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अपनों के ‘चक्रव्यूह’ में फंसे राहुल गांधी, कांग्रेस में बगावत, UPI मुद्दे पर 5 कांग्रेसी सांसदों ने करा दी फजीहत

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कांग्रेस पार्टी के भीतर राहुल गांधी की भूमिका और उनके नेतृत्व को लेकर समय-समय पर वैचारिक और रणनीतिक विरोधाभास देखने को मिलते हैं। जहां एक ओर राहुल गांधी अक्सर मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हैं, वहीं उनकी पार्टी के भीतर कई नेता और सांसद व्यावहारिक तौर पर उनसे अलग राय रखते हैं। इससे कांग्रेस के अंदर पुरानी पीढ़ी और नेतृत्व के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिलता है। यह टकराव यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर (Merchant Discount Rate) शुल्क लगाने के मुद्दे पर एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की सिफारिशों और कांग्रेस के पांच सांसदों ने राहुल गांधी के प्रोपेगेंडा,पाखंड और दोहरे मापदंड की पोल खोल दी है।

यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट का ऐलान
दरअसल, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI ट्रांजैक्‍शन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का ऐलान किया है। इसमें कहा गया है कि 2,000 रुपये से ज्‍यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% का चार्ज लगेगा। इसका मतलब है कि आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, 2,000 रुपये से अधिक के ऑनलाइन पेमेंट पर दुकानदार या व्यापारी से 0.4% चार्ज (MDR) लिया जाएगा, जबकि आम लोगों के बीच होने वाले (P2P) लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

15 अक्टूबर से लागू होगा मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) 15 अक्टूबर से लागू होगा। NPCI ने कहा, ‘75,000 रुपये और उससे ज्‍यादा के ट्रांजैक्‍शन के लिए MDR की सीमा प्रति ट्रांजैक्‍शन 300 रुपये तय की जाएगी।’ NPCI ने बताया कि रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी खास मर्चेंट कैटेगरी के लिए 2,000 रुपये से ज्‍यादा के ट्रांजैक्‍शन पर प्रति ट्रांजैक्‍शन 5 रुपये का फिक्स्ड MDR लागू होगा।

राहुल गांधी ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर उठाया सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर (Merchant Discount Rate) शुल्क का विरोध किया है। उनका तर्क है कि यदि दुकानदारों पर फीस लगेगी, तो वे अपना खर्च बढ़ाने के लिए आखिर कीमतें बढ़ाकर आम जनता पर ही बोझ डालेंगे। इसे “मोदी टैक्स” करार देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह हर आम नागरिक और छोटे कारोबारियों को प्रभावित करेगा। राहुल गांधी का यह भी दावा है कि यह अमेरिकी भुगतान कंपनियों और व्यापारिक दबाव के आगे झुकने का परिणाम है।

राहुल गांधी ने की फैसला वापस लेने की मांग
राहुल गांधी ने 16 सितंबर को 39 सेकेंड का वीडियो जारी कर नए UPI सिस्टम की आलोचना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए इसे UPI पर टैक्स बताया और फैसला वापस लेने की मांग की। उनका आरोप था कि सरकार के इस फैसले से अमेरिका को फायदा होगा। हालांकि वित्त मंत्रालय ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि UPI से जुड़े फैसले किसी विदेशी दबाव में नहीं लिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह फैसला देश की घरेलू जरूरतों के आधार पर लिया गया है।

कांग्रेस के पांच सांसदों ने किया था MDR का समर्थन 
इसी बीच भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की एक सिफारिश चर्चा में आ गई है। समिति ने यूपीआई के लिए चरणबद्ध एमडीआर या राजस्व व्यवस्था बनाने की सिफारिश की थी। 12 अगस्त को जब इस रिपोर्ट को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, तब समिति में कांग्रेस के 5 प्रमुख सांसद उपस्थित थे, जिनमें पी. चिदंबरम (पूर्व वित्त मंत्री), मनीष तिवारी, गौरव गोगोई (लोकसभा में उपनेता), के. एल. शर्मा (किशोरी लाल), के. गोपीनाथ शामिल थे। संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, रिपोर्ट अपनाए जाने के दौरान इन नेताओं की ओर से कोई औपचारिक असहमति (Dissent Note) दर्ज नहीं कराई गई थी।

संसदीय समिति की सिफारिश के अहम बिंदु

  • यूपीआई के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था जरूरी है, ताकि पूरे डिजिटल भुगतान तंत्र को लगातार सरकारी मदद पर निर्भर न रहना पड़े।
  • समिति ने चरणबद्ध राजस्व मॉडल तलाशने की बात कही, जबकि छोटे शहरों में डिजिटल भुगतान बढ़ाने के लिए तीन साल की योजना और कैशबैक को भी जरूरी माना।
  • समिति के मुताबिक, पहले की सिफारिशों के तहत चरणबद्ध एमडीआर व्यवस्था के लिए कानूनी प्रावधान आगे बढ़ाए गए हैं।
  • समिति ने कहा कि 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर तय दर से एमडीआर लगाने की व्यवस्था की जा सकती है।
  • समिति के अनुसार, इस ढांचे को लागू करने में देरी से भुगतान सेवा प्रदाताओं की सब्सिडी पर निर्भरता बनी रहेगी और साइबर सुरक्षा तथा धोखाधड़ी रोकने के निवेश पर असर पड़ सकता है।
  • समिति ने टियर-3 से टियर-6 शहरों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित तीन साल की बहुवर्षीय योजना और कैशबैक व्यवस्था को भी जरूरी बताया।

बजट आवंटन और लागत के बीच ज्यादा अंतर पर चिंता 
बीजेपी के भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने बजट आवंटन और लागत के बीच के अंतर पर चिंता जताई थी। समिति के अनुसार, डिजिटल भुगतान उद्योग की अनुमानित परिचालन लागत लगभग 20,700 करोड़ रुपये है, जबकि सरकार द्वारा इसके लिए आवंटित बजट केवल 2,000 करोड़ रुपये था, जो कुल लागत का मात्र 11% ही कवर करता है। इस वित्तीय अंतर को पाटने के लिए समिति ने चरणबद्ध या स्तरीय मर्चेंट डिस्काउंट रेट मॉडल लागू करने की सिफारिश की। समिति ने कहा कि ज्यादा वैल्यू वाले ट्रांजैक्शन पर कैलिब्रेटेड MDR फ्रेमवर्क को नोटिफाई करने और लागू करने में किसी भी तरह की देरी से पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर अपर्याप्त सब्सिडी पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप साइबर सुरक्षा, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रॉड रोकने के लिए किए जाने वाले जरूरी निवेश में कमी आ सकती है।

कांग्रेस सांसदों का समर्थन, तो राहुल गांधी का विरोध क्यों ?
एक तरफ राहुल गांधी हैं, जो नए चार्ज सिस्टम का विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ संसदीय समिति की वह रिपोर्ट है, जिसमें UPI के लिए टिकाऊ इनकम सिस्टम की जरूरत बताई गई थी। और इसी समिति में कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे। राहुल गांधी के विरोध के बाद बीजेपी ने इन सांसदों का हवाला देकर कांग्रेस पर विरोधाभास का आरोप लगाया है और पूछा है कि जब सांसदों ने समर्थन किया था, तो राहुल गांधी इसका विरोध क्यों कर रहे हैं। समिति ने UPI के लिए एक स्तरीय MDR/रेवेन्यू फ्रेमवर्क की मांग की थी और कहा था कि इसे बिना किसी देरी के नोटिफाई और लागू किया जाना चाहिए।

कांग्रेस है या देशविरोधी दलाल है- CPI(M) पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह
संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट और UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने के विवाद के बीच, विपक्षी दलों के रुख को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। माकपा (CPI-M) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने इस मामले में कांग्रेस के दोहरे रुख की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “क्या आपको पता नहीं कांग्रेस के लोग कैसे हैं… आज गरीब का बुरा हाल है। एक पैसा बढ़ाना भी उस पर बोझा है। उसकी इनकम सीमित है। चीज़ों की कीमतें आसमान छू रही हैं। कांग्रेस के लोगों ने किस बेवकूफी से प्रतिनिधित्व किया था। कांग्रेस है या देशविरोधी दलाल की दलाल है।”

आइए देखते हैं कि कांग्रेस कैसे अंदर से दो फाड़ हो चुकी है। कांग्रेस के सांसदों ने कब-कब बगावत कर राहुल गांधी से अलग स्टैंड लिया और सार्वजनिक रूप से उन्हें एक्सपोज किया…

12 से 13 सितंबर 2026 – BRICS Summit पर राहुल हुए एक्सपोज
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने BRICS नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए खास डिनर मेन्यू को लेकर सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि 80 फीसदी भारतीय नॉनवेज खाते हैं। पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम, सांसद पवन खेड़ा और राशिद अल्वी जैसे नेताओं ने ब्रिक्स से भारत को मिलने वाले ठोस फायदों और चीन के साथ लद्दाख व अन्य मुद्दों पर सरकार की नीति को लेकर कड़े सवाल भी उठाए। उधर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ब्रिक्स समिट को भारत की कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक दक्षिण के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया और इसकी सफलता व आयोजन को भारत के लिए गौरव का विषय कहा। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी ब्रिक्स घोषणापत्र (न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन) में आतंकवाद के मुद्दे (जैसे पहलगाम हमले का जिक्र) और आम सहमति का स्वागत किया।

मार्च–अप्रैल 2026 — ईरान-इजरायल युद्ध पर राहुल हुए एक्सपोज
ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान राहुल गांधी ने मोदी सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए और भारत के रुख की आलोचना की। इसके विपरीत कांग्रेस के कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे बड़े नेताओं के बयानों ने राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। राहुल गांधी ने अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध पर भारत की विदेश नीति को ‘समझौतावादी’ करार दिया, जबकि उन्हीं की पार्टी के सांसद शशि थरूर ने इसे ‘जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट’ बताया था। थरूर ने कहा कि भारत का मौन युद्ध का समर्थन नहीं है और राष्ट्रीय हित में संयम आवश्यक है। सांसद मनीष तिवारी भारत सरकार की सावधानीपूर्ण नीति का समर्थन करते हुए कहा कि यह भारत का युद्ध नहीं है और ऊर्जा सुरक्षा तथा विदेशों में भारतीयों के हितों को देखते हुए सरकार का सतर्क रहना उचित है। मनीष तिवारी ने एक टीवी समाचार चैनल पर बोलते हुए कहा कि ‘सरकार शायद सही काम कर रही है।’ 

मई–जुलाई 2025 — ऑपरेशन सिन्दूर पर राहुल हुए एक्सपोज
ऑपरेशन सिन्दूर के बाद सरकार ने विपक्षी नेताओं को विदेशों में भारत का पक्ष रखने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में शामिल किया। कांग्रेस की ओर से शशि थरूर और मनीष तिवारी भी इन प्रतिनिधिमंडलों में गए। बाद में संसद में Operation Sindoor पर बहस के दौरान कांग्रेस ने इन नेताओं को अपने वक्ताओं की सूची में शामिल नहीं किया। Indian Express के अनुसार, थरूर ने विदेश में प्रतिनिधिमंडल के दौरान अपनाए गए अपने रुख से अलग पार्टी लाइन लेने से बचने के लिए बहस में बोलना उचित नहीं समझा, जबकि तिवारी ने बोलने की इच्छा जताई थी लेकिन उन्हें नहीं चुना गया। थरूर ने बाद में कांग्रेस नेतृत्व के साथ “differences of opinion” होने की बात भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार की।

राहुल गांधी के अनर्गल आरोपों की शशि थरूर ने ही हवा निकाली
ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी यह आरोप लगाती रही कि केंद्र सरकार की कमजोर कूटनीति के कारण भारत वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ रहा है। लेकिन कांग्रेस के ही सांसद शशि थरूर की तारीफ ने राहुल गांधी को ही पिछले पांव पर ला दिया। शशि थरूर के एक अखबार में लिखे लेख ने खुद उनकी पार्टी में ही हलचल मचा दी। द हिंदू में प्रकाशित एक लेख में, थरूर ने कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अभियान में, राष्ट्रीय संकल्प और प्रभावी कम्यूनिकेशन का एक मौका था। पीएम मोदी के ऊर्जावान नेतृत्व में भारत जब एकजुट होता है, तो स्पष्टता और दृढ़ विश्वास के साथ अपनी आवाज उठा सकता है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर लिखा कि शशि थरूर ने मान लिया कि पीएम मोदी की वैश्विक सक्रियता और नेतृत्व भारत के लिए रणनीतिक लाभ है। थरूर ने राहुल गांधी को एक्सपोज कर दिया।

2024 — राहुल गांधी को असहज करने वाला कार्ति चिदंबरम का बयान 
जनवरी 2024 में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने एक इंटरव्यू में कहा कि प्रचार/कम्युनिकेशन की क्षमता में “nobody is a match for Modi” और यह भी माना कि कांग्रेस की जमीनी स्तर पर प्रचार क्षमता भाजपा से कमजोर है। इसके बाद तमिलनाडु कांग्रेस ने उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया। रिपोर्ट के अनुसार उनके बयान को कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी की राजनीतिक क्षमता पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा गया। यह सीधे राहुल की किसी नीति के विरुद्ध संसदीय वोट नहीं था, लेकिन पार्टी नेतृत्व के लिए असहज करने वाला सार्वजनिक मतभेद जरूर था।

2020 — G-23 और राहुल गांधी के नेतृत्व पर उठे सवाल
2020 में 23 वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में “visible and effective leadership”, संगठनात्मक चुनाव और व्यापक सुधार की मांग की। इनमें कई सांसद और पूर्व सांसद शामिल थे। मनीष तिवारी ने बाद में कहा कि पत्र का उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं बल्कि पार्टी की प्रक्रियाओं और दिशा में सुधार था। उन्होंने यह भी कहा कि जिसे भी नेतृत्व की जिम्मेदारी मिले, उसे गंभीर आत्ममंथन करना होगा। यह उस समय राहुल गांधी के नेतृत्व और पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर सबसे बड़ा आंतरिक असहमति प्रकरण था।

2019- पीएम मोदी को हर समय खलनायक की तरह पेश करना गलत-जयराम रमेश
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश मोदी सरकार के कड़े आलोचक हैं, लेकिन 2019 में उन्होंने कहा था कि हर समय प्रधानमंत्री मोदी को खलनायक (Demonize) की तरह पेश करना गलत है। उनके काम के उन पहलुओं की सराहना होनी चाहिए जिनसे जनता को सीधा लाभ मिला है (जैसे उज्ज्वला योजना)। रमेश ने कहा कि यह वक्त है कि हम मोदी के काम और 2014 से 2019 के बीच उन्होंने जो किया उसके महत्व को समझें जिसके कारण वह सत्ता में लौटे। इसी के कारण 30 प्रतिशत मतदाताओं ने उनकी सत्ता में वापसी करवाई। लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को 37.4 प्रतिशत वोट मिले जबकि सत्तारूढ़ राजग को कुल मिलाकर 45 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे।

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