पीएम मोदी सरकार ने विदेशी फंडिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से मानसून सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया है। इसके तहत यदि किसी NGO या संस्था का FCRA लाइसेंस रद्द, समाप्त या नवीनीकृत नहीं होता है, तो उसके पास मौजूद विदेशी धन और उससे खरीदी गई संपत्तियों का प्रबंधन सरकार द्वारा नियुक्त नामित प्राधिकरण करेगा। इससे विदेशी फंड और परिसंपत्तियों के दुरुपयोग, अनधिकृत हस्तांतरण तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों पर रोक लग सकेगी। इसके साथ ही विदेशी अंशदान का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही सुनिश्चित किया जा सकेगा। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके तक, केजरीवाल से लेकर लेफ्ट लिबरल गैंग के इकोसिस्टम तक हर कोई FCRA को रुकवाने की फिराक में है, ताकि इनकी अनधिकृत विदेशी फंडिंग न रुके। इसीलिए जंतर मंतर पर भूख हड़ताल और फिर संसद मार्च की नौटंकी की गई। हालांकि यह अलग बात है कि यह लेफ्ट लिबरल गैंग अपने कुत्सित इरादों में सफल नहीं हो पाया।
सोनम का विदेशी चंदा 6 से बढ़कर हुआ 15 करोड़ तक जा पहुंचा
यह कोई पहली बार नहीं है, जबकि सोनम वांगचुक का नाम विदेशी फंडिंग से जुड़ा हो। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने पहले भी जांच में यह सनसनीखेज सच सामने रखा है कि वांगचुक ने आंदोलन की आड़ में जनता की भावनाओं को भड़काकर निजी और संगठनात्मक हित साधने का प्रयास किया है। इसीलिए गृह मंत्रालय ने वांगचुक द्वारा स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की एफसीआरए (FCRA) रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। इसके अलावा, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भी जांच शुरू की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि विदेशी चंदा का दुरुपयोग कहां हुआ है। जांच में ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि एक साल में संस्था को विदेशी चंदा 6 से बढ़कर हुआ 15 करोड़ तक जा पहुंचा था। दरअसल, वांगचुक की संस्था हिमालयन इंस्टीट्यूट्स ऑफ अल्टरनेटिव्स (एचआईएएल) के दस्तावेज बताते हैं कि इस संस्था को 2023-24 में करीब 6 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, पर अगले ही साल यह रकम बढ़कर 15 करोड़ से भी ज्यादा हो गई। यहीं नहीं, संस्था के पास सात बैंक खाते पाए गए, लेकिन इनमें से चार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
वांगचुक चीन के साथ मिलकर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में लिप्त – कांग्रेस
इससे पहले सोनम वांगचुक पर कांग्रेस राज में भी विदेशी अंशदान के कथित दुरुपयोग, तथा “चीन और अन्य स्थानों पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप लगे थे। सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, 28 फरवरी 2007 को तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर (जिला मजिस्ट्रेट), लेह ने सोनम वांगचुक और उनकी संस्था SECMOL को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पांच प्रमुख आरोप लगाए गए थे। इनमें सरकारी अधिकारियों का मनोबल गिराने, लगभग 200 कनाल सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने, FCRA के तहत विदेशी अंशदान का दुरुपयोग करने, चीन और अन्य स्थानों पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकने वाले संपर्क रखने के आरोप शामिल रहे। इसे तत्कालीन डीसी द्वारा अधिकारों और कानूनों के दुरुपयोग का मामला बताया।
क्यों खास है विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026
दरअसल, 25 मार्च 2026 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 लोकसभा में पेश किया था। उस दिन केवल विधेयक को सदन के पटल पर रखा गया और पेश करने की अनुमति ली गई। इसके बाद बजट सत्र में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा और पारित कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसलिए यह लंबित विधेयक बना रहा। अब 2026 के मानसून सत्र में सरकार इसे फिर से पेश नहीं कर रही, बल्कि इसे विचार चर्चा और पारित करने के लिए अपने विधायी एजेंडे में प्राथमिकता के साथ रखा है। आइए, अब जानते हैं विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026की पांच प्रमुख विशेषताएं…
1. FCRA पंजीकरण की समाप्ति – इसके खत्म होने पर विदेशी फंड और उससे बनी संपत्तियों का सरकारी प्रबंधन होगा। यानि यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, वह स्वयं समर्पित कर देती है, या उसका नवीनीकरण नहीं होता, तो उसकी विदेशी निधि और उससे निर्मित संपत्तियों की देखरेख, प्रबंधन और अंतिम निस्तारण के लिए केंद्र सरकार एक Designated Authority नियुक्त करेगी।
2. अनधिकृत विदेशी फंडिंग पर कड़ी निगरानी – पंजीकरण समाप्त होने के बाद कोई संस्था विदेशी धन का उपयोग या हस्तांतरण नहीं कर सकेगी। विदेशी अंशदान और उससे बनी संपत्तियों के उपयोग पर सरकार की निगरानी बढ़ेगी, जिससे नियमों का उल्लंघन करना कठिन होगा।
3. संपत्तियों के दुरुपयोग पर रोक – यदि किसी संस्था का FCRA निलंबित या समाप्त हो जाता है, तो वह विदेशी धन से बनी संपत्तियों को बेचने, गिरवी रखने या हस्तांतरित करने जैसे कदम बिना सरकारी अनुमति नहीं उठा सकेगी।
4. पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि – संशोधन का उद्देश्य विदेशी अंशदान के उपयोग को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। संस्था के प्रबंधकों, ट्रस्टियों और पदाधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी स्पष्ट की गई है।
5. प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक स्पष्ट बनाना – संशोधन में उन संस्थाओं के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई गई है जो निष्क्रिय हो गई हैं, बंद हो चुकी हैं या अस्तित्व में नहीं हैं। इससे विदेशी धन और परिसंपत्तियों के प्रबंधन को लेकर कानूनी अस्पष्टता कम होगी।
लेफ्ट लिबरल गैंग की अनधिकृत विदेशी फंडिंग पर रोक लगेगी
इस संशोधन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी संस्था FCRA पंजीकरण समाप्त होने के बाद विदेशी धन या उससे निर्मित संपत्तियों का मनमाने ढंग से उपयोग नहीं कर पाएगी। पहले ऐसी परिस्थितियों में संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर अस्पष्टता रहती थी। ऐसे ही प्रावधानों के चलते एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके तक, केजरीवाल से लेकर लेफ्ट लिबरल गैंग के इकोसिस्टम तक हर कोई FCRA को रुकवाने के लिए अनशन, धरना और मार्च की नौटंकी करने में लगे हैं। उन्हें पता है कि अधिनियम के पारित होते ही उनकी अनधिकृत विदेशी फंडिंग पर ब्रेक लग जाएंगे। फंडिंग रुकने से ये इकोसिस्टम अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाएगा।
संसद के मानसून सत्र को बाधित करने की बड़ी साजिश
अभिजीत दीपके द्वारा संचालित आंदोलन की शुरुआत से ही बातें कही जा रही थीं कि सोनम वांगचुक तो सिर्फ मोहरा है। असली खिलाड़ी तो डीप स्टेट से जुड़ी वो ताकतें हैं, जो देश के अंदर और बाहर से इस फर्जी आंदोलन के लिए साजिशें रच रही हैं। आंदोलन की हवा निकलती देख दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी 16 जुलाई,2026 को वांगचुक से मिलने जंतर-मंतर पहुंच गए। इस दौरान सोनम वांगचुक और अरविंद केजरीवाल के बीच जो बातचीत हुई, वो एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें 0.25 सेकंड से लेकर 0.46 सेकंड तक उनकी बातचीत सुनी जा सकती है।
केजरीवाल और वांगचुक के बीच बातचीत
वांगचुक – 28 को सफल बनाएंगे।
केजरीवाल – 28 को,
वांगचुक – सफल बनाए।
केजरीवाल – हां, सफल बनाएंगे।
वांगचुक – सफल बनाकर छोड़ूंगा नहीं तो भूत बन जाऊंगा।
केजरीवाल – आपको कुछ नहीं होगा। आपको कुछ नहीं होने देंगे।
वांगचुक – 20 को सफल बनाएंगे।
केजरीवाल – आपने पूरे देश को जगा दिया है।
We’re really very proud of you Sonam ji… pic.twitter.com/rxKrJTtwy7
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 16, 2026
20 तारीख को दिल्ली में अराजकता पैदा करने की होगी कोशिश
अरविंद केजरीवाल ने कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से कहा कि हमें सोनम वांगचुक जैसा शिक्षा मंत्री भी चाहिए और उसके क्रांतिकारी कदम भी चाहिए। 20 तारीख को देश के कोने कोने में जो लोग सुन रहे हैं। जो लोग सोशल मीडिया में देखेंगे, जो लोग मीडिया के जरिए देखेंगे, सबको अपील करना चाहता हूं। ज्यादा से ज्याद संख्या में यहां पर आएंगे। 20 तारीख के आंदोलन को, इनके कॉल को, पार्लियामेंट तक की जो यात्रा है उसको सफल बनाना है। ज्यादा से ज्यादा संख्या में आना है। गौरतलब है कि 20 जुलाई, 2026 से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, जो 13 जुलाई तक चलेगा।
🚨 भारत का सबसे बड़ा फ्रॉड अरविंद केजरीवाल आज आखिरकार CJP प्रदर्शन पर पहुंच ही गया। 😂
असली में ये सोनम वांगचुक का प्रदर्शन नहीं, केजरीवाल का ही है।
लेकिन खुद तो भूख हड़ताल नहीं कर सकते ना… खाने के बहुत आदी हैं ये! 🍽️#Kejriwal #CJPProtest #DelhiDrama pic.twitter.com/otF9nIUrCl
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 16, 2026
वांगचुक को अन्ना हजारे की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं केजरीवाल
दरअसल, अरविंद केजरीवाल का मकसद अन्ना हजारे की तरह वांगचुक को मोदी सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करना है। वांगचुक से मुलाकात के दौरान केजरीवाल के अंदर की बात सामने आ गई। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इतिहास खुद को दोहराता है। इसी जंतर-मंतर पर 4 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे आंदोलन पर बैठे थे और तीन साल बाद उस समय की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। केजरीवाल चाहते हैं कि वांगचुक को मोहरा बनाकर वो फिर से दिल्ली में खिसकी हुई अपनी सियासी जमीन को हासिल कर सकते हैं। केजरीवाल के इस सियासी मकसद को पूरा करने के लिए इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज भी जंतर-मंतर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके है।
आतिशी रोजमार्लेना पहुंची जंतर-मंतर, प्रोटेस्ट का समर्थन करने ,
अब धीरे धीरे इस प्रोटेस्ट के असली रचियेता सामने आने लगे हैं 😃😃 pic.twitter.com/nz0EEvPozd— sumit kalra (@sumit1kalra) July 13, 2026
अभिजीत दीपके और उसके दोस्त ने खोली केजरीवाल की पोल
अभिजीत दीपके के दोस्त ने खुलासा किया कि हम दोनों एक-दूसरे को करीब सात साल से जानते हैं। हम दोनों अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया टीम से जुड़े हुए थे। 2019-20 में अभिजीत दीपके आम आदमी पार्टी का ट्वीटर हैंडल देखता था। मैं व्हाट्सएप टीम देखता था। तब से हम लोग एक-दूसरे से परिचित थे। अभिजीत दीपके के दोस्त ने आगे कहा कि हैरानी की बात है कि कॉकरोच वाले बयान के एक हफ्ते पहले मेरी और दीपके की बात हुई थी, क्योंकि दीपके जॉब ढूंढ़ रहा था।
🚨✅ CJP का राज खुल गया! 😂
अभिजीत दीपके ने खुद कबूल किया:⁰“अमेरिका में बेरोजगार था, 5 दिन पहले नौकरी ढूंढ रहा था…⁰केजरीवाल ने फोन किया और CJP का प्रोजेक्ट दे दिया!”
ये NEET का आंदोलन नहीं, AAP का पेड़ा प्रोजेक्ट है।⁰बेरोजगारों को AAP में ही प्रोटेस्ट करने की “नौकरी” मिल… pic.twitter.com/isFEqaqe5T
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 17, 2026
जिस वांगचुक को कभी लद्दाख के आंदोलनों का चेहरा माना जाता था, वो दिल्ली में आमरण अनशन के लिए मजबूर क्यों है ? क्या खुद को बचाने के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं?
दरअसल, सोनम वांगचुक छात्रों की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि वो खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उन पर केंद्रीय एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। वित्तीय अनियमितताओं के चलते ही वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया गया। दान और आंदोलन के नाम पर जुटाई गई रकम गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) से निकलकर निजी कंपनी में पहुंची, और वहां से सीधे निजी खातों और यहां तक की विदेशों तक भी पहुंच रही है। वांगचुक दावा जनहित का करते रहे हैं, पर हकीकत में पैसों का खेल सामने आया है। सोशल एक्टिविस्ट का लबादा ओढ़े वांगचुक का असली चेहरा अब सबके सामने आ गया है। वे रेफरेंडम से लेकर यूटी के बजाए जम्मू का हिस्सा बनने की वकालत करने लगा है।
सोनम वांगचुक निदेशक और पत्नी गीतांजलि डायरेक्टर
इसके साथ ही एक निजी कंपनी शेष्योन इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड (SIPL) भी जाँच के दायरे में आई है, जिसमें सोनम वांगचुक निदेशक के रूप में और उनकी पत्नी गीतांजलि जेबी डायरेक्टर हैं। आरोप है कि HIAL से इस निजी कंपनी में 6.5 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) और फंड के दुरुपयोग के सवाल खड़े हो गए। इतना ही नहीं, इस कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) एक वर्ष में 6.13 प्रतिशत से गिरकर सिर्फ 1.14 प्रतिशत रह गया, जिससे संदेह और गहरा हो गया कि कहीं धनराशि को गलत तरीके से बाहर तो नहीं निकाला गया। सबसे गंभीर आरोप सोनम वांगचुक की व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर हैं।

मुनाफे का पैसा दबाने का खेल का जांच एजेंसियों को शक
इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया है कि 2023-24 में वांगचुक की कंपनी का कुल लाभ 6.13 प्रतिशत था। 2024-25 में कारोबार बढ़कर करीब 9.85 करोड़ रुपये हो गया, पर मुनाफा घटकर सिर्फ 1.14 फीसदी रह गया। यानी टर्नओवर तो बढ़ा, लेकिन मुनाफा गायब। जांच एजेंसियों को शक है कि मुनाफे का पैसा दबाने का खेल किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी के तीन खातों में से दो को छुपा लिया गया। एनजीओ से ट्रांसफर हुए 6.5 करोड़ रुपये इन्हीं खातों में पहुंचे थे। वांगचुक की पुरानी संस्था स्टूडेंट्स एजूकेशनल एंड कल्चर मूवमेंट आफ लद्दाख के नाम पर कुल नौ बैंक खाते हैं, पर इनमें से छह का जिक्र नहीं किया गया। यानी यहां भी परदेदारी है। अब सच्चाई सामने आ रही है।

नौ निजी खातों में आठ छिपाए करोड़ों का विदेशी लेन-देन
सबसे दिलचस्प बात कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड (सीएसआर) की है। वांगचुक हर जगह कॉरपोरेट सेक्टर को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं, लेकिन दस्तावेज बताते हैं कि उनकी संस्थाओं ने बड़े-बड़े कॉरपोरेट्स और सरकारी पीएसयू से भारी-भरकम सीएसआर फंड लिया। सामने से कॉरपोरेट विरोध और पीछे से उन्हीं से अनुदान का घी कंबल ओढ़कर पिया गया। जांच एजेंसियों ने सोनम वांगचुक के निजी खातों को भी खंगाला तो रिकॉर्ड चौंकाने वाले आया। वांगचुक के पास कुल नौ व्यक्तिगत बैंक खाते हैं। इनमें से आठ छिपाए गए। 2018 से 2024 के बीच इन खातों में 1.68 करोड़ रुपये की विदेशी रकम आई। साल 2021 से मार्च 2024 तक वांगचुक ने अपने निजी खातों से 2.3 करोड़ रुपये विदेश भी भेजे।
वांगचुक पर शिकंजा कसते हुए उनके एनजीओ का एफसीआरए रद्द
हैरानी की बात यह भी है कि इतना पैसा किन संस्थाओं या व्यक्तियों को गया, इसका कोई साफ रिकॉर्ड नहीं है। इससे हवाला के शक पुख्ता होते हैं। जांच एजेंसी को एफसीआरए की धारा 11 और 17 का उल्लंघन साफ दिख रहा है। कंपनी अधिनियम की शर्तों की अनदेखी और भारतीय दंड संहिता की धारा 467 यानी फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी से जुड़े अपराध भी जुड़ गए। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने वांगचुक पर शिकंजा कसते हुए उनके एनजीओ का एफसीआरए रद्द कर दिया। अब वांगचुक की संस्थाएं विदेश से वित्तीय लेन-देन नहीं कर सकेंगी। आने वाले समय में सीबीआई और ईडी का शिकंजा भी सोनम वांगचुक पर कसना तय है।
मनी लॉन्ड्रिंग: सोनम वांगचुक ने ₹2.3 करोड़ विदेश भेजा
जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि उनके पास कुल 9 व्यक्तिगत बैंक खाते हैं, जिनमें से 8 खातों का खुलासा नहीं किया गया। इन खातों में ज्यादा संख्या में विदेशी पैसा आने का दावा किया गया है। और भी चिंताजनक बात यह है कि 2021 से अब तक सोनम वांगचुक ने 2.3 करोड़ रुपए से अधिक की पैसा विदेश भेजी, जिनके प्राप्तकर्ताओं की पहचान ‘अज्ञात संस्थाओं’ के रूप में बताई जा रही है। यह सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका पैदा करता है। उनकी संस्थाओं ने सरकारी उपक्रमों (PSUs) और निजी कंपनियों से बड़ी मात्रा में CSR (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड प्राप्त किए हैं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह उनके सार्वजनिक बयानों और निजी कार्यों के बीच भारी विरोधाभास को उजागर करेगा।
आंदोलनकारी नेता के मुखौटे के पीछे छिपा है वित्तीय घोटाला
इन आरोपों के असर बहुत दूरगामी हो सकते हैं। अब तक लद्दाख के आंदोलन को एक जमीनी स्तर का संघर्ष माना जाता था, जो स्थानीय लोगों की स्वायत्तता (खुद निर्णय लेने वाले), पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान की मांगों पर आधारित था। लेकिन अगर ये वित्तीय अनियमितताएं बताती हैं कि यह आंदोलन तो एक व्यक्ति के निजी लाभ और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का माध्यम बनकर रह गया। जब कोई व्यक्ति सरकार और उद्योगों से पारदर्शिता की मांग करता है, तो उसे स्वयं भी उतनी ही पारदर्शिता दिखानी चाहिए। CBI की जांच में एक आंदोलनकारी नेता के मुखौटे के पीछे छिपे वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश होगा। लद्दाख और देश की जनता को अब सत्य की प्रतीक्षा है, क्योंकि यही सच न केवल सोनम वांगचुक की छवि बल्कि लद्दाख के भविष्य को भी निर्धारित करेगा।
वांगचुक से जुड़े एक पाकिस्तानी खुफिया एजेंट की गिरफ्तारी
लद्दाख में हुई हिंसा के बाद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक पर भीड़ को उकसाने, हिंसा भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में पाकिस्तान का एंगल भी सामने आया। लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसडी सिंह जामवाल ने मीडिया से बातचीम में सोनम वांगचुक की पाकिस्तान यात्राओं पर सवाल उठाए। जामवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक पाकिस्तान में डॉन के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे और उन पर केंद्र के साथ राज्य के दर्जे की बातचीत को विफल करने की कोशिश करने का आरोप है। उन्होंने वांगचुक की गिरफ्तारी से जुड़े एक पाकिस्तानी खुफिया एजेंट (पीआईओ) की गिरफ्तारी और कार्यकर्ता के पाकिस्तानी लोगों के संपर्क में होने के सुरागों के बारे में भी जानकारी दी।
सोनम वांगचुक ने पाकिस्तान और बांग्लादेश का दौरा किया
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक लद्दाख पुलिस की जांच में सोनम के पाकिस्तान कनेक्शन का खुलासा हुआ है। डीजीपी जामवाल ने बताया, “हमने हाल ही में एक पाकिस्तानी पीआईओ को भी गिरफ्तार किया जो सोनम वांगचुक के संपर्क में था और उन्हें रिपोर्ट कर रहा था। हमारे पास इसका रिकॉर्ड है। वांगचुक पाकिस्तान में डॉन के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, उन्होंने बांग्लादेश का भी दौरा किया था। हमने जिस पीआईओ को गिरफ्तार किया, वह कुछ अहम चीजें पाकिस्तान भेज रहा था। हमने उस व्यक्ति को निगरानी में रखा है।”
वांगचुक ने की शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश
पुलिस प्रमुख ने वांगचुक की कुछ विदेश यात्राओं को संदिग्ध बताते हुए कहा, ‘‘उन्होंने पाकिस्तान में द डॉन के एक कार्यक्रम में भाग लिया और बांग्लादेश भी गए।” वांगचुक, लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और केंद्रशासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर ‘लेह एपेक्स बॉडी’ और ‘करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का मुख्य चेहरा है। वांगचुक ने आंदोलन के मंच को अपने नियंत्रण में लेने और केंद्र सरकार व लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच जारी संवाद को कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने लद्दाख के नेताओं को बातचीत के एक नए दौर के लिए आमंत्रित किया। जामवाल ने बताया कि वांगचुक जानते थे कि दोनों पक्षों के बीच एक अनौपचारिक बैठक होने वाली थी, इसके बावजूद उन्होंने अपना अनशन जारी रखा। जामवाल ने आरोप लगाया, इस बैठक से ठीक एक दिन पहले, भड़काऊ वीडियो और बयानों के जरिए शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई।

इससे पहले सोनम वांगचुक ने कब-कब आंदोलन किया?
- 2023 फरवरी की शुरुआत में सोनम वांगचुक ने केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर पांच दिन की भूख हड़ताल की थी। तब लद्दाख के लोग उनके साथ भूख हड़ताल में शामिल हुए।
- 18 जून 2023 को शुरू हुए सोनम वांगचुक ने अनशन ने लेह के एनडीएस स्टेडियम में सैकड़ों की भीड़ को आकर्षित किया। शुरुआत में यह अनशन सात दिनों का था, लेकिन उन्होंने इसे दो दिन और बढ़ा दिया।
- वांगचुक का सरकार के खिलाफ पहला लंबा अनशन 6 मार्च 2024 से शुरू हुआ था। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के मुद्दे के साथ वे 21 दिनों की भूख हड़ताल पर थे।
- सोनम की ओर से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर अलग आंदोलन 1 सितंबर 2024 से शुरू हुआ।
- सोनम ने लेह से दिल्ली तक पैदल मार्च शुरू किया। इसे “दिल्ली चलो” नाम दिया गया, जिसमें लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) भी शामिल हुए।
- वांगचुक ने इसके बाद 10 सितंबर 2025 से 35 दिनों के अनशन की शुरुआत हुई, जो भड़काऊ बयान के चलते हिंसक प्रदर्शन के कारण केवल 15 दिन में ही खत्म हो गई।
खुद किया अंतर्राष्ट्रीय सांठगांठ और साजिश का खुलासा
सोनम वांगचुक की दाल जब लद्दाख में दंगा और हिंसा कराकर नहीं गली तो वे भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की धमकी भी देने लगे। उन्होंने खुद एक वीडियो स्पीच में धमकी भरे लहजे में कहा कि “आपने देखा होगा कि आजतक के मेरे सारे अपडेट्स हिन्दी भाषा में हैं। उसका एक कारण हैं वो मैं नहीं चाहता कि भारत की ये अंदरूनी बातें विदेशों तक पहुंचे। हमारे नेताओं और भारत का अपमान अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हो। वरना हमारे बहुत से समर्थक विदेशों में हैं। बहुत से नेटवर्क से हैं, जो हमारा समर्थन करना चाहते हैं। जैसे एशिया में मैग्सेसे अवार्ड फाउंडेशन है। जापान में कई फाउंडेशन हैं। वैसे ही यूरोप में रोलेक्स अवॉर्ड फाउंडेशन है। नोबेल पीस प्राइस फाउंडेशन है। जहां पर मैंने एक बहुत बड़ा लेक्चर किया था। वैसे ही अमेरिका में, साउथ अमेरिका में, तो फिर भी हम उन्हें मदद के लिए अभी तक नहीं बोल रहे हैं। मगर अब इतने दिन हुए और हमारी एक आवाज नहीं पहुंची, तो हम सोच रहे हैं कि कल से हम अपने सुबह का अपडेट अंग्रेजी भाषा में करें। ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लद्दाख के हिमालय के पर्यावरण का क्या हो रहा है उसके बारे में ज्ञात तो और उनका भी समर्थन मिले।” यानि वे खुद एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।









