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अगर कहीं भी किसी का उत्पीड़न हो रहा हो, तो वहां आवाज जरूर उठाएं- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि अगर कहीं भी किसी का उत्पीड़न हो रहा हो, तो वहां जरूर आवाज उठाएं। ये हमारा समाज के प्रति और राष्ट्र के प्रति भी कर्तव्य है। श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी की 211वीं जयंती के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से श्रीधाम ठाकुरनगर, ठाकुरबाड़ी, पश्चिम बंगाल में आयोजित मतुआ धर्म महामेला 2022 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण अगर किसी को हिंसा से, डरा-धमका कर कोई रोकता है, तो वो दूसरे के अधिकारों का हनन है। इसलिए ये भी हमारा कर्तव्य है कि हिंसा, अराजकता की मानसिकता अगर समाज में कहीं भी है, तो उसका विरोध किया जाए।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि मतुआ धर्म महामेला, मतुआ परंपरा को नमन करने का अवसर है। ये उन मूल्यों के प्रति आस्था व्यक्त करने का अवसर है, जिनकी नींव श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी ने रखी थी। इसे गुरुचंद ठाकुर जी और बोरो मां ने सशक्त किया। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि मंत्रिपरिषद में उनके सहयोगी श्री शांतनु ठाकुर जी के सहयोग से इस समय ये महान परंपरा और समृद्ध हो रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने महा मेले को एक भारत, श्रेष्ठ भारत के मूल्यों को सशक्त करने वाला बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति और सभ्यता महान इसलिए है, क्योंकि इसमें निरंतरता है, ये प्रवाहमान है, इसमें खुद को सशक्त करने की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है। मतुआ समुदाय के नेताओं के सामाजिक कार्यों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वच्छता, स्वास्थ्य और देश की बेटियों को आत्मविश्वास प्रदान करने के लिए न्यू इंडिया के प्रयासों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब हम समाज के हर क्षेत्र में हमारी बहनों और बेटियों को बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्रनिर्माण में योगदान देते देखते हैं, तब लगता है कि हम सही मायने में श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी जैसी महान विभूतियों का सम्मान कर रहे हैं।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के आधार पर सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाती है, जब सबका प्रयास, राष्ट्र के विकास की शक्ति बनता है, तब हम सर्वसमावेशी समाज के निर्माण की तरफ बढ़ते हैं।’ श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी के ईश्वरीय प्रेम के साथ-साथ कर्तव्य पर जोर देने की बात को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिक जीवन में कर्तव्यों की भूमिका पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमें कर्तव्यों की इसी भावना को राष्ट्र के विकास का भी आधार बनाना है। हमारा संविधान हमें बहुत सारे अधिकार देता है। उन अधिकारों को हम तभी सुरक्षित रख सकते हैं, जब हम अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएंगे।’

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