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महिला विरोधी राहुल गांधी : मुस्लिम महिलाओं से गद्दारी, अनदेखी से फूटा गुस्सा! पूछा- हमारे हकों की बात कब करेंगे?

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पुणे में आयोजित ‘छात्राओं की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति और महिला अधिकारों पर दिए गए बयान को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक राहुल गांधी के ‘झूठ की गूंंज’ सुनाई दे रही है। एक तरफ राहुल गांधी ने अपने संबोधन में हिन्दू महिलाओं को गलत तरीके से पेश किया, जिससे नाराज होकर सामाजिक संगठनों ने उन पर तीखे आरोप लगाए हैं, वहीं राहुल गांधी ने स्कूलों में हिजाब (स्कार्फ) पहनने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर चुप्पी साध रखी है। इससे नाराज मुस्लिम महिलाओं ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी अनदेखी की वजह से उनका गुस्सा फूट पड़ा है। अब वो सड़क पर आकर राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं और सवाल कर रही हैं कि हमारे हकों की बात कब करोंगे? 

मुस्लिम महिलाओं को लेकर राहुल गांधी का दोगलापन
दिल्ली की सड़क पर बैठकर नारेबाजी कर रहीं ये मुस्लिम महिलाएं राहुल गांधी के दोहरे चरित्र की पोल खोल रही हैं। वो दुनिया को बता रही हैं कि राहुल गांधी महिलाओं को वोट बैंक के नजरिए से देखते हैं और उनके हकों को लेकर दोहरे मापदंड अपनाते हैं। दरअसल, राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित ‘छात्राओं की गूंज’ कार्यक्रम में आरोप लगाया था कि मनुस्मृति जैसे महान ग्रंथ से भारत में महिलाओं को दबाने का माइंडसेट आता है। उन्होंने हिन्दू महिलाओं से पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने (“Smash the Patriarchy”) और अपनी स्वतंत्रता व अधिकारों के लिए खुलकर आवाज उठाने का आह्वान किया। राहुल गांधी ने कहा, माइंडसेट क्या है, लड़की की एक जगह है, वो पिजड़े में बंद होनी चाहिए। उसका कंट्रोल रहना चाहिए। उसको काम नहीं करना चाहिए। ऐसा हिन्दुस्तान हम नहीं चाहते हैं। हम न्याय चाहते हैं। सबकी रिस्पेक्ट होनी चाहिए। लड़कों की होनी चाहिए, लड़कियों की भी होनी चाहिए। ये जो आपके दिल में डर है। इसको जल्दी से जल्दी मिटाना देना चाहिए। हमेशा के लिए।”

राहुल गांधी के दोगलापन के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं की गूंज
राहुल गांधी के इस बयान के बाद मुस्लिम महिलाएं भी अब जाग उठी हैं। उनकी गूंज अब दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय के बाहर सुनाई दे रही है। कुछ मुस्लिम महिलाओं ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि वे महिला अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन जब धरातल पर कुछ करने या महिला आरक्षण का समर्थन करने की बात आती है, तो उनके कदम पीछे हट जाते हैं। प्रदर्शनकारी मुस्लिम महिलाओं ने नारेबाजी कर बता दिया कि वो अब आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है। उनके साथ सदियों से हो रहे भेदभाव पर राहुल गांधी का दोहरा चरित्र दिखाई दे रहा है।    

राहुल गांधी हम लोगों के बराबर सम्मान की बात करें- मुस्लिम महिला
राहुल गांधी केवल हिंदू महिलाओं की बात करते हैं, लेकिन मुस्लिम महिलाओं से जुड़े वास्तविक और गंभीर मुद्दों जैसे हलाला, तीन तलाक, हिजाब की अनिवार्यता और पर्सनल लॉ पर चुप्पी साध लेते हैं। एक मुस्लिम महिला ने कहा, “कांग्रेस मुख्यालय के सामने प्रदर्शन करने का एक ही मकसद है कि हम चाहते हैं कि राहुल गांधी हम लोगों के सम्मान की बात करें। उनसे पूछे कि कर्नाटक में आपकी सरकार है, लेकिन एक भी महिला मंत्री नहीं है। आप लेकर चलते हैं कि मैं सबके साथ हूं। हम लोग मुस्लिम समाज की महिलाएं हैं, देश से अलग नहीं है। हम भी देश में ही रहते हैं। हिन्दुस्तान हमारा भी है। सबका हिन्दुस्तान है। हम कहना चाहते हैं कि तीन तलाक का गलत मकसद नहीं लें। जब से तीन तलाक का कानून आया है, हम लोग मजबूत महसूस कर रहे हैं।”

एक बार मुस्लिम महिलाओं का दर्द सुनो राहुल गांधी- मुस्लिम महिला
अब मुस्लिम महिलाएं राहुल गांधी से 70 सालों का हिसाब मांग रही हैं। एक मुस्लिम महिला ने सवाल किया, “70 साल से महिलओं को आपने पूछा नहीं, 70 सालों से आपने क्या किया ? जब तीन तलाक देकर मुस्लिम महिलाओं को यू छोड़ दिया जाता था, तब राहुल गांधी कहां थे? आज हमें आरक्षण की बात चल रही हैं तो मुद्दा उठा रहे हों। आप कपड़ों की बात करते हों, मुस्लिम महिलाओं के बारे में सोचो। राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ेगी 33 प्रतिशत में…उसमें क्यों नहीं बोल रहे हैं। कर्नाटक में कोई मंत्री क्यों नहीं है ? क्यों नहीं इसके बारे में बात कर रहे हों? आप बात करते हो कपड़े की, आप बात करते हो आरक्षण की, क्यों बात करते हो भाई, आप हमारी भी बात करके देखो। एक बार हम महिलाओं का दर्द सुनो। हमारे अंदर है क्या है, नहीं है ?”

राहुल के पास कांग्रेस मुख्यालय पहुंची महिलाओं से मिलने का वक्त नहीं
कांग्रेस मुख्यालय के बार राहुल गांधी ‘हाय-हाय’, ‘मुर्दाबाद- मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहीं ये महिलाएं कह रही हैं कि महिलाओं के हक की बात कीजिए। महिलाओं की हुंकार ये बता रही हैं कि अब उनके सब्र का बांध टूट चुका है। वो चाहती है कि राहुल गांधी मुस्लिम तुष्टीकरण छोड़कर उनके हक की बात करें। मुस्लिम समाज में उनके साथ हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाएं। लेकिन राहुल गांधी मुस्लिम वोट बैंक की वजह से आंखों पर पर्दा डाले हुए हैं। उन्हें मुस्लिम महिलाओं की दर्द भरी आवाज सुनाई नहीं दे रही है। शहर दर शहर घूम कर राहुल गांधी छात्रों की आवाज सुन रहे हैं, लेकिन उनके पास इन महिलाओं की बात सुनने का वक्त नहीं है। यहां तक कि कांग्रेस मुख्यालय के सामने पहुंची महिलाओं से मिलने का वक्त नहीं है।

मोदी जी ने जितना हमें समर्थन दिया, उतना किसी ने नहीं दिया- मुस्लिम महिला
मुस्लिम महिलाओं में 70 साल से दबा हुआ आक्रोश ज्वालामुखी बनकर फूट रहा है। मोदी सरकार में तीन तलाक के डर से मिली मुक्ति ने उन्हें अपनी आवाज उठाने की हिम्मत दी है। मोदी सरकार के महिला सशक्तीकरण को लेकर किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है कि आज मुस्लिम महिलाएं खुलकर अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। मुस्लिम महिलाएं राहुल गांधी से सवाल कर रही हैं कि मुस्लिम समाज की पितृसत्तात्मक प्रथाओं पर चुप्पी क्यों? कांग्रेस ने तीन तलाक कानून का विरोध क्यों किया था, जबकि आज इसके कारण मुस्लिम महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं? प्रदर्शन में आई महिलाओं ने बताया कि मोदी जी ने जितना हम लोगों को समर्थन दिया, उतना किसी ने नहीं दिया। हर लड़कियों को, हर औरतों को, उन्होंने बहुत ऊंचा मुकाम दिया है। हम जानना चाहते हैं कि राहुल गांधी ने क्या किया ? वहीं मोदी जी चाहते हैं कि सभी लड़कियों और औरतों को अच्छा मिले। वो आगे बढ़े। राहुल गांधी से नाराजगी है कि उन्होंने कुछ भी नहीं किया। उनकी सरकार ने कुछ भी नहीं किया।

आइए देखते हैं आजादी के बाद पिछले 80 सालों में कांग्रेस ने मुस्लिम वोट बैंक के लिए कब कब मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से समझौता किया है…

हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर राहुल गांधी की चुप्पी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में यूनिफॉर्म के साथ हिजाब (स्कार्फ) पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक हिस्सा नहीं है और शिक्षण संस्थानों में अनुशासन व समानता के लिए ड्रेस कोड सर्वोपरि है। यह निर्णय 21 अगस्त 2026 को जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई ठोस सबूत या सामग्री पेश नहीं कर पाई जिससे यह साबित हो सके कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लामिक आस्था की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और रक्षाबंधन वाले विज्ञापन में अभिनेत्री कृति सेनन के कपड़े का समर्थन करने वाले राहुल गांधी इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर मौन है। हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन नहीं करना बताता है कि राहुल गांधी मुस्लिम महिलाओं को पिजड़े में बंद देखना चाहते हैं। 

पवन खेड़ा- हिजाब पर मुस्लिम विद्वान करेंगे फैसला
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने मंगलवार को कहा कि हर महिला अपनी पसंद के कपड़े पहनने के लिए स्वतंत्र है और उसे हिजाब, घूंघट या कोई अन्य परिधान चुनने का पूरा अधिकार है।खेड़ा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि सामाजिक-राजनीतिक दृष्टिकोण से कांग्रेस महिलाओं के निर्णय लेने के अधिकार के लिए मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा, ”हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं, यह धार्मिक विद्वानों को तय करना है।” खेड़ा ने कहा कि हर महिला को, चाहे वह किसी भी जाति, वर्ग या धर्म से हो, अपनी पसंद के अनुसार पहनावा चुनने का अधिकार है।

बहुविवाह और निकाह हलाला पर प्रतिबंध लगाने वाले UCC का विरोध
कांग्रेस मुस्लिम महिलाओं को परंपरागत कुरीतियों से मुक्ति दिलाने के प्रयासों का विरोध करती रही है। बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने वाले कानूनों और समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध किया है। कांग्रेस ने हाल ही में राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश) में लाए गए समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयकों का पाश कराने में अड़ंगा लगाया, जिसमें बहुविवाह और निकाह हलाला पर रोक का प्रावधान है। पार्टी ने इसे राजनीतिक एजेंडा करार दिया। जब बिल पेश किया जा रहा था तब कांग्रेस ने इसे लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया। विधेयक का विरोध करने के लिए भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील सदन में काले कपड़े पहनकर पहुंचे थे। आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों का आरोप है कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति के तहत महिला अधिकारों से जुड़े ऐसे सुधारों का विरोध कर रही है।

वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी का कांग्रेस ने किया विरोध
वक्फ बोर्ड में महिलाओं और गैर-मुस्लिम सदस्यों की एंट्री को लेकर लाए गए संशोधनों और उनके प्रावधानों का कुछ मुस्लिम संगठनों और कांग्रेस ने विरोध किया था। लेकिन वक्फ बोर्ड की मनमानियों पर लगाम लगाने और उसमें महिलाओं की भागीदारी का मुस्लिम महिलाओं ने समर्थन किया था। हालांकि वक्फ बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व पहले भी रहा है, लेकिन नए संशोधनों के तहत महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी और पारिवारिक वक्फ (वक्फ-अलल-औलाद) में उत्तराधिकार के प्रावधानों को लेकर कुछ हलकों में यह आशंका जताई जा रही है कि यह वक्फ की मूल अवधारणा को प्रभावित कर सकता है। सरकार ने संशोधन का समर्थन करते हुए कहा कि इससे बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं, पसमांदा (पिछड़े) मुसलमानों और अन्य उपेक्षित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे जमीनी स्तर पर जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सकेगा।

तीन तलाक पर कांग्रेस ने लगाया था अड़ंगा, महिलाओं का भड़का गुस्सा
वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने और 2019 में संसद द्वारा कानून बनने के दौरान, कांग्रेस ने राजनीतिक नफा-नुकसान के कारण इस बिल के कई प्रावधानों का विरोध किया था। ट्रिपल तलाक कांग्रेस के लिए किस कदर राजनीति का मुद्दा रही इसका सबूत ये है कि ट्रिपल तलाक के हक में कांग्रेस के नेता और दिग्गज वकील ने इसके पक्ष में अदालती लड़ाई लड़ी। मोदी सरकार का विरोध करने के नाम पर कपिल सिब्बल ने तीन तलाक और हलाला की तुलना भगवान श्रीराम के अयोध्या में जन्म से कर डाली। यानी मुस्लिम महिलाओं की पीड़ा उन्हें नहीं दिखी और वे राजनीति करते रहे, लेकिन मोदी सरकार ने सख्त कदम उठाए और मुस्लिम महिलाओं के दुख दर्द के साथ खड़ी रही। 

”होते रहना चाहिए महिलाओं का खतना’’
10 जुलाई, 2018 को कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में खतना के पक्ष में दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि ‘खतना’ शरिया का हिस्सा है, और इसे रोका जाना मजहब में दखल होगा। दरअसल कांग्रेस इसे धर्म से जोड़कर चंद वोटों के लिए करोड़ों महिलाओं के आत्मसम्मान से खिलवाड़ कर रही है। यह केवल विडंबना नहीं है कि सिंघवी ने इस बर्बर कुप्रथा का बचाव किया। बल्कि कांग्रेस ने फिर साबित किया कि वह मुसलमानों का वोट पाने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकती है। उसे इस बात की कतई चिंता नहीं कि मुस्लिम महिलाएं किस दंश से गुजरती हैं। हालांकि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया कि ‘खतना’ प्रथा पर बैन लगाने वाली याचिका का वह समर्थन करती है।

शाह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा
कांग्रेस ने 1986 में शाहबानों प्रकरण में जो रुख अपनाया था वो मुस्लिम महिलाओं की तकलीफें बढ़ाने वाला था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो के फेवर में अपना फैसला देते हुए पति को गुजारा भत्ता देने की बात कही थी, लेकिन शाहबानो के पति ने कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पर्सलन लॉ में दखल करार देते हुए भत्ता देने से मना कर दिया। जिसके बाद इस विवाद में मुस्लिम पर्सलन लॉ बोर्ड भी कूद गया। यह विवाद इतना बढ़ा कि मामले ने राजनैतिक रंग ले लिया। तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने कांग्रेस के अपने परंपरागत अल्पसंख्यक वोट बैंक को बचाने के लिए पर्सलन लॉ में कोर्ट के दखल को न सिर्फ गलत ठहराया, बल्कि अपनी बहुमत वाली सरकार से इस बारे में संसद से एक कानून भी पास करा लिया।

 

 

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