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मध्य प्रदेश कांग्रेस में कलह : राज्यसभा की रेस में शामिल अरुण यादव बुधनी चुनाव हारने की मांग रहे ‘कीमत’, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का पद-लिप्सा का वीडियो वायरल

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पुत्र और कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल का वायरल हो रहा वीडियो भले ही 38 सेकंड का हो, लेकिन यह कांग्रेस में कलह, निराशा, पद पाने की लिप्सा और राज्यसभा चुनाव में जोड़-तोड़ की राजनीति की बहुत अच्छे से पोल खोल रहा है। वायरल वीडियो में अजय सिंह यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि कोई पद मिले तो वो अपनी सक्रियता बढ़ाएं, नहीं तो कांग्रेस में तो ऐसे ही चलता रहेगा। एमपी के कांग्रेसी जिस पद की बात कर रहे हैं, वह राज्यसभा की दो माह बाद खाली होने जा रही सीट है और उनकी अंदरूनी पीड़ा दर्शाने वाला वीडियो मैहर में हाल ही में हुई पब्लिक मीटिंग का है। दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव,  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बुधनी चुनाव में हारने की ‘कीमत’ सोनिया गांधी से मांगने में लगे हैं।राज्यसभा की सीट मिलेगी या नहीं, लेकिन उसके लिए गुटबाजी अभी से तेज
मध्य प्रदेश में जून माह में राज्य सभा की तीन सीटें खाली होंगी। इनमें से कांग्रेस के हाथ एक सीट आएगी या नहीं, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इस संभावित सीट की खातिर कांग्रेस में अंतर्कलह तेज हो रही है। उसी सीट को पाने के लिए कांग्रेस में अंदरूनी कलह का खेल अभी से शुरू हो गया है। कांग्रेस के दिग्गज विभिन्न तरीके से अपनी गोटियां फिट करने में लगे हैं, ताकि राज्यसभा की सीट मिल जाए। यह अलग बात है कि इससे पहले कांग्रेस की ऐसी ही कलह के चलते इतने सालों के बाद मिली सत्ता से भी हाथ धो बैठे थे।अजय-अरुण के ‘दावे’ के चलते कांग्रेस में फिर उभरी अंदरूनी कलह
हालांकि मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में पहले से ही हलचल मची हुई थी। यहां, कमलनाथ, दिग्विजय, अजय सिंह आदि कई धड़े हैं, लेकिन इस वीडियो के वायरल होने के बाद गुटबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। इसकी वजह आगामी महीनों में खाली हो रहीं राज्यसभा की सीटें हैं। फिलहाल इस रेस में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहै है। दोनों ही नेता अपनी-अपनी तरफ से दावे कर रहे हैं कि उनको राज्यसभा सीट का उम्मीदवार इसलिए बनाया जाना चाहिए।

कोई पद मिले तो तभी बढ़ाऊंगा सक्रियता, नहीं तो कांग्रेस में ऐसे ही चलेगा
पिछले दिनों सतना जिले के मैहर में कांग्रेस ने स्थानीय समस्याओं को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया था। इस पब्लिक मीटिंग में विंध्य क्षेत्र के क्षत्रप नेता की पीड़ा सामने आई। उन्होंने कहा कि बिना किसी पद या जिम्मेदारी के कैसे काम हो सकता है? पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने सक्रियता बढ़ाने के लिए खुलकर दायित्व (पद) की डिमांड रखी। 38 सेकंड के वायरल वीडियो में अजय सिंह यह कहते नजर आ रहे हैं कि कोई पद मिले तो वह और अपनी सक्रियता बढ़ाएं। नहीं तो पार्टी में तो ऐसे ही चलता रहेगा। मैहर की सभा में अजय सिंह की इन बातों को आगामी दिनों में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है।

जून में एमजे अकबर, उइके और विवेक की खाली हो रहीं राज्यसभा सीटें
मध्यप्रदेश में जून में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इन सीटों में से दो भारतीय जनता पार्टी और एक कांग्रेस के खाते में हैं। बीजेपी की ओर से एमजे अकबर और सम्पतिया उइके एवं कांग्रेस की ओर से विवेक तन्खा सीट खाली करेंगे। मौजूदा विधानसभा का बहुमत देखते हुए बीजेपी को दो सीटें मिलना तय है, तीसरी सीट के लिए ही सारी रस्साकशी मची है। कांग्रेस नेताओं को लगता है कि यह उनके खाते में जाने की संभावना है। इसी तीसरी सीट के लिए अजय सिंह और अरुण यादव के बीच में आपसी कलह तेज हो रही है।

अरुण यादव ने सोनिया गांधी से मांगी शिवराज से हारने की ‘कीमत़’
इसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव भी राज्यसभा में जाने के लिए सक्रियता बढ़ाने में लगे हैं। पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली जाकर मुलाकात कर अपनी पैरवी की। बताते हैं कि उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान का वादा भी याद दिलाया। तब राहुल गांधी ने अरुण यादव को शिवराज के सामने बुधनी से चुनाव लड़ने के लिए कहा था। वे चुनाव तो लड़े, मगर हार गए। अब यादव उस वादे को पूरा करने के लिए आलाकमान पर दबाव बना रहे हैं, जिसपर राहुल गांधी ने बदले में राज्य सभा भेजने के लिए कहा था।

अजय सिंह और अरुण यादव दोनों ही कांग्रेस नेता रह चुके हैं मंत्री
जहां तक कांग्रेस नेता अजय सिंह की बात है तो उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव में अपनी पुश्तैनी सीट चुरहट से किस्मत आजमाई थी लेकिन हार गए। इसके अलावा 2019 का लोकसभा चुनाव सीधी से भी हार गए थे। हालांकि वह पांच बार विधायक चुने गए। 1998 में वह पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री भी बने थे। इसी तरह अरुण यादव 2014 से 2018 तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम और बाद में केंद्रीय राज्य मंत्री कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण रहे।

कांग्रेस की आपसी कलह से 2020 में गिरी थी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार
इस समय एक सीट के लिए अरुण यादव और अजय सिहं अड़े हुए हैं तो दो साल पहले भी ऐसा ही नजारा था। दो साल पहले राज्य सभा की सीट के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बीच खींचतान के कारण कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। नाराज सिंधिया ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। अब अजय सिंह और अरुण यादव, दोनों ही राज्यसभा जाने को तैयार बैठे हैं, लेकिन पार्टी के पास सिर्फ एक सीट ही है। ऐसे में कांग्रेस के लिए 2023 के विधानसभा चुनाव में मुश्किल खड़ी होना तय है। वहीं पार्टी नेताओं में कमलनाथ के खिलाफ बने माहौल का भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

 

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