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PFI रच रहा है हिंदुस्तान को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने की खतरनाक साजिश, अलग-अलग विंग SDPI, CFI और NWF के माध्यम से फैला रहा स्लीपर सेल का जाल, आईएसआई भी बन रही मददगार

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हिंदुस्तान को वर्ष 1947 में अंग्रेजों से आजादी मिली और धर्म के आधार पर हमारे देश का विभाजन तत्कालीन नेताओं ने अपने स्वार्थ में कर दिया। अब आजादी के 100वें साल यानी 2047 तक भारत में इस्लामिक शासन लागू करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। अपने इस ख्वाब को पूरा करने के लिए विवादित कट्टरपंथी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने 4 चरणों वाला ऐसा खतरनाक प्लान तैयार किया है, जिसके बारे में जानकर आप सिहर जाएंगे। इसका खुलासा बिहार के पटना से पीएफआई से जुड़े 5 लोगों की गिरफ्तारी के बाद हुआ है। पुलिस को ऐसे डाक्युमेंट मिले हैं, जिनसे यह पर्दाफाश होता है कि पीएफआई हिंदुस्तान को मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए ‘मिशन 2047’ पर काम कर रहा है।

 

भारत तोड़ने के मंसूबों में पीएफआई ने राजनीतिक, महिला और छात्र विंग को भी जोड़ा
पीएफआई 2047 तक राष्ट्र को इस्लामिक मुल्क बनाने की साजिश रच रहा है और पीएफआई चार स्टेज में प्लान बनाया है। अपने इस घातक मिशन को पूरा करने के लिए न सिर्फ पीएफआई खुद जुटा है, बल्कि उसने अपने राजनीतिक, छात्र और महिला संगठनों को भी सक्रिय कर दिया है। ये संगठन हैं- सोशियल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (पीएफआई का राजनीतिक विंग), द कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई की छात्र इकाई) और नेशनल वूमेन फ्रंट (पीएफआई की महिला विंग)। ये संगठन अलग-अलग मोर्चों पर अपने टास्क को अंजाम देने में लगे हैं। इनकी लक्ष्य मुस्लिमों को भड़काकर हिंदुओं के खिलाफ एकजुट करना है।

हिंदुस्तान को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए सात पन्नों का डाक्युमेंट बनाया
भारत की सम्प्रभुता के खिलाफ इस खतरनाक साजिश का खुलासा बिहार पुलिस ने किया है। राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ से पुलिस ने तीन संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ़्तार किया है। इन लोगों से पुलिस को कुछ दस्तावेज़ बरामद हुए हैं, जिनमें ये लिखा है कि साल 2047 तक भारत में इस्लामिक शासन होगा। ये पूरा Document सात पन्नों का है और इसका शीर्षक है..India 2047, Towards Rule of Islam in India … सबसे बड़ी बात जो आपको समझनी चाहिए, वो ये है कि भारत में एक बार फिर से 1947 को दोहराने की नापाक कोशिश हो रही हैं। यानी ये ताकतें, 2047 तक भारत को 100 साल पीछे 1947 के उस दौर में ले जाना चाहती हैं, जब इस्लामिक कट्टरपंथ ने भारत को दो भागों में बांट दिया था।

10% मुसलमान पीएफआई से जुड़ गए तो 2047 तक भारत को बनाएंगे इस्लामिक राष्ट्र
पुलिस ने जो दस्तावेज बरामद किए हैं, उनमें पीएफआई का साफ तौर पर कहना है कि 75 साल पहले एक इस्लामिक मुल्क भारत से अलग हुआ और जब 2047 में भारत आजादी के 100 वर्ष मनायेगा। तब तक भारत इस्लामिक राष्ट्र में बदल जाएगा। पुलिस ने बताया कि दस्तावेज में यह कहा गया कि 10% मुसलमान ही मेजॉरटी को घुटनों पर बैठाने के लिए काफी हैं और अगर 10% मुसलमान पीएफआई के साथ जुड़ गए तो 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनने से कोई रोक नहीं सकता। मिशन इस्लाम 2047 का लक्ष्य देश के अलग-अलग कोने से मुसलमानों को इकट्ठा करना है। फुलवारी शरीफ में ही 6 और 7 जुलाई को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग के नाम पर कैंप लगाया गया था। इस ट्रेनिंग कैंप में चरमपंथी लोग आए और मुसलमानों को तलवार, चाकू, असलाह की ट्रेनिंग दी।

पहले चरणों में मुसलमानों को जोड़ने और हिंदुओं में फूट डालने का प्लान
पीएफआई ने बाकायदा अपने मिशन को कामयाब करने के लिए चार स्टेज प्लान तैयार किया है। इसमें पहले चरण में न सिर्फ पीएफआई से अधिक से अधिक संख्या में मुस्लिमों को जोड़ना है, बल्कि उन्हें देश के खिलाफ जंग करने जैसी खतरनाक मंसूबों में भी शामिल करना है। दस्तावेज के मुताबिक दूसरे चरण में योजनाबद्ध तरीके के मुसलमानों को एक करके हिन्दुओं में फूट डालनी है। ताकि हिंदू-हिंदू ही आपस में लड़ें और पीएफआई के मिशन का रास्ता आसान हो सके।

मुसलमानों का विरोध करने वाले हिंदुओं पर अटैक करने की है साजिश
पीएफआई के दस्तावेज बताते हैं कि तीसरी स्टेज आने पर पीएफआई मुसलमानों को मार्शल के रूप में तैयार करेगी और फिर यह लोग मुसलमानों की मुखालफत करने वाले हिंदुओं पर अटैक करेंगे। राजस्थान के करौली, जोधपुर और उदयपुर में इस स्टेज का आंशिक तौर पर हम देख ही चुके हैं। उदयपुर में कन्हैया का मर्डर करने वाले रियाज और गौस मोहम्मद के भी अब पीएफआई से कनेक्शन इंटेलिजेंस जांच एजेंसियों को मिले हैं। चौथे स्टेज में पीएफआई सत्ता हाथ में लेने की भी कोशिश करेगा और इसके लिए वह भारत से जंग करने के लिए भी तैयार है।

तुर्की, पाकिस्तान और कुछ इस्लामिक देशों के संपर्क में है पीएफआई
बिहार पुलिस को दस्तावेजों से ये जानकारी भी मिली है कि फुलवारी शरीफ के इस मुस्लिम गैंग का प्लान कुछ इस्लामिक देशों, आईएसआई, तुर्की और पाकिस्तान की मदद से भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना है। इस नापाक मंसूबों में दुनिया के इस्लामिक देश पीएफआई की मदद भी करेंगे। इस बारे में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “पीएफआई को बैन करने की प्रक्रिया चालू है और भारत के सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता जी ने इसे सुप्रीम कोर्ट में बताया है। सरकारी पीएफआई को जड़ से खत्म करने के लिए काम कर रही है।” संबित पात्रा ने कहा कि अगर पीएफआई को एक झटके में सरकार बैन कर देगी तो यह किसी अन्य नाम के साथ आ जाएंगे। इसलिए सरकार उनकी मैपिंग कर रही है और इनको जड़ से कैसे खत्म किया जाए। इस पर कार्यवाही भी जल्द देखने को मिलेगी।

कर्नाटक से करौली और दिल्ली से लेकर पटना तक हिंसा और ट्रेनिंग में पीएफआई कनेक्शन

कर्नाटक के हिजाब विवाद से लेकर राजस्थान के करौली में दंगों तक और अब राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई हिंसा की पड़ताल में एक बात कॉमन निकल आ रही है। इस तरह की इन सारी घटनाओं का पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से कनेक्शन सामने आ रहा है। पीएफआई वही विवादित संगठन है, जिसका दावा है कि इस वक्त देश के 23 राज्यों यह संगठन सक्रिय है। देश में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट यानी सिमी पर बैन लगने के बाद पीएफआई का विस्तार तेजी से हुआ। जहांगीरपुरी मामले में दिल्ली पुलिस टीम पीएफआई की स्टूडेंट विंग जुड़े करीब 20 लोगों पर नजर रखे हुए हैं। हिंसा में पीएफआई की स्टूडेंट विंग से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है। इस संगठन के लोग बड़ी संख्या में हिंसा से पहले जहांगीरपुरी इलाके में सक्रिय थे। ऐसे में अब जिन लोगों का नाम सामने आ रहा है उन्हें जांच में शामिल किया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी भी व्यक्ति या संगठन की भूमिका हिंसा में पाई जाती है तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पीएफआई पर देश विरोधी गतिविधियां करने के आरोप
पॉपुलर फ्रट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई फरवरी 2007 में अस्तित्व में आया। ये संगठन दक्षिण भारत ने तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। कर्नाटक, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में यह विवादित संगठन ज्यादा सक्रिय है और अब दूसरे राज्यों में पैठ बनाने की कोशिशों में है। पीएफआई की कई शाखाएं भी हैं। इसमें महिलाओं के लिए- नेशनल वीमेंस फ्रंट और विद्यार्थियों के लिए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे संगठन शामिल हैं। गठन के बाद से ही पीएफआई पर समाज विरोधी और देश विरोधी गतिविधियां करने के आरोप लगते रहते हैं।PFI ने शोभायात्रा को बाधित कर हिंसा को अंजाम देने की बनाई थी रणनीति
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दो साल पहले हुए दंगे की तरह ही जहांगीरपुरी में भी हिंसा की साजिश रची गई थी। क्राइम ब्रांच की मानें तो इसके लिए न सिर्फ पीएफआई ने फंडिंग की है, बल्कि कई दिन पहले से इसकी साजिश रचना भी शुरू कर दिया था। यही नहीं, हनुमान जन्मोत्सव के एक दिन पहले ही पीएफआई के सदस्यों ने जहांगीरपुरी में बैठक कर शोभायात्रा को बाधित करने और हिंसा को अंजाम देने की रणनीति तैयार की थी। इस बैठक में अंसार, सोनू चिकना और सलीम सहित करीब 25 लोग शामिल हुए बताए जाते हैं। क्राइम ब्रांच इसमें शामिल होने वाले लोगों के बारे में पड़ताल कर रही है।दो साल पहले दिल्ली दंगों में भी फंडिंग करके पीएफआई हुआ था शामिल
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे और शाहीन बाग के प्रदर्शन के मामले में पीएफआई की संलिप्तता का पहली बार पता चला था। क्राइम ब्रांच की मानें तो इन दंगों में जिस तरह से पीएफआई के जरिये फंडिंग की गई थी। ठीक उसी तरह से जहांगीरपुरी हिंसा के लिए फंडिंग किए जाने की जानकारी क्राइम ब्रांच को अब तक की जांच में मिली है। इसके बाद गोपनीय तरीके से क्राइम ब्रांच ने फंडिंग के एंगल से भी जांच शुरू कर दी है।

जहांगीपपुरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भी बड़ा दंगा कराने की थी साजिश
पुलिस को जांच में 20 से 25 ऐसे लोगों की जानकारी मिली है, जो कि सीएए और एनआरसी के प्रदर्शन के साथ ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे के दौरान सक्रिय रहे थे। इन सभी की लोकेशन 15 अप्रैल को जहांगीरपुरी में मिली है। इसके बाद ही क्राइम ब्रांच की जांच इस दिशा में आगे बढ़ी है। क्राइम ब्रांच के मुताबिक उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भी बड़ा दंगा कराने की साजिश जहांगीरपुरी में रची गई थी। इसके लिए पीएफआई के सदस्यों ने कई बैठकें की थीं। इसके बाद उपद्रवियों को हथियार मुहैया कराए गए थे। उपद्रवियों को उम्मीद थी कि शोभायात्रा पर पथराव और फायरिंग करते ही भगदड़ मच जाएगी। इसमें कई लोगों की जान जाएगी और बड़े स्तर पर हिंसा भड़केगी।

दिल्ली दंगा मामले में दायर पूरक आरोप पत्र में भी पीएफआई का लिंक उजागर
पुलिस के मुताबिक इसके लिए पीएफआई के करीब 20 सदस्य लोगों को उकसाने के लिए हिंसा वाले दिन जहांगीरपुरी में मौजूद थे। जहांगीरपुरी में 100 से अधिक पीएफआई स्टूडेंट विंग के सदस्य भी रहते हैं। दिल्ली दंगा मामले में पिछले दिनों जो पूरक आरोप पत्र दायर किया गया है। उसमें भी पीएफआई का लिंक उजागर हुआ है। आरोप पत्र में इस संगठन के तार आतंकी डा.सबील अहमद से जुड़े होने की बात कही गई है। सबील अहमद स्काटलैंड के ग्लासगो एयरपोर्ट पर हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है। एनआइए ने इसी आरोप पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि सबील व अन्य आतंकियों से पीएफआई का संपर्क है।

वोटों के लालच में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाया
अब यह भी साफ होने लगा है कि जहांगीरपुरी में उपद्व करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने ही किस तरह बसाया था। वोटों के लालच में केजरीवाल ने जो जहर बोया, उसका खामियाजा अब दिल्ली को उठाना पड़ रहा है। इस बीच रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर दिल्ली और यूपी सरकार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह का आरोप है कि यूपी सिंचाई विभाग की ज़मीन पर अवैध तरीके से योजना बनाकर केजरीवाल और उनके विधायकों ने रोहिंग्या मुसलमानों को बसा दिया है। अब जब योगी सरकार का बुलडोजर अपनी जमीनों को खाली कराने के लिए दिल्ली में चल रहा है तब केजरीवाल सरकार और उनके अधिकारी मदद नहीं कर रहे हैं। महेंद्र सिंह का आरोप यह भी है कि जिन जमीनों पर कब्जा हटा लिया गया था, वहां फिर रोहिंग्या मुसलमानों को आम आदमी पार्टी के एक विधायक के जरिए बसाने की कोशिश की जा रही है।

करौली में जताई थी हिंसा की आशंका, पर कोई इंतजाम नहीं

दिल्ली से पहले राजस्थान के करौली जिले में हिंदू नव सवंत्सर के मौके पर हुए उपद्रव, हिंसा और आगजनी के पीछे भी पीएफआई की मिलीभगत सामने आ चुकी है। पीएफआई का राजस्थान की गहलोत सरकार को पत्र इस बात का प्रमाण है कि उसे हिंसा होने की पूरी संभावना थी। करौली के आयोजन में हिंसा फैलाने का एक आह्वान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। दरअसल सोशल मीडिया पर जो लेटर वायरल हो रहा है और जिसमें  हिंदू नववर्ष की आड़ में प्रदेश में हिंसा फैलाने की साजिश रचने की बात कही गई है। हैरान करने वाली बात ये सामने आई है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ ने बयान जारी करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री और डीजीपी को हिंसा की आशंका भी जताई थी। बीते शनिवार को राजस्थान के करौली में जुलूस के दौरान जमकर बवाल मचा गया था। हिंदू नववर्ष का जश्न मनाने के लिए एक धार्मिक जुलूस में पथराव हुआ था जिसके बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

धार्मिक जुलूस के संकरी गली में पहुंचने के बाद छतों से बरसाए गए पत्थर
हैरान करने वाली बात यह है कि सोशल म़ीडिया पर धार्मिक जूलूस में पथराव के जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वो साफ-साफ चुगली खाते हैं कि यहां माहौल अनायास ही खराब नहीं हुआ, बल्कि इसकी सुनियोजित प्लानिंग की गई थी। जुलूस पर पथराव के लिए घरों की छतों पर पहले के ही बड़े-बड़े पत्थर जमा किए गए थे। धार्मिक जुलूस पर तब तक पथराव नहीं किया गया, जब तक वह एक संकरी गली में नहीं पहुंच गया, ताकि जब ऊपर से पथराव हो तो संकरी गली में जमा ज्यादा से ज्यादा लोगों को शारीरिक रूप से गंभीर चोटों आएं।

PFI को कैसे पता चला कि 2 से 4 अप्रैल के बीच हो सकते हैं दंगे
अब करौली घटना के तार कट्टर धार्मिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़ता दिखाई दे रहा हैं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया  राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ ने बयान जारी करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री और डीजीपी को हिंसा की आशंका भी जताई थी। चिट्ठी में इस बात का भी जिक्र किया गया था कि 2-4 अप्रैल तक सूबे के अलग-अलग जिलों, तहसीलों और कस्बों में आरएसएस और उसके संगठनों के जरिए हिंदू नववर्ष के मौके पर भगवा रैली आयोजित की जा रही है। रैलियों मे धार्मिक उन्माद फैलाने और कानून व्यवस्था बिगड़ने की भी बात कही थी। मगर सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर पीएफआई को कैसे पता चला कि 2 से 4 अप्रैल के बीच राजस्थान के करौली समेत कुछ ज़िलों में सांप्रदायिक झगड़े हो सकते हैं?

सवालों में गहलोत सरकार, जानकारी के बावजूद चुप्पी क्यों साधे रही
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का लेटर सामने आने के बाद अब सीएम गहलोत की मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे है। बड़ा सवाल ये है कि अगर इस घटना से राजस्थान की गहलोत सरकार अवगत थी तो उन्होंने समय रहते इस हिंसा को रोकने के लिए बड़ा कदम क्यों नहीं उठाया? आखिर क्यों गहलोत सरकार जानकारी होने के बावजूद भी चुप्पी साधे रही?  अब उनकी इस खामोशी पर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने सवाल उठाए है और राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर जोरदार प्रहार किया है।

करौली के उपद्रव के वीडियो और PFI की चिठ्ठी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बार लोग राजस्थान सरकार और सीएम अशोक गहलोत को ट्रोल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जानकारी के बावजूद गहलोत सरकार आंखें मूंदें क्यों बैठी रही।

 

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