Home समाचार डिजिटल इंडिया के 11 साल: डिजिटल क्रांति से वैश्विक नेतृत्व तक, मोदी...

डिजिटल इंडिया के 11 साल: डिजिटल क्रांति से वैश्विक नेतृत्व तक, मोदी सरकार ने बदल दी देश की तस्वीर

SHARE

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब जुलाई 2015 में ‘डिजिटल इंडिया’ की शुरुआत की थी, तब बहुत से लोगों को लगा था कि क्या भारत जैसे विशाल और विविधताओं वाले देश में यह संभव हो पाएगा? आज 1 जुलाई 2026 को इस क्रांतिकारी अभियान के सफलता से 11 साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान देश ने कागज-आधारित प्रशासन से निकलकर पूरी तरह डिजिटल सिस्टम की ओर तेजी से कदम बढ़ाया है। इस पहल ने न सिर्फ शासन व्यवस्था को बदला, बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी को भी ज्यादा आसान, तेज और पारदर्शी बनाया है। लंबी लाइनों, सरकारी दफ्तरों के चक्करों और कागजी मकड़जाल से जूझने वाला भारत अब पूरी तरह बदल चुका है। आज सब्जी की दुकान से लेकर अस्पताल की पर्ची तक, सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध है।

आइए 11 बिंदुओं में समझते हैं कि इस योजना ने आम हिंदुस्तानी की जिंदगी और देश की अर्थव्यवस्था को कैसे बदल कर रख दिया है।

1. कनेक्टिविटी का विस्तार: गांव-गांव तक इंटरनेट
डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी ताकत इसकी कनेक्टिविटी है। देश के ग्रामीण इलाकों तक ब्रॉडबैंड और मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना इस योजना का मुख्य लक्ष्य रहा है। आज करोड़ों लोग इंटरनेट से जुड़े हैं और डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। भारतनेट जैसे प्रोजेक्ट ने लाखों किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाकर गांवों को डिजिटल दुनिया से जोड़ दिया है। जनवरी 2026 तक देश की लगभग 2.15 लाख यानी 97 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को भारतनेट से जोड़ा जा चुका है और 7 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है। इससे ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाएं हर कोने तक पहुंच रही हैं।

2. मोबाइल रिवॉल्यूशन: 106 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट यूज़र्स
एक समय था जब इंटरनेट सिर्फ चुनिंदा लोगों की पहुंच में था। मार्च 2026 के अंत तक देश में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या रिकॉर्ड 106.58 करोड़ पार कर चुकी है। सबसे खास बात यह है कि देश के 85.5 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन है। इसी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी ने देश के सबसे सुदूर इलाकों में भी डिजिटल सेवाओं को पहुंचा दिया है।

3. JAM ट्रिनिटी: बिचौलियों का खेल खत्म
जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) की तिकड़ी ने देश के कल्याणकारी सिस्टम की तस्वीर बदल दी है। इसने करोड़ों लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा और सरकारी लाभ सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचाने का रास्ता बनाया। फरवरी 2026 तक जन धन खातों की संख्या 57.78 करोड़ और आधार नामांकन 144 करोड़ से ज्यादा हो चुका है। जून 2026 तक सरकार ने 51 लाख करोड़ से ज्यादा का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) किया है, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों का पूरी तरह खात्मा हो गया है।

4. यूपीआई का डंका: दुनिया के 49% डिजिटल लेनदेन भारत में
भारत आज ग्लोबल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट के मामले में दुनिया में नंबर वन है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने कैशलेस इकोनॉमी को नई रफ्तार दी है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े बिजनेस तक, हर कोई डिजिटल पेमेंट अपना रहा है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि भ्रष्टाचार में भी कमी आई है। आम लोगों के लिए यह सबसे आसान और सुरक्षित पेमेंट सिस्टम बन चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई लेनदेन की संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गई है, जो दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स का लगभग 49 प्रतिशत है।

5. ई-गवर्नेंस: सरकार अब आपकी जेब में
डिजिटल इंडिया ने सरकार को नागरिकों के और करीब ला दिया है। अब डिजिलॉकर, उमंग और नेशनल सिंगल साइन-ऑन जैसे प्लेटफॉर्म से लोग घर बैठे सरकारी सेवाएं ले सकते हैं। पहले जहां दस्तावेजों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, अब वही काम कुछ क्लिक में हो जाता है। इससे समय की बचत हुई है और भ्रष्टाचार में भी कमी आई है। डिजिलॉकर पर 70.69 करोड़ से ज्यादा यूजर रजिस्टर्ड हैं और 850 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज जारी हो चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ, उमंग ऐप पर अब 2572 से ज्यादा सरकारी सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं, जिसने नागरिकों की जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है।

6. स्वास्थ्य क्रांति: घर बैठे डॉक्टर और CoWIN की मिसाल
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी डिजिटल इंडिया ने बड़ा बदलाव किया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘eSanjeevani’ टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म किसी वरदान से कम नहीं साबित हुआ है। इससे अब मरीज दूर बैठे डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। इसके जरिए 48 करोड़ से ज्यादा कंसल्टेशन पूरे हो चुके हैं। कोरोना काल में 220 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज का सफल प्रबंधन करने वाला CoWIN दुनिया के लिए एक मिसाल बना। मानसिक स्वास्थ्य के लिए शुरू की गई ‘टेली मानस’ सेवा को भी 40 लाख से अधिक कॉल मिल चुके हैं।

7. GeM और ONDC: छोटे व्यापारियों को मिला बड़ा आसमान
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था अब देश के GDP में बड़ा योगदान दे रही है। ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं ने अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाकर 18.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार दर्ज किया है, जिससे 11 लाख से ज्यादा MSMEs लाभान्वित हुए हैं। वहीं ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स’ (ONDC) ने ई-कॉमर्स की दुनिया का लोकतंत्रीकरण कर दिया है। 20 करोड़ खरीदारों और 5 लाख विक्रेताओं के साथ यह छोटे दुकानदारों को सीधे बड़े बाजार से जोड़ रहा है।

8. शिक्षा का डिजिटल अवतार: दीक्षा और APAAR आईडी
डिजिटल इंडिया ने शिक्षा को भी नई दिशा दी है। DIKSHA, SWAYAM और SWAYAM PRABHA जैसे प्लेटफॉर्म ने ऑनलाइन शिक्षा को आम बना दिया है। अब गांव का बच्चा भी देश के बड़े संस्थानों की पढ़ाई से जुड़ सकता है। डिजिटल क्लासरूम और ऑनलाइन कोर्स ने शिक्षा को सीमाओं से मुक्त कर दिया है। इससे शिक्षा अधिक समावेशी और सुलभ हुई है। ‘DIKSHA’ प्लेटफॉर्म के 2 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जो क्यूआर-कोड वाली किताबों से पढ़ रहे हैं। वहीं ‘SWAYAM’ के जरिए मुफ्त उच्च शिक्षा गांवों तक पहुंच रही है। विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई ‘APAAR’ (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) के तहत 33.74 करोड़ से ज्यादा छात्रों के डिजिटल आईडी बनाए जा चुके हैं।

9. एग्रीस्टैक: टेक-फ्रेंडली हुए देश के अन्नदाता
कृषि क्षेत्र में भी डिजिटल इंडिया का बड़ा असर देखा गया है। खेती-किसानी को आधुनिक बनाने के लिए ‘AgriStack’ के माध्यम से 9.20 करोड़ से ज्यादा किसानों के डिजिटल पहचान पत्र बनाए गए हैं। ‘किसान ई-मित्र’ (एआई चैटबॉट) और ‘किसान सारथी’ के जरिए देश के किसानों को मौसम, बीज और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी सीधे उनके मोबाइल पर मिल रही है, जिससे पारंपरिक खेती अब स्मार्ट फार्मिंग में बदल रही है। इससे खेती अब सिर्फ अनुभव पर नहीं, बल्कि डेटा और टेक्नोलॉजी पर आधारित हो रही है। किसान अब डिजिटल टूल्स के जरिए अपनी आय बढ़ा रहे हैं और बेहतर निर्णय ले पा रहे हैं।

10. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में छलांग: दुनिया का दूसरा बड़ा मोबाइल निर्माता
डिजिटल इंडिया ने देश को केवल आत्मनिर्भर नहीं बनाया, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग हब भी बना दिया। साल 2014-15 में जो इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 1.9 लाख करोड़ रुपये का था, वह मार्च 2026 तक बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश है, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिल रहा है। डिजिटल इंडिया ने IT सेक्टर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम ने लाखों युवाओं को रोजगार दिया है। भारत आज दुनिया का एक बड़ा टेक्नोलॉजी हब बन चुका है। एआई, क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

11. विकसित भारत 2047 का आधार: ग्लोबल लीडर बना भारत
डिजिटल इंडिया अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक मॉडल बन चुका है। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर कई देशों द्वारा अपनाया जा रहा है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था आज देश की जीडीपी में 12-14 प्रतिशत का योगदान दे रही है, जिसके अगले दशक में 20 प्रतिशत होने की उम्मीद है। पीएम मोदी की यह दूरदर्शी योजना ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को पूरा करने की सबसे मजबूत रीढ़ बन चुकी है।

Leave a Reply