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पाखंड नंबर -10: राम मंदिर मामले पर डोलती रही है केजरीवाल की आस्था

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राम मंदिर आंदोलन से लेकर आज तक की यात्रा केवल एक मंदिर के निर्माण की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति के बदलते चरित्र की भी कहानी है। एक समय था जब अधिकांश विपक्षी दल राम मंदिर के प्रश्न पर न्यायिक समाधान और संवैधानिक प्रक्रिया पर जोर देते थे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वही दल मंदिर निर्माण का खुला विरोध करने की स्थिति में नहीं रहे। इसके बाद लगभग सभी प्रमुख दलों ने अपने सार्वजनिक चर्चाओं में भगवान राम और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करना शुरू किया। सबसे बड़ा परिवर्तन दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की राजनीति में दिखाई दिया। केजरीवाल के सार्वजनिक बयानों पर एक नजर डालें तो आस्था के नाम पर उनका पाखंड उजागर होते देर ना लगेगी। यह वही केजरीवाल है, जो कहा करते थे- “मेरी नानी कहती थीं, ऐसे राम मंदिर में मेरे भगवान नहीं रहेंगे।” वही केजरीवाल मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दर्शन-पूजन करते हैं और अब मंदिर की राजनीति का अवसर दिखाई दिया तो अयोध्या के चक्कर काटने में लगे हैं।केजरीवाल आस्था का चोला उतारकर जवाबदेही की मांग पर उतरे
पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी प्रारंभिक दौर में तो अयोध्या में राम मंदिर ही बनाने के खिलाफ थी। उन्हीं की पार्टी का बयान आया था कि विवादित स्थल पर राम मंदिर के बजाए अस्पताल बनवाना चाहिए। क्योंकि तब वे सिर्फ भाजपा की राजनीति की आलोचना पर ही केंद्रित थे। बाद के वर्षों में उन्होंने स्वयं को भगवान राम का श्रद्धालु बताया। अयोध्या यात्रा की या उसकी घोषणा की, और राम मंदिर को लेकर सकारात्मक भाषा का प्रयोग किया। 2026 में मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद पर वे मुखर हो गए। अब वे आस्था का चोला उतारकर पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग करने लगे हैं। दरअसल, यह बदलते चुनावी समीकरणों के अनुरूप सार्वजनिक हुआ केजरीवाल का असली रूप है। भारतीय लोकतंत्र में सार्वजनिक जीवन का मूल्यांकन अंततः मतदाता करते हैं। किसी भी नेता के लिए केवल वर्तमान बयान ही नहीं, बल्कि समय के साथ उसके सार्वजनिक रुख की निरंतरता भी महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि राम मंदिर का प्रश्न केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक विश्वसनीयता की कसौटी भी बन गया है। आने वाले वर्षों में भी यह बहस जारी रहेगी कि किन-किन नेताओं के बदलते वक्तव्य परिस्थितियों के अनुरूप विकसित हुई राजनीतिक सोच का परिणाम हैं।

आइए, जानते हैं कि आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रामलला के मंदिर निर्माण से लेकर अब तक आस्था की आड़ में क्या-क्या पाखंड कर चुके हैं….

पाखंड नंबर -1: बाबरी विध्वंस और ‘मेरी नानी’ वाला चर्चित बयान
अरविंद केजरीवाल का राम मंदिर पर सबसे चर्चित बयान वह रहा, जिसमें उन्होंने अपनी नानी का हवाला देते हुए कहा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद उन्होंने अपनी नानी से पूछा था कि अब तो आप खुश होंगी, राम मंदिर बनेगा। इस पर उनकी नानी ने कथित तौर पर जवाब दिया कि “मेरा राम किसी का घर तोड़कर बने मंदिर में नहीं रहेगा।” यह बयान तत्कालीन बाबरी विध्वंस की नैतिकता पर उनकी व्यक्तिगत सोच का प्रतिबिंब माना गया। भाजपा ने इसे राम मंदिर आंदोलन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण बताया, जबकि आम आदमी पार्टी ने इसे हिंसा के विरोध के रूप में प्रस्तुत किया। यह बयान वर्षों बाद आज भी लगातार उद्धृत किया जाता रहा है।

पाखंड नंबर -2: राम मंदिर विवाद का समाधान अदालत से (2019)
राम जन्मभूमि विवाद के दौरान अरविंद केजरीवाल ने लगातार कहा कि इस मुद्दे का समाधान केवल संविधान और न्यायपालिका के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने न तो करोड़ों हिंदुओं की आस्था का कोई ख्याल किया और न ही आदि-अनादि सनातन संस्कृति में रोम-रोम में रमे राम के बारे में सोचा। बल्कि उन्होंने तो भाजपा पर आरोप लगाया कि वह चुनावों से पहले राम मंदिर के मुद्दे को राजनीतिक रूप से उछालती है। इस दौर में उनका जोर न्यायिक प्रक्रिया पर था, न कि आंदोलन, आस्था या राजनीतिक अभियान पर। यह रुख उस समय विपक्ष के अधिकांश दलों के समान था।पाखंड नंबर -3: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत (9 नवंबर 2019)
आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने निर्णय का स्वागत करने को बाध्य होना पड़ा। तब उन्होंने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि अब देश को आगे बढ़ने और भाईचारा मजबूत करने की आवश्यकता है। इसे उनके राजनीतिक पाखंड में महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा गया। इससे यह संकेत मिला कि आम आदमी पार्टी अब न्यायालय के निर्णय के बाद नए धार्मिक और राजनीतिक परिस्थिति को स्वीकारने के लिए मजबूर हुई।पाखंड नंबर -4: सॉफ्ट हिंदुत्व पर बोले-मैं हिंदू हूं, मंदिर जाता हूं (2021)
जब राजनीतिक विरोधियों ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर सॉफ्ट हिंदुत्व अपनाने का आरोप लगाया, तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह स्वयं हिंदू हैं। नियमित रूप से मंदिर जाते हैं। भगवान राम तथा भगवान हनुमान दोनों में उनकी आस्था है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था व्यक्तिगत जीवन का हिस्सा है, इसको किसी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ा जा सकता। यह बयान उनके आस्था के बारे में बदलते विचारों में महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत माना गया।पाखंड नंबर -5: मंत्री ने किया देवी-देवताओं का अपमान, सीएम मौन
सीएम रहे केजरीवाल के एक मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने मां लक्ष्मी और गणेश जी का अपमान किया। यह घटना अक्टूबर 2022 की है। दिल्ली सरकार में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम एक बौद्ध दीक्षा समारोह में शामिल हुए, जहां उन्होंने और उपस्थित लोगों ने हिंदू देवी-देवताओं (विशेष रूप से ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम, कृष्ण, गौरी, गणेश और लक्ष्मी) की पूजा न करने की शपथ लोगों को दिलाई। इसका वीडियो आने के बावजूद भी केजरीवाल की आस्था नहीं जागी और उन्होंने अपने मंत्री को इस तरह ही सनातन विरोधी शपथ दिलाने पर भी पार्टी से बाहर नहीं किया।

पाखंड नंबर -6: करेंसी पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर का ढोंग
एक तरफ केजरीवाल के मंत्री हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते रहे और वे सीएम होकर भी कान में रुई डालकर सोते रहे। जब यह मुद्दा राजनीतिक सुर्खियों में आया तो उसे कवर करने के लिए केजरीवाल ने नया पाखंड रचा। उन्होंने भारतीय करेंसी पर महात्मा गांधी की फोटो हटाकर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगाने की मांग कर डाली। दरअसल, इसके पीछे गुजरात के आम आदमी पार्टी के प्रभारी गोपाल इटालिया के देवी-देवताओं को लेकर दिए गए बयान और दिल्ली के तत्कालीन मंत्री राजेंद्र पाल गौतम के मतांतरण प्रकरण से हुए नुकसान की भरपाई थी।पाखंड नंबर -7: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं लिया हिस्सा
दिल्ली के सीएम रहे अरविंद केजरीवाल को जनवरी 2024 में अयोध्या राम मंदिर में हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिला था, लेकिन वह इस समारोह में शामिल नहीं हुए। दरअसल, उन्होंने भी राम मंदिर में आस्था से अधिक महत्व विपक्ष की राजनीति को दिया। कई विपक्षी दलों ने समारोह में भाग नहीं लिया था, जिसमें केजरीवाल भी शामिल हो गए। हालांकि मीडिया के पूछने पर केजरीवाल ने बहाना किया कि वह अपने माता-पिता के साथ अयोध्या जाना चाहते हैं, और इतने बड़े वीवीआईपी समारोह में सुरक्षा और अत्यधिक भीड़ के कारण उन्हें आसानी से दर्शन नहीं करा पाते। इसलिए वे नहीं गए। भाजपा ने इसे राजनीतिक बहाना बताया।

पाखंड नंबर -8 : राजनीतिक नौटंकी के लिए रामलला के किए दर्शन
कभी राम मंदिर को लेकर नानी की बात को उद्धृत करने वाले आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल बाद में अपनी पत्नी, माता-पिता और परिवार के साथ अयोध्या पहुंचे तथा रामलला के दर्शन भी किए। तब उन्होंने कहा कि वह भगवान श्रीराम का आशीर्वाद लेने आए हैं और देश तथा दिल्ली की समृद्धि की कामना करते हैं। उनके इस दौरे को राजनीतिक विश्लेषकों ने उस समय विपक्षी दलों में बढ़ती ” सांस्कृतिक पुनर्स्थापन ” की रणनीति का हिस्सा बताया। यह वही नेता थे, जिनके पुराने बयान अक्सर भाजपा और राम मंदिर के विरोध में उद्धृत किए जाते रहे थे।पाखंड नंबर -9 : सुंदरकांड और हनुमान चालीसा अभियान
राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के आसपास आम आदमी पार्टी ने देश के अनेक हिस्सों में सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के आयोजन किए। स्वयं केजरीवाल ने भी धार्मिक आयोजनों में भाग लिया। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा माना, जिसके तहत वह स्वयं को केवल “सेक्युलर” राजनीति तक सीमित रखने के बजाय सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों से भी जोड़ना चाहती थी। आप की इसमें आस्था नहीं थी, बल्कि वह सिर्फ दिखावा करना चाहती थी कि वह भी सनातन संस्कृति को मानने लगी है।पाखंड नंबर -10: अब आस्था नहीं, राजनीतिक अवसर (2026)
दिल्ली से लेकर गुजरात और अयोध्या तक इतने पाखंड करने के बाद अब आप संयोजक अरविंद केजरीवाल अपने असली रूप में आ गए हैं। उन्हें अब राम मंदिर में फिर से आस्था दिखाई नहीं दे रही, बल्कि राजनीतिक अवसर नजर आने लगा है। राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद अरविंद केजरीवाल अयोध्या जा पहुंचे। उन्होंने गिरफ्तारियां और इस्तीफे होने के बाद भी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसमें पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनके इस रुख को भाजपा ने राजनीतिक अवसरवाद का जीवंत उदाहरण बताया है।

आइए देखते हैं किस तरह हिन्दू विरोधी और चुनावी भक्त केजरीवाल और आप नेताओं ने कब-कब भगवान और हिन्दू देवी-देवाताओं का अपमान किया…

सत्यनारायण और भागवत कथा फालतू, हिजड़ों की तरह बजाते हैं ताली- गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इटालिया

गुजरात में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, राम मंदिर और हिंदू धर्म के खिलाफ बयान देने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल फिर से हिंदू बन गए हैं और इसी गोपाल इटालिया के साथ माथे पर त्रिपुंड लगा और गले में रुद्राक्ष की माला पहन गुजरात में मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं। सोशल मीडिया पर आप नेता गोपाल इटालिया का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें वे कह रहे हैं, “लोग सत्यनारायण कथा और भागवत कथा जैसी अवैज्ञानिक और फालतू की चीजों पर पैसा और समय बर्बाद कर देते हैं। इसके बाद भी लोगों को यह नहीं पता चलता कि उन्हें ऐसा करके क्या हासिल हुआ। वे दूसरों का समय भी बर्बाद कर देते हैं। अगर हम 5 पैसे भी ऐसी फालतू चीजों पर खर्च कर देते हैं तो हमें मनुष्य की तरह जीने का अधिकार भी नहीं है।” उन्होंने कहा, “मुझे ऐसे लोगों पर शर्म आती है। जो मैं कहता हूं वह आपको अगर अच्छा न लगे तो मुझे ब्लॉक कर दीजिए। लेकिन हमें उनकी जरूरत नहीं है जो संस्कृति और प्रथाओं के नाम पर हिजड़ों की तरह ताली बजाते हैं। कुछ साधु स्टेज से फालतू बातें करेंगे और हम हिंजड़ों की तरह ताली बजाएंगे।”

केजरीवाल ने दिवाली-छठ पर दिल्ली में फिर बैन किए पटाखे

हिंदू विरोधी केजरीवाल सरकार के कारण दिल्ली के लोगों की इस बार भी दिवाली बिना पटाखों वाली रहेगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने एक बार फिर से दिल्ली में दिवाली-छठ पर पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिल्ली में अगले साल एक जनवरी तक सभी तरह के पटाखों के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी लागू रहेगी। केजरीवाल के करीबी मंत्री गोपाल राय ने ट्वीट किया कि ‘दिल्ली में लोगों को प्रदूषण के खतरे से बचाने के लिए पिछले साल की तरह ही इस बार भी सभी तरह के पटाखों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा रहा है, तांकि लोगों की जिंदगी बचाई जा सके। इस बार दिल्ली में पटाखों की ऑनलाइन बिक्री / डिलीवरी पर भी प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2023 तक लागू रहेगा। प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने को लेकर दिल्ली पुलिस, DPCC और राजस्व विभाग के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई जाएगी।’

केजरीवाल सरकार ने पर्यावरण-प्रदूषण के नाम पर पिछले साल भी दिवाली-छठ में पटाखों को प्रतिबंधित कर दिया था। जबकि तमाम जांच और रिपोर्ट से ये साफ हो गया था कि दिल्ली के प्रदूषण के लिए पटाखे स्रोत नहीं हैं। दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य स्रोत पराली जलाना और कल-कारखानों के साथ गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण है। इसको लेकर लोगों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से सवाल किए हैं कि ईद-बकरीद पर पशुओं की हत्या पर बैन क्यों नहीं लगाया जाता है? लोग सोशल मीडिया पर मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर केजरीवाल सरकार पर तंज कस रहे हैं।

बकरीद और ईद पर छूट, छठ पूजा पर पाबंदी

इससे पहले अक्टूबर 2021 में अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में यमुना घाट पर छठा पूजा करने पर पाबंदी लगा दी थी। दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने 30 सितंबर को दिल्ली में कोरोना से जुड़ी नई गाइडलाइंस जारी की। गाइडलाइंस के मुताबिक दिल्ली में मंदिरों, तालाबों, नदियों या जलाशयों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा नहीं मन सकेगी। लेकिन केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार के बिना गाइडलाइन के बकरीद और ईद मनाने की पूरी छूट दी थी। एक समुदाय को त्योहार मनाने की अनुमति और दूसरे समुदाय के त्योहार पर पाबंदी ऐसी चीज है जो केजरीवाल के तुष्टिकरण और सौतेले व्यवहार को प्रदर्शित करती है।

24 घंटे में भगवान राम और अयोध्या को भूल गई आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी को पता था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवंबर 2018 में दीपावली से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया था। लेकिन यूपी चुनाव से पहले अयोध्या को फैजाबाद बताना आम आदमी पार्टी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। एक तरफ पार्टी के नेता भगवान राम का दर्शन कर हिन्दुओं को झांसा देने की कोशिश कर रहे थे, वहीं फैजाबाद का जिक्र कर मुस्लिम वोट बैंक को भी साधने का प्रयास कर रहे थे। दरअसल अयोध्या को फैजाबाद बताकर आम आदमी पार्टी ने फिर साबित कर दिया था कि उनकी सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। वे सिर्फ चुनाव को देखते हुए सियासी गिरगिट बने हुए।

देश की तरक्की मंदिर बनाने से नहीं होती-केजरीवाल

14 सितंबर, 2021 को अयोध्या पहुंचे दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पूरे देश में अरविंद केजरीवाल ही ऐसे एकमात्र मुख्यमंत्री हैं जो अयोध्या के राजा मयार्दा पुरूषोत्तम श्रीराम की प्रेरणा लेकर सरकार चला रहे हैं। लेकिन अरविंद केजरीवाल ने नवंबर 2018 में राममंदिर विवाद पर कहा था कि अगर जवाहरलाल नेहरू ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बजाय मंदिर बनाया होता, तो भारत आगे नहीं बढ़ता। केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने देश को मंदिर और स्टेच्यू में उलझा दिया है। अगर ये मंदिर या मस्जिद बनाते रहे तो आपको अपने बेटे को मंदिर में पुजारी बनाना पड़ेगा। अब सवाल उठता है कि क्या केजरीवाल के इस बात पर अमल हुआ तो आज भगवान राम का मंदिर बन पाता ? 

‘हवा में उड़ गए जय श्रीराम’ – संजय सिंह

आम आमदी पार्टी के नेता भगवान श्रीराम के प्रति कितनी श्रद्धा रखते हैं, उसका अंदाजा उनके पूर्व के बयान से लगाया जा सकता है। ‘हवा में उड़ गए जय श्रीराम’ कहने वाले संजय सिंह भगवा गमछा ओढ़ कर और राम मंदिर की जगह स्कूल-कॉलेज बनाने की बात करने वाले मनीष सिसोदिया रामनामी गमछा पहन कर अयोध्या में प्रविष्ट हुए।

राम मंदिर ट्रस्ट पर झूठा आरोप लगाकर निर्माण कार्य रोकने की साजिश

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन में घोटाले का आरोप लगाकर निर्माण कार्य में बाधा डालने की कोशिश की। ‘आप’ नेता रत्नेश मिश्र ने राज्यसभा सांसद संजय सिंह को झूठा करार देते हुए राम विरोधी होने तक के आरोप लगाए। आम आदमी पार्टी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश प्रवक्ता रत्नेश मिश्र ने ट्रस्ट पर लगे आरोपों से मायूस होकर अयोध्या में प्रेस वार्ता कर संजय सिंह को झूठा और राम विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि जमीन खरीदने के मामले में संजय सिंह राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बदनाम कर रहे हैं।

राम मंदिर भूमि पूजन के संबंध में संजय सिंह का आपत्तिजनक ट्वीट 

अगस्त 2020 में संजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के संबंध में आपत्तिजनक ट्वीट कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। इसके साथ ही संजय सिंह ने दलित समाज को अपमानित करके उनकी भी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम किया और साफ झूठ बोला। संजय सिंह ने कहा था कि राम मंदिर भूमि पूजन से दलितों को दूर रखा गया है। आखिर ऐसा क्यों है कि भूमि पूजन में किसी दलित को नहीं बुलाया गया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज मुझे एक दलित नेता ने फोन किया। बोले भाई साहब राष्ट्रपति दलित, उन्हें नहीं बुलाया गया, उप मुख्यमंत्री मौर्य, उन्हें नहीं बुलाया गया। ऐसा क्यों? भाजपा दलितों को मंदिरों से बाहर क्यों रखना चाहती है?’

केजरीवाल कैबिनेट के मंत्री ने राम और कृष्ण के अस्तित्व पर उठाया सवाल

नवंबर 2019 में केजरीवाल कैबिनेट के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिया था। उन्होंने ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “अगर यह बात प्रमाणित है कि भगवान राम और कृष्ण पूर्वज हैं तो इन्हें इतिहास में क्यों नहीं पढ़ाया जाता। पूर्वजों का इतिहास होता है जबकि इनका कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर पेरियार का दृष्टिकोण प्रमाणिकता और तार्किकता के आधार पर था।”

मनीष सिसोदिया का राम मंदिर की जगह यूनिवर्सिटी बनाने का सुझाव

दिसंबर 2018 में मनीष सिसोदिया ने एक निजी न्यूज चैनल को इंटरव्यू दिया था। सवाल अयोध्या में राम मंदिर को लेकर था। मनीष सिसोदिया ने कहा, ‘राम मंदिर और मस्जिद दोनों वालों से पूछ लो और अगर दोनों की सहमति हो तो वहां एक अच्छी यूनिवर्सिटी बना दो। हिंदुओं के बच्चे भी पढ़ें, मुसलमानों के बच्चे भी पढ़ें, क्रिश्चियन के भी पढ़ें, भारतीयों के भी पढ़ें, विदेशियों के भी पढ़ें…सबके बच्चे पढ़ें। वहीं से राम के सिद्धांतों को निकालो। राम मंदिर बनाने से राम राज्य नहीं आएगा, पढ़ाने से राम राज्य आएगा।’

मनीष सिसोदिया की ‘मंदिर-दर्शन’ की जगह ‘सरकारी स्कूलों के दर्शन’ की सलाह

2017 में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि काश नेताओं में चुनाव से पहले सरकारी स्कूलों के दर्शन करने की परंपरा होती। सिसोदिया ने ट्वीट करते हुए कहा था, ‘अगर चुनावों से ठीक पहले ‘मंदिर-दर्शन’ की जगह ‘सरकारी स्कूलों के दर्शन’ की राजनीतिक परम्परा होती तो देश के हर बच्चे को आज बेहतरीन शिक्षा मिल रही होती।’

 

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