प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में देश में विकास और कल्याण की दिशा में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। सरकार ने आर्थिक सुधारों के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी खास जोर दिया है, जिससे आम लोगों के जीवन में सीधा असर पड़ा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान से लेकर आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री जन-धन योजना जैसी योजनाओं ने देश के करोड़ों लोगों को नई सुविधाएं और आर्थिक मजबूती दी है। वहीं डिजिटल ट्रांसफर, ग्रामीण विद्युतीकरण, नल-जल योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलें भी आम नागरिकों के सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा रही हैं। इन पहलों का असर यह रहा है कि गरीब, किसान, महिलाएं, युवा और वंचित वर्ग के लिए अवसरों के नए द्वार खुले हैं और उनके जीवन स्तर में सुधार देखने को मिला है। केंद्र सरकार की योजनाओं का दायरा इतना व्यापक हो चुका है कि यह देश में A to Z कल्याणकारी पहलों का एक बड़ा नेटवर्क बन गया है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती दे रहा है।
A
आयुष्मान भारत- 43.52 करोड़ कार्ड जारी
23 सितंबर 2018 को लॉन्च की गई भारत सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत योजना लगातार विस्तार कर रही है। 28 फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत 43.52 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु के 1.14 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया गया है। यह योजना मूल रूप से देश के लगभग 10.74 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों को कवर करने के लिए बनाई गई है, जो करीब 50 करोड़ से अधिक लोगों के बराबर है। देशभर में 36,000 से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं, जहां पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत 11.69 करोड़ से अधिक मरीजों का अस्पताल में भर्ती होकर इलाज किया जा चुका है। खास बात यह है कि लाभार्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि योजना महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत अब तक करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज मिलने से उनकी जेब से होने वाला भारी स्वास्थ्य खर्च बचा है, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।
B
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
मोदी सरकार की प्रमुख सामाजिक पहल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना ने पिछले कुछ वर्षों में बालिका सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गिरते लिंगानुपात को सुधारना और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth) 2014-15 में 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 तक पहुंच गया है, जो इस दिशा में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। इसके साथ ही लड़कियों की शिक्षा में भी सुधार दर्ज किया गया है, जहां माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) 75.5 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 80.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह योजना सामाजिक सोच में बदलाव लाने, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने और बालिकाओं की शिक्षा व सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
बायोगैस- प्रणाम योजना
भारत सरकार की PRANAM योजना, जिसे वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया था, का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करना और जैविक व वैकल्पिक पोषक तत्वों को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत बायोगैस, गोबर गैस और जैविक खाद के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरे और कम रसायन वाले खाद्यान्नों के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़े। इसके साथ ही बायोगैस को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा प्रयास किया जा रहा है। Indian Biogas Association की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत अपनी प्राकृतिक गैस आपूर्ति में 5 प्रतिशत बायोगैस का मिश्रण करता है, तो इससे लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के आयात में सालाना करीब 1.17 अरब डॉलर (लगभग 9,500 करोड़ रुपये) की बचत हो सकती है। सरकार की बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को बढ़ावा देने की नीति से न केवल ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि लगभग 37,500 करोड़ रुपये के निवेश और 750 से अधिक CBG प्रोजेक्ट्स स्थापित होने की संभावना भी जताई गई है। इस तरह बायोगैस आधारित पहलें एक साथ किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुधार और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का काम कर रही हैं, जो विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है।
C
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: 57 करोड़ से अधिक लोन अकाउंट स्वीकृत
“क्रेडिट फॉर ऑल” के लक्ष्य को साकार करने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने देश में छोटे उद्यमियों और स्वरोजगार को नई दिशा दी है। 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई इस योजना के तहत बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे छोटे कारोबार और नए उद्यम शुरू करने में मदद मिलती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च 2026 तक इस योजना के तहत 57.79 करोड़ से अधिक लोन अकाउंट स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 40.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि योजना ने देशभर में करोड़ों लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। इस योजना के लाभार्थियों में बड़ी संख्या महिलाओं, युवाओं और पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमियों की है, जिससे आर्थिक समावेशन को मजबूती मिली है।
पीएम स्वनिधि योजना: 92 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को लोन दिया गया
कोविड-19 महामारी के दौरान प्रभावित हुए छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने रेहड़ी-पटरी वालों को आर्थिक रूप से संबल प्रदान किया है। 2020 में शुरू की गई इस योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे अपना व्यवसाय फिर से शुरू कर सकें और उसे आगे बढ़ा सकें। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक इस योजना के तहत 92 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को लोन वितरित किए जा चुके हैं, जबकि कुल स्वीकृत ऋणों की संख्या 1.3 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही, इस योजना के तहत अब तक वितरित की गई राशि ₹17,115 करोड़ से अधिक है। यह योजना छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही है। अब यह योजना केवल स्ट्रीट वेंडर्स तक सीमित न रहकर 31 प्रकार की सेवाओं से जुड़े छोटे व्यापारियों को भी लाभ देगी जिससे लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
D
डिजिटल इंडिया (UPI, GeM, DeVINE)
UPI
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत की थी, जिसके तहत UPI आज भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति का सबसे बड़ा आधार बन चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक UPI के मासिक ट्रांजेक्शन 18 अरब से अधिक के स्तर को पार कर चुके हैं, जबकि 2025 में कुल ट्रांजेक्शन 220 अरब से अधिक और कुल वैल्यू करीब 300 लाख करोड़ रुपये रही। यह दर्शाता है कि UPI लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है।
GeM पोर्टल
सरकारी खरीद प्रणाली को पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए 9 अगस्त 2016 को शुरू किया गया GeM आज देश का एक बड़ा ई-मार्केटप्लेस बन चुका है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने 2016 की अपनी शुरुआत के बाद से कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये का सकल माल मूल्य (जीएमवी) हासिल किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में GeM पोर्टल के जरिए कुल खरीद 5 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंचने की दिशा में है, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इस प्लेटफॉर्म से 63,000 से अधिक सरकारी खरीदार संगठन और 60 लाख से अधिक विक्रेता-सेवाप्रदाता जुड़े हुए हैं। GeM ने सरकारी खरीद में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को नई ऊंचाई दी है। अब यह पोर्टल ग्लोबल टेंडरिंग के लिए तैयार है, जिससे विदेशी निवेश और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को बढ़ावा मिलेगा।
DeVINE (North East)
पूर्वोत्तर भारत के समग्र विकास को गति देने के लिए शुरू की गई DeVINE योजना के तहत बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और सामाजिक क्षेत्र में तेजी से काम हुआ है। हाल के वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और परियोजनाएं लागू की गई हैं, जिससे सड़क, रेलवे, हवाई और जलमार्ग कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हवाई अड्डों की संख्या 9 से बढ़कर 17 हो चुकी है, जो क्षेत्र में तेजी से बढ़ते विकास का संकेत है।
E
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: सुधारों से आसान हुआ कारोबार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में Ease of Doing Business को बेहतर बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। सरकार ने करीब 1,500 से अधिक अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया है और 25,000 से ज्यादा अनुपालन (compliances) कम किए हैं, जिससे कारोबार शुरू करना और संचालित करना पहले के मुकाबले काफी आसान हुआ है। विश्व बैंक की Doing Business Report के अनुसार, भारत ने 2014 में 142वें स्थान से सुधार करते हुए 2020 में 63वां स्थान हासिल किया था, जो बड़े सुधारों का संकेत है। इसके बाद सरकार ने “Ease of Living” और “Ease of Doing Business 2.0” पर जोर देते हुए प्रक्रियाओं को और सरल बनाया है। हाल के वर्षों में भारत में स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन, जीएसटी, डिजिटल सिस्टम और सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसे सुधारों के चलते नए व्यवसाय शुरू करना तेज और पारदर्शी हुआ है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत दुनिया की शीर्ष तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और नए कारोबार शुरू करने के मामले में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बनकर उभरा है।
F
फाइनेंशल इनक्लूजन (JAM): जनधन-आधार-मोबाइल से मजबूत हुआ वित्तीय तंत्र
प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत देश में वित्तीय समावेशन को अभूतपूर्व गति मिली है। इस योजना के जरिए करोड़ों लोगों को पहली बार बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे सब्सिडी और सरकारी लाभ सीधे उनके खातों में पहुंच रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक जनधन खातों की संख्या बढ़कर 53 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि इन खातों में कुल जमा राशि ₹2.30 लाख करोड़ से ज्यादा पहुंच चुकी है। यह संख्या मार्च 2015 के 14.72 करोड़ खातों के मुकाबले कई गुना वृद्धि को दर्शाती है। जनधन, आधार और मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी के माध्यम से सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को प्रभावी बनाया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार में कमी आई है। इस पहल ने गरीबों, महिलाओं और ग्रामीण आबादी को आर्थिक मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
G
गरीब कल्याण अन्न योजना: 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की गारंटी
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत केंद्र सरकार देश के गरीब और जरूरतमंद वर्ग को खाद्य सुरक्षा प्रदान कर रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में शुरू की गई इस योजना को 2023 में विस्तार देते हुए 1 जनवरी 2024 से अगले पांच वर्षों के लिए लागू किया गया है। इस योजना के तहत देश के लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो गेहूं या चावल मुफ्त दिया जा रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में इस योजना पर करीब 2.27 लाख करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है, जबकि अगले पांच वर्षों में इस पर कुल लगभग 11.80 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके साथ ही, करीब 80.6 करोड़ लाभार्थियों को इस योजना के तहत मुफ्त अनाज मिल रहा है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजनाओं में से एक बनाता है।
H: Housing For All Scheme – AWAS
आवास योजना: “हाउसिंग फॉर ऑल” से करोड़ों को मिला पक्का घर
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण) के तहत केंद्र सरकार ने “हाउसिंग फॉर ऑल” के लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाया है। इस योजना का उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्गों को पक्का घर उपलब्ध कराना है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 तक देशभर में 4 करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण पूरा कर उन्हें लाभार्थियों को सौंपा जा चुका है। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में करोड़ों परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लगभग 70-75 प्रतिशत घर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों के लिए बनाए गए हैं, जिससे सामाजिक समावेशन को भी मजबूती मिली है। यह योजना न केवल आवास उपलब्ध करा रही है, बल्कि स्वच्छता, बिजली, जल और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़कर समग्र विकास को भी बढ़ावा दे रही है।
I: Insurance for all
फसल बीमा योजना: प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को सुरक्षा कवच
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को 13 जनवरी 2016 को लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना के तहत बाढ़, सूखा, आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश जैसी परिस्थितियों में फसल खराब होने पर बीमा कवर दिया जाता है, जिससे किसानों को नुकसान की भरपाई में मदद मिलती है। योजना के तहत किसानों के लिए प्रीमियम दरें बेहद कम रखी गई हैं—खरीफ फसलों पर अधिकतम 2 प्रतिशत और रबी फसलों पर 1.5 प्रतिशत, जबकि शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक प्रीमियम सहायता प्रदान करती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 30 जून 2025 तक इस योजना के तहत 78.41 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों को कवर किया गया है और 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम का भुगतान किया जा चुका है। यह योजना किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में उभरी है, जो खेती को जोखिम से सुरक्षित बनाते हुए कृषि क्षेत्र को स्थिरता प्रदान कर रही है।
सुरक्षा बीमा योजना: कम प्रीमियम में बड़ा सुरक्षा कवच
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को 9 मई 2015 को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य दुर्घटना की स्थिति में गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना के तहत मात्र 20 रुपये सालाना प्रीमियम पर 2 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 25 फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत 57.11 करोड़ से अधिक नामांकन (enrolments) किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच को दर्शाता है। यह योजना देश के करोड़ों लोगों, विशेषकर ग्रामीण और कमजोर वर्गों को कम लागत में बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराते हुए वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जीवन ज्योति बीमा योजना: कम प्रीमियम में जीवन सुरक्षा
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना को 9 मई 2015 को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य कम प्रीमियम पर लोगों को जीवन बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्ति 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये तक का जीवन बीमा कवर प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 25 फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत 22 करोड़ से अधिक नामांकन किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच को दर्शाता है। यह योजना देश के करोड़ों लोगों, खासकर गरीब और निम्न आय वर्ग को कम लागत में जीवन बीमा सुरक्षा प्रदान कर वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
J
जनमन योजना: जनजातीय समुदायों के समग्र विकास का बड़ा अभियान
पीएम जनमन योजना (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा-अभियान) की शुरुआत 15 नवंबर 2023 को बिरसा मुंडा की जयंती (आदिवासी गौरव दिवस) के अवसर पर की गई थी। इस योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके सामाजिक और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत सरकार करीब 24,000 करोड़ रुपये के निवेश से जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक विकास कार्य कर रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 4.73 लाख से अधिक घर स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 2.50 लाख घर बनकर तैयार हो चुके हैं, जो जनजातीय समुदायों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी प्रगति को दर्शाता है। यह योजना 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को कवर करते हुए देश के कई राज्यों में बुनियादी ढांचे और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने का काम कर रही है, जो समावेशी विकास और “विकसित भारत” के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है।
K
किसान सम्मान निधि: करोड़ों किसानों को सीधे आर्थिक सहायता
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता राशि तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है, जिससे खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 तक इस योजना के तहत 11 करोड़ से अधिक किसानों को कवर किया जा चुका है, जबकि कुल 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह योजना डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किसानों तक बिना किसी बिचौलिये के सहायता पहुंचाने का एक सफल उदाहरण बन चुकी है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों की आय को स्थिरता मिली है।
कुसुम योजना: सौर ऊर्जा से सिंचाई और किसानों की आय में बढ़ोतरी
पीएम-कुसुम योजना (किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान)के तहत सरकार किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रही है, जिससे उनकी बिजली और डीजल पर निर्भरता कम हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसान सोलर पंप लगाकर सिंचाई कर सकते हैं और अतिरिक्त बिजली को ग्रिड को बेचकर आय भी बढ़ा सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 21.77 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिल चुका है, जबकि लाखों सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। यह योजना स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
L: Logistics and Economy
गतिशक्ति योजना: मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी से इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार
पीएम गति शक्ति के तहत देश में सड़क, रेलवे, पोर्ट, हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एकीकृत कर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बेहतर समन्वय, लागत में कमी और तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब और “प्लग एंड प्ले” इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे उद्योगों और निवेशकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) के माध्यम से 350 से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जा चुका है, जिनकी कुल अनुमानित लागत 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से बड़ी संख्या में परियोजनाएं स्वीकृति और कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं, जो देश में लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और औद्योगिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
M
मातृ वंदना योजना: गर्भवती महिलाओं को पोषण और आर्थिक सहारा
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की शुरुआत जनवरी 2017 में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को 5,000 रुपये की सहायता राशि किस्तों में दी जाती है, ताकि वे गर्भावस्था के दौरान जरूरी जांच और पोषण पर ध्यान दे सकें। बाद में संशोधन करते हुए दूसरी संतान यदि कन्या हो तो उसके लिए भी 5,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान किया गया है, जिससे बालिका जन्म को प्रोत्साहन मिलता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 8 जनवरी 2026 तक इस योजना के तहत 4.26 करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ दिया जा चुका है और 20,060 करोड़ रुपये से अधिक की राशि DBT के माध्यम से सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की गई है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 (7 दिसंबर 2025 तक) में ही 57 लाख से अधिक लाभार्थियों को कवर किया गया है, जिससे यह योजना देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापक स्तर पर लागू है। यह योजना महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के साथ-साथ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पारदर्शिता और प्रभावी वितरण सुनिश्चित करने का एक सफल उदाहरण बन चुकी है।
मिशन इंद्रधनुष: छूटे बच्चों तक टीकाकरण पहुंचाने का राष्ट्रीय अभियान
मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत 25 दिसंबर 2014 को देश में पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। इस अभियान के तहत उन बच्चों (0-5 वर्ष) और गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण का लाभ दिया जाता है, जो किसी कारणवश नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से छूट गए हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी मलिन बस्तियों, प्रवासी परिवारों, निर्माण स्थलों और दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले समुदायों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष (IMI) के तहत शुरुआत से लेकर अब तक 34.77 करोड़ (347.7 मिलियन) से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है, और खसरा-रूबेला टीकाकरण कवरेज 97.98 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो देश में सार्वभौमिक टीकाकरण कवरेज को मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। यह अभियान छूटे हुए बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाकर न केवल बाल मृत्यु दर को कम करने में मदद कर रहा है, बल्कि देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूत बना रहा है।
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नमामि गंगे योजना: गंगा पुनर्जीवन में तेज होती प्रगति
नमामि गंगे कार्यक्रम की शुरुआत 2015 में गंगा नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इस मिशन के तहत गंगा के पूरे बेसिन में सीवेज ट्रीटमेंट, नदी सतह की सफाई, घाट विकास और जैव विविधता संरक्षण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक नमामि गंगे मिशन के तहत कुल 3,977 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता विकसित की जा चुकी है, जबकि वर्ष 2025 के दौरान ही 25 प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (530 MLD क्षमता) चालू किए गए हैं। इसके अलावा, 30 जून 2025 तक 502 से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 323 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जो गंगा की स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। यह मिशन न केवल गंगा के प्रदूषण को कम करने में मदद कर रहा है, बल्कि शहरी सीवेज प्रबंधन और नदी पारिस्थितिकी को सुधारने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
O
वन नेशन वन राशन कार्ड: कहीं भी राशन, हर गरीब तक पहुंच
वन नेशन वन राशन कार्ड योजना की शुरुआत अगस्त 2019 में राशन वितरण प्रणाली को पोर्टेबल बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत अब देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लाभार्थी कहीं भी अपने राशन कार्ड के जरिए सब्सिडी वाला अनाज प्राप्त कर सकते हैं, जिससे प्रवासी श्रमिकों को विशेष लाभ मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 195.9 करोड़ से अधिक पोर्टेबिलिटी ट्रांजैक्शन दर्ज किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से 464.7 लाख टन से अधिक खाद्यान्न का वितरण किया गया है। इसके साथ ही यह योजना देश के लगभग 79.8 करोड़ National Food Security Act (NFSA) लाभार्थियों (लगभग 100% कवरेज) को कवर कर रही है।
P
PLI योजना: भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को वैश्विक बढ़त
Production Linked Incentive Scheme की शुरुआत 2021 में 1.97 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 14 प्रमुख सेक्टरों में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, फूड प्रोसेसिंग, सोलर पीवी, ड्रोन, एडवांस बैटरी और स्पेशल्टी स्टील जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों (PIB, 31 दिसंबर 2025 तक) के अनुसार, इस योजना के तहत 836 से अधिक आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 2.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश प्राप्त हुआ है। इसके परिणामस्वरूप 20.41 लाख करोड़ रुपये से अधिक का उत्पादन/बिक्री और 8.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात दर्ज किया गया है। साथ ही 14.39 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। वहीं, 2025–26 तक विभिन्न सेक्टरों में 28,700 करोड़ रुपये से अधिक की PLI प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और ऑटो सेक्टर प्रमुख हैं। हाल के वर्षों में इस योजना से भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवा उद्योग में तेज़ विस्तार हुआ है, जिससे देश का आयात निर्भरता घट रही है और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ रही है।
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Quality Water For Households
जल जीवन मिशन: हर घर तक सुरक्षित पेयजल की ओर तेज प्रगति
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को लाल किले के प्राचीर से जल जीवन मिशन (JJM) की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर में पाइप के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना था। इस मिशन के तहत अब तक उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। 2019 में शुरुआत के समय देश के लगभग 19.27 करोड़ ग्रामीण घरों में से केवल 3.23 करोड़ यानी करीब 17 प्रतिशत घरों में ही नल से जल कनेक्शन उपलब्ध था, जबकि 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में से 15.79–15.82 करोड़ यानी लगभग 81 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। योजना के तहत पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सभी नल कनेक्शनों को उपभोक्ताओं के आधार नंबर से जोड़ा जा रहा है। अब योजना का फोकस केवल नए कनेक्शन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमित, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। सरकार ने इस मिशन को 2028 तक बढ़ा दिया है ताकि शेष बचे ग्रामीण घरों को भी नल से जल उपलब्ध कराया जा सके और “हर घर जल” का लक्ष्य पूर्ण रूप से हासिल किया जा सके।
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Reservation for Women in Parliament
महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023)
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के रूप में जाना जाता है, सितंबर 2023 में संसद से पारित हुआ। यह ऐतिहासिक कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करता है, जिससे महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया है। इस कानून के पारित होने के साथ ही संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को नई गति मिली और लगभग 27 वर्षों से लंबित यह मुद्दा निर्णायक रूप से आगे बढ़ा। नए संसद भवन में आयोजित पहले सत्रों में इस विधेयक को पारित किए जाने को महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा गया। मोदी सरकार इसे 2029 से लागू करने के लिए संसद का विशेष सत्र 16-18 अप्रैल, 2026 को रखा गया था जिसे महिलाओं को 2029 से आरक्षण का लाभ मिल सके। हालांकि विपक्ष के विरोध से संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका। अब इसका व्यावहारिक क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद किया जाएगा, जिसके बाद ही लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रभावी रूप से लागू हो सकेगा।
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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) ने स्वच्छता को जन आंदोलन का रूप देकर ग्रामीण भारत की तस्वीर में व्यापक बदलाव किया है। इस मिशन के तहत 2 अक्टूबर 2019 को देश के सभी गांवों, जिलों और राज्यों द्वारा खुले में शौच मुक्त (ODF) होने की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी, जिससे ग्रामीण भारत को खुले में शौच की समस्या से मुक्ति मिली। 2 अक्टूबर 2014 को मिशन की शुरुआत के समय ग्रामीण स्वच्छता कवरेज केवल 38.7 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर लगभग 100 प्रतिशत हो चुका है। इस अवधि में कुल 11.78 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है, जबकि खुले में शौच मुक्त गांवों की संख्या लगभग 6.30 लाख, जिलों की संख्या 700+ (लगभग सभी जिले) और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 35 हो चुकी है। इसके साथ ही अब मिशन का दूसरा चरण ODF Plus की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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TOPS Programme: ओलंपिक पदकों के लक्ष्य से वैश्विक प्रदर्शन तक
Target Olympic Podium Scheme (TOPS) की शुरुआत सितंबर 2014 में देश के शीर्ष एथलीटों को ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक दिलाने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत खिलाड़ियों को विदेशी प्रशिक्षण, कोचिंग, उपकरण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी और मासिक भत्ता जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। सरकारी आंकड़ों (2025-26 तक उपलब्ध नवीनतम डेटा) के अनुसार, TOPS के तहत वर्तमान में 98 कोर ग्रुप एथलीट और 165 डेवलपमेंट ग्रुप एथलीटों को समर्थन दिया जा रहा है, जिनमें विभिन्न खेलों के शीर्ष और उभरते खिलाड़ी शामिल हैं। इसके अलावा, कोर ग्रुप खिलाड़ियों को प्रति माह 50,000 रुपये और डेवलपमेंट ग्रुप खिलाड़ियों को 25,000 रुपये का भत्ता दिया जाता है, जिससे उनकी तैयारी को मजबूत किया जा सके। हाल के अपडेट (2026 के आसपास) में प्रदर्शन के आधार पर नए खिलाड़ियों को भी योजना में जोड़ा गया है, जिससे TOPS का दायरा लगातार बढ़ रहा है और ओलंपिक तैयारियों को और मजबूती मिल रही है। TOPS के प्रभाव से भारत ने Tokyo Olympics 2020 में 7 पदक और Asian Games 2022 में रिकॉर्ड 107 पदक जीतकर वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
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उज्ज्वला योजना: धुएं से मुक्ति, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बड़ा बदलाव
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत 1 दिसंबर 2025 तक 10.35 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को LPG कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिससे देश में स्वच्छ रसोई ईंधन की पहुंच में व्यापक वृद्धि हुई है। इसके साथ ही सरकार ने FY 2025-26 में 25 लाख अतिरिक्त कनेक्शन जारी करने का निर्णय लिया है, ताकि शेष पात्र परिवारों को भी कवर किया जा सके। उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को किफायती ईंधन उपलब्ध कराने के लिए ₹300 प्रति सिलेंडर (प्रति वर्ष 9 रिफिल तक) की लक्षित सब्सिडी भी दी जा रही है, जिससे LPG उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। इस योजना ने न केवल महिलाओं को धुएं से राहत दी है, बल्कि स्वास्थ्य सुधार, पर्यावरण संरक्षण और जीवन स्तर में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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विश्वकर्मा योजना: करोड़ों आवेदन, लाखों कारीगरों को मिला सहारा
मोदी सरकार ने 17 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को समग्र सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत मोची, दर्जी, नाई, लोहार, सुनार, कुम्हार, राजमिस्त्री, टोकरी/चटाई बनाने वाले सहित 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को टूलकिट के लिए 15,000 रुपये की सहायता, कौशल प्रशिक्षण के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन स्टाइपेंड तथा बिना गारंटी के पहले 1 लाख रुपये और फिर 2 लाख रुपये तक का सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जाता है। 2026 तक इस योजना को व्यापक समर्थन मिला है और 22 जनवरी 2026 तक लगभग 2.72 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि सरकार का लक्ष्य लगभग 30 लाख लाभार्थियों का पंजीकरण करना है। इसके साथ ही योजना के तहत 30 लाख से अधिक कारीगरों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है, जिनमें से लाखों लाभार्थियों को प्रशिक्षण, डिजिटल प्रोत्साहन और ऋण सहायता दी गई है।
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Women in Defense
सेनाओं में बढ़ी नारी शक्ति: 2025 तक 11 हजार से अधिक महिला अधिकारी
भारत ने 75वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2024) पर ‘नारी शक्ति’ का ऐतिहासिक प्रदर्शन किया, जब पहली बार तीनों सेनाओं की संयुक्त महिला टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। आज जल, थल और नभ तीनों सेनाओं में महिलाएं अहम जिम्मेदारियां निभा रही हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा में योगदान दे रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की संख्या बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई है, जो 2014 में लगभग 3,000 थी—यानी बीते एक दशक में तीन गुना से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) में प्रवेश, स्थायी कमीशन और कॉम्बैट भूमिकाओं में अवसरों का विस्तार किया गया है, जिससे भारतीय सेनाओं की संरचना अधिक समावेशी और आधुनिक बन रही है।
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Record CapeX Increase
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में ऐतिहासिक उछाल, रक्षा से लेकर रेल तक फुल स्पीड विकास
भारत सरकार ने पिछले एक दशक में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Capex) में ऐतिहासिक वृद्धि की है, जिसका उद्देश्य देश में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को तेज करना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में कुल सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में लगातार बढ़ते निवेश को दर्शाता है। मोदी सरकार के अनुसार, यह खर्च 2014 के बाद से कई गुना बढ़ा है और अब इसका फोकस केवल सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं बल्कि रणनीतिक क्षेत्रों पर भी है। इस बढ़े हुए कैपेक्स का बड़ा हिस्सा अलग-अलग प्रमुख क्षेत्रों में वितरित किया गया है, जिसमें रक्षा, परिवहन और ग्रामीण/शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। सीमा सड़क संगठन के लिए पूंजीगत आवंटन को बढ़ाकर 2026-27 में 7,394 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे सीमावर्ती सड़कों, सुरंगों और पुलों के निर्माण को गति मिलेगी। रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा पूंजीगत बजट को भी बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक किया गया है, जिसमें आधुनिक हथियार, विमान और नौसैनिक उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा रेलवे, सड़क, जलमार्ग और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है, जिससे देशभर में मल्टी-लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क तैयार हो रहा है। हाल के वर्षों में सरकार का कैपेक्स फोकस आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निजी निवेश को आकर्षित करने पर केंद्रित रहा है। यह रणनीति भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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Yuva (Skill India)
वैश्विक रोजगार अवसरों के लिए भारत की तैयारी
मोदी सरकार द्वारा Skill India Mission का उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य कौशल प्रदान कर उन्हें वैश्विक अवसरों से जोड़ना और आत्मनिर्भर बनाना है। इस मिशन के अंतर्गत युवाओं को प्रशिक्षण, प्रमाणन, भाषा दक्षता और व्यक्तित्व विकास के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए तैयार किया जा रहा है। मिशन की शुरुआत के बाद कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। इस मिशन के तहत 2015–16 में शुरू की गई PMKVY योजना के अंतर्गत 31 दिसंबर 2025 तक 1.64 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया जा चुका है। 2026 तक सरकार ने इस दिशा में बड़ा विस्तार करते हुए देशभर में 30 Skill India International Centres (SIICs) स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज किया है, जिनका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी युवाओं को वैश्विक रोजगार अवसरों से जोड़ना है। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, प्री-डिपार्चर ओरिएंटेशन, भाषा प्रशिक्षण और विदेशी नियोक्ताओं से सीधा जुड़ाव प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही भारत ने कौशल विकास के क्षेत्र में 16 से अधिक देशों के साथ समझौते (MoU) किए हैं, जिससे भारतीय कुशल युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
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Zero Tolerance For Terror & Naxalism
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने (2019) के बाद सुरक्षा हालात में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। सरकारी आंकड़ों और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2019 के बाद आतंकी घटनाओं में लगभग 65–70 प्रतिशत तक कमी आई है। नागरिक मौतों में करीब 80 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई है, जबकि सुरक्षाबलों के शहीद होने की घटनाएं भी लगभग 45–50 प्रतिशत घटी हैं। पथराव की घटनाएं, जो 2010–2016 के दौरान बड़े पैमाने पर होती थीं, अब लगभग समाप्त हो चुकी हैं। 2020 के बाद से ऐसे मामलों में भारी कमी दर्ज की गई है और संगठित विरोध प्रदर्शनों में भी गिरावट आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के ओवरग्राउंड नेटवर्क (OGW) पर सख्ती बढ़ाई है, उनकी संपत्तियों की कुर्की और फंडिंग चैनलों पर कड़ी कार्रवाई जारी है।
मार्च 2026 तक भारत सरकार ने देश में नक्सलवाद को निर्णायक रूप से खत्म करने का लक्ष्य काफी हद तक हासिल कर लिया है, जिसके चलते यह अब सीमित क्षेत्रों तक सिमटकर मुख्यतः कानून-व्यवस्था की समस्या बनकर रह गया है। छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे प्रभावित राज्यों में सुरक्षाबलों की सघन कार्रवाई, नए कैंपों की स्थापना और प्रभावी सरेंडर नीतियों के कारण माओवादी नेतृत्व और उनकी फाइटिंग विंग को बड़ा झटका लगा है। 2015 से 2025 के बीच 10,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि कई शीर्ष कमांडर सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे गए हैं, जिससे संगठन की क्षमता लगातार कमजोर हुई है। 2013 में जहां 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, वहीं 2026 में यह संख्या शून्य हो गई है।









