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आज समय की मांग है कि हम अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों पर भी बल दें : पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लखनऊ के लोक भवन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कांसे की 25 फीट प्रतिमा का अनावरण किया। इसके साथ ही उन्होंने लखनऊ में अटल बिहारी चिकित्सा विश्वविद्यालय का भी शिलान्यास किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अटल जी कहते थे कि जीवन को टुकड़ों में नहीं देखा जा सकता, उसको समग्रता में देखना होगा। यही बात सरकार के लिए भी सत्य है, सुशासन के लिए भी सत्य है। सुशासन भी तब तक संभव नहीं है, जब तक हम समस्याओं को संपूर्णता में, समग्रता में नहीं सोचेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की ही एक कड़ी है- देश के ग्रामीण इलाकों में सवा लाख से ज्यादा वेलनेस सेंटर का निर्माण। इसका उद्देश्य है बीमारी के लक्षणों को शुरुआत में ही पकड़कर उसका इलाज करना। सरकार द्वारा महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए मिशन पोषण शुरू किया गया है।  

पीएम मोदी ने कहा कि आयुष्मान भारत के कारण देश के करीब 70 लाख गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज हो चुका है, जिसमें करीब 11 लाख यहीं यूपी के हैं। स्वच्छ भारत से लेकर योग तक, उज्ज्वला से लेकर फिट इंडिया मूवमेंट तक और इन सबके साथ आयुर्वेद को बढ़ावा देने तक इस तरह की हर पहल बीमारियों की रोकथाम में अपना अहम योगदान दे रही हैं। 2022 तक हर गरीब जिनके पास घर नहीं है उन्हें घर देने का काम तेजी से चल रहा है। 

उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे इस अभूतपूर्व काम का लाख उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है। इस वर्ष इंसेफलाइटिस के मामले में योगी जी और उनकी टीम ने और यूपी की जनता ने बहुत ही सराहनीय काम किया है। इसके लिए आप सब अभिनंदन के अधिकारी हैं। 

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार के लिए सुशासन का अर्थ है- सुनवाई, सबकी हो। सुविधा, हर नागरिक तक पहुंचे। सुअवसर, हर भारतीय को मिले। सुरक्षा, हर देशवासी अनुभव करे और सुलभता, सरकार के हर तंत्र की सुनिश्चित हो। हमारा प्रयास है कि सरकार अटकाने के बजाए उलझाने के बजाए, सुलझाने का माध्यम बने। आप अगर इस सरकार का मूल्यांकन करेंगे तो आप हर कदम पर यही प्रयास पाएंगे। पहले हर जगह दस्तावेजों के फेर में ही आम आदमी अटका रहता है वहीं अब जीवन आसान हो गया है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अटल सिद्धि की इस धरती से यहां के हर नागरिक को मैं एक और आग्रह करने आया हूं कि आजादी के बाद के वर्षों में हमने सबसे ज्यादा जोर अधिकारों पर दिया है। आज समय की मांग है कि हमें अपने कर्तव्यों के साथ अपने दायित्वों पर भी उतना ही बल देना है। चिकित्सा सुविधा हमारा हक है लेकिन डॉक्टरों को सम्मान देना हमारा दायित्व है।  

 

 

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