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पत्रकारों की जान का दुश्मन बनी रवीश कुमार की ‘हत्यारी पत्रकारिता’, CJP प्रदर्शन में दिखा डरावना असर, अब पत्रकारों की मॉब लिंचिंग की प्लानिंग

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कांग्रेसी पत्रकार रवीश कुमार पत्रकारिता के नाम पर अपनी सियासी दुकान चला रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गोद में बैठकर यह उन पत्रकारों को टार्गेट करते हैं, जो इनके कांग्रेसी एजेंडे और विचारधारा का पर्दाफाश करते हैं। आज रवीश कुमार हजारों पत्रकारों की जान का दुश्मन बन गए हैं, जो खबरें कवर करने के लिए मुश्किल हालात में काम करते हैं। इन्होंने एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान अपनी बेशर्म और हत्यारी पत्रकारिता का परिचय देते हुए उपद्रवियों को भड़काने का काम किया है। 

रवीश कुमार, “गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है”
रवीश कुमार ने 21 जुलाई,2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें उसने परोक्ष रूप से फिर पत्रकारों की हत्या करने के लिए उकसाने की कोशिश की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।” यह पोस्ट करते समय रवीश कुमार ने एक बार भी यह नहीं सोचा कि इससे कितने पत्रकारों की जान जोखिम में पड़ सकती है। 

पैलेट गन पर सवाल, लेकिन पत्रकारों की पिटाई पर मौन
रवीश कुमार ने 22 जुलाई को एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “अब पुलिस का क्या कहना है ? गोदी मीडिया कम से कम ये सवाल तो उठाए कि क्या एक पत्रकार पर पैलेट गन चला है? कर पाएगा?” रवीश कुमार का दोगलापन देखिए कि पत्रकार पर पैलेट गन चलने को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन कई पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, उनके लिए इनको कोई हमदर्दी नहीं है।

दिल्ली से पंचायत तक पत्रकारों की मॉब लिंचिंग की प्लानिंग
सोशल मीडिया में एक और पोस्ट करके रवीश कुमार ने लिखा कि गोदी मीडिया को निशाना मत बनाइये, हिंसा और हुड़दंग नहीं होनी चाहिए। लेकिन इसी पोस्ट में आगे लिखा, “अभी भी ज़रूरत है कि देश की हर पंचायत में पोस्टर लगना चाहिए कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है। हर पार्टी के दफ्तर के बाहर यह पोस्टर लगा होना चाहिए। एयर पोर्ट पर स्पेस ख़रीद कर यह नारा लिखा जाना चाहिए। लोगों को अपनी कार के पीछे लिखना चाहिए।” 

रवीश कुमार की हत्यारी पत्रकारिता का असर देखिए
इस पोस्ट से पता चलता है कि रवीश कुमार देश की हर पंचायत तक उन पत्रकारों की मॉब लिंचिंग करना चाहते हैं, जो इनके सुर में सुर नहीं मिला रहे हैं। वे अपने समर्थकों के माध्यम से उन पत्रकारों में भय पैदा करना चाहते हैं, जो राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों से सवाल पूछते हैं। ये उन पत्रकारों की जुबान बंद करना चाहते हैं जो उनके एजेंडे पर काम नहीं करते हैं। रवीश कुमार की इस हत्यारी पत्रकारिता का असर CJP के प्रदर्शन में देखने को मिला, जहां टाइम्स नाउ के पत्रकार देव कोटक पर प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों की भीड़ टूट पड़ी।

हत्यारी पत्रकारिता का असर नंबर -1

टइम्स नाउ के पत्रकार की मॉब लिंचिंग की कोशिश
रवीश कुमार यही चाहते हैं कि हर पत्रकार राहुल गांधी का गुणगान करें और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना करें। ऐसा नहीं करने पर अंजाम वैसा ही होगा, जैसे CJP के प्रदर्शन में एक टाइम्स नाउ के पत्रकार देव कोटक की मॉब लिंचिंग की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने इनको पीटा, इनका चश्मा, पर्स, मोबाइल, चैन, घड़ी सब छीन लिया।

हत्यारी पत्रकारिता का असर नंबर -2

महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी
CJP प्रदर्शन की हिंसक भीड़ ने एक महिला पत्रकार को भी नहीं छोड़ा। बर्बर, उन्मादी, ज़हरीली भीड़ ने देश वाणि की महिला पत्रकार के साथ ना सिर्फ बदसलूकी की, बल्कि उसे जान से मारने की कोशिश की। उसे बड़ी मुश्किल से भीड़ से बचाकर बाहर निकाला गया।


हत्यारी पत्रकारिता का असर नंबर -3

ABP के पत्रकार के साथ बदसलूकी

हत्यारी पत्रकारिता का असर नंबर -4

इंडिया टीवी के रिपोर्टर को लाइव के दौरान मारा थप्पड़ 
इंडिया टीवी चैनल के रिपोर्टर को लाइव के दौरान थप्पड़ मारे गए, पानी फेंका गया और गोदी मीडिया बोलकर परेशान किया गया।

हत्यारी पत्रकारिता का असर नंबर -5

एनडीटीवी की महिला रिपोर्ट के साथ बदसलूकी

अब आपको दिखाते हैं, रवीश कुमार का सियासी चेहरा, जो इस हत्यारी पत्रकारिता के लिए जिम्मेदार है…

राहुल गांधी की गोद में बैठे नजर आए रवीश कुमार
दूसरे मीडिया हाउस को गोदी मीडिया कहने वाले रवीश कुमार खुद राहुल गांधी की गोदी में बैठने का कोई मौका नहीं चुकते हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर थे। इस दौरान खुद को निष्पक्ष बताने वाले तमाम पत्रकार कांग्रेस की गोदी में बैठे नजर आए। रवीश कुमार भी यात्रा में राहुल गांधी के साथ दिखे। इसको लेकर उनकी तस्वीर सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुई।

कांग्रेस सरकार में गिरते रुपये और अर्थव्यस्था पर रवीश का ज्ञान सुनिए
2013 में कांग्रेस सरकार के दौरान रवीश कुमार अर्थशास्त्री बन गए थे। गिरते रुपये और अर्थव्यवस्था के बारे में उनका ज्ञान हैरान करने वाला है। तब ना तो इनको रुपये गिरने से परेशानी थी, और ना ही अर्थव्यवस्था की बदहाली से। इनको परेशानी थी कांग्रेस सरकार के खिलाफ रिपोर्टिंग से। उस दौरान यही पत्रकार पूछते थे कि रुपया गिरने से लोग क्यों रो रहे हैं?

कांग्रेस सरकार में मिड डे मील में मांड-भात खाकर भी बच्चे खुश थे, गरीबों की चिंता करने वाली सरकार के बारे में सुनिए रवीश कुमार क्या कह रहे हैं…

देखिए राहुल चालीसा पढ़ते रवीश कुमार की तस्वीर

रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पांडे ने कांग्रेस टिकट पर लड़ा था विधानसभा चुनाव
लोग रवीश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि दूसरे पर गोदी मीडिया का आरोप लगाने वाले खुद किसी की गोदी में खेलते रहे हैं। वैसे रवीश कुमार के परिवार का कांग्रेस से पुराना नाता रहा है। रवीश के भाई ब्रजेश पांडे बिहार कांग्रेस के नेता हैं। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने नाबालिग दलित लड़की से रेप के आरोपी रहे और रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पांडे को मोतिहारी की गोविंदगंज सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। बता दें कि हालाँकि ब्रजेश इसके पहले भी इसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन उस चुनाव में उन्हें जीत हासिल नहीं हुई थी। 

भाई पर पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था
रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पांडेय पर बिहार सरकार के पूर्व दलित कांग्रेसी मंत्री की नाबालिग बेटी के साथ यौन शोषण और बलात्कार का आरोप लगा था। साल 2017 में जिस दौरान उन पर यौन शोषण का आरोप लगा उस वक्त वह कांग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर थे। आरोप लगने के बाद उन्हें बिहार कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष के पद से भी इस्तीफ़ा देना पड़ गया था। यही नहीं, इस आरोप के कारण रवीश कुमार के भाई पर पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था। 

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