भारतीय राजनीति में दशकों तक विज्ञान और तकनीक को केवल भाषणों और आयोजनों तक सीमित रखा गया। 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जब संवैधानिक दायित्व संभाला, तब उन्होंने आधुनिक तकनीक को सुशासन, आपदा प्रबंधन और नागरिक सेवाओं का मुख्य आधार बनाया। 2014 में देश की बागडोर संभालने के बाद मोदी सरकार ने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ के नारे में ‘जय अनुसंधान’ जोड़कर भारत को केवल तकनीक का इस्तेमाल करने वाले देश से बदलकर दुनिया को नई तकनीक देने वाले अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने हर क्षेत्र में आधुनिक तकनीक पर जोर देकर न केवल आम लोगों का जीवन संवारा और लाखों जिंदगियां बचाईं, बल्कि नागरिकों के इलाज, दवाइयों और रोजमर्रा के खर्चों में होने वाले करोड़ों रुपये की सीधी बचत भी कराई। तकनीक के जरिए व्यवस्था से लीकेज और बिचौलियों को खत्म कर देश के जो अरबों रुपये बचाए गए, वही आज राष्ट्र निर्माण और विकास के महायज्ञ में काम आ रहे हैं। प्रधानमंत्री के इस दूरदर्शी विजन से भारत भविष्य की हर तकनीकी चुनौती का मुकाबला करने में सक्षम बन रहा है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक तिरंगा फहराने से लेकर स्वदेशी सेमीकंडक्टर फैब, 5G-6G क्रांति, सौर ऊर्जा के महापरियोजनाओं और दस हजार करोड़ रुपये के ‘इंडिया एआई मिशन’ तक, मोदी सरकार ने पिछले ढाई दशक में आत्मनिर्भर भारत को इक्कीसवीं सदी का सबसे सामरिक और सुरक्षित राष्ट्र बना दिया है।
चांद के दक्षिणी ध्रुव से गगनयान तक: अंतरिक्ष में भारत की ऐतिहासिक छलांग
दशकों तक संसाधन और नीतिगत अनिर्णय से जूझते अंतरिक्ष क्षेत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच ने नई उड़ान दी। 23 अगस्त 2023 को भारत चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखने वाला दुनिया का पहला देश बना, जिस ऐतिहासिक क्षण को अमर करते हुए सरकार ने 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ घोषित किया। इसके साथ ही सूर्य का अध्ययन करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष मिशन ‘आदित्य-एल1’ ने अपने गंतव्य पर पहुंचकर इतिहास रचा। मोदी सरकार ने स्पेस सेक्टर को निजी उद्यमों के लिए खोलकर ‘इन-स्पेस’ (IN-SPACe) का गठन किया, जिसके चलते आज देश में दो सौ से अधिक स्पेस-टेक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। भारत अब अपने अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजने के लिए ‘गगनयान मिशन’ और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत के मून मिशन यानी चंद्रयान-3 के लैंडर की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत पहला देश बन गया है. जबकि भारत दुनिया का चौथा देश है जो चंद्रमा पर पहुंचा है इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन भी चांद पर पहुंच चुके हैं. 🧿🌚#ChandParTiranga #JaiHo pic.twitter.com/WNwIbNSZeR
— AajTak (@aajtak) August 23, 2023
चिप निर्माण का नया हब: विदेशी निर्भरता खत्म कर खुद बना रहे अपनी सेमीकंडक्टर चिप
मोबाइल, कार और आधुनिक रक्षा उपकरणों की जान मानी जाने वाली सेमीकंडक्टर चिप्स के लिए भारत दशकों तक दूसरे देशों पर निर्भर रहा। मोदी सरकार ने इस कमजोरी को दूर करने के लिए 76 हजार करोड़ रुपये के ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ की शुरुआत की। गुजरात के धोलेरा में देश के पहले बड़े कमर्शियल सेमीकंडक्टर प्लांट और साणंद व असम के मोरीगांव में अत्याधुनिक चिप टेस्टिंग और पैकेजिंग यूनिट्स का काम शुरू हुआ। दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियों ने भारत पर भरोसा जताते हुए डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया। इससे भारत आने वाले समय में दुनिया भर को चिप सप्लाई करने वाला बड़ा केंद्र बन रहा है।
भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में एक और बड़ी छलांग!
SEMICON India 2026 में प्रधानमंत्री @narendramodi ने बताया कि भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है।
बढ़ा हुआ निवेश, निरंतर सुधार और Global Companies, Indian Startups व Design Firms के लिए बढ़ते अवसर, भारत में… pic.twitter.com/bvC7odZpvn
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) September 17, 2026
सौर ऊर्जा से मुफ्त बिजली: घरों की छतों से पैदा हो रही देश की स्वच्छ ऊर्जा
गुजरात के पाटन में एशिया के पहले बड़े सोलर पार्क की स्थापना से शुरू हुआ नरेंद्र मोदी का हरित विजन आज पूरे देश को रोशन कर रहा है। 2014 के बाद देश में सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता रिकॉर्ड गति से बढ़ी और भारत ने तय समय से पहले ही अपने हरित ऊर्जा लक्ष्य हासिल कर लिए। 75 हजार करोड़ रुपये की ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के जरिए देश के एक करोड़ परिवारों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे आम जनता का बिजली बिल शून्य हो रहा है और वे अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। वहीं, लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के ‘ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ से भविष्य की गाड़ियों और बड़े उद्योगों को बिना प्रदूषण के चलाने का रास्ता साफ हुआ है।
भारत के लिए गर्व का क्षण है 🤟
देश के 40 लाख से ज्यादा घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं, यह अक्षय उर्जा के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिनिधित्व का प्रमाण हैं।
PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना हमारे स्वच्छ भविष्य को एक नई दिशा दे रही है।#40LakhsPMSuryaGhar pic.twitter.com/SlphlQHauZ
— Chandan Sharma (@ChandanSharmaG) May 29, 2026
इंडिया एआई मिशन: आम आदमी की भाषा और जरूरत के हिसाब से कृत्रिम बुद्धिमत्ता
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) केवल बड़े वैज्ञानिकों और कंपनियों तक सीमित न रहे, इसके लिए मोदी सरकार ने 10,372 करोड़ रुपये के ‘इंडिया एआई मिशन’ को मंजूरी दी। इसके तहत देश के युवाओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए 10,000 से अधिक जीपीयू की विशाल सुपरकंप्यूटिंग क्षमता तैयार की जा रही है। भारत ने एआई का इस्तेमाल आम लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए किया है। ‘भाषिणी’ प्लेटफॉर्म के जरिए किसान और ग्रामीण नागरिक अपनी मातृभाषा में बोलकर सरकारी योजनाओं की जानकारी और सेवाएं ले रहे हैं। इसके साथ ही भारत दुनिया के मंचों पर सुरक्षित और नैतिक एआई के नियम तय करने में सबसे आगे खड़ा है।
भारत में एआई शासन प्रणाली को बदल रही है-प्रतिक्रियात्मक प्रशासन से नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण की ओर। डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय एआई मिशन के समर्थन से, एआई स्मार्ट शहरों, कर निगरानी, कल्याणकारी योजनाओं को लक्षित करने और न्यायिक अनुवाद जैसी सेवाओं को सशक्त बना रही है। जिससे 1.3… pic.twitter.com/00EPPO8vzC
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) February 11, 2026
सस्ता इंटरनेट और 5G क्रांति: दुनिया में सबसे तेज नेटवर्क और 6G की स्वदेशी तैयारी
2014 से पहले देश महंगे और धीमे इंटरनेट से जूझ रहा था, लेकिन भाजपा सरकार की नीतियों ने भारत को दुनिया का सबसे सस्ता डेटा बाजार बना दिया। भारत ने दुनिया में सबसे तेजी से 5G नेटवर्क का विस्तार किया, जिससे शहरों से लेकर सुदूर गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचा। विदेशी नेटवर्क कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय भारत ने अपना पूरी तरह स्वदेशी 4G और 5G टेलीकॉम सिस्टम तैयार किया। अब भारत भविष्य की 6G तकनीक के पेटेंट और मानक तय करने में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ पहली कतार में खड़ा है।
भाजपा सरकार के नेतृत्व में देश डिजिटल क्रांति की नई ऊंचाइयां छू रहा है।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों के परिणामस्वरूप आज देश के हर जिले तक पहुंचा 5G नेटवर्क…#11YearsOfMakeInIndia #BJP4ViksitBharat #BJP4UP pic.twitter.com/w4oyUCOPFL
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) November 2, 2025
यूपीआई से डिजिटल क्रांति: जेब में स्मार्टफोन और हाथ में दुनिया का सबसे आधुनिक पेमेंट सिस्टम
प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल विजन ने देश के वित्तीय लेन-देन का चेहरा पूरी तरह बदल दिया। यूपीआई (UPI), आधार और जन-धन की मदद से भारत ने ऐसा डिजिटल ढांचा खड़ा किया जिसकी मिसाल पूरी दुनिया दे रही है। आज सड़क किनारे चाय बेचने वाले से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह एक क्यूआर कोड से सेकंडों में लेन-देन हो रहा है। दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन का लगभग आधा हिस्सा अकेले भारत में होता है। फ्रांस, सिंगापुर, यूएई और श्रीलंका जैसे देश अब भारत के यूपीआई मॉडल को अपना रहे हैं, जिसने आम नागरिक को नकदी के झंझट से मुक्ति दिलाकर डिजिटल शक्ति दी है।
“UPI is a perfect example of ‘innovation at population scale’, 50% of the world’s real time payments are done on UPI.”
— PM Shri @narendramodi Ji
📍 BRICS 2026 pic.twitter.com/lMA2TiEiB3— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) September 12, 2026
तकनीक से भ्रष्टाचार का अंत: डीबीटी और जेम पोर्टल से खत्म हुए बिचौलिए, देश के बचे अरबों रुपये
दशकों तक सरकारी योजनाओं का पैसा गरीबों तक पहुंचने से पहले ही बिचौलियों और फर्जी नामों की भेंट चढ़ जाता था। नरेंद्र मोदी सरकार ने जन-धन, आधार और मोबाइल की डिजिटल तिकड़ी से ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ (डीबीटी) व्यवस्था लागू कर 38 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे असली हकदारों के बैंक खातों में पहुंचाए। इससे करोड़ों फर्जी लाभार्थी सिस्टम से बाहर हुए और देश के 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की लीकेज बची। वहीं, सरकारी खरीद के लिए शुरू किए गए ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) पोर्टल ने पुराने टेंडर घोटालों को समाप्त कर छोटे दुकानदारों, महिलाओं और बुनकरों को सीधे सरकार को सामान बेचने का खुला पारदर्शी मंच दिया।
गर्वेंट ई‑मार्केट प्लेस (GeM) भारत का राष्ट्रीय ऑनलाइन पोर्टल है जो सार्वजनिक खरीद के लिए बनाया गया है.
यह प्लेटफॉर्म आज 350 सेवाएं उपलब्ध कराता है. जहां कभी एक वर्ष में केवल 11,000 ऑर्डर आते थे, वो बढ़ कर 2025-26 में 4.3 लाख ऑर्डर हो चुके हैं.
इनमें से लगभग 4.1 लाख करोड़… pic.twitter.com/zneKfKUtPx
— SansadTV (@sansad_tv) August 10, 2026
सफर में तकनीक की रफ्तार: ‘फास्टैग’ से खत्म हुईं टोल की लंबी कतारें, बची ईंधन और समय की बर्बादी
पहले राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर के दौरान टोल नाकों पर वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लगती थीं, जिससे न केवल यात्रियों का कीमती समय बर्बाद होता था बल्कि करोड़ों लीटर ईंधन भी व्यर्थ जलता था। मोदी सरकार ने आरएफआईडी (RFID) तकनीक पर आधारित ‘फास्टैग’ व्यवस्था को पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू कर सफर का अंदाज बदल दिया। चंद सेकंड में डिजिटल भुगतान होने से टोल प्लाजा पर रुकावटें समाप्त हुईं और आम जनता के साथ-साथ माल ढुलाई में लगने वाले समय और पैसे की बड़ी बचत हुई। अब सरकार उपग्रह और जीपीएस आधारित आधुनिक टोलिंग की तैयारी कर रही है, जिससे बिना रुके गाड़ियां हाईवे पर फर्राटा भर सकेंगी।
भारत के राजमार्ग अब सिर्फ सड़कें ही नहीं, बल्कि बन चुके हैं स्मार्ट, डिजिटल और जीवंत!
⦁ 1.46 लाख किमी से ज्यादा लंबे राजमार्गों पर 98% फास्टैग की पहुंच के साथ अब यात्रा हुई सहज और आसान
⦁ राजमार्ग यात्रा ऐप रियल टाइम अलर्ट सुविधा और सहायता के साथ हर यात्रा का कर रहा… pic.twitter.com/RKvilID4MD— BJP (@BJP4India) November 11, 2025
ड्रोन से जमीनों की सटीक नपाई: ‘स्वामित्व योजना’ से मिला कानूनी प्रॉपर्टी कार्ड, थमे आपसी विवाद
गांवों में पीढ़ियों से बसे परिवारों के घरों और जमीनों के पास कोई आधिकारिक कानूनी दस्तावेज न होने के कारण ग्रामीण दशकों तक अदालती मुकदमों और झगड़ों में फंसे रहते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुरानी समस्या को सुलझाने के लिए अत्याधुनिक 3D ड्रोन तकनीक का सहारा लिया और ‘स्वामित्व योजना’ शुरू की। आकाश से उड़ते ड्रोन के जरिए गांव के हर घर और जमीन की इंच-इंच सटीक मैपिंग की गई और ग्रामीणों को डिजिटल ‘प्रॉपर्टी कार्ड’ सौंपे गए। इस कानूनी मान्यता से न केवल जमीनी विवाद हमेशा के लिए खत्म हुए, बल्कि गांव के लोग अपनी संपत्ति को बैंक में रखकर आसानी से कारोबार और खेती के लिए कर्ज लेने में सक्षम हुए।
स्वामित्व योजना के 6 वर्ष: गांवों के अधिकार और आत्मविश्वास की नई पहचान! 🏠✨
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi के नेतृत्व में स्वामित्व योजना गांवों में खुशहाली का नया सवेरा लेकर आई है।
ड्रोन तकनीक से सटीक मैपिंग और फिर हाथों में अपनी ज़मीन का ‘प्रॉपर्टी कार्ड’—यह सिर्फ कागज़… pic.twitter.com/wbmatW4War
— BJP (@BJP4India) April 24, 2026
अदालतों में डिजिटल क्रांति: ई-कोर्ट और ऑनलाइन पेशी से आम आदमी तक पहुंचा त्वरित न्याय
आम नागरिक के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाना हमेशा से समय और धन की भारी बर्बादी का कारण रहा था। मोदी सरकार ने न्याय व्यवस्था को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए ‘ई-कोर्ट्स मिशन’ को बड़े पैमाने पर लागू किया। देश की हजारों अदालतों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़कर लाखों मुकदमों की वर्चुअल सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई, जिससे गवाहों और वकीलों की पेशी सुगम हुई। मुकदमों की लाइव ट्रैकिंग के लिए डिजिटल पोर्टल बनाए गए और जेल से कैदियों की पेशी वीडियो लिंक से कराकर सुरक्षा व खर्च दोनों बचाए गए। अब कानूनी फैसलों को आम नागरिक की समझ में आने वाली स्थानीय भारतीय भाषाओं में बदलने के लिए आधुनिक एआई टूल्स का उपयोग शुरू किया गया है।
पिछले 12 वर्षों में न्याय की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए न्याय विभाग ने ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति की है। 718 करोड़ से अदालती अभिलेखों का डिजिटलीकरण और CIS 4.0 के माध्यम से सभी न्यायालयों का तकनीकी एकीकरण इस दिशा में बड़े मील के पत्थर हैं।
(1/2) pic.twitter.com/nxcAxLZl3E
— Ministry of Law and Justice (@MLJ_GoI) July 1, 2026
कागजी फाइलों से मिली आजादी: ‘डिजीलॉकर’ से मोबाइल में सुरक्षित हुए सारे सरकारी दस्तावेज
पहले सरकारी सेवाओं, नौकरियों या यात्रा के लिए मूल प्रमाण पत्रों की भारी फाइलें और अटेस्टेड फोटोकॉपी लेकर दर-दर भटकना आम नागरिक की मजबूरी थी। मोदी सरकार के ‘डिजीलॉकर’ ने देश के 25 करोड़ से अधिक नागरिकों के आधार, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, अंकपत्र और गाड़ी के कागजात को कानूनी रूप से डिजिटल पहचान दे दी। इस तकनीक ने न केवल कागजों की भारी बर्बादी और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाई, बल्कि आम आदमी को कभी भी और कहीं भी एक क्लिक पर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने की पूर्ण स्वतंत्रता दी।
924 करोड़ से अधिक दस्तावेज डिजिलॉकर में उपलब्ध
75 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत डिजिटल खाते (ABHA) खोले गए#BJP4IND #BJP4UP #सशक्त_यूपी_सशक्त_भारत pic.twitter.com/vCbXs75iM6
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) March 2, 2025
चोरी हुए मोबाइल पर लगाम: ‘संचार साथी’ से तुरंत ब्लॉक और ट्रैक हो रहे खोए हुए फोन
मोबाइल फोन गुम या चोरी होना किसी भी आम नागरिक के लिए भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ निजी डेटा और बैंक खातों पर बड़ा खतरा बन जाता था। दूरसंचार विभाग द्वारा शुरू किया गया ‘संचार साथी’ पोर्टल तकनीक का सीधा नागरिक-हितैषी उपयोग बनकर उभरा है। इसके जरिए देशभर में चोरी या खोए हुए लाखों स्मार्टफोन्स को घर बैठे तुरंत ब्लॉक किया जा रहा है और केंद्रीय डेटाबेस की मदद से पुलिस द्वारा उन्हें ट्रैक कर रिकॉर्ड संख्या में असली मालिकों तक वापस पहुंचाया जा रहा है। इसने फर्जी सिम कार्ड और साइबर ठगी के नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त किया है।
उपभोक्ता की सुरक्षा मोदी सरकार की प्राथमिकता है, और इसी सोच के साथ Sanchar Saathi का निर्माण किया गया है।
यह ऐसा ऐप है, जो हर नागरिक को अपने मोबाइल की सुरक्षा का नियंत्रण सीधे अपने हाथ में देता है। #DigitalIndia
पारदर्शिता और भरोसे का ही परिणाम है कि आज तक 1.5 करोड़ से ज्यादा… pic.twitter.com/sQYIVUuMW0
— BJP (@BJP4India) December 3, 2025
घर-घर स्मार्ट मीटर क्रांति: मोबाइल ऐप से बिजली पर नियंत्रण, गलत बिलिंग और अंधेरे का अंत
बिजली कंपनियों की पुरानी व्यवस्था में गलत मीटर रीडिंग, बिजली चोरी और भारी-भरकम बिलों से आम उपभोक्ता हमेशा परेशान रहता था। मोदी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘स्मार्ट प्रीपेड मीटर’ और आधुनिक ग्रिड तकनीक का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया। आज उपभोक्ता अपने मोबाइल ऐप के जरिए दैनिक बिजली खपत पर नजर रख पा रहे हैं और अपने बजट के अनुसार बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पारदर्शी प्रणाली से बिजली वितरण कंपनियों का घाटा कम हुआ है, बिजली चोरी रुकी है और देश के कोने-कोने तक चौबीसों घंटे बिना रुकावट सस्ती बिजली आपूर्ति संभव हुई है।
दिव्यांगजनों के लिए तकनीक का सहारा: मोबाइल ऐप और आधुनिक उपकरणों से मिला स्वाभिमान
प्रधानमंत्री मोदी ने तकनीक को केवल सक्षम वर्ग तक सीमित न रखकर समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग यानी दिव्यांगजनों की गरिमा का संबल बनाया। ‘सुगम्य भारत’ अभियान के तहत सार्वजनिक स्थानों की डिजिटल पहुंच सुनिश्चित की गई। दृष्टिबाधित नागरिकों को नोटों की पहचान में सहूलियत देने के लिए ‘मानी’ (MANI) ऐप शुरू किया गया। इसके साथ ही भारतीय सांकेतिक भाषा का विशाल डिजिटल शब्दकोश तैयार किया गया और आधुनिक एआई व सेंसर्स से लैस स्मार्ट व्हीलचेयर, हियरिंग एड और स्क्रीन रीडर उपकरण सुलभ कराकर दिव्यांग भाई-बहनों को शिक्षा और रोजगार में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया गया।
हवाई सफर में तकनीक की उड़ान: ‘डिजीयात्रा’ से चेहरा बना बोर्डिंग पास, खत्म हुईं लंबी कतारें
हवाई अड्डों पर पहचान पत्र और टिकट की बार-बार जांच के कारण लगने वाली थकाऊ लाइनों को मोदी सरकार ने फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक से खत्म कर दिया। ‘डिजीयात्रा’ प्रणाली के तहत यात्री का चेहरा ही उसका बोर्डिंग पास बन गया है। बिना किसी कागजी दस्तावेज या मोबाइल स्क्रीन को दिखाए यात्री केवल कैमरे के सामने देखकर सेकंडों में एंट्री और सुरक्षा जांच पार कर रहे हैं। इस पूरी तरह सुरक्षित और स्वदेशी डिजिटल व्यवस्था ने देश भर के हवाई अड्डों पर यात्रियों का समय बचाया है और भारतीय विमानन सेवा को विश्वस्तरीय आधुनिक गति प्रदान की है।
डिजिटल इंडिया के 10 साल — पल-पल डिजिटल
अब हवाई सफर में न टिकट की फाइल, न लंबी लाइन की परेशानी..! #DigiYatra से चेक-इन हुआ पेपरलेस और आसान। डिजीयात्रा ने बनाया यात्रा को सहज।#10YearsOfDigitalIndia #DigitalIndia #transformingindia@_DigitalIndia @MIB_India @PIBHindi @MIB_Hindi pic.twitter.com/1FecNRdXSJ
— आकाशवाणी समाचार (@AIRNewsHindi) July 1, 2025
गांव-गांव बिछा फाइबर का जाल: ‘भारतनेट’ से पंचायतों तक पहुंचा तेज इंटरनेट
डिजिटल क्रांति केवल बड़े महानगरों तक सीमित न रहे, इस संकल्प के साथ मोदी सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड परियोजना ‘भारतनेट’ को जमीन पर उतारा। देश भर की दो लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा गया। इस नेटवर्क के जरिए आज ग्रामीण सचिवालयों, प्राथमिक स्कूलों और जन सेवा केंद्रों (सीएससी) में शहरों जैसा हाई-स्पीड इंटरनेट चल रहा है। इसने गांव के युवाओं के लिए ऑनलाइन पढ़ाई, युवाओं के लिए दूरस्थ रोजगार और ग्रामीणों के लिए गांव में ही सभी डिजिटल सरकारी सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित कर दी है।
भारतनेट के तहत ग्राम पंचायतों को जोड़ने के साथ अब नेटवर्क को और मजबूत बनाया जा रहा है।
लाइन टोपोलॉजी से रिंग टोपोलॉजी में बदलाव कर कनेक्टिविटी को इस तरह सशक्त किया जा रहा है कि एक तरफ से बाधा आने पर भी सेवा जारी रहे।
भारतनेट योजना से गांव-गांव तक स्थिर और इंटरनेट पहुंचाने की दिशा… pic.twitter.com/tvdwWfc72y— DoT India (@DoT_India) February 12, 2026
सेंसर से नल तक शुद्ध पानी: स्मार्ट मॉनिटरिंग से गांव-गांव सुरक्षित हुई जलापूर्ति
‘जल जीवन मिशन’ के तहत हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति की नियमित निगरानी के लिए आधुनिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और सेंसर्स लगाए गए। पानी की टंकियों और पाइपलाइनों में लगे डिजिटल सेंसर्स के जरिए पानी के दबाव, मात्रा और शुद्धता का डेटा सीधे डिजिटल डैशबोर्ड पर पहुंचता है। किसी भी गांव में पानी की आपूर्ति बाधित होने या पानी में खराबी आने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है। इस आधुनिक तकनीक ने ग्रामीण भारत में स्वच्छ पेयजल की गारंटी देकर जलजनित बीमारियों से लाखों जिंदगियां बचाई हैं।
देश के 15.7 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में पहुंचा नल से जल!#6YearsOfJalJeevanMission pic.twitter.com/Tn86aMoKcc
— BJP (@BJP4India) August 14, 2025
3D प्रिंटिंग से निर्माण क्रांति: दिनों में बनकर तैयार हो रहे आधुनिक भवन और सैन्य चौकियां
पारंपरिक निर्माण कार्यों में लगने वाले महीनों के समय, भारी लागत और पर्यावरण को होने वाले नुकसान का सटीक समाधान भारत ने स्वदेशी 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक से खोजा। इस अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक के जरिए बेंगलुरु में देश का पहला 3D-प्रिंटेड डाकघर रिकॉर्ड 43 दिनों में तैयार हुआ। इतना ही नहीं, लद्दाख और दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में माइनस तापमान और विषम परिस्थितियों के बीच देश के जवानों के लिए आधुनिक 3D-प्रिंटेड बंकर, शेल्टर और सैन्य चौकियां तेजी से खड़ी की जा रही हैं। यह तकनीक भविष्य के बुनियादी ढांचे को तेज, मजबूत और पर्यावरण-अनुकूल बनाने का नया आधार बन चुकी है।
फाइलों की लेटलतीफी का अंत: ‘प्रगति’ और डिजिटल समीक्षा से रुके प्रोजेक्ट्स को मिली रफ्तार
सरकारी योजनाओं में दशकों की देरी और विभागों के बीच आपसी खींचतान को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में ‘प्रगति’ (PRAGATI) डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। हर महीने प्रधानमंत्री स्वयं तीनों स्तरों- केंद्र सरकार के सचिवों, मुख्य सचिवों और ग्राउंड टीम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सैटेलाइट डेटा के जरिए समीक्षा करते हैं। ड्रोन फुटेज और जीआईएस मैपिंग के जरिए अटकी पड़ी परियोजनाओं की बाधाओं को सीधे स्क्रीन पर देखकर एक झटके में सुलझाया जाता है। इस आधुनिक निगरानी व्यवस्था से अब तक लाखों करोड़ रुपये के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय से पूरा कर देश के धन और समय की ऐतिहासिक बचत की गई है।
OXFORD का सर्वे।
भारत में बड़ी संख्या में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स इतनी तेजी से पूरे होने का मुख्य कारण है ‘प्रगति’ (PRAGATI – Pro-Active Governance and Timely Implementation) प्लेटफॉर्म, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में लॉन्च किया गया एक डिजिटल गवर्नेंस टूल है।… pic.twitter.com/irviKcXqlL
— P.N.Rai (@PNRai1) January 18, 2026
इंस्पेक्टर राज का खात्मा: ‘फेसलेस टैक्स’ व्यवस्था से आम व्यापारी को मिला सम्मान और पारदर्शिता
दशकों से देश का मध्यम वर्ग और ईमानदार व्यापारी टैक्स विभाग के चक्करों और इंस्पेक्टर राज के भय से जूझता था। मोदी सरकार ने इस उत्पीड़न को खत्म करने के लिए कर प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और ‘फेसलेस’ बना दिया। फेसलेस असेसमेंट और फेसलेस अपील व्यवस्था में जांच करने वाले अधिकारी को यह नहीं पता होता कि फाइल किसकी है और करदाता को नहीं पता होता कि उसका केस किस शहर का अफसर देख रहा है। पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर एल्गोरिदम और ऑनलाइन दस्तावेजों से चलती है। इसके साथ ही जीएसटी के आधुनिक आईटी नेटवर्क ने टैक्स प्रणाली को सरल बनाकर करोड़ों व्यापारियों को राहत और व्यापार सुगमता प्रदान की है।
जनता की सीधी सुनवाई: ‘स्वागत’ से ‘माईगॉव’ तक, एक क्लिक पर सरकार तक पहुंची आम नागरिक की आवाज
नागरिकों की शिकायतों को दूर करने में तकनीक का उपयोग नरेंद्र मोदी ने 2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में ‘स्वागत’ (SWAGAT) कार्यक्रम से शुरू किया था, जिसे वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा सराहा गया। 2014 के बाद इसी सोच को राष्ट्रीय स्तर पर ‘माईगॉव’ (MyGov) और डिजिटल सीपीग्राम्स (CPGRAMS) के रूप में लागू किया गया। आज देश का कोई भी सामान्य नागरिक घर बैठे अपने मोबाइल से सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्रीय मंत्रालयों को अपनी समस्या भेज सकता है। तय समय सीमा में शिकायतों के डिजिटल निपटारे और नागरिक सुझावों को सरकारी नीतियों में शामिल करने की इस व्यवस्था ने जनता और सरकार के बीच की दूरी हमेशा के लिए समाप्त कर दी है।
स्वदेशी जीपीएस ‘नाविक’: विदेशी सैटेलाइट पर निर्भरता खत्म, भारत की अपनी नेविगेशन तकनीक
कारगिल युद्ध के समय जब भारत को सामरिक जरूरतों के लिए विदेशी जीपीएस डेटा देने से इनकार कर दिया गया था, तब से देश को अपनी नेविगेशन प्रणाली की दरकार थी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इसरो ने स्वदेशी उपग्रह समूह आधारित नेविगेशन प्रणाली ‘नाविक’ (NavIC) को पूरी तरह स्थापित और सक्रिय किया। आज भारत की मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और सैन्य अभियानों के साथ-साथ नए 5G स्मार्टफोन्स और कमर्शियल गाड़ियों में नाविक चिपसेट लगाए जा रहे हैं। इससे भारत की भौगोलिक स्थिति, मैपिंग और संवेदनशील सुरक्षा डेटा विदेशी कंपनियों के नियंत्रण से मुक्त होकर पूरी तरह संप्रभु बन चुका है।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में.. केवल USA, चीन और पाकिस्तान के हथियारों की नहीं.. बल्कि अमेरिका के नेविगेशन सिस्टम GPS का भी बैंड बजा दिया था.
क्या आप लोगों को यह पता है, कि भारत का अपना NAVIC भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम जो IRNSS का एक हिस्सा है. जिसे भारतीय सेना ने… pic.twitter.com/neZPj2t6sn
— Oc updates (@ocjain4) May 30, 2025
डिजिटल बस्ते से मुफ्त पढ़ाई: ‘दीक्षा’ और ‘स्वयं’ से गांव-गांव पहुंची आईआईटी जैसी उच्च शिक्षा
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बड़े शहरों की महंगी कोचिंग से निकालकर देश के अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने डिजिटल एजुकेशन का मजबूत ढांचा खड़ा किया। ‘दीक्षा’ (DIKSHA) पोर्टल के जरिए करोड़ों स्कूली बच्चों को क्यूआर-कोड वाली किताबों से डिजिटल लर्निंग सामग्री उपलब्ध कराई गई। वहीं, ‘स्वयं’ (SWAYAM) प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के सुदूर गांवों में बैठे छात्र आईआईटी, आईआईएम और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के शीर्ष प्रोफेसरों के लेक्चर्स मुफ्त में ऑनलाइन देख रहे हैं। इस डिजिटल क्रांति ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए ज्ञान के दरवाजे खोलकर शिक्षा के क्षेत्र में अमीरी-गरीबी की खाई को पाट दिया है।
दीक्षा (DIKSHA) पोर्टल / ऐप
दीक्षा (DIKSHA) (Digital Infrastructure for Knowledge Sharing) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे स्कूली शिक्षा के लिए बनाया गया है।
यह पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ 30 से अधिक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे… pic.twitter.com/ViSCCmJowS— Akashvani आकाशवाणी (@AkashvaniAIR) January 29, 2026
छोटे दुकानदारों की बड़ी डिजिटल उड़ान: ‘ओएनडीसी’ से खत्म हुई बड़ी ऑनलाइन कंपनियों की मनमानी
विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के भारी कमीशन और एकाधिकार से छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों को बचाने के लिए भारत सरकार ने ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स’ (ONDC) की शुरुआत की। जिस तरह यूपीआई ने बैंकों के एकाधिकार को खत्म कर डिजिटल भुगतान को आसान बनाया, उसी तरह ओएनडीसी छोटे किराना व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और कारीगरों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे ग्राहकों से जोड़ रहा है। इससे आम ग्राहक को कम दामों में सामान मिल रहा है और छोटे भारतीय कारोबारियों को ऑनलाइन बाजार में बराबरी का अवसर मिला है।
https://x.com/ONDC_Official
असंगठित मजदूरों की डिजिटल पहचान: ‘ई-श्रम’ से 30 करोड़ कामगारों को मिला सामाजिक सुरक्षा का अधिकार
दशकों तक देश के निर्माण में पसीना बहाने वाले करोड़ों दिहाड़ी मजदूर, घरेलू कामगार, प्रवासी श्रमिक और गिग वर्कर्स किसी भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। मोदी सरकार ने आधुनिक डेटा तकनीक का उपयोग करते हुए ‘ई-श्रम’ (e-Shram) पोर्टल शुरू किया। आज 30 करोड़ से अधिक असंगठित कामगारों को डिजिटल पहचान पत्र और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर दिया जा चुका है। इस पारदर्शी डेटाबेस की मदद से किसी भी संकट के समय आपदा राहत, दुर्घटना बीमा और सामाजिक सुरक्षा का पैसा सीधे इन मेहनतकश गरीबों के बैंक खातों में बिना किसी रुकावट के पहुंच रहा है।
हथियारों के आयात से निर्यात तक: स्वदेशी तकनीक से अभेद्य बनी भारत की सुरक्षा
दशकों तक दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक देशों में गिने जाने वाले भारत को मोदी सरकार ने रक्षा विनिर्माण का केंद्र बना दिया है। समुद्र में देश की ताकत बढ़ाने वाला पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘आईएनएस विक्रांत’, आसमान में गरजता ‘तेजस’ लड़ाकू विमान और दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ भारत की वैज्ञानिक क्षमता के प्रमाण हैं। सेना की जरूरतों के लिए ड्रोन और आधुनिक तकनीक बनाने का काम भारतीय स्टार्टअप्स को सौंपा गया। इसका नतीजा है कि जो भारत कभी छोटे हथियारों के लिए बाहर देखता था, उसका रक्षा निर्यात आज रिकॉर्ड 21 हजार करोड़ रुपये को पार कर चुका है और भारतीय हथियार दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में जा रहे हैं।
दवा और टीके का वैश्विक केंद्र: स्वदेशी वैक्सीन से लेकर बायो-ई3 की नई नीति
कोरोना संकट के समय जब पूरी दुनिया टीकों के लिए त्राहि-त्राहि कर रही थी, तब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड समय में स्वदेशी ‘कोवैक्सीन’ तैयार की। डिजिटल ‘कोविन’ प्लेटफॉर्म के जरिए 220 करोड़ से अधिक टीकों की पारदर्शी डिलीवरी की गई और ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत दुनिया के 100 से ज्यादा देशों को जीवनरक्षक टीके भेजे गए। इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने ‘बायो-ई3’ (Bio-E3) नीति लागू की है। इससे पर्यावरण के अनुकूल बायो-प्लास्टिक, उन्नत दवाएं और कृषि उत्पाद बनाने वाली आधुनिक प्रयोगशालाएं देश में स्थापित हो रही हैं, जिससे भारत दुनिया की बड़ी बायो-इकोनॉमी बनकर उभर रहा है।
आज भारत तेजी से एक ग्लोबल बायोटेक पावर के रूप में उभर रहा है। भारत में बायो फार्मा रिसर्च प्रोमोट करने के लिए एक Fertile इकोसिस्टम है। हमने Bio E3 पॉलिसी भी बनाई है: पीएम @narendramodi #PMModiUSVisit #PMModiUSAVisit pic.twitter.com/gcFpqdIkXf
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) September 23, 2024
अनुसंधान और नए पेटेंट: स्कूल की लैब से लेकर राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन तक
देश में नवाचार (इनोवेशन) की संस्कृति को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए स्कूलों में 10 हजार से अधिक ‘अटल टिंकरिंग लैब्स’ खोली गईं, जहां ग्रामीण और छोटे शहरों के बच्चे रोबोटिक्स, कोडिंग और 3D प्रिंटिंग सीख रहे हैं। उच्च स्तर पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ (ANRF) बनाया गया। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि भारत में पेटेंट दर्ज कराने की गति में ऐतिहासिक उछाल आया है और देश ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में लगातार लंबी छलांग लगाते हुए शीर्ष पायदानों की ओर बढ़ रहा है।
क्वांटम मिशन और भविष्य की तकनीक: दुनिया के चुनिंदा देशों के क्लब में भारत
कंप्यूटिंग और संचार की दुनिया में आने वाली अगली बड़ी क्रांति क्वांटम तकनीक की है। मोदी सरकार ने समय रहते 6 हजार करोड़ रुपये का ‘राष्ट्रीय क्वांटम मिशन’ शुरू किया। इसके जरिए भारत सुपर-फास्ट क्वांटम कंप्यूटर, सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन और अत्याधुनिक सेंसर्स बनाने वाले दुनिया के गिने-चुने 6-7 शीर्ष देशों के क्लब में शामिल हो गया है। यह मिशन भविष्य में बैंकिंग, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैज्ञानिक डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखने का अचूक आधार बनेगा।
Future India is loading… 🚀#MyGovTechTalk के पहले एपिसोड में जानिए – भारत कैसे बन रहा है इनोवेशन का नया पावरहाउस!
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से लेकर cutting-edge tech तक – Gen Z, यही है आपका future playground! #DigitalIndia #ViksitBharat @_DigitalIndia @GoI_MeitY pic.twitter.com/waJtXnTBLc
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) April 17, 2026
साइबर सुरक्षा और डेटा रक्षा: नागरिकों के निजी डेटा पर सख्त कानून का पहरा
डिजिटल होती दुनिया में देश की सीमाओं के साथ-साथ नागरिकों के डेटा और साइबर स्पेस की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी। सरकार ने ऐतिहासिक ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून’ (DPDP Act) लागू किया, जिसने नागरिकों के निजी डेटा के दुरुपयोग पर कड़ा अंकुश लगाया। देश के अहम बुनियादी ढांचे, पावर ग्रिड और बैंकिंग नेटवर्क को साइबर हमलों से बचाने के लिए स्वदेशी फायरवॉल और सुरक्षा तंत्र तैयार किए गए। इससे विदेशी ऐप्स और कंपनियों की मनमानी पर रोक लगी और भारत की डिजिटल संप्रभुता अभेद्य बनी।
स्वदेशी रेल तकनीक से रफ्तार की नई क्रांति: वंदे भारत से लेकर कवच और बुलेट ट्रेन तक
दशकों तक पुरानी और धीमी ट्रेनों के जाल में उलझे भारतीय रेल तंत्र को मोदी सरकार ने अत्याधुनिक स्वदेशी इंजीनियरिंग से बदलकर रख दिया। पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित ‘वंदे भारत’ और ‘नमो भारत’ ट्रेनों ने यात्रियों को विश्वस्तरीय गति, सुरक्षा और आराम का अनुभव कराया। ट्रेनों को हादसों से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने पूरी तरह स्वदेशी स्वचालित सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ विकसित की, जो एक ही पटरी पर आमने-सामने आ रही ट्रेनों को अपने आप रोक देती है। इसके साथ ही गुजरात और महाराष्ट्र के बीच अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना ने भारतीय रेल को दुनिया की सबसे आधुनिक परिवहन प्रणालियों के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया है।
फर्क साफ है… तस्वीर खुद बोल रही है! 🚆
2014 का रेलवे और 2026 का भारत — बदलाव साफ दिखता है:
🔹 20% → 99.6% विद्युतीकरण
🔹 0 → 162 वंदे भारत सेवाएं
🔹 31,445 → 85,000+ KM हाई-स्पीड ट्रैक
🔹 ₹32,000 Cr → ₹2.78 लाख Cr आवंटन
🔹 पारंपरिक कोच → 42,677 LHB कोचस्पीड भी बढ़ी,… pic.twitter.com/s0l7sbMu7X
— BJP (@BJP4India) August 26, 2026
खेत-खलिहान में आधुनिक तकनीक: नैनो यूरिया और किसान ड्रोन से खेती में बड़ा बदलाव
पारंपरिक खेती को विज्ञान और डेटा से जोड़कर नरेंद्र मोदी सरकार ने अन्नदाता को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया। मिट्टी की सही सेहत जानने के लिए करोड़ों किसानों को ‘सॉयल हेल्थ कार्ड’ दिए गए, जिससे रसायनों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगी। भारतीय वैज्ञानिकों ने दुनिया में पहली बार तरल ‘नैनो यूरिया’ और ‘नैनो डीएपी’ का सफल आविष्कार किया, जिससे बोरी भर खाद की जगह आधी लीटर की बोतल ने ले ली। फसलों की निगरानी, कीटनाशकों के सुरक्षित छिड़काव और सटीक खेती के लिए ‘किसान ड्रोन’ को बढ़ावा दिया गया, जिससे किसानों की लागत घटी, पैदावार बढ़ी और भारतीय कृषि आधुनिक युग में प्रवेश कर गई।
इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी क्रांति: प्रदूषण मुक्त यात्रा और देश में आधुनिक तकनीक का विस्तार
पेट्रोलियम उत्पादों के भारी आयात बिल और शहरों के प्रदूषण को कम करने के लिए मोदी सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (ईवी) को बड़े जन-आंदोलन का रूप दिया। ‘फेम’ (FAME) योजना और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) के जरिए देश के भीतर दोपहिया, तिपहिया और इलेक्ट्रिक बसों के निर्माण में जबर्दस्त तेजी आई। विदेशी बैटरियों पर निर्भरता खत्म करने के लिए देश में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी गीगा-फैक्ट्रियां लगाई जा रही हैं। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशनों का विशाल नेटवर्क तैयार होने से आज भारत पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों का बड़ा बाजार और भविष्य का विनिर्माण केंद्र बन चुका है।
समुद्र की गहराइयों में स्वदेशी खोज: ‘समुद्रयान’ और डीप ओशन मिशन का नया अभियान
जिस तरह आसमान और अंतरिक्ष की ऊंचाइयों में भारत ने अपनी वैज्ञानिक धाक जमाई, उसी तरह अथाह समुद्र के भीतर छिपे रहस्यों और संसाधनों की खोज के लिए मोदी सरकार ने ‘डीप ओशन मिशन’ की शुरुआत की। इसके तहत भारत ने अपना पहला मानवयुक्त वैज्ञानिक पनडुब्बी वाहन ‘मत्स्य 6000’ तैयार किया है। यह स्वदेशी पनडुब्बी तीन भारतीय वैज्ञानिकों को समुद्र के छह हजार मीटर (6 किलोमीटर) नीचे गहरे तल में ले जाने में सक्षम है। गहरे समुद्र में दुर्लभ धातुओं, ऊर्जा स्रोतों और समुद्री जैव-विविधता पर होने वाला यह शोध भारत को समुद्री विज्ञान और ‘ब्लू इकोनॉमी’ की वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
डीप ओशन मिशन
महासागर के तल तक पहुंचने के लिए भारत का प्रवेश द्वार🔹2021 में शुरू किया गया डीप ओशन मिशन, समुद्री संपदा के सतत दोहन और ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने पर केंद्रित है
🔹डीप ओशन मिशन के तहत समुद्रयान परियोजना के हिस्से के रूप में भारत का पहला मानवयुक्त पनडुब्बी वाहन… pic.twitter.com/h4RAxmJDd9
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) August 18, 2025
परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता: स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर से सुरक्षित और असीमित बिजली
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मोदी सरकार ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है। कलपक्कम में 500 मेगावाट क्षमता के स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) की शुरुआत से भारत अपने विशाल थोरियम भंडारों का उपयोग कर असीमित और स्वच्छ बिजली बनाने के करीब पहुंच गया। इसके साथ ही सरकार ने एक साथ 10 नए स्वदेशी भारी जल परमाणु रिएक्टरों (PHWR) के निर्माण को मंजूरी दी और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) में निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खोला। इस वैज्ञानिक उपलब्धि ने भारत को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर और सुरक्षित बना दिया है।
अंतरिक्ष से विकास पर नजर: सैटेलाइट मैपिंग और ‘गतिशक्ति’ से बदला बुनियादी ढांचा
गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग संस्थान (BISAG) के जरिए सैटेलाइट मैपिंग को शासन और विकास योजनाओं से जोड़ने की जो शुरुआत की थी, आज वह ‘पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान’ के रूप में देश का सबसे बड़ा डिजिटल ढांचा बन चुका है। इसमें 1400 से अधिक डेटा लेयर्स के जरिए सड़क, रेल, गैस पाइपलाइन, बिजली और पानी की परियोजनाओं की थ्री-डी सैटेलाइट मैपिंग की जा रही है। इससे परियोजनाओं की योजना बनाने में लगने वाला समय महीनों से घटकर कुछ दिनों का रह गया और विभागों के बीच आपसी तालमेल से सरकारी धन व समय की भारी बचत सुनिश्चित हुई है।
भविष्य की तकनीक का कच्चा माल: लिथियम और दुर्लभ धातुओं की खोज में आत्मनिर्भर भारत
इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, सौर पैनल, मोबाइल चिप्स और अत्याधुनिक मिसाइलों के निर्माण में लिथियम, कोबाल्ट और टाइटेनियम जैसी दुर्लभ धातुएं (क्रिटिकल मिनरल्स) सबसे अहम मानी जाती हैं। मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में विदेशी एकाधिकार को तोड़ने के लिए ‘राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन’ शुरू किया। जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मिले विशाल लिथियम भंडारों की पारदर्शी नीलामी की व्यवस्था की गई और विदेशों में खदानों की साझेदारी के लिए ‘काबिल’ (KABIL) कंपनी बनाई गई। इस कदम ने भारत को भविष्य की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी कच्चे माल के मामले में पूरी तरह सुरक्षित कर दिया है।
दुनियाभर में क्रिटिकल मिनरल्स की चर्चा हो रही है। पूरी टेक्नोलॉजी क्रिटिकल मिनरल्स पर निर्भर है। भारत इसमें भी अपने आप को सुरक्षित करने में जुटा हुआ है… हमने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन लॉन्च किया, बजट में क्रिटिकल मिनरल्स कॉरीडोर की घोषणा की गई, कई देशों के साथ समझौते हो रहे… pic.twitter.com/03IL7VDRQX
— Akashvani आकाशवाणी (@AkashvaniAIR) August 15, 2026
सुपरकंप्यूटर का स्वदेशी दम: ‘परम’ श्रृंखला से मौसम से लेकर दवा खोज तक तेज अनुसंधान
एक समय विदेशी ताकतों द्वारा भारत को सुपरकंप्यूटर देने पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन मोदी सरकार ने ‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ (NSM) के जरिए इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों जैसे आईआईटी, आईआईएससी और सी-डैक में ‘परम शिवाय’, ‘परम शक्ति’ और ‘परम सिद्धि-एआई’ जैसे दर्जनों स्वदेशी सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं। इस विशाल कंप्यूटिंग शक्ति की बदौलत आज सटीक मौसम पूर्वानुमान, चक्रवातों की समय पूर्व चेतावनी, नई जीवनरक्षक दवाओं की खोज और जटिल वैज्ञानिक सिमुलेशन भारत की अपनी मशीनों पर रिकॉर्ड गति से हो रहे हैं।
आपदा से सुरक्षा की अचूक तकनीक: उपग्रहों की नजर और समय रहते अलर्ट से बचीं लाखों जिंदगियां
गुजरात में 2001 के विनाशकारी भूकंप के बाद नरेंद्र मोदी ने संस्थागत आपदा प्रबंधन की जो मजबूत नींव रखी थी, आज वह तकनीक के दम पर वैश्विक मॉडल बन चुकी है। मौसम उपग्रहों, आधुनिक रडार नेटवर्क और ‘नाविक’ प्रणाली के जरिए चक्रवातों और समुद्री तूफानों की सटीक जानकारी कई दिन पहले मिल जाती है। ‘सचेत’ जैसे मोबाइल इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम से आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाई जाती है। इसी उन्नत वैज्ञानिक निगरानी का नतीजा है कि भयानक समुद्री चक्रवातों के दौरान भी लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर जान-माल का नुकसान शून्य के स्तर पर सीमित कर दिया गया है।
गांव की चौपाल पर ड्रोन क्रांति: ‘नमो ड्रोन दीदी’ से महिलाओं के हाथ में आधुनिक तकनीक की कमान
आधुनिक तकनीक अब केवल महानगरों के कॉरपोरेट दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन से इसने गांव की चौपाल तक पहुंचकर महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी है। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) की हजारों बहनों को ड्रोन उड़ाने, उनकी मरम्मत करने और फसलों पर नैनो उर्वरकों के सटीक छिड़काव का पेशेवर प्रशिक्षण दिया गया। हाथ में ड्रोन का रिमोट थामकर ग्रामीण महिलाएं न केवल आधुनिक कृषि की अगुवा बन रही हैं, बल्कि सालाना लाखों रुपये कमाकर आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हो रही हैं।
नए भारत की नमो ड्रोन दीदियों पर हर देशवासी को गर्व है!
आज पूरा देश हमारी ड्रोन दीदियों के कौशल का साक्षी बना। जिन्हें हमारी बहन-बेटियों के कौशल पर भरोसा नहीं था, उन्हें देश की सशक्त होती नारीशक्ति की इन तस्वीरों को जरूर देखना चाहिए। pic.twitter.com/BsUjM361SD
— Narendra Modi (@narendramodi) March 11, 2024
डिजिटल डॉक्टर और टेली-मेडिसिन: ‘ई-संजीवनी’ से गांव-गांव पहुंचा बड़े अस्पतालों का इलाज
दूर-दराज के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले गरीबों के लिए बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से इलाज कराना हमेशा से एक महंगा और कठिन सपना रहा था। मोदी सरकार के राष्ट्रीय टेली-मेडिसिन प्लेटफॉर्म ‘ई-संजीवनी’ ने इस फासले को तकनीक की मदद से पूरी तरह मिटा दिया है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर बैठा मरीज सीधे एम्स और बड़े मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों से वीडियो कॉलिंग के जरिए विशेषज्ञ परामर्श ले रहा है। अब तक 25 करोड़ से अधिक मरीज घर बैठे या अपने नजदीकी केंद्र से डिजिटल पर्चे और मुफ्त परामर्श का लाभ उठा चुके हैं, जिसने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में ऐतिहासिक क्रांति ला दी है।
जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट: भारतीय डीएनए की मैपिंग से गंभीर बीमारियों के सटीक इलाज की राह
चिकित्सा विज्ञान में पश्चिमी देशों के डेटा पर निर्भरता खत्म करने के लिए भारत ने अपना खुद का ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके तहत देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और समुदायों के 10,000 नागरिकों के संपूर्ण डीएनए (जीनोम) की अनुक्रमणिका तैयार की गई। इस स्वदेशी जेनेटिक डेटाबेस की मदद से अब कैंसर, डायबिटीज, दिल की बीमारियों और दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के लिए ऐसी सटीक दवाएं और टीके विकसित किए जा रहे हैं जो विशेष रूप से भारतीय शरीर और आनुवंशिकी के अनुकूल हों। इस वैज्ञानिक कदम ने देश को भविष्य की सटीक चिकित्सा (प्रिसिजन मेडिसिन) का वैश्विक केंद्र बना दिया है।
जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट देश के जैव प्रौद्योगिकी परिदृश्य में एक निर्णायक क्षण है!@DrJitendraSingh @rajesh_gokhale @THSTIFaridabad @DBT_CDFD @NIPGRsocial @NABI_India @HydNiab @unescorcb @ICGEBNewDelhi pic.twitter.com/ygGye8fJP1
— Department of Biotechnology (@DBTIndia) January 13, 2025
विकसित भारत 2047 की अचूक तकनीकी ढाल
नरेंद्र मोदी के संवैधानिक दायित्व के 25 वर्ष इस बात का ऐतिहासिक प्रमाण हैं कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कोई भी देश औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर तकनीकी महाशक्ति बन सकता है। गुजरात के डिजिटल मॉडल और भूकंप बाद के तकनीकी पुनर्निर्माण से प्रारंभ हुआ यह विजन आज भारत को सेमीकंडक्टर, सुपरकंप्यूटिंग, अंतरिक्ष और स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक हब बना चुका है। भाजपा सरकार ने तकनीक को केवल विकास का जरिया नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के स्वाभिमान और राष्ट्रीय सुरक्षा की अभेद्य ढाल बना दिया है। सेवा, समर्पण और वैज्ञानिक दूरदर्शिता का यह ढाई दशक का मजबूत आधार वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को सिद्ध करने का सबसे बड़ा संबल बनकर उभरा है।










