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वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की फोटो पर जताई आपत्ति, केरल हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया 1 लाख रुपए का जुर्माना, कांग्रेस के सरपरस्तों को दिया बड़ा संदेश

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कोरोना महामारी से लड़ने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अद्भुत नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। इसकी न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर में तारीफ हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी का समर्पण देख जहां हर नागरिक को गर्व हो रहा है, वहीं कांग्रेस पार्टी और उसके सरपरस्तों को उनकी लोकप्रियता रास नहीं आ रही है। इसलिए वे किसी न किस बहाने अपनी नफरत को जाहिर करते रहते हैं। लेकिन केरल हाईकोर्ट ने ऐसे लोगों को सख्त और बड़ा संदेश दिया है। केरल हाईकोर्ट ने कोविड-19 वैक्सीन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर हटाने की याचिका को खारिज कर दिया। मंगलवार (21 दिसंबर, 2021) को दिए फैसले में याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया। साथ ही कहा कि नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के नहीं है। वे किसी अन्य देश के प्रधानमंत्री नहीं है। वह जनादेश से सत्ता में आए। केवल इसलिए कि आपके राजनीतिक मतभेद हैं, आप इसे चुनौती नहीं दे सकते हैं। 100 करोड़ लोगों को इससे कोई परेशानी नहीं, तो आपको क्यों है? इस तरह की याचिका की एक नागरिक से उम्मीद नहीं थी।

जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन की पीठ ने कहा कि मुझे संदेह है कि याचिकाकर्ता का राजनीतिक एजेंडा भी है। यह एक पब्लिसिटी और ओरिएंटेड पिटीशन है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पीटर मयालपरंभिल पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया और छह सप्ताह के भीतर केएलएसए में जमा करने का निर्देश दिया। समय पर जुर्माना नहीं भरने पर याचिकाकर्ता की संपत्ति बेचकर राशि की वसूली की जाएगी। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता के वकील अजीत जॉय ने दलील दी थी कि पर्सनल वैक्सीन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता फिलहाल जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूटी ऑफ लीडरशिप के साथ काम कर रहा है।

नफरत से भरे लोगों को कोर्ट की नसीहत

केरल हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री मोदी से नफरत करने वालों को नसीहत देते हुए का कि कोई यह नहीं कह सकता कि प्रधानमंत्री कांग्रेस के प्रधानमंत्री हैं या बीजेपी के प्रधानमंत्री या किसी राजनीतिक दल के प्रधानमंत्री हैं। लेकिन एक बार जब प्रधानमंत्री संविधान के अनुसार चुन लिए जाते हैं, तो वह हमारे देश के प्रधानमंत्री होते हैं और वह पद हर नागरिक का गौरव होना चाहिए। प्रधानमंत्री का सम्मान करना नागरिकों का कर्तव्य है। नागरिकों को उनकी तस्वीर और “मनोबल बढ़ाने वाले संदेश” के साथ टीकाकरण प्रमाण-पत्र ले जाने में शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है।

हाईकोर्ट के सख्त तेवर, तीखे सवाल

हाईकोर्ट ने सख्त तेवर दिखाते हुए तीखे सवाल किए कि सरकार की नीतियों और यहां तक कि प्रधानमंत्री के राजनीतिक रुख से असहमत हो सकते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री ने प्रमाण पत्र में अपनी तस्वीर के साथ संदेश दिया कि दवा और सख्त नियंत्रण की मदद से भारत वायरस को हरा देगा तो इसमें “क्या गलत है ?” इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया था कि जब जवाहर लाल नेहरू के नाम पर यूनिवर्सिटी हो सकती है, तो वैक्सीन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री की तस्वीर होना क्यों गलत है? कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप प्रधानमंत्री के नाम वाले संस्थान में काम करते हैं। आखिर आप यूनिवर्सिटी से नाम हटाने को क्यों नहीं कहते ?

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