जब-जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक और आर्थिक शक्ति का परचम लहराता है, तब-तब देशविरोधी डीप स्टेट, वामपंथी तंत्र और विपक्ष का टूलकिट सिंडिकेट अचानक सक्रिय हो जाता है। अब जब राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आगामी 12 और 13 सितंबर 2026 को ऐतिहासिक 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, तब दुनिया के सामने भारत की छवि बिगाड़ने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के अभिजीत दीपके ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक गैर-कानूनी मार्च निकालने का नया षड्यंत्र रचा है।
कब तक खामोश रहेगा देश? संविधान की आड़ में दंगे की साजिश!
क्या 12 सितंबर को दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले देश को बदनाम करने का टूलकिट एक्टिव हो गया है? 5 सितंबर को सीजेपी के अभिजीत दीपके ने इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च का ऐलान किया है। इसे अपना ‘लोकतांत्रिक अधिकार’ बताकर वह खुलेआम पुलिस की कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को एक उपद्रवी की भाषा में चुनौती देते हुए अभिजीत दीपके खुलेआम कानून तोड़ने का ऐलान कर रहा है।
🚨 दिल्ली पुलिस को इस बार सावधान रहना चाहिए।
अजीत अंजुम ने अभिजीत दीपके को साफ बता दिया कि 5 सितंबर को इंडिया गेट से प्रस्तावित CJP मार्च वाले रूट पर धारा 163 लग चुकी है।
इसके बावजूद दीपके का जवाब है — “हम वही रूट लेंगे। पुलिस पीटना चाहे तो पीटे।”
जब पाबंदी पहले से पता हो और… pic.twitter.com/7oIbCrIXm2
— Manoj Singh (@PracticalSpy) August 26, 2026
वैश्विक साख बिगाड़ने की अंतरराष्ट्रीय साजिश
भारत की अध्यक्षता में होने जा रहा यह ब्रिक्स सम्मेलन दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी और वैश्विक जीडीपी के 32 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। जब दुनिया के शीर्ष नेता और बड़े निवेशक दिल्ली पहुंचने वाले हैं, ठीक उसी समय दिल्ली की सड़कों पर उपद्रव खड़ा कर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में नकारात्मक सुर्खियां बनवाना ही इस टूलकिट का मुख्य लक्ष्य है, ताकि देश में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और भारत की मजबूत साख पर चोट की जा सके।
विदेशी फंडिंग और भारत-विरोधी डीप स्टेट का खतरनाक गठजोड़
इस तरह के अचानक खड़े किए जाने वाले विरोध मार्च और हाई-टेक सोशल मीडिया कैंपेन के पीछे की फंडिंग पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। बिना किसी ठोस जनाधार वाले संगठन के पास दिल्ली के दिल में इतना बड़ा तमाशा खड़ा करने के संसाधन कहां से आते हैं? साफ है कि विदेशी धरती पर बैठा भारत-विरोधी डीप स्टेट और जॉर्ज सोरोस जैसी ताकतें भारत के आर्थिक विकास से खौफजदा हैं। भारत को आंतरिक रूप से अस्थिर करने और देश में अराजकता का माहौल बनाए रखने के लिए ऐसी कठपुतलियों को मोहरा बनाकर विदेशी फंड का खुला खेल खेला जा रहा है।
फिर देश तोड़ने की तैयारी, एक्टिव हुआ ‘टूलकिट’ गैंग#umarkhalid #sharzilimam #abhijitdipke pic.twitter.com/8TS2PpAtvD
— PerformIndia (@performindianew) August 27, 2026
तीसरी बार मोदी सरकार बनने की हताशा और जनादेश का अपमान
लगातार तीसरी बार देश की जनता द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रचंड विश्वास दिए जाने से विपक्ष का पूरा इकोसिस्टम गहरे अवसाद और खीझ में है। लोकतांत्रिक तरीके से चुनावी मैदान में बार-बार मात खाने के बाद अब यह हताश गिरोह जनता के जनादेश को पचा नहीं पा रहा है। चुनावी प्रक्रिया से चुनी हुई मजबूत सरकार को सामान्य रूप से काम न करने देना, हर अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर रोड़े अटकाना और सड़कों पर उपद्रव मचाना ही इनकी इस हताशा का एकमात्र पैंतरा बनकर रह गया है।
माननीय श्री @narendramodi जी ने आज के ही दिन तीसरी बार लगातार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।
मोदी जी के नेतृत्व में इन 12 वर्षों में देश ने पहली बार गरीब कल्याण और अभूतपूर्व विकास को समांतर रूप से चरितार्थ होते देखा है।@AmitShah ji #12YearsOfSeva pic.twitter.com/NaGzJfalpk
— Rajul Pandya (@irajulpandya) June 9, 2026
2020 में ट्रंप के भारत दौरे पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़काए
साल 2020 में जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ऐतिहासिक दौरे पर भारत आए थे, तब पूरी दुनिया की निगाहें नई दिल्ली पर टिकी थीं। ठीक उसी समय देशविरोधी ताकतों और वामपंथी सिंडिकेट ने अपनी टूलकिट को सक्रिय किया। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध का बहाना बनाकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में अचानक सुनियोजित दंगे भड़का दिए गए। घरों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्ति को आग के हवाले किया गया ताकि विदेशी मीडिया में भारत की छवि एक अशांत और असहिष्णु देश के तौर पर पेश की जा सके। यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख को सीधा नुकसान पहुंचाने का पहला बड़ा षड्यंत्र था।
Have spent part of day in some of the worst riot-affected areas of north east delhi, neighbourhoods of Chandbagh, Moonga Nagar, Mustafabad—some mixed neighbourhoods. The extent of the damage is far worse than expected. pic.twitter.com/4HV1IGekbs
— Anubha Bhonsle (@anubhabhonsle) February 26, 2020
2021 में किसान आंदोलन की आड़ में लाल किले पर उपद्रव
साल 2021 के गणतंत्र दिवस पर देश जब अपना राष्ट्रीय पर्व मना रहा था, तब आंदोलन की आड़ में अराजकता का सबसे शर्मनाक चेहरा सामने आया। तथाकथित किसान ट्रैक्टर रैली के नाम पर दिल्ली की सीमाओं को तोड़कर उपद्रवी लाल किले की प्राचीर तक जा पहुंचे। सुरक्षाबलों और पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले किए गए, बैरिकेड्स तोड़े गए और उस पवित्र ऐतिहासिक स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान का खुला दुस्साहस किया गया। इस पूरी साजिश का मकसद सिर्फ एक था—देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व के दिन पूरी दुनिया के सामने भारत की संप्रभुता, कानून-व्यवस्था और लोकतंत्र का उपहास उड़ाना।
Congressi Goons in the name of Farmers attacking Delhi Police pic.twitter.com/PjjwhK4EBa
— Ankur Singh (@AnkurSingh) January 26, 2021
2023 में जी-20 के दौरान फेक नैरेटिव गढ़े गए
साल 2023 में जब भारत जी-20 की ऐतिहासिक अध्यक्षता कर रहा था और दुनिया के शीर्ष नेता नई दिल्ली में मौजूद थे, तब विपक्षी तंत्र और टूलकिट गैंग ने सुनियोजित तरीके से भारत विरोधी फेक नैरेटिव गढ़े। विदेशी मीडिया के सामने भारत को शर्मिंदा करने के लिए यह झूठा नैरेटिव चलाया गया कि ‘गरीबी छिपाने के लिए झुग्गियों को पर्दों और ग्रीन शीट से ढक दिया गया है’। इसी तरह, आयोजन स्थल भारत मंडपम के बाहर भारी बारिश के बाद पानी भरने का भ्रामक वीडियो वायरल कर इसे ‘करोड़ों के इंफ्रास्ट्रक्चर की विफलता’ साबित करने का दुष्प्रचार किया गया, जबकि वह केवल तात्कालिक ड्रेनेज ओवरफ्लो था जिसे कुछ ही मिनटों में साफ कर लिया गया था। इसके अलावा सुरक्षा के सामान्य प्रबंधों को ‘अघोषित लॉकडाउन’ और ‘आपातकाल’ बताकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लोकतंत्र को बदनाम करने की पूरी कोशिश की गई।
2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले पुराना ड्रामा दोहराने की तैयारी
अब साल 2026 में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ऐतिहासिक 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। विदेशी मेहमानों और वैश्विक नेताओं के आगमन से ठीक एक हफ्ते पहले, 5 सितंबर की तारीख चुनकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के जरिए फिर वही पुराना उपद्रवी पैंतरा चला जा रहा है। बिना अनुमति इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने की धमकी देकर धारा 163 को खुलेआम चुनौती दी जा रही है। मकसद साफ है—समिट से ऐन पहले राजधानी में टकराव का माहौल बनाना, झड़पें दिखाना और दुनिया के सामने देश की छवि बिगाड़ने का वही पुराना और आजमाया हुआ ड्रामा दोहराना।

पर्दे के पीछे से मुख्य विपक्षी दलों का साइलेंट बैकअप और प्रॉक्सी वॉर
इस पूरे बवाल में तथाकथित कार्यकर्ता केवल एक मुखौटा हैं, जबकि असली पटकथा हताश मुख्य विपक्षी दलों के कमरों में लिखी जा रही है। जब बड़े राजनीतिक दल सीधे तौर पर देशहित के खिलाफ सड़कों पर उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, तो वे ऐसे अज्ञात संगठनों को आगे कर ‘प्रॉक्सी वॉर’ छेड़ते हैं। यदि हिंसा और अराजकता भड़कती है तो ये दल तुरंत पल्ला झाड़ लेते हैं, और यदि किसी मुद्दे पर राजनीतिक हवा बनती है तो उसका मलाईदार क्रेडिट लेने सबसे आगे आ जाते हैं। यह विपक्ष की सबसे कायरतापूर्ण रणनीति है।
सुरक्षाबलों और दिल्ली पुलिस के जवानों का मनोबल गिराने की साजिश
इस सुनियोजित मार्च का सीधा निशाना दिल्ली पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान हैं। पुलिस को उकसाना, जवानों से धक्का-मुक्की करना और उन्हें हिंसक प्रतिक्रिया के लिए विवश करना इस टूलकिट का प्रमुख हिस्सा है। यदि पुलिस कानून बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाती है तो जवानों को ‘बर्बर’ और ‘अत्याचारी’ बताया जाता है, और यदि वे संयम बरतें तो उन्हें ‘कमजोर’ करार दिया जाता है। इस दोहरे वार के जरिए दिन-रात देश की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को तोड़ने की गहरी साजिश रची जा रही है।
कानून और संविधान को सीधी चुनौती: उकसावे वाला भड़काऊ बयान
इंडिया गेट, कर्तव्य पथ, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय का इलाका देश की सुरक्षा का केंद्र है, जहां सुरक्षा कारणों से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 पहले से प्रभावी है। इसके बावजूद खुलेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने की घोषणा की जा रही है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में सीजेपी के अभिजीत दीपके बिना किसी झिझक के खुलेआम पुलिस और कानून को ललकारते हुए कह रहे हैं—”डेमोक्रेटिक राइट है… हमारी डेमोक्रेटिक राइट है… हम 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर तक प्रोटेस्ट मार्च निकालेंगे। हमें किसी पुलिस की परमिशन की जरूरत नहीं है, दिल्ली पुलिस को जो करना है करे, जिसको रोकना है रोके, हम बिना परमिशन के मार्च निकाल कर रहेंगे।” यह बयान सीधे तौर पर दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को खुली चुनौती देने, सुरक्षाबलों को उकसाने और जानबूझकर टकराव की हिंसक स्थिति पैदा करने की मंशा को उजागर करता है।
सावधान दिल्ली! 5 सितंबर को फिर बवाल की साज़िश…#cjp #cjpprotest #cjpprotestdelhi #abhijitdipke pic.twitter.com/FFBsu45tX0
— PerformIndia (@performindianew) August 27, 2026
शहरी नक्सलवाद और वैचारिक दिवालियापन
यह पूरा इकोसिस्टम सकारात्मक और रचनात्मक राजनीति से पूरी तरह कट चुका है। विपक्ष और उसके सहयोगी संगठनों के पास देश के विकास के लिए न कोई ठोस विजन है और न ही लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करने की क्षमता। इसलिए वे केवल व्यवधान, अराजकता और ‘शहरी नक्सलवादी’ मानसिकता के सहारे अपनी डूबती राजनीतिक नैया को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जब चुनावी मैदान में जनता इन्हें बार-बार नकार देती है, तब यह गिरोह सड़कों पर उपद्रव मचाकर समानांतर सत्ता चलाने का खतरनाक खेल शुरू कर देता है।
दिल्ली के व्यापार, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर सीधा आघात
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से दिल्ली के होटल उद्योग, पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजारों को भारी आर्थिक उछाल की उम्मीद होती है। ऐसे समय में सड़कों को जाम करने और उपद्रव फैलाने की धमकियों से विदेशी प्रतिनिधियों और पर्यटकों में असुरक्षा का संदेश जाता है। इसका सीधा और घातक असर दिल्ली के व्यापारियों, रेस्टोरेंट संचालकों, कैब चालकों और छोटे दुकानदारों की आजीविका पर पड़ता है, जिनकी कमाई इस अराजक राजनीति की भेंट चढ़ जाती है।
‘धरना संस्कृति’ से आम जनता में भारी आक्रोश
दिल्ली और देश की जनता अब इस बात से भली-भांति परिचित हो चुकी है कि किस तरह मुट्ठी भर लोग अपने स्वार्थ के लिए करोड़ों लोगों की दिनचर्या को बंधक बना लेते हैं। आज का युवा, कामकाजी वर्ग और व्यापारी केवल विकास, सुगमता और स्थिरता चाहते हैं। देश अब इस नकारात्मक ‘धरना-प्रदर्शन संस्कृति’ और सड़कों पर लगने वाले जाम से पूरी तरह ऊब चुका है और ऐसी अराजक हरकतों को सिरे से खारिज कर रहा है।
लोकतंत्र के नाम पर अराजक तानाशाही का मुखौटा
हाथ में संविधान की प्रति लेकर चलना और दूसरी तरफ प्रशासनिक नियमों, अदालती दिशा-निर्देशों और पुलिस के आदेशों को खुलेआम धता बताना—यह इस गिरोह का दोहरा और खतरनाक चरित्र है। जब कानून का डर खत्म करने और बिना अनुमति के अति-संवेदनशील इलाकों में घुसने की बात की जाती है, तो यह कोई लोकतांत्रिक अधिकार नहीं बल्कि समाज को अशांति की ओर धकेलने वाली अराजक तानाशाही है।
आम जनता पर आफत और टैक्सपेयर्स के पैसों की बर्बादी
इस तरह के प्रायोजित और गैर-कानूनी प्रदर्शनों की सबसे बड़ी मार दिल्ली के लाखों आम नौकरीपेशा नागरिकों, रोजमर्रा की कमाई करने वाले मजदूरों, स्कूली बच्चों और आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं पर पड़ती है। अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए पूरी दिल्ली को बंधक बना लेना इस वामपंथी और विपक्षी इकोसिस्टम की पुरानी आदत बन चुकी है। सड़कों की अघोषित नाकाबंदी से सिर्फ जनजीवन ही अस्त-व्यस्त नहीं होता, बल्कि उपद्रवियों को रोकने के लिए अर्धसैनिक बलों और पुलिस की भारी तैनाती, बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजामों में देश के ईमानदार टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं। यह आम आदमी के पैसों की खुली बर्बादी और उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
विक्टिम कार्ड और डिजिटल प्रोपेगैंडा का षड्यंत्र
सड़कों पर होने वाले इस पूरे ड्रामे का दूसरा और सबसे खतरनाक चरण ‘डिजिटल वॉरफेयर’ और टूलकिट प्रोपेगैंडा है। इनकी कार्यप्रणाली बिल्कुल साफ है—पहले जानबूझकर धारा 163 का उल्लंघन करना, पुलिस को उकसाना और सुरक्षाबलों के साथ जबरन हिंसक टकराव पैदा करना। इसके बाद उसी टकराव की छोटी और भड़काऊ वीडियो क्लिप्स काटकर सोशल मीडिया पर अपनी विदेशी बॉट आर्मी और फेक न्यूज फैक्ट्रियों के जरिए वायरल कर देना। इसके तुरंत बाद विदेशी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘भारत में लोकतंत्र खतरे में है’ का रोना रोते हुए झूठा विक्टिम कार्ड खेलना ही इस टूलकिट गिरोह का असली और घिनौना मकसद है।
विकसित भारत के संकल्प के आगे पस्त होता हताश विपक्ष
आज एक तरफ जहां समूचा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में विकास, आत्मनिर्भरता और 2047 के ‘विकसित भारत’ के विराट संकल्प के साथ तेज गति से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ लगातार अपनी राजनीतिक जमीन खो चुका हताश और निराश विपक्ष इस प्रगति से बुरी तरह घबरा गया है। यह टूलकिट सिंडिकेट और अर्बन नक्सल गिरोह किसी भी कीमत पर देश की विकास यात्रा को पटरी से उतारने और भारत की वैश्विक साख को दागदार करने की साजिशों में जुटा है। लेकिन देश की जागरूक जनता अब इनके इस देशविरोधी टूलकिट, दोहरे चरित्र और अराजक मंसूबों को भली-भांति पहचान चुकी है। भारत अब रुकने वाला नहीं है, और विकास के इस विजय रथ को ऐसी कोई भी खोखली साजिश डिगा नहीं सकती।










