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जनसेवा और नेशन फर्स्ट को समर्पित PM MODI के 25 सालों के सफर की 25 ऐतिहासिक उपलब्धियां

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन विरले राजनेताओं में हैं, जिनके लिए पीएम का पद केवल संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ ही राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च अवसर है। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक का सफर निजी जीवन की सुविधाओं से अधिक राष्ट्र को प्राथमिकता देने का रहा है। इन 25 वर्षों की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि पीएम मोदी का विजन केवल आज की राजनीति तक सीमित नहीं रहा। वे लगातार आने वाले भारत की तस्वीर बनाने के प्रयासों में निरंतर जुटे रहते हैं। डिजिटल इंडिया से लेकर जनधन, यूपीआई और आत्मनिर्भर भारत तक, अंतरिक्ष से लेकर सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर वैश्विक कूटनीति तक और योग से लेकर पाकिस्तान को पस्त करने तक उन्होंने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत को केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि निर्णायक वैश्विक शक्ति और विश्व-व्यवस्था में अपनी भूमिका तय करने वाले आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित हो रहा है। सार्वजनिक जीवन में अर्जित धन व उपहारों को जनहित में समर्पित करने की उनकी परंपरा उनके समर्थकों के बीच उन्हें एक अलग पहचान देती है। पीएम मोदी सफलता के शिखर पर हैं और नित नए रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं। उनके नेतृत्व में ऐतिहासिक और अतुलनीय फैसलों और उपलब्धियों से भारत की विजयगाथा देश ही नहीं, दुनियाभर के सामने गुंजायमान हो रही है।आइए, जानते हैं सीएम से लगातार तीसरी बार पीएम बनने के शानदार सफर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्या-क्या ऐतिहासिक उपलब्धियां देश को दिलाई हैं….

1. राजनीतिक कौशल का शिखर: ऐतिहासिक BRICS का सफल संचालन
वैश्विक कूटनीति के मंच पर भारत को एक ‘विश्वबंधु’ और नीति-निर्माता के रूप में स्थापित करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी विदेश नीति को जाता है। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफलतम आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण रहा कि वैश्विक गुटबाजी के इस दौर में भी भारत एक धुरी की भूमिका निभा रहा है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए जहां एक साझा ढांचा तैयार हुआ, वहीं बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार के लिए देश के ‘रिफॉर्म रोडमैप’ पर भी मुहर लगी। विकासशील और विकसित दुनिया के बीच एक मजबूत सेतु बनकर उभरे प्रधानमंत्री के इस राजनयिक कौशल ने वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मंचों पर भारत के दखल को एक नए और सर्वमान्य स्तर पर पहुंचा दिया है।2. स्पेस युग का महानायक: चंद्रयान-3 की विजय से ‘गगनयान’ तक
पीएम मोदी के दृढ़ संकल्प की बदौलत ही भारत ने चंद्रयान-3 के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराकर वह ऐतिहासिक कीर्तिमान रचा, जो दुनिया का कोई विकसित देश आज तक नहीं कर सका। इस अटूट सिलसिले को जारी रखते हुए इसी माह 4 सितंबर 2026 को इसरो ने GSLV-F17 के जरिए भारत का पहला जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट ‘EOS-05’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जिसे ‘अंतरिक्ष में भारत की नई आंख’ कहा जा रहा है। स्पेस सेक्टर को निजी खिलाड़ियों के लिए खोलने के नीतिगत फैसले का ही नतीजा है कि देश ने पहला स्वदेशी प्राइवेट रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च कर स्पेस इकोनॉमी में नए युग की शुरुआत की। यही नहीं, अंतरिक्ष को ‘असीमित क्षितिज’ मानने वाले प्रधानमंत्री का यही विजन आज भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को तेजी से हकीकत में बदल रहा है। मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसले के तहत चंद्रयान-4 (लूनर सैंपल रिटर्न मिशन), वीनस ऑर्बिटर मिशन और गगनयान कार्यक्रम के व्यापक विस्तार के लिए करीब 20,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी भी दी है। प्रधानमंत्री मोदी का यह विजन देश को 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर पहले भारतीय को उतारने के विराट लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर कर रहा है।3. तकनीकी महाशक्ति: भारत सेमीकंडक्टर मिशन का वैश्विक विस्तार
वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में चीन और ताइवान जैसी ताकतों पर दुनिया की निर्भरता को चुनौती देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को भविष्य की ‘चिप और तकनीक’ का नया वैश्विक केंद्र बना दिया है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत देश में पहले कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और असेंबली प्लांट्स का निर्माण कार्य जिस युद्धस्तर पर आगे बढ़ाया गया, वह प्रधानमंत्री की औद्योगिक दूरदर्शिता को दर्शाता है। अमेरिका और ताइवान जैसी वैश्विक तकनीकी शक्तियों के साथ रणनीतिक साझेदारियों को अमलीजामा पहनाकर मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आने वाले समय में दुनिया के इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की धड़कनें भारत से नियंत्रित होंगी, जिससे न सिर्फ लाखों रोजगार पैदा हो रहे हैं, बल्कि भारत तकनीकी रूप से पूर्ण आत्मनिर्भर बन रहा है।

4. सामरिक संप्रभुता का नया अध्याय: ऑपरेशन सिंदूर में पाक परास्त
प्रधानमंत्री मोदी के मजबूत इरादों और सैन्य आत्मनिर्भरता की नीति ने देश की सीमाओं को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान किया है। मोदी 3.0 के शुरुआती दौर में ही भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा अंजाम दिया गया ऑपरेशन सिंदूर प्रधानमंत्री की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस वाली सुरक्षा रणनीति की एक और बड़ी मिसाल बना। इस वैश्विक स्तर के संवेदनशील सैन्य ऑपरेशन की पूर्ण सफलता ने दुनिया के सामने यह स्पष्ट संदेश दिया कि नया भारत अपनी भौगोलिक अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने का माद्दा रखता है। इस मिशन की रणनीतिक विजय ने न केवल देश के विरोधी तत्वों के हौसले पस्त किए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रधानमंत्री मोदी के सुदृढ़ नेतृत्व और देश की सेनाओं की अभूतपूर्व मजबूती को भी स्थापित किया।5. युद्ध संकट में 7.8 प्रतिशत की विकास दर के साथ तेज अर्थव्यवस्था
आज जब दुनिया के बड़े और विकसित देश मंदी की कगार पर खड़े हैं और पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध तथा वैश्विक अस्थिरता ने वैश्विक सप्लाई चेन व ऊर्जा बाजारों को छिन्न-भिन्न कर दिया है, तब प्रधानमंत्री मोदी के कुशल आर्थिक प्रबंधन में भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक और करिश्मा कर दिखाया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत ने दुनिया को चौंकाते हुए 7.8 प्रतिशत की शानदार जीडीपी ग्रोथ रेट दर्ज की है, जो विश्व की सभी प्रमुख बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज और बेजोड़ है। प्रधानमंत्री के ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा और कड़े वित्तीय सुधारों के दम पर आई यह तेज रफ्तार साबित करती है कि मोदी सरकार की नीतियों की नीयत साफ है और बुनियाद बेहद मजबूत है।6: काले धन और टैरर फंडिंग पर नकेल कसने के लिए नोटबंदी लागू की
मोदी सरकार ने कालाधन, आतंकवाद, जाली नोट और टैरर फंडिंग के खिलाफ बड़े हथियार के रूप में नोटबंदी लागू की। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद टीवी पर आकर बताया कि आज रात से 500 और 1000 रुपए के नोट बेकार हो जाएंगे। जनता को इन नोटों को बैंकों में जमा करने की पूरी छूट मिली। सरकार ने पूरा जोर डिजिटल करेंसी बढ़ाने और डिजिटल इकोनॉमी बनाने पर दिया। नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले से डिजिटल ट्रांजेक्शन में इजाफा हुआ। 2016-17 में 1013 करोड़ रुपये का डिजिटल ट्रांजेक्शन हुआ था। 2017-18 में ये बढ़कर 2,070.39 करोड़ और 2018-19 में 3133.58 करोड़ रुपये का डिजिटल ट्रांजेक्शन हुआ। अब 2021-22 में 7422 करोड़ रुपये का डिजिटल ट्रांजेक्शन हुआ है, जो पिछले साल से 33 प्रतिशत अधिक है। इससे आतंकवाद, नक्सलवाद और जाली नोट के खिलाफ भी बड़ी सफलता मिली है।7: सर्जिकल और एयर स्ट्राइक कर पहली बार दुश्मन को घर में घुसकर मारा
पीएम मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत का आतंकवाद से निपटने को लेकर नजरिया एकदम बदल गया। आजादी के बाद पहले 28 सितंबर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक और फिर 26 फरवरी 2019 को एयर-स्ट्राइक के वक्त भारत ने दुश्मन की सीमा में घुसकर उसे सबक सिखाया। आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा लांघी थी। सर्जिकल स्ट्राइक और फिर एयरस्ट्राइक के वक्त पहली बार ऐसा हुआ जब युद्ध की स्थिति नहीं होते हुए भी आतंकी घटनाओं का जवाब देने के लिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार जाकर आतंकियों को सबक सिखाया। इससे भारत की आंतकवाद के खिलाफ लड़ने को लेकर छवि मजबूत हुई। पूरी दुनिया ने  महसूस किया गया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत अब अपने दुश्मनों को कहीं भी जाकर खत्म कर सकता है। यही वजह रही की भारत की जनता 2019 में मोदी सरकार को और ज्यादा ताकत के साथ सत्ता में लेकर आई।

 

8: जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का खात्मा, दो केंद्र शासित प्रदेश बने
पीएम मोदी सरकार के कार्यकाल में एक और ऐतिहासिक फैसला हुआ, जिसने कांग्रेस सरकार द्वारा की गई गलतियों का खात्मा किया। मोदी सरकार ने प्रशासनिक संकल्प से जम्मू-कश्मीर से संविधान की धारा 370 हटा दी। इससे राज्य को मिले विशेषाधिकार खत्म हो गए। जम्मू-कश्मीर दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बंट गया। भाजपा भी लंबे समय से धारा 370 खत्म करने की मांग कर रही थी। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद बड़ा बदलाव यह हुआ कि अब वहां केंद्र के सभी कानून लागू होते हैं। इससे जम्मू-कश्मीर औपचारिक तौर पर भारत का हिस्सा बना। भारत के सभी कानून जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लागू हुए। मनरेगा, शिक्षा के अधिकार को भी लागू किया गया। सबसे खास बात यह कि धारा 370 खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर में पुलिस पर पत्थरबाजी और आंतकवाद की घटनाओं में जबरदस्त कमी आई है। कश्मीर में अमन और शांति बहाली से कश्मीर घाटी फिर से पर्यटकों से गुलजार होने लगी है।

9: तीन तलाक के खिलाफ कानून पारित, हज सब्सिडी भी खत्म की
पीएम मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के हक में ऐतिहासिक फैसला लिया। सरकार ने कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं से तीन बार तलाक कहकर संबंध खत्म करने की प्रथा को गैरकानूनी बना दिया। ऐसा करने वालों के लिए तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया। मुस्लिम महिलाओं के लिए गुजारा भत्ते/मुआवजे की व्यवस्था भी की। मोदी सरकार ने फरवरी 2018 में अध्यादेश जारी किया। यह बिल की शक्ल में संसद में पेश हुआ और तमाम विरोधों के बाद दोनों सदनों से दिसंबर 2018 में यह पारित हो गया।  राष्ट्रपति के साइन होने के बाद मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक कानून बना और इसे 19 सितंबर 2018 से लागू माना गया। इस कानून के लागू होने के बाद तीन तलाक के केस घटकर बमुश्किल 5% ही रह गए हैं। इसके अलावा मोदी सरकार ने हज के लिए दी जाने वाली वाली सब्सिडी भी इसी साल से खत्म कर दी। यानी 2018 के बाद से हज पर जाने वालों को पूरा खर्च खुद ही वहन शुरू हो गया। कई मुस्लिम संगठन हज सब्सिडी को खत्म कराना चाहते थे।

10: एक देश, एक टैक्स पर जीएसटी लागू, अब जीएसटी कलेक्शन में लगातार वृद्धि
मोदी सरकार द्वारा जीएसटी लागू करने से पहले हर राज्य अपने अलग-अलग टैक्स वसूलता था। आधा टैक्स केंद्र सरकार को जाता है और आधा राज्यों को। वसूली केंद्र सरकार करती है। बाद में राज्यों को पैसा लौटाती है। वर्ष 2000 में वाजपेयी सरकार ने पूरे देश में एक टैक्स लागू करने के बारे में सोचा। विधेयक बनाने के लिए कमेटी भी बनाई। पर राज्यों को डर था कि उन्हें जितना रेवेन्यू मिल रहा है, उतना नहीं मिलेगा। इस वजह से मामला अटका रहा। मार्च 2011 में मनमोहन सिंह की सरकार ने इसको लागू करने की कोशिश की, लेकिन वह तो फेल ही हो गई। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार नई सोच के साथ कुछ जरूरी बदलावों के बाद संविधान संशोधन विधेयक लेकर आई। अगस्त 2016 में यह विधेयक संसद ने पास किया। 12 अप्रैल 2017 को जीएसटी से जुड़े चार विधेयकों को संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की सहमति मिली। यह 4 कानून हैं- सेंट्रल GST बिल, इंटिग्रेटेड GST बिल, GST (राज्यों को कम्पेंसेशन) बिल और यूनियन टेरेटरी GST बिल। तब जाकर 1 जुलाई 2017 की आधी रात से नई व्यवस्था पूरे देश में लागू हुई। मोदी सरकार द्वारा जीएसटी लागू करने से टैक्स की विसंगति दूर हुई। अब पूरे देश में हर सामान पर एक-सा टैक्स लगता है। जीएसटी कलेक्शन में लगातार वृद्धि हो रही है।

11: प्रवासियों के लिए नागरिकता संशोधन कानून (सीसीए) लागू किया
पीएम मोदी सरकार ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम (हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और इसाई) प्रवासियों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीसीए) लागू किया। पहले इन लोगों को भारत की नागरिकता पाने के लिए भारत में 11 साल रहना होता था। नागरिकता संशोधन बिल के बाद ये अवधि 11 साल से घटकर 6 साल हो गई। वैसे यह बिल मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में (जनवरी 2019 में) लोकसभा से पारित कर दिया गया था। राज्यसभा में पास होने से पहले ही 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया। लोकसभा भंग होने के साथ ही यह बिल भी रद्द हो गया। 17वीं लोकसभा के गठन के बाद मोदी सरकार ने नए सिरे से इस बिल को पेश किया। 10 दिसंबर 2019 को ये बिल लोकसभा और 11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में पास हो गया। राष्ट्रपति से हस्ताक्षर के बाद 10 जनवरी 2020 को इसे लागू कर दिया गया। इस बिल के लागू होने से कई सालों से अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिकता पाने की राह आसान हुई।

12: सदियों के संघर्ष के बाद भव्य-दिव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य यजमान नेतृत्व में 22 जनवरी 2024 को सदियों के संकल्प को सिद्धि देते हुए अयोध्या के भव्य मंदिर में प्रभु श्री रामलला की दिव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इसने राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का एक स्वर्णिम अध्याय रच दिया। इसी पावन संकल्प की पूर्णाहुति के रूप में 25 नवंबर 2025 (विवाह पंचमी) को राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे मुख्य शिखर पर 42 फीट ऊंचे भव्य धर्मध्वज का ऐतिहासिक ध्वजारोहण पीएम मोदी द्वारा किया गया। इससे पहले पीएम मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था। तब पीएम ने कहा कि आज पूरा भारत राममय है। पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक भी है। करोड़ों लोगों को ये विश्वास ही नहीं हो रहा कि वो अपने जीते-जी इस पावन दिन को देख पा रहे हैं। राम मंदिर के इस भूमिपूजन तक पहुंचने में ढेरों कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। भाजपा के लिए हमेशा से ही राम मंदिर निर्माण सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

 

13: वैश्विक कोरोना महामारी के लिए वैक्सीन बनाकर 200 करोड़ डोज का आंकड़ा पार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति, विजन और अनथक प्रयासों के चलते भारत ने इस दिन 200 करोड़ वैक्सीनेशन के जादुई आंकड़े को रिकार्ड समय में पार कर लिया। इसके साथ ही सरकार ने करोड़ों देशवासियों को वैश्विक महामारी से बचाव के लिए सुरक्षा कवच मुहैया कराया। कोरोना के शुरुआत में जब हमारे पास वैक्सीन ही नहीं थी, तब यह लक्ष्य बेहद दुरूह नजर आता था। लेकिन महामारी के बीच में ही पीएम मोदी की देशभक्ति, दूरदृष्टि और अटल इरादों ने 135 करोड़ भारतीयों में कोरोना के खिलाफ लड़ाई का विश्वास भर दिया। भारत ने न सिर्फ अपने देशवासियों को बचाया, बल्कि विश्व के 98 देशों में 200 मिलियन डोज की आपूर्ति भी की। इसके लिए भारत को विश्वभर से बधाइयां मिलीं। तेजी से चले वैक्सीनेशन अभियान का फायदा यह रहा कि तीसरी लहर ने भारत में कहर नहीं बरपाया, जबकि दूसके कई देश इसकी चपेट में आए।

14: हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को बढ़ावा, केदारनाथ से काशी तक भव्य-दिव्य मंदिर
भारतीय जनता पार्टी शुरू से ही हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने की फिलॉसफी से चलती है। राम मंदिर ही नहीं, बीजेपी ने काशी से लेकर केदारनाथ तक, सोमनाथ से लेकर मथुरा तक के मंदिरों को न सिर्फ मुद्दा बनाया, बल्कि उनको भव्यता और दिव्यता भी प्रदान की। जनता के लिए तीर्थाटन योजना भी सबसे पहले भाजपा की ही राज्य सरकारों ने शुरू की। बीजेपी ने गाय और गोवंश का मुद्दा भी प्राथमिकता से लिया। केंद्र से लेकर अलग-अलग राज्यों में बीजेपी की सरकार बनने पर गोहत्या रोकने की कोशिश की गई है। अटल सरकार ने गो पशु आयोग बनाया। गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने गोहत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दी। 26 मई 2017 को मोदी सरकार ने पशु बाजारों में हत्या के लिए मवेशियों की बिक्री और खरीद पर रोक लगा दी थी।

15: फार्मा सेक्टर ने दमदार निर्यात से भारत को दुनिया का सबसे सस्ता दवाखाना बनाया
भारत के फार्मा सेक्टर ने निर्यात के मोर्चे पर दमदार प्रदर्शन किया है। अगर कहा जाए कि भारत दुनिया का सस्ता दवाखाना बनने जा रहा है तो यह कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। यह सब हो रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से जिन्होंने देश की सत्ता संभालने के बाद कहा था…”मैं देश नहीं झुकने दूंगा।” पीएम मोदी ने 2014 में देश सत्ता संभालने के बाद हर सेक्टर के विकास पर जोर दिया है और यही वजह है कि फार्मा सेक्टर ने पिछले आठ साल में निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। पिछले 8 वर्षों में इसमें करीब 10 बिलियन अमरीकी डॉलर की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें खास बात यह है कि कोरोना काल में विभिन्न बाधाओं के बावजूद भारतीय फार्मा कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। भारतीय औषध उद्योग को वैश्विक बाजार में अग्रणी भूमिका निभाने हेतु समर्थ बनाना और आम उपभोग के लिए अच्छी गुणवत्ताओं वाले औषध उत्पादों का उचित मूल्यों पर देश के अंदर प्रचुर उपलब्धता सुनिश्चित करना केंद्र सरकार का अहम लक्ष्य है जिसे पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं।

16: सेहतमंद भारत की ओर कदम, अब पैसे की कमी से गरीब का नहीं रुकता इलाज

आयुष्मान भारत योजना के तहत मार्च 2022 तक 17.90 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड मुहैया कराए जा चुके हैं। 3.28 करोड़ के अधिक लोग उपचार की सुविधा ले चुके हैं। इस योजना से करीब 27300 निजी एवं सरकारी अस्पताल जुड़े हुए हैं। साथ ही इस योजना के तहत 141 ऐसे मेडिकल प्रोसीजर्स शामिल किए गए हैं, जो सिर्फ महिलाओं के लिए हैं। अक्टूबर 2019 से सितंबर 2021 तक इस योजना का लाभ पाने वालों में 46.7 प्रतिशत महिलाएं हैं। पीएम जय-आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 से हुई। इसके तहत 10 करोड़ 74 लाख परिवारों के 50 करोड़ के अधिक लोगों को पांच लाख रुपये-सालाना मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई है। मुफ्त इलाज में गंभीर बीमारियां भी शामिल हैं।

17: गुलामी की निशानी को मिटाकर राजपथ को बनाया कर्तव्य पथ, नेताजी की प्रतिमा का अनावरण
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले की प्राचीर से दिए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर ‘पंच प्राणों का विजन रखा है। इन पंच प्राणों में विकास के बड़े लक्ष्यों का संकल्प है, कर्तव्यों की प्रेरणा है। इसमें गुलामी की मानसिकता के त्याग का आवाहन है, अपनी विरासत पर गर्व का बोध है। गुलामी के प्रतीक राजपथ का अस्तित्व समाप्त करके कर्तव्य पथ की पीएम मोदी ने शुरुआत की। इसके साथ ही जॉर्ज पंचम की मूर्ति हटाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी की मानसिकता के परित्याग का पहला उदाहरण नहीं है। ये मन और मानस की आजादी का लक्ष्य हासिल करने तक, निरंतर चलने वाली संकल्प यात्रा है। इसी दिशा में गुलामी की निशानियों को मिटाकर अंडमान के द्वीपों को नेताजी बोस से जोड़कर भारतीय नाम दिए गए18: मोदी के सीएम रहते गुजरात ने देश के औसत से भी ज्यादा तरक्की की
गुजरात की बात करें तो साल 2000 से लेकर 2012 तक राज्य में 3 हजार रूरल रोड प्रोजेक्ट्स पूरी की गईं। वहीं 2004-05 से 2013-14 के बीच बिजली प्रत्येक इंसान की खपत के लिए 41 फीसदी ज्यादा उपलब्ध थी। नरेन्द्र मोदी के सीएम रहते गुजरात के आर्थिक तरक्की का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2000 से 2010 के बीच सर्विसेज और गुड्स के वैल्यू की वजह से जीएसडीपी 9.8 फीसदी हो गई। जबकि इस दौरान देश का आंकड़ा 7.7 फीसदी ही था। ज़ाहिर है देश के औसत आंकड़े से गुजरात कहीं आगे निकला। इसलिए राज्य के संतुलित विकास की चर्चा देश ही नहीं, दुनियाभर में होने लगी।19: मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मेलन कराकर दुनिया का ध्यान खींचा
नरेन्द्र मोदी ने साल 2003 में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मेलन करा पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। वाइब्रेंट गुजरात के जरिए नरेन्द्र मोदी ‘ब्रांड गुजरात’ बनाने में सफल साबित हुए। साल 2003 में 76 एमओयू के जरिए 66 हजार से बढ़कर साल 2011 में 8,380 एमओयू में परिवर्तित हुआ। ज़ाहिर है साल 2011 में इन्वेस्टर्स के बीच भरोसा बढ़ाने में कामयाब रहे मोदी 21 लाख करोड़ के विनिवेश के लिए उद्योगपतियों को राजी कर चुके थे। इन्वेस्टर्स गुजरात में बिजेनस फ्रेंडली एनवायर्नमेंट की वजह से आकर्षित हो रहे थे, जहां बेहतरीन इंफ्रस्ट्रक्चर की वजह से विनिनेश बढ़ाने में सहूलियत हो रही थी।20: बंगाल में नैनो के लिए ममता के विरोधी आंदोलन को मोदी ने गुजरात के लिए अवसर में बदला
तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी ने फोर्ड, सुजूकी और टाटा जैसी कंपनियों के लिए जटिल नौकरशाही की प्रक्रिया को बेहद आसान कर दिया और उद्योगपतियों की नजरों में बिजनेस फ्रेंडली प्रशासक के रूप में पहचाने जाने लगे। देश ही नहीं दुनिया में मोदी के शासन की धूम मची जब चंद दिनों में टाटा जैसे उद्योगपति को नैनो की फैक्ट्री लगाने के लिए पूरी तरह उन्होंने तैयार कर लिया। साल 2008 में बंगाल में नैनो के विरोध के लिए ममता आंदोलन कर रही थीं, लेकिन नरेन्द्र मोदी ने इसे गुजरात के लिए अवसर में तब्दील किया। जिसकी चर्चा दूर-दूर तक होने लगी। यही वजह बना कि गुजरात में होने वाला व्राइब्रेंट गुजरात समिट विनिवेश का शानदार माध्यम बना। इस कारण गुजरात उद्योगपतियों को अपनी ओर आकर्षित करने लगा।21: मोदी राज की बेहतरीन आर्थिक नीतियों को दुनिया ने ‘मोदीनॉमिक्स’ नाम दिया
साल 2005-06 में गुजरात में रिकॉर्ड ग्रोथ रेट दर्ज हुई थी जो 15 प्रतिशत के करीब थी। इस दौरान तीन बेहतरीन ग्रोथ रेट वाले राज्यों पर ध्यान दें तो महाराष्ट्र का ग्रोथ रेट 10.75 प्रतिशत, तमिलानडु का 10.27 प्रतिशत और बिहार का 11.42 प्रतिशत था। कहा जाता है कि बिहार का ग्रोथ बेहद निचले स्तर पर था, इसलिए 11.42 प्रतिशत का ग्रोथ स्वाभाविक था। जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्य लंबे समय से विकसित राज्यों में गिने जाते रहे हैं। लेकिन मोदी अपनी नीतियों से गुजरात की ग्रोथ 15 प्रतिशत तक ले गए। मोदी राज में अपनाए गए बेहतरीन आर्थिक नीति को दुनिया ‘मोदीनॉमिक्स’ के नाम से पुकारने लगी।

22: बेहतरीन कृषि नीति से फूड डेफसिट राज्य से गुजरात फूड सरप्लस स्टेट बना 
नरेन्द्र मोदी का जोर कृषि के बढ़ावे पर भी उतना ही था, जितना अन्य इंडस्ट्री सहित दूसरे सेक्टर पर। कृषि को उन्नत बनाने में बीटी कॉटन (जेनेटिकली मॉडिफाइड) को अपनाने पर जोर सहित, लघु सिंचाई,चेक डैम्स और 10 हजार छोटे कृषि मशीन कृषि की पैदावार बढ़ाने में बेहद कारगर साबित हुए। खाद्य पदार्थों की पैदावार में साल 2000 की तुलना में 100 फीसदी बढ़ गई। वहीं कपास के पैदावार में 200 फीसदी का इज़ाफा हुआ। बेहतरीन कृषि नीति की वजह से साल 2000 से 2010 तक गुजरात फूड डेफसिट से फूड सरप्लस राज्य बन पाने में कामयाब हुआ। राज्य में गेहूं की पैदावार 8 मिलियन टन से बढ़कर 40 मिलियन टन तक पहुंच गई, जबकि कपास की उपज पूरे देश के 40 फीसदी आंकड़े को पार कर चुकी थी।

23: मोदी राज में पावर जनरेशन में शानदार बढ़त, पावर सरप्लस राज्य बनाने में कामयाबी
बिजली की खपत और पैदावार किसी राज्य की समृद्धि का सूचकांक होती है। मोदी के विजन के चलते दस सालों में पावर जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन में गुजरात में शानदार बढ़त देखी गई। राज्य में साल 2003-04 में 9 हजार मेगावाट से बढ़कर 2013 में 23 हजार 887 मेगावाट तक पहुंच जाना बिजली की पैदावार और खपत विकास की कहानी बखूबी बयां करती है। इस दौरान मोदी सरकार ने ट्रांसमिशन लॉस पर ध्यान देकर उसको 35 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया और गुजरात को पावर सरप्लस राज्य बनाने में कामयाबी हासिल की।24: गांव से शहर तक बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली-पानी जैसी समस्याओं से छुटकारा
गुजरात में सीएम मोदी का ध्यान आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर भी था। इसलिए शहर से लेकर गांव तक की सड़कों को मजबूत करना मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में था। सड़कों के तीन हजार रूरल प्रोजेक्ट्स इस कड़ी में पूरे किए गए जो सरकार की प्राथमिकताओं का बेहतरीन उदाहरण बने। गुजरात पावर सरप्लस स्टेट बन चुका था और बेहतरीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से एक पोर्ट से दूसरे पोर्ट पर जाना एक दिन के भीतर आसानी से संभव था। तत्कालीन मोदी सरकार ने गुजरात में अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने को लेकर भी कई प्रयास किए जिनमें अहमदाबाद और गांधीनगर, सूरत और भरूच को डिवेलप करना शामिल था। इतना ही नहीं लोकल बॉडी के मजबूत फाइनेंशियल स्टेटस की वजह से शहरी आधारभूत संरचना बेहतर होती गई और गुजरात लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता रहा।

25: मोदी विजन…नारीशक्ति की राज्य और राष्ट्र के उत्थान में अग्रणी भूमिका 
एक शासक और व्यक्तित्व के तौर पर नरेन्द्र मोदी का हमेशा से विजन रहा है कि नारीशक्ति राज्य और राष्ट्र के उत्थान में अग्रणी भूमिका निभा सकती है। सीएम से लेकर पीएम बनने तक उन्होंने न सिर्फ महिलाओं के उत्थान पर जोर दिया, बल्कि उनके लिए कई बेहद सफल योजनाएं भी लेकर आए। साल 2004-2005 में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर मोदी सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कन्या केलवणी योजना सहित शाला प्रवेशोत्सव अभियान चलाया, जिसमें अधिकारियों और मंत्रियों को गांवों तक भेजकर ज़मीन पर उतारने का सफल प्रयास किया। मोदी सरकार ने बेटी बचाओ अभियान के लिए लिंग अनुपात पर विशेष जोर दिया। इतना ही नहीं हर स्कूल में शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की ताकि लड़कियों की शिक्षा में आने वाली दिक्कतों को दूर किया जा सके। विकास के तमाम आयाम को छूने और उसे सफल बनाकर राज्य को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने में कामयाब मोदी गुजरात को विकास का पर्याय बनाने में पूरी तरह कामयाब रहे। इसलिए पिछले दो दशकों से गुजरात देश के लिए नजीर और विकास का पर्याय बन चुका है।

 

 

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