Home नरेंद्र मोदी विशेष #ParikshaPeCharcha2020 Live: प्रधानमंत्री मोदी की ‘परीक्षा पे चर्चा’

#ParikshaPeCharcha2020 Live: प्रधानमंत्री मोदी की ‘परीक्षा पे चर्चा’

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ “परीक्षा पे चर्चा 2020” कर रहे हैं। परीक्षा पे चर्चा को लेकर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों में काफी उत्साह है। कार्यक्रम में 2,000 छात्र एवं अध्यापक भाग ले रहे हैं, इनमें से 1,050 छात्रों का चयन निबंध प्रतियोगिता के जरिए किया गया है। कार्यक्रम शुरू करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि फिर एक बार आपका ये दोस्त आप सबके बीच में है। सबसे पहले मैं आपको नववर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा 2020 की ये सिर्फ नया वर्ष नहीं है, ये नया दशक भी है। ये दशक आपके लिए जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही देश के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। इस दशक में देश जो भी करेगा। उसमें इस समय 10वीं, 12वीं के जो छात्र हैं, उनका बहुत योगदान रहेगा।

उन्होंने कहा कि अगर कोई मुझे कहे कि इतने कार्यक्रमों के बीच वो कौन सा कार्यक्रम है जो आपके दिल के सबसे करीब है, तो मैं कहूंगा वो कार्यक्रम है परीक्षा पे चर्चा। यह कार्यक्रम मेरे दिल के बहुत करीब है, देश के हजारों स्कूल के बच्चे इस कार्यक्रम में जुड़ते हैं, नौजवानों, युवा पीढ़ी से मिलना मेरे लिए शिक्षा का अवसर होता है। मुझे इस कार्यक्रम में बहुत आनंद की अनुभूति होती है। युवा मन क्या सोचता है, क्या करना चाहता है, ये सब मैं भली-भांति समझ पाता हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे आपके माता-पिता के मन में 10वीं, 12वीं को लेकर टेंशन रहती है, तो मुझे लगा आपके माता-पिता का भी बोझ मुझे हल्का करना चाहिए। मैं भी आपके परिवार का सदस्य हूं, तो मैंने समझा कि मैं भी सामूहिक रूप से ये जिम्मेदारी निभाऊं।

उन्होंने कहा कि जो बात आपके माता -पिता और अध्यापक करते हैं, वही बात मैं करता हूं और अलग तरीके से आपका दोस्त और साथी बनकर करता हूं। क्या कभी हमने सोचा है कि मूड ऑफ क्यों होता है? अपने कारण से या बाहर के किसी कारण से। अधिकतर आपने देखा होगा कि जब मूड ऑफ होता है, तो उसका कारण ज्यादातर बाह्य होते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मोटिवेशन और डिमोटिवेशन का सवाल है, जीवन में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे ऐसे दौर से न गुजरना पड़ता हो। चंद्रयान को भेजने में आपका कोई योगदान नहीं था, लेकिन आप ऐसे मन लगाकर बैठे होंगे कि जैसे आपने ही ये किया हो। जब सफलता नहीं मिली तो आप भी डिमोटिवेट हुए। मैं भी तब वहां मौजूद था। मुझे कुछ लोगों ने कहा कि मुझे वहां नहीं जाना चाहिए, क्योंकि मिशन की सफलता की कोई गारंटी नहीं है। तब मैंने उनसे कहा कि इसलिए मैं वहां गया था। मैं कुछ वैज्ञानिकों के साथ वहां बैठा, उन्हें सांत्वना दी। हम विफलताओं में भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं। हर प्रयास में हम उत्साह भर सकते हैं और किसी चीज में आप विफल हो गए तो उसका मतलब है कि अब आप सफलता की ओर चल पड़े हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जाने-अनजाने में हम लोग उस दिशा में चल पड़े हैं जिसमें सफलता -विफलता का मुख्य बिंदु कुछ विशेष परीक्षाओं के मार्क्स बन गए हैं। उसके कारण मन भी उस बात पर रहता है कि बाकी सब बाद में करूंगा, एक बार मार्क्स ले आऊं। सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए। मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है।

उन्होंने कहा कि अगर आप कोई एक्स्ट्रा एक्टिविटी नहीं करते हैं और बिलकुल रोबोट की तरह सुबह से शाम तक कार्य करते रहोगे तो, आप सच में एक रोबोट बनकर रह जाओगे, क्या आप चाहते हैं कि ऐसा हो? हमारा नौजवान ऊर्जा से भरा हुआ, सपनों को लेकर चलने वाला, साहस दिखाने वाला नहीं होगा तो, कुछ नहीं होगा। आप इसे बदल सकते हैं। हां, इसके लिए बेहतर समय प्रबंधन की आवश्यकता होगी। आज कई अवसर हैं और मुझे आशा है कि युवा इनका उपयोग करेंगे

छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली शताब्दी के आखरी कालखंड और इस शताब्दी के आरंभ कालखंड में विज्ञान और तकनीक ने जीवन को बदल दिया है। इसलिए तकनीक का भय कतई अपने जीवन में आने नहीं देना चाहिए। तकनीक को हम अपना दोस्त माने, बदलती तकनीक की हम पहले से जानकारी जुटाएं, ये जरूरी है। स्मार्ट फोन जितना समय आपका समय चोरी करता है, उसमें से 10 प्रतिशत कम करके आप अपने मां, बाप, दादा, दादी के साथ बिताएं। तकनीक हमें खींचकर ले जाए, उससे हमें बचकर रहना चाहिए। हमारे अंदर ये भावना होनी चाहिए कि मैं तकनीक को अपनी मर्जी से उपयोग करूंगा।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी घर से ही गुगल गुरु से बात करके ये जान लेती है कि उसकी ट्रेन समय पर है या नहीं। नई पीढ़ी वो है जो किसी और से पूछने के बजाए, तकनीक की मदद से जानकारी जुटा लेती है। इसका मतलब कि उसे तकनीक का उपयोग क्या होना चाहिए, ये पता लग गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं आपसे आग्रह करूंगा, क्या कभी हम अपनी मातृभाषा या अन्य किसी भाषा की डिक्शनरी जो आपके मोबाइल में हैं, क्या आप तय करेंगे की जो भी शब्द उसमें हैं आप प्रतिदिन उनमें से कम से कम 10 शब्दों की स्पेलिंग और उसके मिनिंग याद करेंगे। बताइये इससे टेक्नोलॉजी उपयोगी होगी या नहीं।

उन्होंने कहा कि इस देश में अरुणाचल ऐसा प्रदेश है जहां एक दूसरे से मिलने पर जय-हिंद बोला जाता है। ये हिंदुस्तान में बहुत कम जगह होता है। वहां के लोगों ने अपनी भाषा के प्रचार के साथ हिंदी और अंग्रेजी पर भी अच्छी पकड़ बनाई है। हम सभी को नॉर्थ ईस्ट जरूर जाना चाहिए। हमें अपनी मातृ भाषा, अंग्रेजी, हिंदी के सिवाय, हमारे देश के समृद्ध खजाने में शामिल इतनी भाषाओं में से कम से कम किसी एक भाषा से परिचय जरूर करना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अधिकार और कर्त्तव्य जब साथ साथ बोले जाते हैं, तभी सब गड़बड़ हो जाता हैं। जबकि हमारे कर्त्तव्य में ही सबके अधिकार समाहित हैं। जब मैं एक अध्यापक के रूप में अपना कर्त्तव्य निभाता हूं, तो उससे विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा होती है।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि क्या हम तय कर सकते हैं कि 2022 में जब आजदी के 75 वर्ष होंगे तो मैं और मेरा परिवार जो भी खरीदेंगे वो मेक इन इंडिया ही खरीदेंगे। मुझे बताइये ये कर्त्तव्य होगा या नहीं, इससे देश का भला होगा और देश की अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं किसी परिजन पर कोई दवाब नहीं डालना चाहता, और न किसी बच्चे को बिगाड़ना चाहता हूं। जैसे स्टील के स्प्रिंग को ज्यादा खींचने पर वो तार बन जाता है, उसी तरह मां-बाप, अध्यापकों को भी सोचना चाहिए कि बच्चे कि क्षमता कितनी है। मां-बाप को मैं कहूंगा कि बच्चे बड़े हो गए हैं ये स्वीकार करें, लेकिन जब बच्चें 2-3 साल के थे और तब आपके अंदर उनको मदद करने की जो भावना थी उसे हमेशा जिंदा रखिए। बच्चों को उनकी रुचि के सही रास्ते में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जितना ज्यादा आप बच्चे को प्रोत्साहित करोगे, उतना परिणाम ज्यादा मिलेगा और जितना दबाव डालोगे उतना ज्यादा समस्याओं को बल मिलेगा। अब ये मां-बाप और अध्यापकों को तय करना है कि उन्हें क्या चुनना है। मैं प्रोत्साहित करने का रास्ता तय करूंगा। मैं सभी अभिभावकों और अध्यापकों से चाहूंगा कि आपके बच्चों और छात्रों से आपका ऐसा नाता रहना चाहिए कि ऐसी छोटी छोटी समस्याएं भी वो आपको खुलकर कहें। जितना ज्यादा उनके अंदर खुलापन आएगा, उतना उनके स्वस्थ विकास में बहुत काम आएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारा दिनभर के कामों, थकावट, में दिन बीतता है तो दिमाग कुछ व्यस्त रहता है। क्या उस वक्त आपका दिमाग खाली होगा क्या? दिन भर की घटनाओं का एक्शन-रिएक्शन भी चलता होगा। संभव है कि सुबह उठकर आप पढ़ते हैं तो मन और दिमाग से पूरी तरह तंदुरुस्त होते होंगे। लेकिन हर किसी की अपनी विशेषता होती है, इसलिए आप सुबह या शाम जिस समय कंफर्टेबल हों, उसी समय में पढ़ाई करो।

उन्होंने कहा कि सूर्योदय के समय पक्षियों की आवाज अलग होती है और सूर्यास्त के समय अलग। अगर हम इस प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जिएंगे, तो प्रकृति स्वयं आपको आगे ले जाने में सहायता करेगी। इसीलिए समय और परिस्थिति की पसंद में हमे, प्रकृति के अनुकूल समय खोजना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर आप बोझ लेकर परीक्षा हॉल में गए हैं तो सारे प्रयोग बेकार जाते हैं। आपको आत्म विश्वास लेकर जाना है। परीक्षा को कभी जिंदगी में बोझ नहीं बनने देना है। आत्मविश्वास बहुत बड़ी चीज है। साथ ही फोकस एक्टिविटी होनी जरूरी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमने डर के कारण आगे पैर नहीं रखे, इससे बुरी कोई अवस्था नहीं हो सकती। हमारी मनोस्थिति ऐसी होनी चाहिए कि हम किसी भी हालत में डगर आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे, ये मिजाज तो हर विद्यार्थी का होना चाहिए। विद्यार्थी कोई कालखंड के लिए नहीं होता। हमें जीवन भर अपने भीतर के विद्यार्थी को जीवित रखना चाहिए। जिंदगी जीने का यही उत्तम मार्ग है, नया-नया सीखना, नया-नया जानना।

उन्होंने कहा कि कुछ करने के सपने हम पालेंगे तो जो भी करेंगे उसे अच्छा करने का मन करेगा। जीवन को कुछ बनने के सपने से जोड़ने के बजाय कुछ करने के सपने से जोड़ना चाहिए। अगर आप ऐसा करेंगे तो कभी आपको एग्जाम का दबाव नहीं होगा।

 

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