एक प्रसिद्ध कहावत है कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते। यह कहावत कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत पर बिल्कुल सटीक बैठती है। सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया विदेश दौरों को लेकर सवाल उठाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने लिखा कि एक ओर प्रधानमंत्री भारतीयों को विदेश यात्रा से बचने की सलाह दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री लगातार विदेशी दौरों पर हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने पिछले 57 दिनों में 11 देशों का दौरा किया है। सुप्रिया श्रीनेत के इस सवाल ने जहां राहुल गांधी को बुरी तरह फंसा दिया है, वहीं प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों से मिली उपलब्धियों को नजरअंदाज कर देश की 140 करोड़ जनता को गुमराह किया है।

57 दिनों में 11 देशों के दौरे का किया जिक्र
सुप्रिया श्रीनेत ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों की लिस्ट भी शेयर की। उनके मुताबिक, ‘प्रधानमंत्री ने 15-16 मई को UAE, 17 मई को नीदरलैंड, 18 मई को स्वीडन, 19 मई को नॉर्वे, 20 मई को इटली, 13-16 जून को फ्रांस, 17-18 जून को स्लोवाकिया, 27-29 जून को सेशेल्स, 6-7 जुलाई को इंडोनेशिया, 8-9 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया और 10-11 जुलाई को न्यूजीलैंड का दौरा किया।’ कांग्रेस नेता ने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिकों को विदेश यात्रा से बचने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री स्वयं पिछले 57 दिनों में 11 देशों की यात्रा कर चुके हैं।
Modi’s vacation packed summer ⛱️🕶️✈️
📍 UAE: 15–16 May
📍 Netherlands: 17 May
📍 Sweden: 18 May
📍 Norway: 19 May
📍 Italy: 20 May
📍 France: 13–16 June
📍 Slovakia: 17–18 June
📍 Seychelles: 27–29 June
📍 Indonesia: 6–7 July
📍 Australia: 8–9 July
📍 New Zealand: 10–11 July…— Supriya Shrinate (@SupriyaShrinate) July 11, 2026
प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों ने कांग्रेस की नाकामियों को किया उजागर
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों पर सवाल तो उठाया दिया, लेकिन ये नहीं बताया कि इन विदेशी दौरों से देश को क्या हासिल हुआ। उन्होंने जनता को गुमराह करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को विरोधाभासी साबित करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों से मिली कामयाबी ही कांग्रेस के प्रोपेगैंडा और झूठ को बेनकाब करने के लिए काफी है। अब प्रधानमंत्री मोदी के उन प्रमुख विदेशी दौरों पर एक नजर डालते हैं, जिन्होंने ना सिर्फ देश को लाभान्वित और सुरक्षित किया है, बल्कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन की विदेश नीति और उसकी नाकामियों को भी उजागर किया है।

प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों से मिली प्रमुख उपलब्धियां
न्यूजीलैंड दौरा : मुक्त व्यापार समझौता,20 बिलियन डॉलर के भारी निवेश
रिकॉर्ड 9 महीने के समय में हुए मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच बाजार की पहुंच, निवेश, टेक्नोलॉजी और सेवाओं के नए द्वार खुलेंगे। इसके तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन डॉलर के भारी निवेश का वादा किया है।
ऑस्ट्रेलिया दौरा : यूरेनियम और रेयर अर्थ मिनरल्स का समझौता
ऑस्ट्रेलिया में ऊर्जा सुरक्षा और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर बड़ा समझौता किया गया। भारत को यूरेनियम की आपूर्ति के लिए ‘इंडिया-ऑस्ट्रेलिया सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट’ को अंतिम रूप दिया गया। इसे भारत की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। गौरतलब है कि साल 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से साफ मना कर दिया था। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के कोकोस द्वीप पर अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा, जो भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन को तकनीकी सहयोग देगा।
इंडोनेशिया दौरा : ब्रह्मोस मिसाइल, समुद्री सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स
दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सहयोग और समुद्री सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हुए। इंडोनेशिया भारत को क्रिटिकल मिनरल्स देगा। भारत और इंडोनेशिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सहयोग का विस्तार किया है।
सेशेल्स दौरा : समुद्री सुरक्षा लेकर दोनों देशों के बीच समझौत
इस ऐतिहासिक दौरे में भारत और सेशेल्स के बीच अगले 50 वर्षों के लिए रोडमैप तैयार हुआ तथा डिजिटल पेमेंट (UPI) सहित 9 महत्वपूर्ण समझौते किए गए। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, समुद्री सुरक्षा और रक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत हुआ। इसके साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की विश्वसनीय भागीदार की भूमिका और सशक्त होगी।

सौजन्य सोशल मीडिया
क्यों जरूरी थे प्रधानमंत्री मोदी के ये विदेशी दौरे
प्रधानमंत्री मोदी का 4 देशों का दौरा यूं ही नहीं हुआ। इसका आधार 16 जून 2026 को अमेरिका में हुई एक घटना को माना जा रहा है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 जून को अपनी सबसे बड़ी सैन्य कमांड, ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ (USPACOM) कर दिया। माना जा रहा है कि अमेरिका रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर चीन के साथ तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि रेयर अर्थ मिनरल्स सेमी-कंडक्टर निर्माण, बैटरी वाली गाड़ियों, स्मार्टफोन और डिफेंस सेक्टर के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन का एकाधिकार है। इसके चलते हिंद और प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों ने आपसी कूटनीति को नई दिशा देने की शुरुआत कर दी है। इसी को धार देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशांत महासागर क्षेत्र के तीन देशों इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र के देश सेशेल्स की यात्रा की।

सुप्रिया श्रीनेत के सवाल से कैसे फंस गए राहुल गांधी ?
प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों पर सवाल उठने के बाद अब राहुल गांधी के विदेशी दौरों को लेकर बहस तेज हो गई है। अब पूछा जा रहा है कि राहुल गांधी अभी कहा है? केरल के वायनाड में हाल में हुए भूस्खलन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हादसे के कई दिन बाद भी राहुल गांधी प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने व पीड़ितों से मिलने नहीं पहुंचे। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि, ‘राहुल गांधी काफी समय से भारत से बाहर हैं और किसी को उनके ठिकाने के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा, ‘क्या किसी को पता है कि राहुल गांधी कहां हैं? वह किस देश में छुट्टियां मना रहे हैं? वह किसके साथ हैं? वह अक्सर किससे मिलने जाते हैं?’
Does anyone know where Rahul Gandhi is? Which country is he holidaying in? Who is he with? Whom does he travel to meet so often? He has been away from India for an extended period, and no one knows his whereabouts.
— Amit Malviya (@amitmalviya) July 12, 2026
वायनाड में हालिया भूस्खलन, राहुल और प्रियंका गायब
वहीं एक अन्य पोस्ट में बीजेपी नेता ने लिखा कि ‘वायनाड में हालिया भूस्खलन में लोगों की जान गई और बड़े पैमाने पर तबाही हुई, लेकिन इसके बावजूद न राहुल गांधी और न ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रभावित इलाके में जाकर पीड़ितों से मुलाकात की।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘किसी भी जनप्रतिनिधि की संवेदनशीलता इस बात से मापी जाती है कि वह लोगों के सबसे कठिन समय में उनके साथ खड़ा हो, न कि केवल चुनाव के समय उनके बीच पहुंचे।’ बता दें कि 7 जुलाई को केरल के वायनाड में भूस्खलन हुआ था। भारी बारिश होने के कारण मिट्टी खिसकने से दुर्घटना हुई थी जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ था।
Days after the latest Wayanad landslide claimed lives and caused widespread devastation, neither Rahul Gandhi nor Priyanka Vadra has found the time to visit the affected area or meet the victims. Empathy is measured by standing with people in their darkest hour, not just by…
— Amit Malviya (@amitmalviya) July 12, 2026
राहुल गांधी की विदेश यात्रा अभी भी रहस्य के घेरे में
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया एक्स पर एक और पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि 22 जून से 13 जुलाई के बीच राहुल गांधी की विदेश यात्रा अभी भी रहस्य के घेरे में है। वह कहाँ गए थे? उन्होंने किससे मुलाकात की? उनकी यात्रा और वहां ठहरने का खर्च किसने उठाया? ये कुछ ऐसे जायज सवाल हैं, जिन्हें लेकर नेता प्रतिपक्ष को खुलकर सामने आना चाहिए। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि क्या उनकी इन विदेशी मुलाकातों में ऐसी बैठकें शामिल थीं, जिनका भारत के राजनीतिक या रणनीतिक हितों पर कोई असर पड़ सकता है।
Rahul Gandhi’s foreign trip between 22 June and 13 July remains shrouded in mystery. Where did he go? Who did he meet? Who sponsored his travel and stay? These are legitimate questions that the Leader of the Opposition should come clean about. The public is entitled to know…
— Amit Malviya (@amitmalviya) July 13, 2026
देश और पार्टी की जरूरत के समय राहुल गांधी की विदेश यात्रा
राहुल गांधी की विदेश यात्रा उस वक्त होती है जब कांग्रेस पार्टी को उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। अब सवाल है कि पार्टी की स्थिति को ठीक करने के बजाए राहुल गुपचुप विदेश यात्राओं पर क्यों निकल जाते हैं? कांग्रेस द्वारा जारी प्रचार कार्यक्रम के अनुसार, देहरादून में अगले बड़े जनसभा से पहले 10 जुलाई को प्रयागराज (इलाहाबाद), 11 जुलाई को पटना और 14 जुलाई को दिल्ली में रैलियां होनी थीं। हालांकि, राहुल गांधी की विदेश यात्रा बढ़ने के कारण इन्हें स्थगित करना पड़ा है और उनके 17 जुलाई के आसपास लौटने की उम्मीद है। सूत्रों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी पिछले 20 दिन से सार्वजनिक गतिविधियों में नजर नहीं आए हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि राहुल गांधी आखिर हैं कहां। सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी विदेश दौरे पर हैं। लेकिन इसे लेकर न तो कोई यात्रा कार्यक्रम जारी किया गया और ना ही उन्होंने खुद इसे लेकर सोशल मीडिया पर ही कोई पोस्ट किया। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान उनका अधिकांश समय इंग्लैंड और फिनलैंड सहित कुछ अन्य यूरोपीय देशों में बीता है।

खास मौकों पर गायब रहे राहुल गांधी
सितंबर 2025 में, राहुल गांधी ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में भाग नहीं लिया, जिस पर भाजपा ने आरोप लगाया कि वह उस समय विदेश यात्रा पर थे।
अक्टूबर 2024 में, हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान चिली की उनकी यात्रा भी एक राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई।
30 दिसंबर,2024 को राहुल गांधी वियतनाम में थे। राहुल गांधी का वियतनाम दौरा ऐसे समय पर हुआ था, जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन हुआ था और देश में सात दिन का शोक घोषित था।
दिसंबर 2020 में, राहुल गांधी ने विदेश यात्रा की क्योंकि कांग्रेस ने किसानों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में अपना अभियान तेज कर दिया था।
2016 में, नए साल के मौके़ पर वह पाँच राज्यों के चुनाव से ठीक पहले विदेश यात्रा पर गए। इस मौके़ पर भी पंजाब कांग्रेस के नेताओं की ओर से काफ़ी नाराज़गी का भाव मीडिया में सामने आया।
2015 में, राहुल गांधी ने लगभग दो महीने की छुट्टी लेकर विदेश में अवकाश लिया, जिसके चलते वे संसद के बजट सत्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से और विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक पर हुई बहस में शामिल नहीं हो पाए।

22 साल में 54 विदेश यात्रा, राहुल की ट्रिप पर 60 करोड़ खर्च
बीजेपी ने राहुल गांधी की विदेश यात्रा का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखते हुए विस्तृत जानकारी दी। राहुल गांधी ने साल 2004 से 2026 तक कुल 54 व्यक्तिगत विदेश यात्राएं की हैं, जिसमें अमेरिका, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, वियतनाम, कम्बोडिया, सिंगापुर, बहरीन, मालदीव, कतर, यूएई शामिल है। इसके अलावा वो 3 मई,2026 को बिना जानकारी के मस्कट ओमान भी गए, जिसकी फुटेज सोशल मीडिया पर मौजूद है। बीजेपी ने दावा किया कि राहुल गांधी 22 साल में 54 बार विदेश यात्रा पर गए, जिन पर 60 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए गए। अब सवाल उठ रहे कि राहुल की इन यात्राओं की फंडिंग किसने की।

सौजन्य सोशल मीडिया
सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर गोपनीय रूप से विदेश जाने का आरोप
राहुल गांधी के विदेशी दौरों को लेकर उन पर सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर गोपनीय रूप से यात्रा करने के आरोप लगते रहे हैं। कांग्रेस की तरफ से बचाव में कहा जाता है कि राहुल गांधी अपनी निजी जिंदगी को राजनीतिक जीवन से अलग रखते हैं। कई बार वह ध्यान (विपासना) लगाने, आराम करने या छुट्टियां बिताने के लिए एकदम गोपनीय तरीके से यात्रा करते हैं। उनके कई दौरों को लेकर सत्ता पक्ष और जानकारों का मानना है कि वे विदेशों में छिपी हुई राजनीतिक बैठकों, विचार-विमर्श या अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संपर्क साधने के लिए जाते हैं। उनके लंबे विदेश दौरों के कारण कभी-कभी उनकी घरेलू राजनीति और संसद में उपस्थिति पर सवाल उठते हैं। बीजेपी अक्सर उन पर विदेशों में देश विरोधी ‘साजिश’ रचने का आरोप लगाती है, जबकि कांग्रेस उनके विचारों और संवादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बताती है।

देश विरोधी ताकतों के साथ सांठगांठ का आरोप
राहुल गांधी हर साल 2 से 3 बार विदेशी टूर पर नियमित तौर पर निकल जाते हैं। हालांकि राहुल के विदेश दौरे पर किसी को आपत्ति नहीं है लेकिन भारत की सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का यूं बार-बार विदेश दौरे पर जाना और वह भी ‘गोपनीय’ तरीके से, थोड़ा संदिग्ध जरूर लगता है। यह एक mystery बन गयी है। जाहिर तौर पर राहुल गांधी विदेश में आत्मचिंतन करने तो नहीं ही जाते होंगे? तो फिर राज क्या है? कुछ खास वजहों से राहुल गांधी अपनी विदेश यात्राओं को गोपनीय रखना चाहते हैं। राहुल गांधी पर आरोप लगाते हैं कि वो देश विरोधी ताकतों के मिलने और उनका समर्थन हासिल करने के लिए गोपनीय रूप से विदेश यात्रा करते हैं। राहुल गांधी की कुछ विदेशी मुलाकातों ने आरोपों की पुष्टि की है।

भारत विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान उमर से मिले राहुल गांधी
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सितंबर 2024 में अमेरिका के तीन दिनों के दौरे पर थे। इस दौरान राहुल गांधी ने अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिन पर विवाद हो गया। इन तस्वीरों में राहुल गांधी के साथ भारत विरोधी सोमालियाई मूल की अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद इल्हान उमर नजर आ रही थीं। अमेरिकी सांसद इल्हान उमर को पाकिस्तान का हमदर्द माना जाता है। वे पहले भी कई बार कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की नाकाम कोशिशें कर चुकी हैं। पिछले महीने 7 जून,2026 को इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) के एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें इल्हान उमर ने भारत को लेकर एक बार फिर विवादित बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत नरसंहार के आठवें स्टेज पर पहुंच चुका है। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

21 जून 2023 को एक ट्वीट में इल्हान उमर ने कहा था, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों का दमन किया है। हिंसक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को गले लगाया है। पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है। मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी।” उन्होंने आगे लिखा, “मैं पीएम मोदी के दमन और हिंसा के रिकॉर्ड पर चर्चा करने के लिए मानवाधिकार समूहों के साथ एक ब्रीफिंग करूँगी।”
Prime Minister Modi’s government has repressed religious minorities, emboldened violent Hindu nationalist groups, and targeted journalists/human rights advocates with impunity.
I will NOT be attending Modi’s speech.
— Ilhan Omar (@IlhanMN) June 20, 2023
भारत विरोधी बांग्लादेशी पत्रकार मुश्फिकुल फजल अंसारे से मिले राहुल गांधी
सितंबर 2024 में सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों में राहुल गांधी को भारत विरोधी, बांग्लादेशी ‘पत्रकार’ मुश्फिकुल फजल अंसारे के साथ बातचीत करते देखा गया। गौरतलब है कि 27 मार्च,2024 को अमेरिकी विदेश विभाग और संयुक्त राष्ट्र की प्रेस ब्रीफिंग में बांग्लादेश के पत्रकार मुश्फिकुल फजल अंसारे ने सवाल उठाए थे। अंसारे बांग्लादेशी नागरिक है और अमेरिका के वाशिंगटन में रहता है। उसके सवाल पर सवाल उठे थे कि बांग्लादेशी पत्रकार को दिल्ली के तत्कालनी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की खबर को उठाने में इतनी दिलचस्पी क्यों है? उसने सवाल पूछा था कि एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार ‘भारत में लोकसभा चुनावों से पहले विपक्ष पर कार्रवाई तेज हो गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी के संबंध में टिप्पणियों पर भारत द्वारा अमेरिकी राजनयिक को तलब करने पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, और आप विपक्षी पार्टी के बैंक खाते की हेराफेरी पर भारत में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल को कैसे देखते हैं?’

राहुल गांधी पर विदेशों में देश विरोधी बयान देने का आरोप
राहुल गांधी ने सितंबर 2024 में वर्जीनिया में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए एक सवाल उठाकर राजनीतिक हलचल मचा दी थी कि क्या भारत में एक सिख को पगड़ी और कड़ा पहनने या गुरुद्वारे जाने का अधिकार है या नहीं। उन्होंने कहा था कि सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि लड़ाई किस बारे में है। लड़ाई राजनीति के बारे में नहीं है.. यह सतही है। आपका नाम क्या है? लड़ाई इस बारे में है कि क्या…एक सिख के तौर पर उन्हें भारत में पगड़ी पहनने की इजाजत दी जाएगी या एक सिख के तौर पर उन्हें भारत में कड़ा पहनने की इजाजत दी जाएगी… या फिर एक सिख गुरुद्वारा जा सकेगा। असल मायनों में लड़ाई इसी को लेकर है और सिर्फ इनके लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए है।” इसके बाद राहुल गांधी के बयान को जायज ठहराते हुए गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कहा कि राहुल गांधी ने काफी बोल्ड स्टेटमेंट दिया है। उनका ये बयान सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के अलग खालिस्तान देश की मांग को जस्टिफाई करता है। सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने राहुल गाँधी के बयान का समर्थन करने वाला अपना एक पत्र भी जारी किया।










