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कांग्रेस राज में कैट से लेकर रीट तक पेपर लीक की लंबी सूची, मोदी सरकार में ‘जीरो टॉलरेंस’

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देश में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता से खिलवाड़ करने का यह खेल कोई नया नहीं है। अगर इतिहास उठाकर देखें तो कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के शासनकाल में पेपर लीक एक संस्थागत बीमारी की तरह फैल चुका था। कैट (CAT) और एआईपीएमटी (AIPMT) जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परीक्षाओं से लेकर राज्यों की लोक सेवा आयोग (PCS) और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़ा और सॉल्वर गिरोहों का बोलबाला रहा।

जहां अतीत में कांग्रेस सरकारों के दौरान पेपर लीक के मामलों में केवल निचले स्तर की लीपापोती करके बड़े मगरमच्छों और सिंडिकेट को बचा लिया जाता था, वहीं मोदी सरकार ने युवाओं के सपनों की रक्षा के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। सरकार ने न केवल आरोपियों को जेल भेजा, बल्कि ऐतिहासिक कानून बनाकर फर्जीवाड़े में शामिल संगठित गिरोहों की जड़ें काटने का काम किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए (NDA) संसदीय दल की बैठक में नीट (NEET) और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर बड़ा बयान देते हुए पेपर लीक को ‘घोर पाप’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि सरकार ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है, छात्रों के हित में पारदर्शी तरीके से री-एग्जाम कराकर परिणाम जारी किए हैं और पूरे परीक्षा तंत्र को फुलप्रूफ बनाने के लिए कड़े प्रशासनिक व कानूनी कदम उठाए हैं।

कांग्रेस कार्यकाल के दौरान पेपर लीक के प्रमुख मामले
CAT (Common Admission Test) — 2003-04: देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों (IIMs) में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली कैट परीक्षा का पर्चा नवंबर 2003 में लीक हो गया। सीबीआई जांच में कुख्यात रंजीत डॉन का नाम सामने आया, जिसने प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों से साठगांठ कर पेपर लीक कराया था। इस घोटाले के कारण 1.25 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निरस्त करनी पड़ी और फरवरी 2004 में दोबारा परीक्षा आयोजित हुई।

CBSE All India Pre-Medical Test (AIPMT) — 2004: अप्रैल 2004 में परीक्षा से ठीक पहले सीबीएसई की AIPMT परीक्षा का पर्चा लीक हो गया। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की जांच में इसके पीछे भी रंजीत डॉन गिरोह की भूमिका पाई गई, जिसके बाद परीक्षा को रद्द करके दोबारा आयोजित करना पड़ा।

AIEEE Paper Leak — 2011: 1 मई 2011 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ और कानपुर में ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन (AIEEE) का पेपर लीक हुआ, जिससे देशभर के लाखों अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव और परेशानी झेलनी पड़ी।

AIIMS Entrance Exam — 2012: 2012 में एम्स (AIIMS) पीजी प्रवेश परीक्षा में बड़े पैमाने पर तकनीकी धांधली और लीक का मामला सामने आया। सीबीआई जांच में एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ जो मोटी रकम लेकर उम्मीदवारों को उत्तर-कुंजी (Answer Keys) मुहैया कराता था।

राज्य स्तर पर कांग्रेस व सहयोगी सरकारों के दौर में धांधली
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) महाघोटाला — 2003: अजीत जोगी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद आयोजित हुई पहली ही पीसीएस (PCS) परीक्षा में भारी भाई-भतीजावाद हुआ और ओएमआर शीट्स तक बदली गईं। सीबीआई के अनुसार, एक कोचिंग संचालक के पास प्रश्नपत्रों की अग्रिम पहुंच थी और उसने महासमुंद के एक होटल में पसंदीदा उम्मीदवारों के लिए टारगेटेड सेशंस चलाए, जिससे अफसरों के रिश्तेदारों और प्रभावशाली लोगों को टॉप रैंक दिलाई गई।

महाराष्ट्र ‘टीईटी’ (TET) व शिक्षक भर्ती घोटाला — 2011-13: कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार (मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण) के शासन में महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) और डी.एड (D.Ed) भर्ती में ओएमआर शीट में हेरफेर और बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ।

हरियाणा JBT शिक्षक भर्ती घोटाला — 2000 (सजा 2013): साल 2000 में 3,206 जूनियर बेसिक ट्रेंड (JBT) शिक्षकों की भर्ती में फर्जी इंटरव्यू लिस्ट और कॉपियों में हेरफेर की गई। इस मामले में साल 2013 में अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला सहित कई अधिकारियों को 10-10 साल की सजा सुनाई।

राजस्थान RPSC व शिक्षक भर्ती — 2012-13: अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ग्रेड-II और ग्रेड-III शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। प्रिंटिंग प्रेस और कोचिंग संचालकों का जो सिंडिकेट उस समय पनपा, उसने आगे चलकर प्रदेश के परीक्षा तंत्र को पूरी तरह से खोखला कर दिया।

उत्तर प्रदेश CPMT पेपर लीक — 2014: 22 जून 2014 को सपा सरकार के दौरान सीपीएमटी का पर्चा लीक होने से परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

महाराष्ट्र HSC परीक्षा — 2013: मार्च 2013 में मुंबई और आसपास के इलाकों में कक्षा 12वीं (HSC) का इंग्लिश और अन्य विषयों का पर्चा परीक्षा से पहले मोबाइल पर लीक हो गया था।

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार (2018–2023) में पेपर लीक की झड़ी
राजस्थान में कांग्रेस शासन के दौरान लगभग हर प्रमुख भर्ती परीक्षा पेपर लीक की भेंट चढ़ी:

कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2018: 11 मार्च को आयोजित परीक्षा का पेपर लीक होने पर 17 मार्च को इसे रद्द किया गया।

लाइब्रेरियन भर्ती परीक्षा 2018: राजस्थान चयन बोर्ड द्वारा 29 दिसंबर 2019 को आयोजित परीक्षा पेपर लीक के कारण रद्द हुई।

JEN सिविल डिग्रीधारी भर्ती 2018: 6 दिसंबर 2020 को आयोजित परीक्षा को एसओजी (SOG) की रिपोर्ट पर रद्द किया गया।

REET लेवल-2 परीक्षा 2021: 26 सितंबर को आयोजित इस परीक्षा का पेपर लीक हुआ और चौतरफा दबाव के बाद सरकार को करीब 4 महीने बाद इसे रद्द करना पड़ा।

बिजली विभाग टेक्निकल हेल्पर भर्ती 2022: ऑनलाइन परीक्षा के दौरान पेपर लीक पर भारी बवाल हुआ और 6 केंद्रों की परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2022: 14 मई 2022 को दूसरी पारी का पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द करके दोबारा कराई गई।

वनरक्षक भर्ती परीक्षा 2020: 12 नवंबर 2022 को परीक्षा के उत्तर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एक पारी की परीक्षा रद्द हुई।

हाईकोर्ट LDC, सेकंड ग्रेड 2022 व मेडिकल ऑफिसर भर्ती: ये सभी महत्वपूर्ण परीक्षाएं पेपर लीक और धांधली के चलते रद्द करनी पड़ीं।

पेपर लीक रोकने और परीक्षा तंत्र को पारदर्शी बनाने के लिए मोदी सरकार के ऐतिहासिक कदम
मोदी सरकार ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले माफियाओं के खिलाफ केवल बातें नहीं कीं, बल्कि ठोस प्रशासनिक, कानूनी और तकनीकी सुधार किए हैं:

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 (Public Examinations Act, 2024): सरकार ने देश का पहला सख्त केंद्रीय कानून संसद से पास कराकर लागू किया। इसके तहत पेपर लीक करने, सॉल्वर गैंग चलाने या मिलीभगत करने वाले अपराधियों के लिए 3 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

संगठित अपराध सिंडिकेट्स की संपत्ति कुर्क करने का नियम: नए कानून में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई संस्थान, परीक्षा केंद्र या संगठित माफिया पेपर लीक में शामिल पाया जाता है, तो उसकी संपत्ति जब्त/कुर्क (Property Attachment) की जाएगी और उस सेवा प्रदाता (Service Provider) को 4 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

सीबीआई जांच और त्वरित गिरफ्तारियां: नीट (NEET-UG) और यूजीसी-नेट मामलों में तत्परता दिखाते हुए जांच तुरंत सीबीआई को सौंपी गई। किसी भी रसूखदार को बचाने के बजाय मुख्य मास्टरमाइंड्स, कोचिंग संचालकों और सॉल्वर गैंग के 13 से अधिक आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया।

NTA के पुनर्गठन के लिए इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष की अगुवाई में उच्च स्तरीय समिति: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रोटोकॉल, डेटा सुरक्षा और संरचनात्मक सुधारों के लिए पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (High-Level Committee of Experts) का गठन किया गया, ताकि भविष्य में ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी स्तर पर चूक न हो।

तकनीकी व डिजिटल सुरक्षा कवच (Cyber & AI Audit): प्रश्नपत्रों के निर्माण, छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक डिलीवरी के लिए ‘एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन’, डिजिटल लॉक वाले बक्से और बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके परीक्षा केंद्रों पर असामान्य गतिविधि और सॉल्वर पैटर्न की रीयल-टाइम निगरानी शुरू की गई है।

री-एग्जाम और छात्रों के हितों का त्वरित संरक्षण: पीएम मोदी के स्पष्ट निर्देशों के तहत, जहां भी परीक्षा प्रणाली की शुचिता प्रभावित हुई, वहां छात्रों का समय खराब किए बिना तुरंत री-एग्जाम आयोजित कराए गए और उनके परिणाम समय पर घोषित किए गए, ताकि ईमानदार अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित न हों।

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