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अमेरिका ने भारत के पक्ष में लिया बड़ा फैसला, CAATSA कानून की पाबंदियों से मिली छूट, रूस से हथियार खरीद का रास्ता साफ

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ साल में न सिर्फ एक कुशल व संवेदनशील प्रशासक की भूमिका निभाई है बल्कि घरेलू राजनीति से लेकर वैश्विक कूटनीति में एक ऐसी लकीर खींची है जो सभी राजनीतिक दलों के लिए चुनौती साबित होगी। वैश्विक कूटनीति में भारत का सम्मान बढ़ने की वजह से ही आज अमेरिका ने भारत के पक्ष में बड़ा फैसला लिया है। चीन को रोकने के लिए अमेरिका कुछ भी करने को तैयार है और वह जानता है कि भारत की मदद के बिना यह संभव नहीं है। ऐसे में वह भारत की हर शर्त मानने को तैयार है। इसका मजमून तब दिखाई दिया, जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा(यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) ने नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह प्रस्ताव अमेरिका के ‘काउंटिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (CAATSA) के प्रतिबंधों के दायरे से भारत को बाहर करता है यानी भारत अगर रूस से हथियार खरीदता है तो अमेरिका को इससे कोई परेशानी नहीं होगी। खास बात यह है कि यह प्रस्ताव भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना द्वारा लाया गया था, जिसे दोनों पार्टियों के सांसदों ने अपनी मंजूरी दे दी।

अमेरिका में भारत को बहुत बड़ी सफलता मिली है और रूसी हथियार खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने की आशंका के बादल अब छंट गये हैं। यानी CAATSA के तहत अब भारत पर प्रतिबंध नहीं लग सकता है और भारत के लिए ये एक बहुत बड़ी राहत की बात है। हालांकि भारत ने पहले ही साफ कर दिया था कि भारत को किसी भी देश के साथ रक्षा संबंध बनाने और हथियार खरीदने का संप्रभु हक है, लेकिन भारत के ऊपर CAATSA की तलवार लटक रही थी जो कि अब हट गई है।

अमेरिकी संसद में भारत के समर्थन में प्रचंड बहुमत

काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (CAATSA) के तहत भारत के लिए विशिष्ट छूट वाले प्रस्ताव को प्रचंड बहुमत के साथ अमेरिकी सीनेट ने 330/99 से पास कर दिया। हालांकि अभी तक यह प्रस्ताव कानून का हिस्सा नहीं है। अधिनियम को सदन और सीनेट दोनों में पारित करना होगा, उसके बाद ही इसे कानूनी तौर पर मूर्त रूप दिया जा सकता है। खन्ना के संशोधन को अमेरिकी विधायी शाखा (कैपिटल हिल) राजनीतिक समर्थन के संकेत के रूप में देख रही है। हालांकि माना जा रहा है कि सीनेट में इसे काफी आसानी से पास कर दिया जाएगा क्योंकि ज्यादातर सीनेटर्स, जिनमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों शामिल हैं, उनके भारत से अच्छे संबंध हैं और वो भारत समर्थक हैं।

चीन को रोकने के लिए भारत के पक्ष में फैसला

विस्तारवादी चीन के रवैये से पूरी दुनिया परेशान है। छोटे व कमजोर पड़ोसी देशों पर चीन लगातार अपना रौब जमा रहा है। हालांकि भारत के आगे उसकी यह विस्तारवादी नीति लगातार फेल हो रही है। कूटनीति हो या सैन्य कार्रवाई, भारत हर भाषा में चीन को करारा जवाब दे रहा है। ऐसे में अमेरिका को भी भारत से ही उम्मीदें हैं। चीन को रोकने के लिए अमेरिका ने भारत के पक्ष में बड़ा फैसला किया है।

चीन से खतरे का दिया था हवाला

भारत द्वारा रूस से एस-500 मिसाइल रक्षा प्रणाली (s-500 missile system) खरीदने के कारण अमेरिका कॉट्सा अधिनियम के तहत कार्रवाई पर विचार कर रहा था। इस मामले में भारत का पक्ष लेते हुए रो खन्ना ने कहा था कि भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारी रूसी हथियार प्रणालियों की जरूरत है इसलिए उसे CAATSA के तहत प्रतिबंधों में छूट दी जाए। रूस और चीन की घनिष्ठ साझेदारी को देखते हुए हमलावरों को रोकने के लिए ऐसा करना अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी के सर्वोत्तम हित में होगा। दरअसल, भारत ने अक्टूबर 2018 में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के 5 स्क्वाड्रनों के लिए रूस के साथ 5.43 अरब डॉलर का सौदा किया था।

अमेरिका-भारत भागीदारी से ज्यादा कुछ महत्वपूर्ण नहीं

रो खन्ना ने कहा कि अमेरिका को चीन के बढ़ते आक्रामक रूख के मद्देनजर भारत के साथ खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा यह संशोधन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और मुझे यह देखकर गर्व हुआ कि इसे दोनों दलों के समर्थन से पारित किया गया है। अमेरिका-भारत भागीदारी से ज्यादा महत्वपूर्ण अमेरिका के रणनीतिक हित में और कुछ भी इतना जरूरी नहीं है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कानूनी संशोधन

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारत के समर्थन में पास किए गये इस अहम प्रस्ताव से दोनों लोकतंत्रों के बीच रक्षा संबंध और भी ज्यादा मजबूत होंगे और ये प्रस्ताव चीन जैसे हमलावरों को रोकने में मदद करता है। यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से ‘एनडीएए’ कानून में संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद सांसद रो खन्ना ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह संशोधन अमेरिका और भारत के परमाणु समझौते के बाद से अमेरिका और भारत के संबंधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कानून है। रो खन्ना ने कहा कि इंडिया कॉकस के उपाध्यक्ष के रूप में मैं अपने (दोनों) देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा हूं कि भारत, भारतीय-चीनी सीमा पर अपनी रक्षा कर सके।

क्या है CAATSA कानून?

इस कानून के तहत अमेरिका अपने विरोधी देशों से हथियारों की खरीदी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठाता है। अमेरिका CAATSA के तहत उन देशों पर प्रतिबंध लगाता है जिनका ईरान, उत्तर कोरिया या रूस के साथ लेनदेन है। भारत ने रूस से एस-500 मिसाइल रक्षा प्रणाली को लेकर सौदा किया था। ऐसे में भारत भी इन प्रतिबंधों के दायरे में आ गया था।

कौन हैं रो खन्ना

रो खन्ना भारतीय मूल के अमेरिकी राजनीतिज्ञ व वकील हैं। 2017 से वह कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद भी हैं। उनका जन्म 13 सितंबर, 1976 में फिलाडेल्फिया में एक भारतीय पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता पंजाब से अमेरिका में आकर बस गए। रो खन्ना के पिता एक केमिकल इंजीनियर हैं जिन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और फिर मिशिगन विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। उनकी मां शिक्षिका रही हैं। खन्ना ने 8 अगस्त, 2009 से अगस्त 2011 तक राष्ट्रपति बराक ओबामा के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य विभाग में उप सहायक सचिव के रूप में भी काम किया।

रो खन्ना क्यों लाए यह प्रस्ताव?

इस मामले में भारत का पक्ष लेते हुए रो खन्ना ने कहा कि भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारी रूसी हथियार प्रणालियों की जरूरत है इसलिए उसे CAATSA के तहत प्रतिबंधों में छूट दी जाए। रूस और चीन की घनिष्ठ साझेदारी को देखते हुए हमलावरों को रोकने के लिए ऐसा करना अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी के सर्वोत्तम हित में होगा।

चीन पर क्या पड़ेगा असर

अमेरिका की प्रतिनिधि सभा द्वारा प्रस्ताव मंजूर होने के बाद इसे सीनेट के दोनों सदनों में पास कराना होगा। इसके बाद ही इसे कानूनी मान्यता मिलेगी। अगर, ऐसा होता है तो भारत बिना किसी चिंता के आगे भी रूस से हथियारों की खरीद जारी रखेगा। इसका असर सीधे तौर पर चीन पर पड़ेगा। भारत हथियारों के मामले में जितना मजबूत होगा, चीन को उतना ही आक्रामक रवैया छोड़कर बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

चीन को काउंटर करना जरूरी

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा कि ‘भारत-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाने के लिए और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी महत्वपूर्ण है और दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच यह साझेदारी महत्वपूर्ण है और भारत-प्रशांत क्षेत्रों में बढ़ते खतरों के जवाब में इसे मजबूत करना जारी रखना चाहिए, और एक स्पष्ट संकेत भेजना है कि संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। यह संशोधन भारत और अमेरिका के बीच एक मजबूत रक्षा साझेदारी को रेखांकित करने का नवीनतम प्रयास है, जो भारत की सुरक्षा के लिए चीन के खतरे को उजागर करता है।

भारतीय रक्षा जरूरतों पर जोर

भारत को लेकर जो प्रस्ताव यूएस हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने पास किया है, उसमें इस बात पर जोर दिया गया है, कि ‘संयुक्त राज्य अमेरिका को भारत की तत्काल रक्षा जरूरतों का पुरजोर समर्थन करते हुए रूस द्वारा निर्मित हथियारों और रक्षा प्रणालियों से भारत की प्रतिबद्धता के बीच भारत को प्रोत्साहित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए’। प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए रो खन्ना ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (आईसीईटी) जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में यूएस-इंडिया इनिशिएटिव (आईसीईटी) की सराहना की, जिसे राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच टोक्यो शिखर सम्मेलन के दौरान एक आवश्यक कदम के रूप में घोषित किया गया था।

अमेरिका के हित में है ये फैसला

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा लिया गया यह फैसला दूरगामी सोच का परिणाम है और यह अमेरिका के हित में है। उनका कहना है कि एशिया में चीन को काउंटर करने के लिए अगर अमेरिका ने भारत को नाराज कर दिया तो फिर एशिया में अमेरिका के पास कुछ नहीं बचेगा। चीन को रोकने के लिए अमेरिका कुछ भी करने को तैयार है और वह जानता है कि भारत की मदद के बिना यह संभव नहीं है। ऐसे में वह भारत की हर शर्त मानने को तैयार है।

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