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पंजाब में हाई-टेक पेपर लीक और केजरीवाल की ‘शिक्षा क्रांति’ का फुसफुसाता गुब्बारा

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पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल में राज्य की शिक्षा और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर पहुँच चुकी है। इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल की तथाकथित ‘शिक्षा क्रांति’ का फुसफुसाता गुब्बारा भी पूरी तरह फूट चुका है। एक तरफ जहाँ पंजाब का होनहार युवा अपनी योग्यता के दम पर रोजगार पाने और पारदर्शी परीक्षाओं के लिए दर-दर भटक रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य में नकल माफिया और संगठित पेपर लीक सिंडिकेट सरकारी सरपरस्ती में बेखौफ फल-फूल रहा है। हाल ही में आयोजित ‘फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा’ में हुए इस भीषण घोटाले ने ‘आप’ के उन तमाम बड़े-बड़े दावों और वादों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जिनके झूठे सब्जबाग दिखाकर वे सत्ता के शिखर तक पहुँचे थे।

शिक्षा में बड़ा घोटाला, भगवंत मान और ‘सुपर CM’ की चुप्पी
पंजाब में फार्मेसी एक्जाम देने पहुँचे हजारों युवाओं के सपनों पर उस वक्त पानी फिर गया जब परीक्षा हॉल में हाई-टेक Cheating का खुलासा हुआ। पैसे लेकर कैमरा पेन और Bluetooth Devices के जरिये बड़े पैमाने पर नकल करवाई गई। लाखों रुपये में युवाओं के भविष्य का सौदा हुआ, लेकिन सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस गंभीर घोटाले पर ना तो मुख्यमंत्री भगवंत मान की कोई आवाज निकल रही है और ना ही ‘Super CM’ अरविंद केजरीवाल की। जो पार्टी शिक्षा में क्रांति का ढिंढोरा पीटती थी, आज उसके अपने ही राज्य में शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह पस्त है और नकल माफिया मस्त।

दिल्ली में ढोंग, पंजाब में धांधली: दोहरा रवैया उजागर
एक तरफ अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी पार्टी दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा धांधली के नाम पर अराजकता और दंगा-फसाद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके अपने शासित राज्य पंजाब में सॉल्वर गैंग बेखौफ होकर पेपर लीक करा रहा था। फरीदकोट, कोटकपूरा और फिरोजपुर में 5 से 8 लाख रुपये में अभ्यर्थियों का सौदा कर ब्लूटूथ के जरिए पेपर सॉल्व करवाया जा रहा था। पुलिस ने संदिग्धों पर BNS और IT Act के तहत मामला तो दर्ज किया है, लेकिन असली सवाल यह है कि लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाले इस गिरोह को किसका संरक्षण प्राप्त है?

जंतर-मंतर पर ड्रामा और पंजाब में ब्लूटूथ से पेपर लीक
आम आदमी पार्टी का दोहरा चरित्र पूरी तरह उजागर हो चुका है। एक तरफ जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी का पूरा तंत्र ड्रामा करके सुर्खियां बटोरने में लगा है, तो दूसरी तरफ उनकी अपनी सरकार की नाक के नीचे फार्मासिस्ट ऑफिसर की भर्ती परीक्षा को ब्लूटूथ और हाई-टेक गैजेट्स के जरिए लीक किया जा रहा था। यह साफ दर्शाता है कि ‘आप’ नेताओं को युवाओं के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने की चिंता है।

युवाओं पर लाठीचार्ज और दिल्ली को सुलगाने की साजिश
जो अरविंद केजरीवाल आज खुद को युवाओं और छात्रों का मसीहा बता रहे हैं, वही पंजाब में GenZ युवाओं और छात्रों को सड़कों पर पुलिस से पिटवाते और घसीटवाते हैं। पंजाब का युवा जब हक और नौकरी माँगने जाता है तो उस पर लाठियाँ बरसाई जाती हैं, और जब वह परीक्षा देने बैठता है तो पेपर लीक हो जाता है। युवाओं की जायज माँगें सुनने के बजाय आम आदमी पार्टी के नेता दिल्ली का माहौल खराब करने और अराजकता फैलाने की साजिशों में व्यस्त हैं।

टूटते सपने और पुलिस के डंडे: AAP का असली चेहरा
रातों की नींद और माता-पिता के पसीने की गाढ़ी कमाई लगाकर परीक्षा देने पहुँचे परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर ब्लूटूथ डिवाइस, स्पाई कैमरा पेन और सरेआम सौदेबाजी का सामना करना पड़ा। पंजाब की सड़कों पर रोजगार माँगने उतरे युवाओं पर पुलिस का बेरहम लाठीचार्ज और परीक्षा केंद्रों पर लीक होते पेपर—यही आज के पंजाब की कड़वी सच्चाई है। दिल्ली में बैठकर राजनीति चमकाने वाले आम आदमी पार्टी के नेता पंजाब के इन युवाओं की बर्बादी का जवाब देने से पूरी तरह बच रहे हैं।

35 गिरफ्तारियाँ और लाखों में रेट: ‘आप’ के सिलेक्टिव एक्टिविज्म का पर्दाफाश
पंजाब में फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में हुए घोटाले की जांच में जो सच सामने आया है, वह चौंकाने वाला है। पुलिस ने अब तक 7 सरगनाओं और 28 अभ्यर्थियों समेत कुल 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि स्पाई पेन कैमरों से पेपर लीक कर लाइव ब्लूटूथ ईयरपीस के जरिए जवाब बताए जा रहे थे, जिसके लिए उम्मीदवारों से 3.5 लाख से लेकर 13 लाख रुपये तक वसूले गए। अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी जो बात-बात पर छात्रों के मसीहा बनने का दावा करते हैं, वे इस भीषण घोटाले पर पूरी तरह खामोश हैं। सवाल यह उठता है कि उनका गुस्सा और विरोध प्रदर्शन कहाँ गायब हो गया? क्या आम आदमी पार्टी का यह विरोध प्रदर्शन और ‘एक्टिविज़्म’ सिर्फ राजनीतिक विरोधियों के राज्यों तक ही सीमित है?

दोहरे मापदंड: अपने ही वादों से मुकरे मनीष सिसोदिया
मनीष सिसोदिया का एक चर्चित बयान आज आम आदमी पार्टी की पोल खोल रहा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अगर पंजाब में पेपर लीक या भर्ती घोटाला होता है, तो उनकी सरकार तुरंत शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करेगी और दोषी पाए जाने पर जेल भेजेगी। लेकिन आज जब फरीदकोट, कोटकपूरा और फिरोजपुर में ब्लूटूथ डिवाइस और स्पाई कैमरों से फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में खुलेआम धांधली हुई, तो सिसोदिया समेत पूरी ‘आप’ लीडरशिप चुप्पी साधे बैठी है। अपने खुद के बड़े-बड़े दावों और वादों के विपरीत, न तो किसी मंत्री पर गाज़ गिरी है और न ही कोई कार्रवाई हुई है—जिससे इनका दोहरा रवैया पूरी तरह बेनकाब हो गया है।

फरीदकोट से फिरोजपुर तक सक्रिय नकल माफिया का नेटवर्क
पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में सामने आए इस हाई-टेक घोटाले ने राज्य के परीक्षा तंत्र को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। नकल कराने का यह काला नेटवर्क सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि फरीदकोट, कोटकपूरा और फिरोजपुर तक फैला हुआ था। अभ्यर्थियों से लाखों रुपये ऐंठकर उन्हें परीक्षा पास कराने का झांसा दिया गया। ऐसे में राज्य सरकार की प्रशासनिक नाकामी पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इंडी गठबंधन का इतिहास: जब कांग्रेस ने भी मानी थी अपनी नाकामी
पेपर लीक और युवाओं से धोखेबाजी के मामले में इंडी गठबंधन (INDI Alliance) के सहयोगियों का रिकॉर्ड हमेशा से दागदार रहा है। जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, तब प्रियंका वाड्रा खुद यह स्वीकार करने पर मजबूर हो गई थीं कि राजस्थान में पेपर लीक एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका था और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार इसे रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई थी। चाहे राजस्थान में कांग्रेस की असफलता हो या पंजाब में आम आदमी पार्टी का वर्तमान भ्रष्टाचार, यह इंडी गठबंधन युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने में एक जैसा ही इतिहास रखता है।

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