्यादातर MSME सेक्टर में ही बनेंगी। MSME को ऐसे ही अवसरों के लिए तैयार करने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है। पीएलआई योजना भारत में इकाइयों को स्थापित करने के लिए विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करेगी। हमारी दवाइयां, वैक्सीन, गाड़ियां, फोन आदि हमारे देश में ही बनें इस दिशा में पीएलआई स्कीम बड़ा कदम माना जा रहा है।

फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा 

मार्च में पीएम मोदी ने पीएलआई स्कीम के बारे में बताते हुए कहा था कि पिछले साल मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के निर्माण के लिए PLI स्कीम लॉन्च की थी। कोरोना काल के दौरान भी इस सेक्टर में बीते साल 35 हजार करोड़ रुपए का प्रोडक्शन हुआ। यही नहीं, कोरोना के इस कालखंड में भी इस सेक्टर में करीब-करीब 1300 करोड़ रुपए का नया इनवेंस्ट आया हुआ है। इससे हजारों नई जॉब्स इस सेक्टर में तैयार हुई हैं। जाहिर सरकार मेड इन इंडिया के जरिए प्रोडक्शन को बढ़ाने पर जोर दे रही है। इससे न सिर्फ उत्पाद देश में बन कर मिलेंगे, बल्कि रोजगार भी बढ़ेगा। खास बात ये है कि पीएलआई स्कीम के तहत कई क्षेत्र ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों पर फोकस कर रहे हैं। टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग का क्षेत्र ऐसा ही है।

क्या है PLI स्कीम?

इस योजना के अनुसार, केंद्र अतिरिक्त उत्पादन पर प्रोत्साहन देगा और कंपनियों को भारत में बने उत्पादों को निर्यात करने की अनुमति देगा। PLI स्कीम का लक्ष्य प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करना है। PLI स्कीम भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा और इसके लिए जरूरी है कि आयात कम हो और देश में ही सामानों का उत्पादन बढ़ाया जाए। देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और वर्क फोर्स को रोजगार से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने अलग-अलग सेक्टर में पीएलआई स्कीम यानि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की शुरुआत की है।

कैसे काम करेगी योजना

कंपनियों को हर साल उत्‍पादन का लक्ष्‍य दिया जाएगा और इसे पूरा करने पर सरकार उत्‍पादन के मूल्‍य का 4 फीसदी तक नकद प्रोत्‍साहन के रूप में वापस कर सकती है। इसमें भारतीय कंपनियों के अलावा विदेशी कंपनियों को भी मौका दिया जाएगा, हालांकि, उन्‍हें अपनी इकाई भारत में ही लगानी पड़ेगी। 

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