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मोदी सरकार में एमएसएमई: 12 कदम, जिसने बदला देश के छोटे उद्योगों का भाग्य

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर आज देश की विकास यात्रा में आर्थिक धड़कन बन चुका है। यह केवल फैक्ट्रियों या दुकानों का समूह नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता का सबसे बड़ा आंदोलन है। गांव के पारंपरिक शिल्पकारों से लेकर शहरों की आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स तक, और महिला उद्यमियों से लेकर युवा स्टार्टअप फाउंडर्स तक, हर कोई आज इस बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। मोदी सरकार ने इस सेक्टर की असली ताकत को समझा और पिछले कुछ वर्षों में इसे केवल ‘सहायक’ बनाने के बजाय भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य “ग्रोथ इंजन” बना दिया है।

आइए, 12 प्वाइंट से जानते हैं कि कैसे मोदी सरकार की नीतियों ने इस क्षेत्र को उद्यम से सशक्तिकरण की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है:

1. जीडीपी और निर्यात में ऐतिहासिक योगदान
मोदी सरकार की आर्थिक रणनीतियों का सबसे बड़ा प्रमाण इस क्षेत्र के चौंकाने वाले आंकड़े हैं। जनवरी 2026 के ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल जीडीपी में एमएसएमई का योगदान लगभग 31.1 प्रतिशत हो चुका है। यानी देश की कुल कमाई का करीब एक-तिहाई हिस्सा इन्हीं उद्योगों से आ रहा है। इसके अलावा, देश के कुल विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत और देश से होने वाले कुल निर्यात में 48.58 प्रतिशत की विशाल हिस्सेदारी इसी क्षेत्र की है। प्रधानमंत्री मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ के नारों ने छोटे कारखानों को इतनी मजबूती दी है कि विदेशों में बिकने वाला भारत का लगभग आधा माल अब इन्हीं लघु उद्योगों में तैयार होता है। ये आंकड़े साबित करते हैं कि देश की आर्थिक संप्रभुता में एमएसएमई की भूमिका अब निर्णायक बन चुकी है।

2. कृषि के बाद देश का सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता
भारत जैसे विशाल देश में रोजगार के अवसर पैदा करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन मोदी सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करके इस समस्या का एक ठोस समाधान निकाला है। वर्तमान में यह सेक्टर देश भर में 38.9 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है, जो कृषि के बाद भारत में आजीविका का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। सरकार की नीतियों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह रोजगार किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी—तीनों क्षेत्रों में समान रूप से फैला हुआ है। इससे गांवों से शहरों की तरफ होने वाला पलायन रुका है और क्षेत्रीय आर्थिक असमानता को कम करने में बड़ी मदद मिली है। यह क्षेत्र पहली पीढ़ी के युवा उद्यमियों के लिए तरक्की का मुख्य द्वार बन गया है।

3. ‘ब्रिक्स’ के मंच पर गूंज
मोदी सरकार ने भारतीय एमएसएमई को केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक मजबूत पहचान दिलाई है। जून 2026 में, भारत ने अपनी ब्रिक्स (BRICS) चेयरमैनशिप के तहत एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाया। देश में पहली बार ‘प्रथम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम’ और तीसरी ‘एसएमई वर्किंग ग्रुप’ की बैठक का शानदार आयोजन किया गया। “एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: वैश्विक मार्गों के लिए सतत जड़ें” विषय के तहत आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों ने छोटे उद्योगों के विकास के लिए भारत के मॉडल और उसकी सर्वोत्तम प्रथाओं की जमकर तारीफ की। इस फोरम में मोदी सरकार ने वैश्विक स्तर पर यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि छोटे उद्यमियों को आसानी से विदेशी बाजारों तक पहुंच, सस्ती पूंजी और नई तकनीक मिल सके।

4. बिना किसी डर के व्यापार बड़ा करने की आजादी
पुरानी सरकारों के समय छोटे व्यापारियों में एक डर हमेशा बना रहता था कि अगर उनका टर्नओवर या निवेश थोड़ा भी बढ़ा, तो वे एमएसएमई की श्रेणी से बाहर हो जाएंगे और उन्हें मिलने वाली सरकारी मदद बंद हो जाएगी। इस विसंगति को दूर करने के लिए मोदी सरकार ने एक साहसिक कदम उठाते हुए 1 अप्रैल, 2025 से एमएसएमई की परिभाषा को पूरी तरह से संशोधित कर दिया। निवेश और वार्षिक टर्नओवर पर आधारित इस नई परिभाषा ने उद्योगों को विस्तार करने के लिए बहुत बड़ी जगह दे दी है। अब छोटे व्यापारी बिना किसी कानूनी डर या सरकारी सब्सिडी खोने की चिंता के अपने बिजनेस को दोगुना-तिगुना बड़ा कर सकते हैं। सरकार का यह एक सुधार पूरे उद्योग जगत के लिए संजीवनी साबित हुआ है।

5. डिजिटल क्रेडिट असेसमेंट: लोन की थकाऊ प्रक्रिया का अंत
बैंकों के चक्कर काटने और महीनों तक लोन पास होने का इंतजार करने के पुराने दौर को मोदी सरकार ने डिजिटल तकनीक से पूरी तरह खत्म कर दिया है। सरकार द्वारा लागू किया गया क्रेडिट असेसमेंट मॉडल (सीएएम) एक क्रांतिकारी डिजिटल लोन प्रणाली है। यह कंप्यूटर और इंटरनेट के जरिए पूरी तरह सत्यापित डेटा का उपयोग करती है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के लोन आवेदनों का तेज मूल्यांकन करती है। मोदी सरकार के इस डिजिटल सिस्टम का ही कमाल है कि 1 अप्रैल से 31 दिसंबर, 2025 के बीच, देश के पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) ने इस नए क्रेडिट असेसमेंट सिस्टम का उपयोग करते हुए 3.96 लाख से अधिक एमएसएमई ऋण आवेदनों को मंजूरी दी। इन मंजूरियों का कुल मूल्य 52,300 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिसने बाजार में छोटे उद्योगों के लिए नकदी की कमी को कभी आड़े नहीं आने दिया।

6. उद्यम पोर्टल पर 8.7 करोड़ पंजीकरण
छोटे और असंगठित व्यवसायों को देश की मुख्य बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के लिए मोदी सरकार ने उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल और उद्यम सहायता प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। इस सरकारी पहल ने सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जून 2026 तक इस पोर्टल पर 8.7 करोड़ से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। इस औपचारिकीकरण का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि जो छोटे दुकानदार या ग्रामीण व्यवसाई पहले साहूकारों के चंगुल में फंसे रहते थे, उन्हें अब सीधे बैंकों से सस्ता लोन, सरकारी योजनाएं और नए बाजार के अवसर मिल रहे हैं। यह कागजी औपचारिकता को खत्म कर सीधे हक देने की मोदी सरकार की नीति का बेहतरीन उदाहरण है।

7. बिना गारंटी लोन का दायरा दोगुना
सूक्ष्म और लघु उद्योगों को बिना किसी कोलेटरल (गारंटी या जमीन गिरवी रखे) लोन देने वाले क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज (CGTMSE) ने अपनी कामयाबी के 25 साल पूरे कर लिए हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल में इस ट्रस्ट ने जो रफ्तार पकड़ी है, वह बेमिसाल है। 1 जनवरी से 30 नवंबर, 2025 की छोटी सी अवधि में ही इस ट्रस्ट ने 29.03 लाख गारंटियों को मंजूरी दी, जिनकी कुल राशि 3.77 लाख करोड़ रुपये थी। यही नहीं, छोटे व्यापारियों को बड़ा बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित करने के मकसद से मोदी सरकार ने बिना गारंटी वाले लोन की सीमा को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 10 करोड़ रुपये कर दिया। इस कदम से देश के लाखों युवाओं को अपना स्टार्टअप बड़ा करने का हौसला मिला है।

8. खादी, ग्रामोद्योग और कोयर क्षेत्र की रिकॉर्ड बिक्री
प्रधानमंत्री मोदी ने खुद खादी के प्रचार-प्रसार की कमान संभाली, और इसका नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है। मोदी सरकार के प्रयासों से खादी व ग्रामोद्योग की सालाना बिक्री इतिहास में पहली बार 1.27 लाख करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े को पार कर गई है। यह इस बात का साफ संकेत है कि सरकार के ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान को देश की जनता ने सिर-आंखों पर बिठाया है। इसी तरह, तटीय राज्यों के पारंपरिक कोयर (नारियल की जटा से जुड़े उत्पाद) क्षेत्र ने भी मोदी सरकार द्वारा दिए गए आधुनिक उपकरणों और निर्यात सहायता के दम पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है। साल 2025-26 में कोयर उत्पादों का कुल निर्यात 6,614.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिससे ग्रामीण और तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों परिवारों की आय दोगुनी करने में मदद मिली है।

9. जिम्मेदार और पारदर्शी शासन
छोटे व्यापारियों के हक की रक्षा के लिए मोदी सरकार ने तकनीकी शासन (Tech-Driven Governance) को लागू किया। बड़े कॉरपोरेट्स या विभागों द्वारा छोटे व्यापारियों का भुगतान रोकने की आदत को बदलने के लिए ‘एमएसएमई समाधान पोर्टल’ बनाया गया। जून 2026 तक इस पोर्टल पर विलंबित भुगतान के 2,56,892 आवेदन प्राप्त हुए, जिनका दावा 55,244.29 करोड़ रुपये का था। इनमें से 58,148 पेचीदा मामलों का ‘एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल’ ने सफलतापूर्वक निपटान कराया। इसके अलावा, व्यापारियों की अन्य शिकायतों के लिए बने चैंपियन (CHAMPIONS) पोर्टल ने देश में सुशासन की नई मिसाल पेश की है। साल 2025-26 में इस पोर्टल को मिली 39,494 शिकायतों में से 39,387 का पूरी तरह निपटारा किया गया—यानी 99.72 प्रतिशत की ऐतिहासिक सफलता दर। अब सरकार ने अदालतों के चक्कर काटे बिना तकनीक से विवाद सुलझाने के लिए ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजोल्यूशन (ODR) पोर्टल भी लॉन्च कर दिया है, जिससे लघु उद्यमियों का समय और पैसा दोनों बच रहा है।

10. सरकारी खरीद में एमएसएमई को प्राथमिकता
मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि देश के छोटे उद्योगों को सबसे बड़ा बाजार खुद सरकार के भीतर मिले। इसके लिए ‘एमएसएमई संबंध पोर्टल’ के माध्यम से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा की जाने वाली खरीद की कड़ी और लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। जून 2026 तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 118 बड़ी सरकारी कंपनियों (CPSEs) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 31,443.32 करोड़ रुपये के सामान और सेवाओं की खरीदारी की। मोदी सरकार के कड़े नियमों के कारण, इस कुल खरीद का 54.51 प्रतिशत हिस्सा सीधे छोटे और लघु उद्यमियों से लिया गया, जिससे देश भर के 29,769 से अधिक छोटे उद्यमों को सीधे सरकारी खजाने से व्यापार का लाभ मिला।

11. मेले में सिल्वर मेडल और वंचित वर्गों को आर्थिक आजादी
मोदी सरकार की नीतियों का मूल मंत्र है—’सबका साथ, सबका विकास’। इसका एक जीवंत रूप 44वें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF 2025) में देखने को मिला, जहां एमएसएमई, खादी ग्रामोद्योग, और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति हब (NSSH) ने मिलकर “वाइब्रेंट एमएसएमई, विकसित भारत” थीम का प्रदर्शन किया। उनके इन प्रयासों को सरकार द्वारा ‘भारत सशक्तिकरण’ श्रेणी में सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया। इस मेले में देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के छोटे कारीगरों और ‘विश्वकर्मा’ साथियों को कुल 292 स्टॉल आवंटित किए गए थे। मोदी सरकार के सामाजिक समावेशन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से 67 प्रतिशत से अधिक स्टॉल महिलाओं के लिए, 34 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति और जनजाति के उद्यमियों के लिए, और 15 स्टॉल दिव्यांग उद्यमियों को दिए गए थे।

12. ‘पीएम विश्वकर्मा’ और ‘एसआरआई फंड’ जैसी दूरदर्शी योजनाएं
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा व्यक्तिगत रूप से शुरू की गई योजनाएं आज इस सेक्टर को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बना रही हैं-
*पीएम विश्वकर्मा योजना: 18 पारंपरिक शिल्पकलाओं (लोहार, बढ़ई, कुम्हार आदि) से जुड़े कारीगरों को आधुनिक बनाने की इस योजना ने कमाल कर दिया है। सरकार ने अगले 4 वर्षों के लिए जो 30 लाख लाभार्थियों का लक्ष्य रखा था, उसे देश के उत्साह ने महज 2 वर्षों में ही पार कर लिया। इसके तहत 24 लाख से अधिक लोगों को ट्रेनिंग दी गई और 5.98 लाख से अधिक लाभार्थियों को 5,133 करोड़ रुपये का बिना गारंटी का ऋण दिया जा चुका है।
*आत्मनिर्भर भारत (SRI) फंड: जिन होनहार छोटी कंपनियों के पास आगे बढ़ने का बड़ा आइडिया है लेकिन पूंजी की कमी है, उनके लिए सरकार ने ‘एसआरआई फंड’ बनाया है जो सीधे कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदकर पैसा लगाता है। मोदी सरकार ने बजट 2026-27 में इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया है। मई 2026 तक यह फंड 761 एमएसएमई में कुल 2,851 करोड़ रुपये का सीधा निवेश कर चुका है।
*ग्रामीण और क्षेत्रीय योजनाएं: PMEGP योजना (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) के तहत अब आवेदन फॉर्म हिंदी-अंग्रेजी के अलावा 19 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं, जिसने अब तक 97 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार पैदा किया है। गांवों के लिए बनी एस्पायर (ASPIRE) योजना ने 109 इनक्यूबेटर्स के जरिए हजारों सूक्ष्म उद्योग स्थापित किए हैं। इसके साथ ही, पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्किम के लिए 114.3 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और युवाओं को आधुनिक तकनीक सिखाने के लिए 20 नए टेक्नोलॉजी सेंटर्स और 100 विस्तार केंद्र (TCEC) विकसित किए जा रहे हैं।

एमएसएमई की यह कहानी सिर्फ कुछ फैक्ट्रियों या सरकारी योजनाओं के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के आर्थिक और सामाजिक कायाकल्प की एक ऐतिहासिक गाथा है। मोदी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से नीतिगत बाधाओं को तोड़ा, डिजिटल तकनीक का समावेश किया, और समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े पारंपरिक कारीगरों एवं महिलाओं को सीधे वित्तीय सुरक्षा प्रदान की—उसने इस पूरे सेक्टर का भाग्य बदल कर रख दिया है। आने वाले वर्षों में, यही मजबूत और सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करते हुए “विकसित भारत 2047” के सपने को साकार करने का सबसे बड़ा और अटूट इंजन साबित होगा।

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