साल 2005 में अमेरिका द्वारा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को वीजा न देना कूटनीतिक इतिहास की एक ऐसी घटना है, जिसे आज वाशिंगटन अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक भूलों में से एक मानता है। यह निर्णय उस समय भारत-अमेरिका संबंधों का एक चर्चित अध्याय बन गया था। लेकिन इतिहास का सबसे बड़ा सत्य यही है कि परिस्थितियां बदलती हैं। जिस अमेरिका ने कभी नरेन्द्र मोदी को अपने देश आने की अनुमति नहीं दी थी। यहां तक कि बराक ओबामा को भी 65 सांसदों ने मोदी को वीजा न देने की सिफारिश की थी, उसी अमेरिका ने बाद के वर्षों में उन्हें अनेक बार राजकीय सम्मान के साथ आमंत्रित किया। दरअसल, अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 1998 में पारित ‘इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम एक्ट’ (IRFA) का हवाला देते हुए 18 मार्च 2005 को तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन ने गुजरात के सीएम मोदी का राजनयिक वीजा आवेदन खारिज कर दिया और उनका पर्यटन/व्यापार वीजा भी रद्द कर दिया था। हालांकि, समय का पहिया ऐसा घूमा कि जिस नेता को अमेरिका ने कभी रोकने की कोशिश की थी, वह आज न सिर्फ भारत की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं, बल्कि वह विश्व पटल सबसे लोकप्रिय राजनेता भी बने हैं। उनकी लोकप्रियता का यह आलम है कि अब तक 35 देशों ने पीएम मोदी को अपने देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है।
अमेरिका को कब-कब हुआ अपनी गलती का अहसास?
अमेरिका ने कूटनीतिक मंचों और बयानों के जरिए अपनी नीति को सुधारते हुए नरेन्द्र मोदी को वीजा ना देने के फैसले को बार-बार अपनी बड़ी रणनीतिक भूल माना है:
• फरवरी 2014: भारत के आम चुनावों से ठीक पहले, भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत नैन्सी पॉवेल ने गांधीनगर जाकर नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह अमेरिका की तरफ से अनौपचारिक रूप से यह स्वीकारने का पहला बड़ा दिन था कि उनका पिछला रुख गलत था और वे भारत के भावी नेतृत्व के साथ संबंध सुधारना चाहते हैं।
• मई 2014: चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने स्वयं पीएम मोदी को फोन कर जीत की बधाई दी और उन्हें तत्काल वाशिंगटन आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया, जिससे 2005 का वह प्रतिबंध स्वतः और पूरी तरह समाप्त हो गया।
• सितंबर 2014: प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार अमेरिका की यात्रा की। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका ऐतिहासिक स्वागत हुआ और राष्ट्रपति ओबामा ने व्हाइट हाउस में उनका स्वागत किया।
• जून 2016: पीएम मोदी की ऐतिहासिक अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रशासन और रक्षा विशेषज्ञों ने खुलकर माना कि मोदी पर लगाया गया वीजा प्रतिबंध अमेरिकी विदेश नीति की एक बड़ी अदूरदर्शिता थी।
• जून 2023: राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रधानमंत्री मोदी का पूर्ण राजकीय यात्रा के साथ स्वागत किया। व्हाइट हाउस में राजकीय भोज दिया गया और अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने का सम्मान भी मिला। अमेरिकी मीडिया और अनेक पूर्व राजनयिकों ने इसे इस बात का प्रतीक माना कि 2005 का निर्णय इतिहास बन चुका है।
पीएम नरेन्द्र मोदी आठ बार कर चुके हैं अमेरिकी यात्राएं
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने द्विपक्षीय वार्ताओं और संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्रों में भाग लेने के लिए कई बार अमेरिका की यात्राएं की हैं। उनकी प्रमुख यात्राएं इस प्रकार हैं:
1. सितंबर 2014: प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली आधिकारिक यात्रा, जहां मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका भव्य स्वागत हुआ।
2. सितंबर 2015: सिलिकॉन वैली का दौरा और पीएम मोदी ने वैश्विक तकनीकी दिग्गजों (टेक लीडर्स) से मुलाकात की।
3. जून 2016: अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को पीएम नरेन्द्र मोदी ने पहली बार संबोधित किया।
4. जून 2017: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर पहली बार पीएम मोदी ने व्हाइट हाउस की यात्रा की।
5. सितंबर 2019: ह्यूस्टन में ऐतिहासिक ‘हाउडी मोदी’ (Howdy Modi) मेगा इवेंट, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप भी शामिल हुए।
6. सितंबर 2021: जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद वाशिंगटन की यात्रा और क्वाड (QUAD) नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया।
7. जून 2023: पीएम मोदी की पहली आधिकारिक ‘स्टेट विजिट’ (State Visit), जिसमें उन्होंने दूसरी बार अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया।
8. फरवरी 2025: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पीएम मोदी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर गए। इस दौरान पीएम मोदी ने वॉशिंगटन डी.सी. में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की।
पीएम मोदी की वैश्विक लोकप्रियता और कूटनीतिक उपलब्धियां
आज प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं की सूची में लगातार शीर्ष पर बने हुए हैं। वैश्विक नेताओं से उनके मधुर और व्यक्तिगत संबंध भारत की विदेश नीति को एक नई ऊंचाई पर ले गए हैं:
• देशों की राजकीय और आधिकारिक यात्राएं: पीएम मोदी अब तक 82 देशों की 100 से अधिक सफल अंतरराष्ट्रीय यात्राएं कर चुके हैं।
• विदेशी संसदों में भाषण: वह दुनिया के विभिन्न देशों की 21 विदेशी संसदों/राष्ट्रीय विधानसभाओं को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बन चुके हैं (जुलाई 2026 में इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करने के साथ ही उन्होंने विदेशी सरजमीं पर अपनी स्पीच का 21वां आंकड़ा छू लिया है।
• सर्वोच्च नागरिक सम्मान: दुनिया के विभिन्न देशों (जैसे फ्रांस, रूस, यूएई, सऊदी अरब और हाल ही में स्लोवाकिया व इंडोनेशिया) ने पीएम मोदी को अब तक कुल 35 अंतरराष्ट्रीय सम्मानों और सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से नवाजा है।
• अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में महत्व: अमेरिका, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूएई, सऊदी अरब, रूस, मिस्र और कई अन्य देशों के शीर्ष नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत और कार्यकारी संबंधों को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में विशेष महत्व दिया जाता है।
अब भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ
जिस अमेरिका ने कभी वीज़ा देने से इनकार किया था, आज वही वाशिंगटन भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक और वैश्विक साझेदार के रूप में देखता है। खुद पीएम मोदी ने एक बार अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा था कि उन्होंने 2005 में ही कह दिया था कि “एक दिन ऐसा आएगा जब दुनिया भारतीय वीजा के लिए लाइन (कतार) में खड़ी होगी।” आज का सशक्त भारत कूटनीति के इस बदलते दौर का सबसे बड़ा प्रमाण है। 2005 में जिन नरेन्द्र मोदी को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार किया था, वही आज व्हाइट हाउस में राजकीय सम्मान प्राप्त करते हैं। अमेरिकी कांग्रेस को वे दो बार संबोधित कर चुके हैं। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का उन्हें प्रमुख स्तंभ माना जाता है। यह बदलाव केवल एक व्यक्ति की राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक बढ़ती शक्ति और बदलते सामरिक महत्व का भी प्रतीक है।
65 भारतीय सांसदों ने मोदी को वीजा न देने के लिए ओबामा को पत्र लिखा
साल 2013 में 65 भारतीय सांसदों ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को पत्र लिखकर नरेंद्र मोदी के वीज़ा प्रतिबंध को बरकरार रखने की मांग की थी, जिसे बाद में कई सांसदों ने जाली बताते हुए विवाद खड़ा कर दिया था। जबकि एक फोरेंसिक जांच में इन्हें मूल बताया गया था। हालांकि, 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पूरे विवाद को दरकिनार करते हुए उन्हें आधिकारिक निमंत्रण देकर इस मुद्दे को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

क्यों वीजा ना देना अमेरिका के लिए बदनुमा दाग
अमेरिकी सीनेट के पूर्व सदस्य लैरी प्रेसलर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में माना था कि ऐसे करिश्माई व्यक्ति को 2005 में अमेरिका द्वारा वीजा नहीं दिया जाना अमेरिका पर एक दाग है। उन्होंने माना कि अमेरिका में जिस तरह ‘लॉबी’ और ‘प्रेशर ग्रुप’ काम करते हैं उसके कारण नरेन्द्र मोदी को वीजा देने से मना कर दिया था। वह बताते हैं कि जिस कानून के तहत ऐसा किया गया उसका इससे पहले और बाद में कभी इस्तेमाल नहीं हुआ। दबावों के चलते बुश प्रशासन ने दुनिया को अपनी धार्मिक समानता का परिचय देने के लिए नरेन्द्र मोदी पर पाबंदी लगा दी, जिससे उस समय अमेरिकी प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि नरेन्द्र मोदी उस समय केन्द्र सरकार में कैबिनेट मंत्री भी नही, एक राज्य के मुख्यमंत्री थे। इसलिए अमेरिका ने निहित स्वार्थों के समूहों के दबावों के कारण ऐसा निर्णय किया था।









