प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी विजन और टेक्नोलॉजी में उनकी बेहद दिलचस्पी का ही सुपरिणाम है कि UPI आज केवल भारत में शहरों से लेकर सुदूर गांवों तक भुगतान का माध्यम नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम के रूप में नित-नए रिकॉर्ड बना रहा है। आज से ठीक दस साल पहले जब UPI यानि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस शुरू हुआ, तब शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि मोबाइल पर कुछ सेकंड में होने वाला एक छोटा-सा भुगतान एक दिन भारत की तकनीकी दक्षता और डिजिटल आत्मविश्वास की वैश्विक पहचान बन जाएगा। यूपीआई की सफलता सिर्फ इसी से आंकी जा सकती है कि वित्त वर्ष 2016-17 में जहां UPI पर केवल 1.78 करोड़ सालाना लेनदेन हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 24,162 करोड़ से अधिक पहुंच गया है। यानि लगभग 13,000 गुना का ऐतिहासिक उछाल यूपीआई में आया है। लेनदेन का मूल्य भी 0.07 लाख करोड़ से बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपए तक हो गया है।
भारत ने भुगतान की आदत नहीं, डिजिटल दुनिया की दिशा बदली
UPI की सबसे बड़ी खूबी उसकी जटिल तकनीक नहीं, बल्कि उसका सरल अनुभव है। मोबाइल उठाइए, QR कोड स्कैन कीजिए, राशि डालिए और कुछ ही क्षणों में भुगतान पूरा। न बैंक खाता नंबर याद रखने की जरूरत, न नकदी रखने की मजबूरी और न ही बैंक खुलने का इंतजार। इसी सरलता ने UPI को केवल तकनीकी उत्पाद नहीं रहने दिया, बल्कि उसे रोजमर्रा की जिंदगी का डिजिटल व्यवहार बना दिया। 2016 में शुरू हुआ UPI आज दस वर्ष की यात्रा पूरी कर चुका है। यह केवल किसी भुगतान प्रणाली की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है जिसने तकनीक को आम आदमी की हथेली तक पहुंचाकर डिजिटल लेनदेन को रोजमर्रा की जिंदगी का सहज हिस्सा बना दिया।
A decade ago, UPI was rolled out, marking a major turning point in India’s digital payments journey.
The sheer scale and reach of UPI are something every Indian must be proud of.
Tell me about your UPI experience and how it impacted your life… #10YearsOfUPI pic.twitter.com/Xtto6V6gpU
— Narendra Modi (@narendramodi) August 25, 2026
आइए, पीएम मोदी के विजन से दस साल पहले जन्मे यूपीआई की दस अहम उपलब्धियों पर एक नजर डालते हैं…
उपलब्धि नंबर 1:
चाय की दुकान से डायमंड के शो-रूम तक डिजिटल पेमेंट
इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि UPI ने भुगतान को लेकर लोगों की मानसिकता बदल दी। आज भारत में डिजिटल भुगतान किसी विशेष अवसर की तकनीक नहीं, रोजमर्रा की आदत है। चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक, गांव के छोटे व्यापारी से लेकर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल तक, एक QR कोड ने लोगों के जीवन को सरल बना दिया है। यही UPI की सबसे बड़ी वैश्विक उपलब्धि है। भारत ने केवल अपने नागरिकों को कैश से डिजिटल तक नहीं पहुंचाया, बल्कि दुनिया को यह दिखाया कि विशाल आबादी वाले देश में डिजिटल भुगतान को सहज, सस्ता और सर्वसुलभ कैसे बनाया जा सकता है। 2016-17 में साल भर में 1.78 करोड़ रुपए लेनदेन हुआ। अकेले जुलाई 2026 में 2,365.8 करोड़ UPI लेनदेन हुए और उनका मूल्य 29.87 लाख करोड़ रुपए रहा। दस वर्षों में UPI ने भारत की जेब बदलने के साथ दुनिया की नजर में भारत की तकनीकी पहचान भी बदली है। कभी भारत वैश्विक डिजिटल समाधानों का बड़ा उपभोक्ता माना जाता था और आज उसका अपना डिजिटल भुगतान मॉडल दूसरे देशों के लिए अध्ययन और साझेदारी का विषय बन रहा है।
𝐓𝐡𝐞𝐫𝐞 𝐰𝐚𝐬 𝐚 𝐭𝐢𝐦𝐞 𝐰𝐡𝐞𝐧 𝐜𝐚𝐫𝐫𝐲𝐢𝐧𝐠 𝐜𝐚𝐬𝐡 𝐰𝐚𝐬 𝐚 𝐦𝐮𝐬𝐭. 𝐓𝐨𝐝𝐚𝐲, 𝐲𝐨𝐮𝐫 𝐩𝐡𝐨𝐧𝐞 𝐢𝐬 𝐲𝐨𝐮𝐫 𝐰𝐚𝐥𝐥𝐞𝐭.
From chai stalls to college canteens, villages to big businesses, UPI has made payments ridiculously simple. Scan. Tap. Pay. Done.… pic.twitter.com/yZU6xRJPql
— Dr Vikas kumar Modi (@vikaskumarmodi) August 25, 2026
उपलब्धि नंबर 2:
अब UPI से दुनिया में हर दूसरा रियल टाइम भुगतान
यूपीआई की ऐतिहासिक सफलता की कहानी इसलिए भी असाधारण है, क्योंकि इसने भारत को केवल डिजिटल भुगतान का बड़ा बाजार नहीं बनाया, बल्कि डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक ऐसा मॉडल दिया जिसे दुनिया सीख रही है। 2024 के ACI Worldwide के आंकड़ों के अनुसार भारत में हुए रियल-टाइम पेमेंट दुनिया के कुल रियल-टाइम लेनदेन का करीब 49 प्रतिशत थे। भारत ने 129.3 अरब रियल-टाइम पेमेंट किए, जो दुनिया के शीर्ष 10 अन्य बाजारों के संयुक्त आंकड़े से भी अधिक थे। UPI आज 11 देशों में स्वीकार्य है या फिर क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस के लिए सक्रिय है। फ्रांस के एफिल टावर से लेकर कंबोडिया के 45 लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक इसकी पहुंच बन चुकी है। यह केवल भुगतान तकनीक की सफलता नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है जिसने डिजिटल दुनिया में उपभोक्ता से आगे बढ़कर तकनीक का निर्माता और मानक तय करने वाला देश बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
UPI is an exemplar of Modi Ji’s vision of paving India’s journey of transformation through innovation.
In the #10YearsOfUPI, our nation has given the world’s largest real-time payment system and proven what we can achieve through Digital India in empowering people with a swift,… pic.twitter.com/WPV9QWGfzk
— Amit Shah (@AmitShah) August 25, 2026
उपलब्धि नंबर 3:
IMF ने दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट-पेमेंट सिस्टम माना
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने 2025 में UPI को लेनदेन की मात्रा के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा retail fast-payment system माना। भारत सरकार के अनुसार, IMF की जून 2025 की रिपोर्ट में UPI की इसी क्षमता को रेखांकित किया गया। यह किसी भारतीय संस्था का आत्म-मूल्यांकन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था की मान्यता है। इसका अर्थ यह है कि UPI अब केवल भारत की सफल सरकारी-तकनीकी परियोजना नहीं रहा, बल्कि वह वैश्विक डिजिटल वित्त की महत्वपूर्ण मिसाल बन चुका है।
उपलब्धि नंबर 4:
‘मेड इन इंडिया’ से अब ‘मेड फॉर द वर्ल्ड’ की ओर
UPI की सबसे दूरगामी उपलब्धि यह है कि उसने दुनिया को यह दिखाया कि डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर, इंटरऑपरेबल और व्यापक पहुंच के साथ बनाया जा सकता है। UPI में एक ही ऐप से कई बैंक खातों को जोड़ना, तत्काल भुगतान, QR आधारित लेनदेन और दो-स्तरीय प्रमाणीकरण जैसी सुविधाएं शामिल हैं। भारत अब इस मॉडल को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रख रहा। UPI के अंतरराष्ट्रीय विस्तार, विभिन्न देशों की स्थानीय भुगतान प्रणालियों के साथ उसके जुड़ाव और NPCI International की साझेदारियों से एक ऐसा डिजिटल ढांचा उभर रहा है जिसमें भविष्य के सीमा-पार भुगतान अधिक तेज, सरल और कम लागत वाले हो सकते हैं। यही वह बिंदु है जहां ‘मेड इन इंडिया’ तकनीक ‘मेड फॉर द वर्ल्ड’ की दिशा में बढ़ती दिखाई देती है।
उपलब्धि नंबर 5:
एफिल टावर तक पहुंचा भारत का QR
UPI की वैश्विक यात्रा का सबसे खूबसूरत प्रतीक शायद पेरिस का एफिल टावर है। फरवरी 2024 में फ्रांस UPI स्वीकार करने वाला पहला यूरोपीय देश बना और भारतीय पर्यटक एफिल टावर के टिकट UPI से खरीदने लगे। इसके बाद पेरिस के प्रसिद्ध Galeries Lafayette स्टोर में भी UPI भुगतान शुरू हुआ। यानी भारत से हजारों किलोमीटर दूर एक भारतीय अपने मोबाइल से उसी सहजता से भुगतान कर सकता है, जैसे वह अपने मोहल्ले की दुकान पर करता है। यह उपलब्धि का महत्व बहुत बड़ा है। दुनिया के प्रतिष्ठित पर्यटन और व्यापार केंद्रों में UPI की स्वीकार्यता बताती है कि भारत की डिजिटल तकनीक अब केवल भारतीयों की सुविधा नहीं रही, वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन के अनुभव का हिस्सा बन रही है।
उपलब्धि नंबर 6:
पड़ोसी देशों से लेकर खाड़ी तक डिजिटल सेतु
UPI की वैश्विक सफलता का एक और आयाम इसका क्षेत्रीय विस्तार है। भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, सिंगापुर और यूएई जैसे 11 देशों में UPI की स्वीकार्यता ने भारतीय यात्रियों के लिए भुगतान को आसान बनाया है। 2026 में कंबोडिया भी इस नेटवर्क से जुड़ा, जहां UPI को वहां के राष्ट्रीय KHQR से जोड़ा गया और पहले चरण में भारतीय यात्रियों के लिए 45 लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर QR भुगतान की सुविधा उपलब्ध हुई। यहां UPI का महत्व सिर्फ यह नहीं कि भारतीय विदेश जाकर QR स्कैन कर सकते हैं। असली उपलब्धि यह है कि भारत अलग-अलग देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की क्षमता विकसित कर रहा है। डिजिटल दुनिया में यह वही भूमिका है जो कभी बंदरगाह और सड़कें निभाती थीं यानि देशों को जोड़ना।
उपलब्धि नंबर 7:
अब सिंगापुर तक से सीधा डिजिटल रिश्ता
भारत और सिंगापुर के बीच UPI-PayNow लिंक दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल भुगतान पहलों में से एक है। इसके जरिए दोनों देशों के उपयोगकर्ता अपने-अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से तत्काल और सुरक्षित धन हस्तांतरण कर सकते हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के अनुसार यह व्यवस्था तेज, सुरक्षित और कम लागत वाले सीमा-पार भुगतान को संभव बनाती है। इसका महत्व प्रवासी भारतीयों और छोटे कारोबारियों के लिए विशेष है। विदेश में रहने वाला भारतीय हो या भारत में परिवार को पैसा भेजने वाला सिंगापुर निवासी हो, इससे भुगतान की दुनिया में बीच के कई पारंपरिक अवरोध कम होते हैं। यानी UPI ने QR से आगे बढ़कर सीमा-पार पैसे की आवाजाही का नया रास्ता भी बनाया है।
With Digital Public Infrastructure, PM Modi is ensuring that every student can access quality coaching, no matter where they are.
People once mocked UPI. Today, UPI has completed 10 years and transformed how India pays. Now, they are mocking DPI.
But the real success will come… pic.twitter.com/BGg94ldHG2
— BJP (@BJP4India) August 25, 2026
उपलब्धि नंबर 8:
विदेश में भारतीय जेब में लेकर जाता है UPI One World
UPI One World ने भारत की डिजिटल शक्ति को एक और दिशा दी है। अब विदेशी पर्यटक भी भारत में बिना भारतीय मोबाइल नंबर या भारतीय बैंक खाते के UPI आधारित भुगतान कर सकते हैं। फरवरी 2026 में India AI Impact Summit में 40 से अधिक देशों के विदेशी प्रतिनिधियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराई गई। UPI One World के जरिए विदेशी आगंतुक भारत में होटल, रेस्तरां, परिवहन, खरीदारी और अन्य सेवाओं के लिए डिजिटल भुगतान कर सकते हैं। इसका संदेश बहुत बड़ा है। अब भारत केवल अपनी जनता को डिजिटल भुगतान नहीं सिखा रहा, बल्कि वह दुनिया के लोगों को भारत की डिजिटल व्यवस्था का अनुभव करा रहा है। एक विदेशी पर्यटक के हाथ में UPI का इस्तेमाल होता है तो वह अपने साथ भारत की एक तकनीकी छवि भी लेकर लौटता है।
उपलब्धि नंबर 9:
प्रवासी भारतीयों के लिए डिजिटल कनेक्शन बना UPI
दुनिया भर में बसे भारतीयों को भारतीय बैंक खातों से जोड़ने की दिशा में भी UPI ने बड़ा कदम उठाया है। NPCI के अनुसार ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, हांगकांग, मलेशिया, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, यूएई, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों के मोबाइल नंबरों को निर्धारित भारतीय बैंकों और UPI ऐप्स से जोड़ने की सुविधा उपलब्ध है। यह उस भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है जो वर्षों से भारत से आर्थिक और भावनात्मक रूप से जुड़ा है। तकनीक ने यहां दूरी को छोटा कर दिया है। विदेश में रहने वाला भारतीय अब अपने देश की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था से पहले से कहीं अधिक सहज तरीके से जुड़ सकता है।
उपलब्धि नंबर 10:
UPI पर 720 लाइव बैंकों ने बनाया वैश्विक डिजिटल मॉडल
UPI की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद उसका पैमाना नहीं, बल्कि उसका लोकतांत्रिक चरित्र है। यह केवल बड़े शहरों, बड़ी कंपनियों या उच्च आय वाले लोगों की तकनीक नहीं है। सड़क किनारे चाय बेचने वाले से लेकर छोटे दुकानदार तक QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार कर सकते हैं। NPCI के आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में UPI पर 720 बैंक लाइव थे और एक ही महीने में 23.20 अरब यानी 2,320 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए, जिनका मूल्य लगभग 29.90 लाख करोड़ रुपए था। इस पैमाने ने डिजिटल भुगतान को रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बना दिया है। यही कारण है कि UPI की कहानी तकनीक से अधिक लोगों का जीवन आसान बनाने वाली बन गई है। यहां भारत की उपलब्धि सिर्फ इसलिए बड़ी नहीं है कि उसने अधिक भुगतान किए। असली उपलब्धि यह है कि एक विशाल और विविध आबादी को एक साझा, इंटरऑपरेबल डिजिटल भुगतान ढांचे में जोड़ना संभव हुआ। दुनिया में डिजिटल भुगतान की चर्चा अब भारत के उदाहरण के बिना पूरी नहीं होती।
From ₹0.07 lakh crore in 2016 to ₹314 lakh crore in 2026. From 44 banks to 703. From one country to eleven.
The ten years of UPI is a decade of Hon. Prime Minister Shri Narendra Modi Ji’s conviction that technology built for India can lead the world.@NPCI_NPCI @UPI_NPCI… pic.twitter.com/oMpI4IFwww
— Pravin Darekar – प्रविण दरेकर (@mipravindarekar) August 25, 2026









