प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम विश्वकर्मा योजना ने 17 सितंबर 2026 को अपने तीन साल पूरे कर लिए हैं। 17 सितंबर 2023 को शुरू हुई इस योजना का मकसद देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि उनके हुनर को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, डिजिटल व्यवस्था और बड़े बाजार से जोड़ना है। योजना के तहत अब तक 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। भारत के करोड़ों कारीगरों की रोजी-रोटी पारंपरिक हुनर और पीढ़ियों से चले आ रहे पारिवारिक ज्ञान पर टिकी है। बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, मोची, नाई और दूसरे कारीगर लंबे समय से स्थानीय अर्थव्यवस्था और देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते रहे हैं। पीएम विश्वकर्मा इन्हीं पारंपरिक व्यवसायों को नई आर्थिक ताकत देने की कोशिश है।

सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि पर फोकस
पीएम विश्वकर्मा योजना तीन प्रमुख स्तंभों- सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि- पर आधारित है। योजना के जरिए कारीगरों को पहचान देने, उनके कौशल को अपग्रेड करने और कारोबार बढ़ाने के लिए वित्तीय व बाजार संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक के लिए योजना का कुल परिव्यय 13,000 करोड़ रुपये है। इसमें 18 पारंपरिक ट्रेड शामिल हैं और लक्ष्य है कि कारीगरों के उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर हो, बाजार का दायरा बढ़े और उन्हें घरेलू के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ा जा सके।

पहले पहचान, फिर प्रशिक्षण और कारोबार को सहारा
योजना के तहत पंजीकरण और सत्यापन पूरा होने के बाद लाभार्थी को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड दिया जाता है। यानी सबसे पहले कारीगर को औपचारिक पहचान मिलती है और फिर उसे योजना की अन्य सुविधाओं से जोड़ा जाता है। कौशल प्रशिक्षण योजना का अहम हिस्सा है। बुनियादी प्रशिक्षण 5 से 7 दिन का होता है, जबकि उन्नत प्रशिक्षण 15 दिन या उससे अधिक का हो सकता है। प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक उपकरणों, बेहतर कामकाजी तरीकों, नए डिजाइन, डिजिटल लेनदेन, मार्केटिंग और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षुओं को 500 रुपये प्रतिदिन का वजीफा भी मिलता है।

15 हजार रुपये तक का आधुनिक टूलकिट
कारीगरों के लिए सही औजार ही उनके कारोबार की बुनियाद होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए योजना के पात्र लाभार्थियों को 15,000 रुपये तक का टूलकिट प्रोत्साहन दिया जाता है। 15 सितंबर 2026 तक 24.37 लाख से ज्यादा कारीगर बुनियादी कौशल प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं, जबकि 18.16 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को टूलकिट उपलब्ध कराया जा चुका है। इससे पारंपरिक काम करने वालों के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल आसान बनाने पर जोर दिया गया है।

तीन लाख रुपये तक बिना जमानत ऋण
छोटे कारोबार के लिए पूंजी की कमी बड़ी चुनौती होती है। पीएम विश्वकर्मा के तहत कारीगरों को 3 लाख रुपये तक का बिना जमानत उद्यम विकास ऋण दो किश्तों में उपलब्ध कराया जाता है। पहली किश्त 1 लाख रुपये तक, 18 महीने की अवधि के लिए है। इसके लिए बुनियादी प्रशिक्षण पूरा करना जरूरी है। दूसरी किश्त 2 लाख रुपये तक है, जिसकी अवधि 30 महीने तक है। ऋण पर 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर लागू है और सरकार की ओर से 8 प्रतिशत तक की ब्याज छूट दी जाती है। 15 सितंबर 2026 तक योजना के तहत करीब 5,316 करोड़ रुपये के 6.19 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसका इस्तेमाल कच्चा माल खरीदने, औजार आधुनिक बनाने, कारोबार बढ़ाने और छोटे उद्यम को मजबूत करने में किया जा सकता है।

डिजिटल पेमेंट पर भी प्रोत्साहन
योजना सिर्फ पारंपरिक तरीके से कारोबार करने तक सीमित नहीं है। कारीगरों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। लाभार्थियों को हर डिजिटल भुगतान या प्राप्ति पर 1 रुपये का प्रोत्साहन मिलता है, जो एक महीने में अधिकतम 100 लेनदेन तक है। अब तक 8.11 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को डिजिटल प्रोत्साहन दिया गया है और इसके तहत 42 करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए जा चुके हैं।

हुनर के साथ बाजार तक पहुंच
किसी कारीगर के लिए अच्छा उत्पाद बनाना जितना जरूरी है, उसे सही ग्राहक तक पहुंचाना भी उतना ही अहम है। इसलिए पीएम विश्वकर्मा में मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर खास जोर दिया गया है। कारीगरों को GeM, ONDC, Meesho, Amazon, Fabindia और Sulekha जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। अब तक 30,000 से ज्यादा विश्वकर्मा लाभार्थियों को इन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। एमएसएमई मंत्रालय ने बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए Amazon के साथ समझौता भी किया है।

मेलों और प्रदर्शनियों से बढ़ा बाजार
योजना के तहत देशभर में 1,500 से ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम और शिविर, 50 से ज्यादा कार्यशालाएं, 82 व्यापार मेले, 37 राज्य स्तरीय प्रदर्शनियां और 50 से ज्यादा फ्लैश मॉब आयोजित किए गए हैं। 17 से 31 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली हाट में पहला पीएम विश्वकर्मा राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेला हुआ। इसमें देशभर के 117 से ज्यादा कारीगरों ने हिस्सा लिया और 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री दर्ज हुई। मेले में 60,000 से अधिक लोग पहुंचे। कारीगरों के उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग सुधारने के लिए भारतीय पैकेजिंग संस्थान के सहयोग से छह शहरों में कार्यशालाएं भी हुईं। इनमें करीब 1,500 कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया।

रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट और होटल तक पहुंच
कारीगरों को नए ग्राहक और नए बाजार देने के लिए योजना के तहत रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट, होटल और रिसॉर्ट्स तक भी उत्पाद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। वन स्टेशन वन प्रोडक्ट पहल के जरिए 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 42 से ज्यादा दिव्यांग विश्वकर्मा लाभार्थियों को रेलवे स्टेशनों पर स्टॉल उपलब्ध कराए गए हैं। भोपाल और चंडीगढ़ समेत विभिन्न एयरपोर्ट पर भी पीएम विश्वकर्मा के स्टॉल लगाए गए हैं। बिहार, गुजरात, गोवा, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और पुडुचेरी समेत कई राज्यों में प्रमुख होटल और रिसॉर्ट्स में भी कारीगरों के उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। जनजातीय कारीगरों को बाजार से जोड़ने के लिए ट्राइफेड और ट्राइब्स इंडिया के साथ भी गतिविधियां की जा रही हैं।

एआई से लेकर उद्यमिता तक नई तैयारी
समय के साथ बाजार बदल रहा है और कारीगरों के सामने नई तकनीक अपनाने की चुनौती भी है। इसी दिशा में 12,000 से ज्यादा कारीगरों को एआई टूल्स के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई है, ताकि वे ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग को आधुनिक तरीके से कर सकें। योजना के लाभार्थियों को औपचारिक एमएसएमई इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को पंजीकृत कर उद्यम पंजीकरण संख्या और प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की ऑनलाइन व्यवस्था है।

18 पारंपरिक कारोबार योजना में शामिल
पीएम विश्वकर्मा के तहत बढ़ई, नाव निर्माता, शस्त्रसाज, धातुकार, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, ताला बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार और पत्थर तोड़ने वाले, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी-चटाई-झाड़ू निर्माता और कॉयर बुनकर शामिल हैं। इसके अलावा गुड़िया और खिलौना निर्माता, नाई, माला निर्माता, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले कारीगर भी योजना के दायरे में आते हैं।

पंजीकरण से लेकर मंजूरी तक तीन स्तर की जांच
योजना में लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय प्रक्रिया रखी गई है। पहले ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर सत्यापन होता है। इसके बाद जिला कार्यान्वयन समिति आवेदन की समीक्षा और सिफारिश करती है और अंत में स्क्रीनिंग कमेटी मंजूरी देती है। पंजीकरण कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से किया जाता है। योजना के तहत परिवार से केवल एक सदस्य लाभ ले सकता है। पात्र आवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और वह अधिसूचित 18 पारंपरिक व्यवसायों में हाथ और औजारों से काम करने वाला स्वरोजगार व्यक्ति होना चाहिए।

पीएम विश्वकर्मा योजना केवल एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की एक सफल पहल साबित हो रही है। यह योजना पारंपरिक कौशल को न केवल प्रासंगिक बनाए रख रही है, बल्कि कारीगरों को स्वाभिमान के साथ आजीविका कमाने का अवसर दे रही है।










